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सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध और सर्वेक्षण के निष्कर्ष

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021 के तहत पूरे देश में 1 जुलाई 2022 से कुछ सिंगल-यूज प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जारी ये नियम पतली प्लास्टिक की थैलियाँ, डिस्पोजेबल कटलरी, कप, प्लेट और स्ट्रॉ जैसी वस्तुओं को लक्षित करते हैं। 2025 में भुवनेश्वर, दिल्ली, गुवाहाटी और मुंबई के 560 स्थानों पर किए गए सर्वे में पाया गया कि करीब 84% स्थानों पर प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग अभी भी जारी है, जो कानून के बावजूद प्रवर्तन में बड़ी कमी को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम, प्रवर्तन की चुनौतियाँ और पर्यावरणीय प्रभाव।
  • GS पेपर 2: शासन – नीति क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य संस्थानों की भूमिका।
  • निबंध विषय – सतत विकास, प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन रणनीतियाँ।

सिंगल-यूज प्लास्टिक पर कानूनी एवं संस्थागत व्यवस्था

सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021 में निहित है, जिसने 2016 के नियमों में संशोधन कर कुछ सिंगल-यूज प्लास्टिक वस्तुओं को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया। इसकी कानूनी ताकत पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 से मिलती है, जो केंद्र सरकार को पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रित करने का अधिकार देती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) निगरानी करता है, जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) और नगरपालिका निकाय स्थानीय स्तर पर प्रवर्तन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के M.C. Mehta बनाम भारत संघ (1996) के फैसले ने पर्यावरण प्रदूषण रोकने में सरकार की जिम्मेदारी को मजबूत किया है, जो ऐसे प्रतिबंधों का न्यायिक समर्थन है।

  • प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021: 1 जुलाई 2022 से निर्धारित सिंगल-यूज प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, धारा 6: पर्यावरण नियंत्रण के लिए कानूनी आधार।
  • CPCB और SPCBs: निगरानी एवं प्रवर्तन एजेंसियां।
  • नगरपालिका निगम: स्थानीय कचरा संग्रहण और नियम पालन के लिए जिम्मेदार।

सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध के आर्थिक पहलू

भारत का प्लास्टिक पैकेजिंग बाजार 2023 में लगभग 5.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो 12% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है (IBEF 2024)। अनौपचारिक क्षेत्र, जिसमें लाखों छोटे विक्रेता शामिल हैं, सस्ते सिंगल-यूज प्लास्टिक पर निर्भर हैं। कागज या बायोडिग्रेडेबल विकल्पों की ओर बदलाव महंगा होने के कारण धीमा है। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए बजट भी सीमित है; MoEFCC का वार्षिक बजट लगभग 200 करोड़ रुपये (संघ बजट 2024-25) है, जो बड़े पैमाने पर प्रवर्तन या प्रोत्साहन के लिए अपर्याप्त है।

  • अनौपचारिक विक्रेताओं की सस्ती सिंगल-यूज प्लास्टिक पर निर्भरता प्रतिबंध के बावजूद मांग बनाए रखती है।
  • महंगे विकल्प बाजार में कम प्रवेश पाते हैं।
  • सीमित वित्तीय संसाधन प्रवर्तन और जागरूकता अभियानों को प्रभावित करते हैं।

सर्वेक्षण डेटा: शहरों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग के पैटर्न

2025 के बहु-शहर सर्वे में प्रतिबंधित प्लास्टिक की उपलब्धता में शहरवार अंतर दिखा: भुवनेश्वर (89%), दिल्ली (86%), मुंबई (85%) और गुवाहाटी (76%)। अनौपचारिक बाजार और छोटे व्यवसायों में प्रतिबंधित वस्तुओं का व्यापक उपयोग पाया गया, जबकि संगठित मॉल और बड़े रिटेल आउटलेट्स में अनुपालन बेहतर था। यह डेटा प्रवर्तन की मुख्य चुनौती को अनौपचारिक क्षेत्रों में दर्शाता है, जहां नियमों का पालन कम होता है और आर्थिक प्रोत्साहन भी कम हैं।

शहरप्रतिबंधित प्लास्टिक उपलब्धता (%)संगठित रिटेल में अनुपालन (%)अनौपचारिक बाजार में अनुपालन (%)
भुवनेश्वर89उच्चनिम्न
दिल्ली86उच्चनिम्न
मुंबई85उच्चनिम्न
गुवाहाटी76मध्यमनिम्न

तुलनात्मक दृष्टिकोण: भारत बनाम यूरोपीय संघ सिंगल-यूज प्लास्टिक नियंत्रण में

यूरोपीय संघ का सिंगल-यूज प्लास्टिक्स निर्देश (2019) शीर्ष 10 सिंगल-यूज प्लास्टिक वस्तुओं पर सख्त प्रतिबंध और विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (EPR) ढांचे के साथ लागू किया गया। इससे 2023 तक 40% सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे में कमी दर्ज की गई है (यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी, 2024)। भारत के नियमों में समान प्रवर्तन कड़ाई और EPR का व्यापक क्रियान्वयन नहीं है, जिससे प्रभाव सीमित होता है। यूरोपीय संघ का मॉडल दिखाता है कि कानूनी प्रतिबंधों के साथ उत्पादकों की जवाबदेही, जनजागरूकता और व्यवहार्य विकल्प भी जरूरी हैं ताकि मापनीय कचरा कटौती हो सके।

पहलूभारतयूरोपीय संघ
कानूनी ढांचाप्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021सिंगल-यूज प्लास्टिक्स निर्देश, 2019
प्रवर्तन का फोकसकेंद्र और राज्य बोर्ड, नगरपालिका निकाय; अनौपचारिक क्षेत्र में कमजोर प्रवर्तनसख्त प्रवर्तन, जुर्माने के साथ; मजबूत निगरानी
उत्पादक जिम्मेदारीEPR का सीमित क्रियान्वयनअनिवार्य विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी
कचरा कटौती का परिणामन्यूनतम कमी; 84% स्थानों पर प्रतिबंधित वस्तुओं का उपयोग2023 तक 40% सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे में कमी

