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परिचय: 9वीं भारतीय महासागर कॉन्फ्रेंस और विदेश मंत्री का संबोधन

2024 में India Foundation के तत्वावधान में आयोजित 9वीं भारतीय महासागर कॉन्फ्रेंस में 30 भारतीय महासागर तटीय और साझीदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। विदेश मंत्री (EAM) ने “भारतीय महासागर शासन के लिए सामूहिक जिम्मेदारी” विषय पर मुख्य भाषण दिया, जिसमें वैश्विक व्यवस्था के बदलते स्वरूप के बीच समुद्री स्थिरता बनाए रखने, महत्वपूर्ण संकुचन बिंदुओं की सुरक्षा करने और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया।

यह मंच 2016 से भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और पर्यावरणीय स्थिरता पर संवाद का प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, आर्थिक विकास
  • निबंध विषय: भारत की समुद्री रणनीति, भारतीय महासागर में क्षेत्रीय सहयोग
  • प्रारंभिक परीक्षा: UNCLOS, EEZ, भारतीय महासागर के संकुचन बिंदु, सागरमाला कार्यक्रम

भारतीय महासागर की समुद्री सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा

भारत का समुद्री शासन राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित है। Maritime Zones of India (Regulation of Fishing by Foreign Vessels) Act, 1981 विदेशी मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। Territorial Waters, Continental Shelf, Exclusive Economic Zone and Other Maritime Zones Act, 1976 भारत के समुद्री क्षेत्रों पर संप्रभु अधिकारों को परिभाषित करता है, जिसमें लगभग 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर का EEZ शामिल है (Ministry of Earth Sciences, 2023)। Indian Ports Act, 1908 बंदरगाह संचालन और सुरक्षा से संबंधित है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS), 1982 का सदस्य है, जो समुद्री क्षेत्राधिकार, नौवहन अधिकार और विवाद समाधान के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

भारतीय महासागर का आर्थिक महत्व और भारत के समुद्री प्रयास

भारतीय महासागर विश्व के समुद्री तेल व्यापार का 80% से अधिक और कंटेनर यातायात का 60% हिस्सा संभालता है (International Maritime Organization, 2023)। भारत का समुद्री व्यापार उसके कुल व्यापार का लगभग 95% है, जिसकी वार्षिक कीमत लगभग 1.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है (Ministry of Ports, Shipping and Waterways, 2023)। यह महासागर भारत की आर्थिक सुरक्षा में उसकी अहम भूमिका दर्शाता है।

सरकार का सागरमाला कार्यक्रम, जो 2015 में शुरू हुआ, ने पोर्ट अवसंरचना के आधुनिकीकरण और आंतरिक कनेक्टिविटी सुधार के लिए 15,000 करोड़ रुपये (लगभग 2 बिलियन डॉलर) से अधिक निवेश किया है। इस पहल से लॉजिस्टिक्स लागत में 15% की कमी आई है और इसका लक्ष्य समुद्री व्यापार को सालाना 7-8% की दर से बढ़ाना है (NITI Aayog रिपोर्ट, 2023)।

भारतीय महासागर के संकुचन बिंदुओं की रणनीतिक अहमियत

विदेश मंत्री ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-एल-मंडेब जैसे समुद्री संकुचन बिंदुओं की संवेदनशीलता पर ध्यान दिलाया, जहाँ प्रतिदिन लगभग 30 मिलियन बैरल तेल गुजरता है (Energy Information Administration, 2023)। ये संकुचन बिंदु वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारत की रणनीति इन बिंदुओं की सुरक्षा के लिए नौसेना सहयोग और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसमें Indian Maritime Security Centre (IMSC) जैसी संस्थाएं अहम भूमिका निभाती हैं। 2018 से 2023 के बीच समुद्री डकैती की घटनाओं में 40% की कमी (IMB Piracy Report, 2023) क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में सुधार को दर्शाती है।

समुद्री सहयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था

  • विदेश मंत्रालय (MEA): भारत की कूटनीतिक भागीदारी का समन्वय करता है और क्षेत्रीय सहयोग के ढांचे को बढ़ावा देता है।
  • Indian Maritime Security Centre (IMSC): IOR में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और संचालन का समन्वय करता है।
  • Indian Ocean Rim Association (IORA): सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सतत विकास और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने वाला क्षेत्रीय अंतरसरकारी संगठन।
  • International Maritime Organization (IMO): समुद्री सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक मानक तय करता है।
  • National Maritime Foundation (NMF): समुद्री सुरक्षा और शासन पर नीति अनुसंधान एवं रणनीतिक विश्लेषण प्रदान करता है।

भारतीय महासागर में बहुपक्षीयता बनाम दक्षिण चीन सागर की द्विपक्षीयता

पहलूभारतीय महासागर क्षेत्र (IOR)दक्षिण चीन सागर (SCS)
शासन दृष्टिकोणIORA और भारतीय महासागर कॉन्फ्रेंस जैसे मंचों के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोगक्षेत्रीय दावों के चलते द्विपक्षीय दबाव और टकराव
विवाद समाधानUNCLOS और संवाद आधारित प्रबंधन पर जोरबार-बार कूटनीतिक तनाव और सैन्यकरण, जैसे चीन का नौ-डैश लाइन दावा
सुरक्षा सहयोगसाझा समुद्री क्षेत्र जागरूकता और समुद्री डकैती विरोधी अभियानप्रतिस्पर्धी नौसैनिक निर्माण और रणनीतिक स्थिति
आर्थिक एकीकरणकनेक्टिविटी, व्यापार सुगमता और संसाधनों के सतत उपयोग पर ध्यानसंसाधनों का विवादित दोहन और नौवहन की सीमित स्वतंत्रता

