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परिचय: ग्रेट निकोबार द्वीप के लिए ड्राफ्ट मास्टर प्लान

भारत सरकार ने 2024 में ग्रेट निकोबार द्वीप पर एक ग्रीनफील्ड सिटी के लिए ड्राफ्ट मास्टर प्लान जारी किया है, जिसका उद्देश्य पर्यटन और बुनियादी ढांचा विकास को बढ़ावा देना है। यह योजना अंडमान और निकोबार द्वीप प्रशासन (ANIA) के नेतृत्व में पर्यटन, पर्यावरण और बंदरगाह मंत्रालयों के समन्वय से तैयार की गई है। इसके तहत अगले दस वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश कर द्वीप की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है। मालक्का जलडमरूमध्य के निकट द्वीप की रणनीतिक स्थिति इसे व्यापार और पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं प्रदान करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 1: भारतीय भूगोल (द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र, आदिवासी समुदाय), GS पेपर 3: बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और सतत विकास
  • निबंध: पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन

संवैधानिक और कानूनी ढांचा

यह ड्राफ्ट योजना एक जटिल कानूनी व्यवस्था के तहत काम करती है, जो आदिवासी समुदायों और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। संविधान के अनुच्छेद 243Q के तहत स्थानीय शासन संस्थाओं को योजना बनाने का अधिकार दिया गया है, लेकिन द्वीप के आदिवासी क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप (आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा) विनियम, 1956 (ANPATR) के अंतर्गत आते हैं। ANPATR की धारा 3 और 4 गैर-आदिवासियों के प्रवेश को सीमित करती हैं ताकि शॉम्पेन और निकोबारी जनजातियों की रक्षा हो सके। पर्यावरणीय मंजूरी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3-5) के तहत अनिवार्य है, जबकि तटीय विकास कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) अधिसूचना, 2019 के नियमों का पालन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय जैसे T.N. Godavarman Thirumulpad बनाम भारत संघ (1996) वन और जैव विविधता संरक्षण पर कड़े नियम लागू करते हैं, जिनका पालन योजना को करना होगा।

  • अनुच्छेद 243Q: पंचायती राज संस्थाओं को योजना और विकास में भूमिका देता है।
  • ANPATR 1956: आदिवासी स्वायत्तता की रक्षा के लिए प्रवेश प्रतिबंधित करता है।
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986: पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और मंजूरी आवश्यक है।
  • CRZ अधिसूचना 2019: तटीय क्षेत्र की गतिविधियों को पर्यावरणीय नुकसान से बचाने के लिए नियंत्रित करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले: वन संरक्षण और जैव विविधता सुरक्षा को लागू करते हैं।

आर्थिक पहलू: निवेश, रोजगार और विकास के अनुमान

मास्टर प्लान के तहत अगले दस वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जो पांच वर्षों में पर्यटन से स्थानीय GDP में 15% की वृद्धि का लक्ष्य रखता है (Indian Express, 2024)। बुनियादी ढांचे के विकास में एक नया बंदरगाह शामिल है, जो सालाना 2 मिलियन TEUs की क्षमता रखेगा, जिससे बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ेगी। रोजगार सृजन के अनुमान 25,000 प्रत्यक्ष और 50,000 अप्रत्यक्ष नौकरियों का है, जिसमें 60% बिजली की जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करने पर जोर दिया गया है। बजट आवंटन के तहत पर्यटन और बंदरगाह मंत्रालयों के अंतर्गत सतत पर्यटन बुनियादी ढांचे के लिए 1,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

  • 2030 तक वार्षिक पर्यटक संख्या 50,000 से बढ़कर 200,000 होने का अनुमान।
  • बंदरगाह की क्षमता 2 मिलियन TEUs तक विस्तार।
  • कुल बिजली खपत का 60% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य।
  • रोजगार: 25,000 प्रत्यक्ष और 50,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां।
  • बजट आवंटन: सतत पर्यटन बुनियादी ढांचे के लिए 1,500 करोड़ रुपये।

मुख्य संस्थागत हिस्सेदार और उनकी भूमिका

योजना के क्रियान्वयन में कई संस्थान शामिल हैं जो शासन, पर्यावरण और तकनीकी क्षेत्रों में समन्वय करते हैं। ANIA स्थानीय शासन और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभालता है। पर्यटन मंत्रालय (MoT) सतत पर्यटन नीतियों का निर्माण करता है, जबकि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरणीय मंजूरी और अनुपालन की निगरानी करता है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) तटीय बुनियादी ढांचे के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करता है। प्रस्तावित विशेष प्राधिकरण, ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNDA), परियोजना के प्रबंधन और हितधारकों के समन्वय में मदद करेगा।

