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जनवरी 2024 में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने भारतीय समुद्री तट के निकट एक परिचालन नौसैनिक प्लेटफॉर्म से नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) के पहले सैल्वो लॉन्च को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह घटना पहली बार एक साथ कई NASM-SR मिसाइलों के एक साथ प्रक्षेपण को दर्शाती है, जिससे देश की स्वदेशी सैल्वो फायरिंग क्षमता और समुद्री हमला दक्षता में इजाफा हुआ है। NASM-SR की उड़ान समुद्र के करीब होती है और इसकी परिचालन सीमा लगभग 120 किमी है, जो दुश्मन के सतही जहाजों को प्रभावी ढंग से नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है।

यह उपलब्धि भारत की रणनीतिक निरोधक क्षमता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में परिचालन तत्परता को बढ़ाती है, क्योंकि यह नौसैनिक मुकाबलों में प्रतिक्रिया समय कम करती है और लक्ष्यों पर दबाव बढ़ाती है, जो देश के व्यापक समुद्री सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा प्रौद्योगिकी, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा
  • निबंध: भारत का रक्षा आधुनिकीकरण और रणनीतिक स्वायत्तता
  • प्रारंभिक परीक्षा: रक्षा खरीद प्रक्रिया, मिसाइल प्रणाली, DRDO की भूमिका

NASM-SR विकास के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

NASM-SR का विकास एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचे के तहत हो रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन अधिनियम, 1980 DRDO को स्वदेशी रक्षा अनुसंधान एवं विकास की जिम्मेदारी देता है। भारतीय नौसेना नौसेना अधिनियम, 1957 के तहत संचालित होती है, जो हथियार प्रणालियों के परिचालन तैनाती को अनुमति देता है। रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2020 मेक इन इंडिया पहलों को प्रोत्साहित करती है, जिसमें स्वदेशी सामग्री के लक्ष्य और पूंजीगत खरीद के लिए प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश शामिल हैं।

  • संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत नागरिकों पर देश की रक्षा का मौलिक कर्तव्य है, जो स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के महत्व को रेखांकित करता है।
  • आर्म्स एक्ट, 1959 मिसाइल प्रणालियों के स्वामित्व और उपयोग को नियंत्रित करता है, जिससे कानूनी अनुपालन सुनिश्चित होता है।
  • अधिकारिक रहस्य अधिनियम, 1923 संवेदनशील रक्षा तकनीक की जानकारी की सुरक्षा करता है।

आर्थिक पहलू और स्वदेशी रक्षा उत्पादन

भारत का रक्षा बजट 2023-24 लगभग ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) है, जिसमें पूंजीगत व्यय का हिस्सा 25% है, जो मुख्य रूप से स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास और खरीद पर खर्च होता है (रक्षा मंत्रालय, बजट 2023-24)। रक्षा उत्पादन नीति 2020 का लक्ष्य 2030 तक घरेलू रक्षा उत्पादन को 25% से बढ़ाकर 70% करना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो।

  • NASM-SR सहित स्वदेशी मिसाइल विकास आयात पर निर्भरता घटाता है, जिससे सालाना लगभग $2 बिलियन की बचत होती है (SIPRI Arms Transfers Database 2023)।
  • वैश्विक नौसैनिक मिसाइल बाजार 2030 तक 8.5% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है, जो भारत के स्वदेशी प्रणालियों के निर्यात के अवसर बढ़ाता है (Frost & Sullivan रिपोर्ट 2023)।
  • भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां मिसाइल प्लेटफॉर्म के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम इंटीग्रेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

NASM-SR के सफल सैल्वो लॉन्च में कई संस्थानों का समन्वित प्रयास शामिल है:

  • DRDO: मिसाइल डिजाइन, विकास और परीक्षण की मुख्य एजेंसी।
  • भारतीय नौसेना: परीक्षण और परिचालन के लिए साझेदार।
  • रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्धारण, बजट आवंटन और खरीद पर निगरानी।
  • भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL): सिस्टम इंटीग्रेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO): मिसाइल मार्गदर्शन के लिए आवश्यक उपग्रह नेविगेशन समर्थन प्रदान करता है।