भारतीय महासागर समुद्री शासन में अहम चुनौतियां

मजबूत कूटनीतिक भागीदारी के बावजूद, भारतीय महासागर में कोई बाध्यकारी बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा ढांचा नहीं है, जिसके कारण समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और पर्यावरणीय क्षति जैसी गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों का समन्वित समाधान नहीं हो पाता। एकीकृत कानूनी या संचालनात्मक व्यवस्था की कमी क्षेत्रीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में बाधा है।

आगे का रास्ता: सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग को मजबूत बनाना

  • IORA के तहत एक बाध्यकारी समुद्री सुरक्षा ढांचा स्थापित करें जिसमें स्पष्ट प्रवर्तन प्रोटोकॉल हों।
  • संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और खुफिया साझा करने को बढ़ाएं ताकि समुद्री डकैती में कमी बनी रहे और क्षेत्रीय जागरूकता बढ़े।
  • 40 मिलियन से अधिक लोगों की आजीविका से जुड़े भारतीय महासागर के मछली संसाधनों की रक्षा के लिए सतत मत्स्य प्रबंधन में निवेश करें (FAO, 2022)।
  • सागरमाला के तहत अवसंरचना को मजबूत करें ताकि संकुचन बिंदुओं पर आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके।
  • समावेशी आर्थिक संबंधों को बढ़ावा दें और ऐतिहासिक सांस्कृतिक जुड़ाव को पुनर्जीवित कर क्षेत्रीय एकीकरण को गहरा करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत का EEZ UNCLOS के अनुसार उसके बेसलाइन से 200 नौटिकल मील तक फैला है।
  2. भारत को EEZ में जीवित और निर्जीव संसाधनों पर संप्रभु अधिकार प्राप्त हैं, पर पूर्ण संप्रभुता नहीं।
  3. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विदेशी जहाजों को भारत के EEZ में बिना प्रतिबंध के मछली पकड़ने का अधिकार है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि UNCLOS के अनुसार EEZ 200 नौटिकल मील तक होता है। कथन 2 भी सही है; EEZ में संसाधनों पर संप्रभु अधिकार होते हैं, पर पूर्ण संप्रभुता नहीं। कथन 3 गलत है; विदेशी जहाजों को अनुमति लेनी होती है और उन्हें राष्ट्रीय कानून जैसे Maritime Zones Act, 1981 के तहत नियंत्रित किया जाता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Indian Ocean Rim Association (IORA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IORA केवल समुद्री सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित क्षेत्रीय संगठन है।
  2. भारत 1997 से IORA का संस्थापक सदस्य है।
  3. IORA सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सतत विकास और आपदा जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है; IORA का दायरा समुद्री सुरक्षा से आगे आर्थिक सहयोग और सतत विकास तक फैला है। कथन 2 और 3 सही हैं; भारत संस्थापक सदस्य है और IORA क्षेत्रीय मुद्दों को व्यापक रूप से संबोधित करता है।

मुख्य प्रश्न

9वीं भारतीय महासागर कॉन्फ्रेंस में भारत के विदेश मंत्री द्वारा उजागर किए गए भारतीय महासागर क्षेत्र में सामूहिक जिम्मेदारी और बहुपक्षीय सहयोग के महत्व पर चर्चा करें। ये प्रयास समुद्री सुरक्षा और आर्थिक विकास में कैसे योगदान देते हैं?

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध) और पेपर 3 (आर्थिक विकास)
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड भौगोलिक रूप से समुद्र से दूर है, लेकिन राज्य के खनिज निर्यात भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से सागरमाला के तहत बेहतर समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर तैयार करते समय भारत की समुद्री रणनीति का झारखंड के आर्थिक विकास पर अप्रत्यक्ष प्रभाव, जैसे बंदरगाह आधुनिकीकरण और व्यापार सुगमता, को उजागर करें।
भारत के समुद्री क्षेत्रों को नियंत्रित करने वाला मुख्य कानूनी उपकरण क्या है?

भारत के समुद्री क्षेत्र मुख्य रूप से Territorial Waters, Continental Shelf, Exclusive Economic Zone and Other Maritime Zones Act, 1976 द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो क्षेत्रीय जल, महाद्वीपीय शेल्फ और EEZ के दायरे और अधिकार निर्धारित करता है।

सागरमाला कार्यक्रम भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था में कैसे योगदान देता है?

सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाह अवसंरचना को आधुनिक बनाता है और कनेक्टिविटी सुधारता है, जिससे 2015 से लॉजिस्टिक्स लागत में 15% की कमी आई है और समुद्री व्यापार को 7-8% की वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य दिया गया है।

Indian Ocean Rim Association (IORA) की भूमिका क्या है?

IORA एक क्षेत्रीय अंतरसरकारी संगठन है जो भारतीय महासागर के तटीय देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सतत विकास और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकुचन बिंदु भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकुचन बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 30 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और निर्बाध समुद्री व्यापार के लिए जरूरी है।

भारतीय महासागर समुद्री सुरक्षा सहयोग में प्रमुख कमी क्या है?

भारतीय महासागर में कोई बाध्यकारी बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा ढांचा नहीं है, जिसके कारण समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और पर्यावरणीय खतरों के खिलाफ प्रतिक्रिया तुकड़ी हुई और असंगठित रहती है।

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