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9वें भारतीय महासागर सम्मेलन का संदर्भ और अवलोकन

भारत के विदेश मंत्री ने 2024 में आयोजित 9वें भारतीय महासागर सम्मेलन को संबोधित किया, जो 2016 में India Foundation द्वारा क्षेत्रीय थिंक टैंकों के सहयोग से शुरू किया गया एक प्रमुख मंच है। इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे, जिनका विषय था “भारतीय महासागर के लिए सामूहिक जिम्मेदारी।” संबोधन में समुद्री स्थिरता सुनिश्चित करने, आर्थिक हितों की रक्षा करने, और भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में उभरती भू-राजनीतिक व पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत पर बल दिया गया।

विदेश मंत्री द्वारा प्रमुख प्राथमिकताएं

  • समुद्री स्थिरता: भारतीय महासागर एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र है जो आर्थिक गतिविधियों, जीविका, संपर्क और सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। इस प्रणाली में किसी भी व्यवधान से क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर खतरा पैदा हो सकता है।
  • ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध: पुराने बाधाओं को दूर कर पारंपरिक संबंधों को पुनर्जीवित कर भारतीय महासागर देशों के बीच आर्थिक सहयोग और संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
  • बदलता वैश्विक क्रम: विदेश मंत्री ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विभाजन बढ़ने की बात कही, जिससे क्षेत्रीय देशों को मजबूत और भरोसेमंद साझेदारियां तलाशनी पड़ रही हैं।
  • चोक पॉइंट्स को लेकर चिंता: हॉर्मुज जलडमरूमध्य और मलक्का जैसे भौतिक और वैचारिक चोक पॉइंट्स समुद्री व्यापार में बाधा डाल सकते हैं, इसलिए इनके संयुक्त प्रबंधन की आवश्यकता है।
  • गहरा क्षेत्रीय सहयोग: भारतीय महासागर को "ग्लोबल साउथ का महासागर" बताते हुए साझा चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान की जरूरत पर बल दिया गया।

भारतीय समुद्री क्षेत्र के कानूनी और संस्थागत ढांचे

भारत का समुद्री शासन एक मजबूत कानूनी आधार पर आधारित है:

  • Territorial Waters, Continental Shelf, Exclusive Economic Zone and Other Maritime Zones Act, 1976 (EEZ Act): इस अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत क्षेत्रीय जल (12 समुद्री मील तक) और EEZ (200 समुद्री मील तक) की सीमा निर्धारित की गई है, जो समुद्री संसाधनों पर संप्रभु अधिकार स्थापित करती है।
  • Indian Ports Act, 1908: यह बंदरगाह संचालन को नियंत्रित करता है, जिससे समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा और प्रबंधन सुनिश्चित होता है।
  • Maritime Zones of India (Regulation of Fishing by Foreign Vessels) Act, 1981: भारत के समुद्री क्षेत्रों में विदेशी मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करता है ताकि अवैध शोषण रोका जा सके।
  • United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS), 1982: भारत ने UNCLOS को अनुमोदित किया है, जो समुद्री सीमाओं, नेविगेशन अधिकारों और संसाधन अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
  • Navy Act, 1957 और Coast Guard Act, 1978: ये अधिनियम भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के संचालन और समुद्री सुरक्षा तथा कानून प्रवर्तन की जिम्मेदारी निर्धारित करते हैं।

भारतीय महासागर क्षेत्र का आर्थिक महत्व

भारतीय महासागर वैश्विक और भारतीय आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • विश्व के 80% समुद्री तेल व्यापार और 60% कंटेनर यातायात भारतीय महासागर के रास्ते होकर गुजरता है (International Maritime Organization, 2023)।
  • भारत का इस क्षेत्र के माध्यम से समुद्री व्यापार लगभग $300 बिलियन वार्षिक है (Ministry of Shipping, 2023)।
  • केंद्र सरकार ने बजट 2023-24 में ₹13,000 करोड़ (~$1.6 बिलियन) की राशि Sagarmala Programme के तहत बंदरगाह अवसंरचना और तटीय शिपिंग के लिए आवंटित की है, जिसका उद्देश्य समुद्री लॉजिस्टिक्स और संपर्क बढ़ाना है।
  • ब्लू इकॉनमी भारत की GDP में लगभग 4% का योगदान देती है, जो 2030 तक दोगुनी होकर 8% तक पहुंचने की संभावना है (NITI Aayog, 2022)।
  • भारतीय महासागर में समुद्री डकैती की घटनाएं 2018 से 2023 के बीच 40% तक कम हुई हैं, जो नौसेना सहयोग में सुधार को दर्शाती हैं (IMB Piracy Report, 2023)।