NASM-SR सैल्वो लॉन्च के तकनीकी और परिचालन आंकड़े

पहले सैल्वो लॉन्च में एक साथ कई NASM-SR मिसाइलों का प्रक्षेपण किया गया, जो भारत की स्वदेशी नौसैनिक मिसाइल प्रणालियों के लिए पहली बार है (PIB, 2024)। मिसाइल की समुद्र के करीब उड़ान क्षमता दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों से बचाव बढ़ाती है। परिचालन विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • परिचालन सीमा: लगभग 120 किमी
  • उड़ान प्रोफ़ाइल: समुद्र के करीब उड़ान, जिससे पता लगाना मुश्किल होता है
  • सैल्वो लॉन्च: दुश्मन की रक्षा को संतृप्त करने के लिए एक साथ कई मिसाइलें दागी जाती हैं
  • भारतीय नौसेना बेड़ा: 130 से अधिक युद्धपोत, 2030 तक 45 नए जहाजों के साथ स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों से लैस (भारतीय नौसेना वार्षिक रिपोर्ट 2023)

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत का NASM-SR बनाम चीन का YJ-18

पैरामीटरभारत का NASM-SRचीन का YJ-18
परिचालन सीमालगभग 120 किमीलगभग 220 किमी
उड़ान प्रोफ़ाइलसमुद्र के करीब, उपध्वनिक क्रूजसमुद्र के करीब, सुपरसोनिक अंतिम गति
सैल्वो क्षमतादिखाई गई (2024 में पहला सैल्वो लॉन्च)स्थापित, एक साथ कई मिसाइलें
प्रौद्योगिकीस्वदेशी, नौसैनिक प्लेटफॉर्म के साथ बेहतर एकीकरण पर काम चल रहा हैउन्नत C4ISR एकीकरण, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध
रणनीतिक प्रभावक्षेत्रीय निरोधक क्षमता बढ़ाता है, क्षमता अंतर घटाता हैमात्रात्मक और गुणात्मक श्रेष्ठता बनाए रखता है

महत्वपूर्ण क्षमता अंतर: नेटवर्क-केंद्रित युद्ध एकीकरण

सैल्वो लॉन्च की सफलता के बावजूद, भारत की मिसाइल सैल्वो प्रणालियां उन्नत नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्लेटफॉर्म के साथ पूर्ण रूप से एकीकृत नहीं हैं। इससे वास्तविक समय डेटा फ्यूजन, बहु-क्षेत्रीय परिचालन समन्वय और तेजी से निर्णय लेने में कमी आती है। इसके विपरीत, चीन और अमेरिका ने अत्याधुनिक C4ISR (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस, और रिकॉनिसेंस) प्रणालियां तैनात की हैं, जो मिसाइल सिस्टम को व्यापक युद्ध नेटवर्क में सहज एकीकरण देती हैं (Defence Analysis Journal, 2024)।