  • ANIA: स्थानीय शासन और कार्यान्वयन।
  • MoT: सतत पर्यटन नीति और प्रचार।
  • MoEFCC: पर्यावरणीय मंजूरी और निगरानी।
  • NIOT: तटीय बुनियादी ढांचे के लिए तकनीकी समर्थन।
  • GNDA: परियोजना प्रबंधन के लिए विशेष प्राधिकरण।

पर्यावरणीय और जनसांख्यिकीय जानकारी

ग्रेट निकोबार द्वीप लगभग 1,045 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है, जिसका 85% से अधिक हिस्सा वनाच्छादित है (Forest Survey of India, 2023)। वर्तमान जनसंख्या लगभग 8,000 है (जनगणना 2011), जो शहरी विकास के कारण दोगुनी होने की संभावना है। द्वीप की 104 किलोमीटर लंबी तटरेखा पूरी तरह से CRZ नियमों के तहत आती है, जो तटीय क्षेत्र के संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाता है। ड्राफ्ट मास्टर प्लान के तहत 2030 तक द्वीप की बिजली जरूरतों का 60% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जो भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।

परिमाणग्रेट निकोबार द्वीपसिंगापुर सेंटोसा द्वीप
क्षेत्रफल (वर्ग किमी)1,0455.2
वन आवरण (%)85+70
पर्यटन GDP योगदान वृद्धि15% (अनुमानित, 5 वर्ष)25% (10 वर्ष में)
वार्षिक पर्यटक संख्या50,000 से 200,000 (2030 तक)5 मिलियन से अधिक
पर्यावरणीय नियमCRZ 2019, EPA 1986, ANPATRकड़े शहरी पुनर्विकास कानून

तुलनात्मक अध्ययन: सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप से सीख

यह विकास मॉडल सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप से मिलता-जुलता है, जिसने एक सैन्य अड्डे से एक प्रमुख पर्यटन और बुनियादी ढांचा केंद्र में तब्दीली की। सेंटोसा ने दस वर्षों में पर्यटन के GDP योगदान में 25% की वृद्धि की, साथ ही 70% हरित आवरण बनाए रखा, जो कड़े पर्यावरणीय नियमों का परिणाम था (Singapore Urban Redevelopment Authority, 2020)। ग्रेट निकोबार की योजना भी सतत पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर देती है, लेकिन इसे अधिक संवेदनशील पारिस्थितिक और आदिवासी अधिकारों का ध्यान रखना होगा।

महत्वपूर्ण कमियां: आदिवासी अधिकार और सहभागिता तंत्र

ड्राफ्ट मास्टर प्लान में आदिवासी शॉम्पेन और निकोबारी जनजातियों के सामाजिक-सांस्कृतिक विस्थापन के खतरों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है। इसमें पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के तहत आवश्यक व्यापक सहभागिता तंत्र का अभाव है, जो आदिवासियों की सहमति और विकास निर्णयों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करता है। इस कमी से आदिवासी स्वायत्तता कमजोर हो सकती है और सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचने का खतरा बनता है। आदिवासी आवाज़ों को शामिल करना सतत और न्यायसंगत विकास के लिए जरूरी है।

  • PESA-अनुरूप सहभागिता तंत्र का अभाव।
  • शॉम्पेन और निकोबारी समुदायों का विस्थापन और सांस्कृतिक क्षरण का खतरा।
  • आदिवासी प्रभाव आकलन और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता।