भारतीय महासागर शासन में प्रमुख संस्थाएं

  • Ministry of External Affairs (MEA): विदेश नीति और क्षेत्रीय सहयोग रणनीतियों का निर्माण करती है।
  • Indian Maritime Security Centre (IMSC): समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और सूचना साझा करने का समन्वय करता है।
  • Indian Navy: रणनीतिक उपस्थिति और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • Indian Coast Guard (ICG): समुद्री कानून, सुरक्षा और खोज एवं बचाव कार्यों को लागू करता है।
  • Indian Ocean Rim Association (IORA): 23 सदस्यीय क्षेत्रीय अंतर-सरकारी संगठन है जो आर्थिक सहयोग और समुद्री शासन को बढ़ावा देता है।
  • International Maritime Organization (IMO): संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ एजेंसी है जो समुद्री सुरक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को नियंत्रित करती है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारतीय महासागर बनाम यूरोपीय संघ का समुद्री शासन

पहलूभारतीय महासागर क्षेत्रयूरोपीय संघ
बहुपक्षीय ढांचासंप्रभु राज्यों के बीच खंडित, गैर-बाध्यकारी सहयोगEU Maritime Spatial Planning Directive (2014) के तहत एकीकृत समुद्री नीति
सुरक्षा समन्वयNATO जैसे बाध्यकारी क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का अभावसदस्य देशों के बीच समन्वित समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग
व्यापार दक्षतामहत्वपूर्ण लेकिन भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अवसंरचना की कमी से सीमित2015-2023 में समुद्री व्यापार दक्षता में 25% वृद्धि
पर्यावरण प्रबंधनअस्थायी पहल, सीमित प्रवर्तन तंत्र2015-2023 में समन्वित नीतियों के जरिए समुद्री प्रदूषण में 15% कमी

भारतीय महासागर समुद्री शासन में अहम कमियां

  • एक बाध्यकारी, व्यापक क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे के अभाव में समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और भू-राजनीतिक तनावों के प्रति प्रतिक्रिया खंडित रहती है।
  • संस्थागत समेकन की कमी से वास्तविक समय में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और संयुक्त संचालन की क्षमता प्रभावित होती है।
  • तटीय देशों के बीच आर्थिक असमानताएं अवसंरचना विकास और संपर्क में बाधा डालती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन से समुद्र स्तर में वृद्धि और समुद्री प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए समन्वित रणनीतियों की जरूरत है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • एक बाध्यकारी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचा स्थापित करने से सामूहिक मजबूती बढ़ेगी और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों को रोकने में मदद मिलेगी।
  • Indian Ocean Rim Association की भूमिका और क्षमता मजबूत कर आर्थिक व पर्यावरणीय सहयोग को गहरा किया जा सकता है।
  • भारत के Sagarmala Programme और नौसेना क्षमताओं का इस्तेमाल क्षेत्रीय अवसंरचना निर्माण और संयुक्त अभ्यासों में किया जाना चाहिए, जिससे इंटरऑपरेबिलिटी बेहतर होगी।
  • IMSC और साझेदार नौसेनाओं/तटरक्षक बलों के माध्यम से एकीकृत समुद्री क्षेत्र जागरूकता प्रणाली लागू कर समय पर खतरे का पता लगाया जा सकता है।
  • चोक पॉइंट्स पर कूटनीतिक संवाद और अवसंरचना निवेश से निर्बाध समुद्री व्यापार सुनिश्चित किया जा सकता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS Paper 3: समुद्री सुरक्षा, भारतीय महासागर भू-राजनीति, आर्थिक विकास, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन
  • GS Paper 2: भारत की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संगठन (IORA, IMO)
  • निबंध: क्षेत्रीय सहयोग और भारतीय महासागर में समुद्री शासन में भारत की भूमिका
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Territorial Waters, Continental Shelf, Exclusive Economic Zone and Other Maritime Zones Act, 1976 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह अधिनियम क्षेत्रीय जल की सीमा को बेसलाइन से 12 समुद्री मील तक परिभाषित करता है।
  2. अधिनियम के तहत Exclusive Economic Zone (EEZ) की सीमा 350 समुद्री मील तक है।
  3. यह अधिनियम भारत को अपने समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि क्षेत्रीय जल की सीमा 12 समुद्री मील तक है। कथन 2 गलत है क्योंकि EEZ की सीमा 200 समुद्री मील तक है, 350 नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि अधिनियम मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Indian Ocean Rim Association (IORA) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IORA के 23 सदस्य देश हैं जो भारतीय महासागर के तटीय क्षेत्र से हैं।
  2. IORA एक बाध्यकारी कानूनी संधि के तहत संचालित होता है, जैसे EU।
  3. IORA आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है; IORA के 23 सदस्य देश हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि IORA किसी बाध्यकारी संधि के तहत संचालित नहीं होता। कथन 3 सही है; यह आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।