महत्व और आगे का रास्ता

  • NASM-SR का सैल्वो लॉन्च भारत की स्वदेशी समुद्री हमला क्षमता को बढ़ाता है, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है और रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत करता है।
  • मिसाइल वर्गों में सैल्वो क्षमता का विस्तार भारतीय नौसेना को बहु-लक्ष्य हमले प्रभावी ढंग से करने में सक्षम बनाएगा।
  • मिसाइल प्रणालियों का नेटवर्क-केंद्रित प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने और परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
  • सार्वजनिक-निजी साझेदारी को मजबूत करना और ISRO के उपग्रह नेविगेशन का लाभ उठाना मिसाइल मार्गदर्शन और निशानेबाजी की सटीकता को तेज करेगा।
  • रक्षा उत्पादन नीति 2020 के लक्ष्य के अनुरूप निरंतर अनुसंधान एवं विकास निवेश भारत को विश्व के शीर्ष पांच मिसाइल उत्पादकों में स्थापित करेगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. NASM-SR की परिचालन सीमा 200 किमी से अधिक है।
  2. पहले सैल्वो लॉन्च में कई मिसाइलों का एक साथ प्रक्षेपण किया गया।
  3. NASM-SR विकास के लिए DRDO मुख्य एजेंसी है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि NASM-SR की परिचालन सीमा लगभग 120 किमी है, 200 किमी से अधिक नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि पहले सैल्वो लॉन्च में एक साथ कई मिसाइलें दागी गईं और DRDO इसका नेतृत्व करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह तुरंत प्रभाव से सभी रक्षा खरीद में न्यूनतम 70% स्वदेशी सामग्री का आदेश देती है।
  2. यह घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया पहलों को प्रोत्साहित करती है।
  3. यह भारतीय नौसेना द्वारा मिसाइल प्रणालियों की परिचालन तैनाती को नियंत्रित करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि 70% स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य 2030 तक है, तत्काल प्रभाव से नहीं। कथन 3 गलत है क्योंकि परिचालन तैनाती नौसेना अधिनियम, 1957 द्वारा नियंत्रित होती है। कथन 2 सही है।

मुख्य प्रश्न

DRDO और भारतीय नौसेना द्वारा नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) के पहले सैल्वो लॉन्च की रणनीतिक महत्वता पर चर्चा करें, विशेषकर भारत की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के संदर्भ में। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (GS2) - सुरक्षा और रक्षा; पेपर 3 (GS3) - रक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी
  • झारखंड पहलू: झारखंड में DRDO की महत्वपूर्ण प्रयोगशालाएं जैसे रक्षा धातु विज्ञान अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL) स्थित हैं, जो स्वदेशी रक्षा अनुसंधान एवं विकास को प्रभावित करती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा को लाभ पहुंचाती हैं।
  • मुख्य उत्तर बिंदु: भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास, राष्ट्रीय सुरक्षा को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता से जोड़ना, और DRDO तथा भारतीय नौसेना की भूमिका जो स्वदेशी प्रणालियों को परिचालन में लाने में है।
NASM-SR मिसाइल की परिचालन सीमा क्या है?

NASM-SR की परिचालन सीमा लगभग 120 किमी है, जो समुद्री मुकाबलों के लिए उपयुक्त है और इसकी समुद्र के करीब उड़ान दुश्मन के रडार से बचाव करती है।

NASM-SR सैल्वो लॉन्च में किन संस्थानों ने भाग लिया?

इस लॉन्च में DRDO (विकासकर्ता), भारतीय नौसेना (परिचालन उपयोगकर्ता), रक्षा मंत्रालय (नीति और वित्त), BEL (सिस्टम इंटीग्रेशन), और ISRO (उपग्रह नेविगेशन समर्थन) शामिल थे।

NASM-SR सैल्वो लॉन्च भारत की समुद्री सुरक्षा को कैसे मजबूत करता है?

यह एक साथ कई मिसाइलों के प्रक्षेपण से प्रतिक्रिया समय कम करता है, लक्ष्य संतृप्ति बढ़ाता है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दुश्मन नौसैनिक खतरों के खिलाफ भारत की निरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

भारत की मिसाइल सैल्वो प्रणालियों की वैश्विक मानकों के मुकाबले मुख्य सीमाएं क्या हैं?

भारत की प्रणालियां अभी उन्नत नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्लेटफॉर्म और C4ISR प्रणालियों के साथ पूर्ण रूप से एकीकृत नहीं हैं, जिससे वास्तविक समय डेटा फ्यूजन और बहु-क्षेत्रीय समन्वय सीमित होता है।

NASM-SR के विकास और परिचालन को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधान कौन से हैं?

प्रमुख कानूनी प्रावधानों में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन अधिनियम, 1980; नौसेना अधिनियम, 1957; रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020; आर्म्स एक्ट, 1959; और आधिकारिक रहस्य अधिनियम, 1923 शामिल हैं।

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