प्रतिबंध की प्रभावशीलता में बाधक मुख्य चुनौतियाँ

  • प्रवर्तन की कमी: अनौपचारिक बाजारों में नियमों का पालन कम, संसाधन सीमित।
  • आर्थिक बाधाएँ: महंगे विकल्पों के कारण विक्रेता और उपभोक्ता बदलाव से कतराते हैं।
  • जनजागरूकता की कमी: उपभोक्ताओं में जागरूकता कम और मुफ्त प्लास्टिक थैलियों की मांग बनी हुई है।
  • समन्वय की कमी: केंद्र, राज्य और नगरपालिका निकायों के बीच कमजोर तालमेल।
  • प्रोत्साहनों की कमी: वैकल्पिक पैकेजिंग के लिए सब्सिडी या समर्थन का अभाव।

महत्त्व और आगे की राह

  • SPCBs और नगरपालिका निकायों की क्षमता बढ़ाकर अनौपचारिक क्षेत्रों में प्रवर्तन मजबूत करें, तकनीकी निगरानी अपनाएं।
  • विक्रेताओं और उपभोक्ताओं के लिए टिकाऊ विकल्पों की लागत कम करने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी लागू करें।
  • उत्पादकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मजबूत EPR योजनाएं लागू करें।
  • सिंगल-यूज प्लास्टिक के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएं।
  • सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच बेहतर समन्वय व्यवस्था विकसित करें ताकि नीति का सुसंगत क्रियान्वयन हो सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. नियमों ने 1 जुलाई 2022 से सभी प्रकार की प्लास्टिक पैकेजिंग पर प्रतिबंध लगाया।
  2. प्रतिबंध विशेष रूप से पहचानी गई सिंगल-यूज प्लास्टिक वस्तुओं को लक्षित करता है।
  3. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 इन नियमों का कानूनी आधार है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि प्रतिबंध केवल निर्दिष्ट सिंगल-यूज प्लास्टिक वस्तुओं पर लागू है, सभी प्लास्टिक पैकेजिंग पर नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि नियम पहचानी गई वस्तुओं को लक्षित करते हैं और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 से अधिकार प्राप्त करते हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. सिंगल-यूज प्लास्टिक मुख्य रूप से जैविक रूप से टूटने योग्य और आसानी से पुनर्चक्रणीय होते हैं।
  2. अनौपचारिक क्षेत्र प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक का बड़ा उपभोक्ता है।
  3. संगठित रिटेल आउटलेट्स अनौपचारिक बाजारों की तुलना में बेहतर अनुपालन दिखाते हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि सिंगल-यूज प्लास्टिक आमतौर पर जैविक रूप से टूटने योग्य नहीं होते और पुनर्चक्रण कठिन होता है। कथन 2 और 3 सर्वेक्षण डेटा के अनुसार सही हैं जो अनौपचारिक क्षेत्र की निर्भरता और संगठित रिटेल में बेहतर अनुपालन दर्शाते हैं।

मुख्य प्रश्न

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021 के तहत सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रवर्तन में आने वाली चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और भारत में अनुपालन सुधार के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – पर्यावरण और पारिस्थितिकी; कचरा प्रबंधन नीतियाँ।
  • झारखंड का दृष्टिकोण: रांची और जमशेदपुर जैसे शहरी केंद्रों में अनौपचारिक बाजारों में सिंगल-यूज प्लास्टिक के व्यापक उपयोग के कारण समान प्रवर्तन चुनौतियाँ।
  • मुख्य बिंदु: राज्य स्तर पर प्रवर्तन क्षमता, नगरपालिका निकायों की भूमिका और वैकल्पिक समाधान में स्थानीय नवाचार की संभावनाएं।
प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट संशोधन नियम, 2021 के तहत किन वस्तुओं पर प्रतिबंध है?

इन नियमों के तहत पतली प्लास्टिक की थैलियाँ (75 माइक्रोन से कम मोटाई), डिस्पोजेबल कटलरी (प्लेट, कप, ग्लास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ) और कुछ खाद्य पैकेजिंग सामग्री 1 जुलाई 2022 से प्रतिबंधित हैं।

भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने की जिम्मेदारी किन संस्थाओं की है?

प्रवर्तन मुख्य रूप से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) और नगरपालिका निगमों की जिम्मेदारी है, जबकि नीति का निरीक्षण पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) करता है।

प्रतिबंध के बावजूद अनौपचारिक क्षेत्र सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग क्यों जारी रखता है?

अनौपचारिक क्षेत्र सस्ते सिंगल-यूज प्लास्टिक पर निर्भर है, प्रवर्तन कमजोर है और किफायती विकल्प उपलब्ध नहीं हैं, जिससे प्रतिबंध के बावजूद उपयोग बना रहता है।

यूरोपीय संघ का सिंगल-यूज प्लास्टिक नियंत्रण भारत से कैसे अलग है?

यूरोपीय संघ सख्त प्रतिबंध लगाता है, जिसमें अनिवार्य विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (EPR) और मजबूत निगरानी शामिल है, जिससे 2023 तक 40% कचरा कटौती हुई है, जबकि भारत में प्रवर्तन और EPR का क्रियान्वयन सीमित है।

भारत में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का कानूनी आधार क्या है?

कानूनी आधार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 है, जो केंद्र सरकार को पर्यावरण प्रदूषकों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, जिसमें प्लास्टिक कचरा भी शामिल है।

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