मुख्य प्रश्न

भारतीय महासागर क्षेत्र के प्रभावी सामूहिक शासन में चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण करें। समुद्री शासन और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में भारत की भूमिका और पहलों पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध और समुद्री सुरक्षा)
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड भौगोलिक रूप से भू-आबद्ध है, फिर भी उसकी औद्योगिक इकाइयां भारतीय बंदरगाहों के माध्यम से समुद्री व्यापार पर निर्भर हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय महासागर शासन से जुड़ी हैं।
  • मुख्य बिंदु: समुद्री सुरक्षा और बंदरगाह अवसंरचना विकास से आंतरिक राज्यों की आर्थिक वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभाव पर चर्चा करें।
Territorial Waters, Continental Shelf, Exclusive Economic Zone and Other Maritime Zones Act, 1976 का महत्व क्या है?

यह अधिनियम भारत के समुद्री क्षेत्रों को परिभाषित करता है, जिसमें क्षेत्रीय जल (12 समुद्री मील) और EEZ (200 समुद्री मील) शामिल हैं, जो समुद्री संसाधनों पर संप्रभु अधिकार और प्रवर्तन के लिए अधिकार क्षेत्र स्थापित करता है।

Indian Ocean Rim Association (IORA) क्षेत्रीय समुद्री शासन में कैसे योगदान देता है?

IORA एक 23-सदस्यीय अंतर-सरकारी संगठन है जो भारतीय महासागर के तटीय देशों के बीच आर्थिक सहयोग, सतत विकास, और समुद्री सुरक्षा को संवाद और संयुक्त पहलों के माध्यम से बढ़ावा देता है।

भारतीय महासागर के प्रमुख चोक पॉइंट्स कौन-कौन से हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?

प्रमुख चोक पॉइंट्स में हॉर्मुज जलडमरूमध्य, बाब अल-मंडेब, और मलक्का जलडमरूमध्य शामिल हैं। ये संकीर्ण मार्ग वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद जरूरी हैं; यहां व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।

भारत का Sagarmala Programme समुद्री अवसंरचना को कैसे बढ़ावा देता है?

Sagarmala Programme का उद्देश्य बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, तटीय शिपिंग में सुधार, और बंदरगाह-आधारित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देकर समुद्री लॉजिस्टिक्स और संपर्क को बेहतर बनाना है।

भारतीय महासागर में बाध्यकारी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे की जरूरत क्यों है?

वर्तमान में, खंडित सुरक्षा सहयोग के कारण समुद्री डकैती और अवैध मछली पकड़ने जैसे खतरों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया सीमित है। एक बाध्यकारी ढांचा सामूहिक रक्षा, खुफिया साझेदारी, और संकट प्रबंधन को मजबूत करेगा।

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