आगे का रास्ता: विकास और संरक्षण के बीच संतुलन

  • PESA-अनुरूप संस्थागत सहभागिता स्थापित कर आदिवासियों की सहमति और लाभ साझा करना सुनिश्चित करें।
  • MoEFCC की निगरानी में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और निरंतर मॉनिटरिंग को मजबूत करें।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और कम प्रभाव वाले बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दें ताकि पारिस्थितिक पदचिह्न कम हो।
  • पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन योजना में आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को शामिल करें।
  • GNDA के भीतर पारदर्शी तंत्र स्थापित कर विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
अंडमान और निकोबार द्वीप (आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा) विनियम, 1956 (ANPATR) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ANPATR गैर-आदिवासियों के प्रवेश को सीमित करता है ताकि आदिवासी समुदायों की सुरक्षा हो सके।
  2. ANPATR राज्य की मंजूरी से आदिवासी क्षेत्रों में असीमित व्यावसायिक विकास की अनुमति देता है।
  3. ANPATR की धारा 3 और 4 गैर-आदिवासियों के प्रवेश और बसावट को नियंत्रित करती हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि ANPATR गैर-आदिवासियों के प्रवेश को सीमित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि ANPATR आदिवासी क्षेत्रों में असीमित व्यावसायिक विकास की अनुमति नहीं देता। कथन 3 सही है क्योंकि धारा 3 और 4 गैर-आदिवासियों के प्रवेश और बसावट को नियंत्रित करती हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
ग्रेट निकोबार द्वीप विकास से संबंधित पर्यावरणीय नियमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ) अधिसूचना, 2019 ग्रेट निकोबार के 100% तटरेखा पर लागू होती है।
  2. वन संरक्षण अधिनियम, 1980 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 को सभी मामलों में प्राथमिकता देता है।
  3. T.N. Godavarman Thirumulpad बनाम भारत संघ के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में विकास परियोजनाओं में वन संरक्षण अनिवार्य किया गया है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि CRZ अधिसूचना 2019 पूरे 104 किमी तटरेखा पर लागू होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि वन संरक्षण अधिनियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम को हर मामले में प्राथमिकता नहीं देता, बल्कि दोनों साथ काम करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने वन संरक्षण पर जोर दिया है।

मेन प्रश्न

ग्रेट निकोबार द्वीप पर ग्रीनफील्ड सिटी के ड्राफ्ट मास्टर प्लान में पर्यटन आधारित आर्थिक विकास को पारिस्थितिक और आदिवासी सुरक्षा के साथ कैसे संतुलित किया गया है? मुख्य कमियां क्या हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 1 (भूगोल और पर्यावरण), पेपर 3 (आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा)
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के आदिवासी और वन आश्रित समुदायों को विकास और संरक्षण के बीच समान चुनौतियों का सामना है, जिससे ग्रेट निकोबार का मामला तुलनात्मक अध्ययन के लिए उपयुक्त है।
  • मेन पॉइंटर: संवैधानिक आदिवासी सुरक्षा, पर्यावरण कानून और सहभागिता शासन को झारखंड के आदिवासी इलाकों के संदर्भ में समझाएं।
ग्रेट निकोबार मास्टर प्लान के संदर्भ में अनुच्छेद 243Q का क्या महत्व है?

73वें संशोधन द्वारा शामिल अनुच्छेद 243Q पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं बनाने का अधिकार देता है। ग्रेट निकोबार में स्थानीय शासन की भागीदारी अनिवार्य है, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों पर ANPATR के तहत अतिरिक्त प्रतिबंध लागू होते हैं, जो पंचायती संस्थाओं के अधिकार सीमित करते हैं।

ANPATR ग्रेट निकोबार द्वीप पर आदिवासी क्षेत्रों में पहुँच को कैसे नियंत्रित करता है?

ANPATR की धारा 3 और 4 गैर-आदिवासियों के प्रवेश और बसावट को सीमित करती हैं ताकि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक अखंडता बनी रहे। इसके लिए बाहरी लोगों को विशेष अनुमति लेनी होती है।

मास्टर प्लान को किन पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा?

योजना को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत मंजूरी लेनी होगी, तटीय क्षेत्रों के लिए CRZ अधिसूचना, 2019 का पालन करना होगा, और वन तथा जैव विविधता संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करना होगा।

पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) यहाँ क्यों प्रासंगिक है?

PESA अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की सहमति और सहभागिता को अनिवार्य करता है। ड्राफ्ट योजना में इसका अभाव आदिवासी विस्थापन का खतरा बढ़ाता है और सतत विकास को कमजोर करता है।

ग्रेट निकोबार सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप से क्या सीख सकता है?

सेंटोसा ने एकीकृत पर्यटन और बुनियादी ढांचा विकास के जरिए पर्यटन GDP योगदान में 25% वृद्धि की और 70% हरित आवरण सुरक्षित रखा। ग्रेट निकोबार भी इसी संतुलन को अपनाकर अपनी अनूठी पारिस्थितिक और आदिवासी परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बना सकता है।

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