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परिचय: जनगणना 2021 में डिजिटल स्व-गणना

साल 2024 में करीब 55,000 भारतीय परिवारों ने जनगणना 2021 के लिए शुरू किए गए डिजिटल स्व-गणना पोर्टल का उपयोग किया। यह पोर्टल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा विकसित और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा लागू किया गया था, जिससे नागरिक ऑनलाइन जनगणना डेटा जमा कर सके। भारत में लगभग 290 मिलियन परिवार (जनगणना 2011) होने के बावजूद, डिजिटल भागीदारी 0.05% से भी कम है, जो इस तकनीक के शुरुआती अपनाने को दर्शाता है। गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय इस प्रक्रिया की देखरेख करता है, जिसे जनगणना अधिनियम, 1948 और संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन — जनगणना अधिनियम, 1948; डिजिटल शासन पहल; डेटा गोपनीयता कानून
  • GS पेपर 3: अर्थशास्त्र — बजट आवंटन और डिजिटल जनगणना की लागत दक्षता
  • GS पेपर 1: भारतीय समाज — जनसांख्यिकी डेटा और डिजिटल विभाजन
  • निबंध: प्रौद्योगिकी और शासन; डेटा गोपनीयता और डिजिटल समावेशन

जनगणना और डिजिटल गणना के लिए कानूनी एवं संवैधानिक ढांचा

अनुसूचित जाति और जनजाति की पहचान तथा जनसंख्या गणना के लिए संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 में प्रावधान हैं। पूरा जनगणना कार्य जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत संचालित होता है, जिसमें धारा 4 के अनुसार डेटा संग्रह अनिवार्य है। यह अधिनियम डेटा की गोपनीयता और दुरुपयोग पर जुर्माने का प्रावधान भी करता है। डिजिटल स्व-गणना के आने से डेटा सुरक्षा की चिंताएं उत्पन्न हुई हैं, जिन्हें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (संशोधित 2008) के तहत नियंत्रित किया जाता है। आने वाले व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक से नागरिकों के डेटा गोपनीयता को और मजबूत करने की उम्मीद है, जो भविष्य के डिजिटल जनगणना संचालन के लिए अहम होगा।

  • अनुच्छेद 341 और 342: अनुसूचित जाति/जनजाति की पहचान और जनगणना के लिए सरकार को अधिकार देते हैं
  • जनगणना अधिनियम, 1948: जनगणना कार्यों का कानूनी आधार, जिसमें डिजिटल गणना भी शामिल है
  • धारा 4, जनगणना अधिनियम: जनसंख्या डेटा संग्रह अनिवार्य करती है
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: डिजिटल डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को नियंत्रित करता है
  • व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक: व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को विनियमित करने वाला लंबित विधेयक

डिजिटल जनगणना के आर्थिक पहलू

साल 2021-22 के केंद्रीय बजट में जनगणना 2021 के लिए ₹3,400 करोड़ आवंटित किए गए थे (आर्थिक सर्वेक्षण 2022)। डिजिटल स्व-गणना पोर्टल पारंपरिक घर-घर जाकर गणना की तुलना में 15-20% तक लागत कम करता है (NITI आयोग 2023)। डिजिटल माध्यम से प्राप्त सटीक डेटा से कल्याण योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण और कार्यान्वयन में सुधार हो सकता है, जिससे फंड आवंटन की दक्षता 10% तक बढ़ सकती है। हालांकि, डिजिटल स्व-गणना में केवल 0.05% भागीदारी होने से ये आर्थिक लाभ सीमित रह गए हैं और अवसंरचना तथा डिजिटल साक्षरता की चुनौतियों को दर्शाते हैं।

  • बजट आवंटन: जनगणना 2021 के लिए ₹3,400 करोड़ (आर्थिक सर्वेक्षण 2022)
  • लागत में बचत: डिजिटल गणना से 15-20% की कमी (NITI आयोग 2023)
  • कल्याण निधि दक्षता में संभावित सुधार: सटीक डेटा से 10% तक
  • डिजिटल भागीदारी: 55,000 परिवार (~0.05% कुल)
  • इंटरनेट पहुंच: ~75% (2023 TRAI रिपोर्ट)

डिजिटल जनगणना में संस्थागत भूमिकाएँ

रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय (गृह मंत्रालय के अंतर्गत) जनगणना का संचालन करता है। MeitY ने डिजिटल स्व-गणना पोर्टल विकसित और संचालित किया है, जबकि NIC तकनीकी कार्यान्वयन और साइबर सुरक्षा संभालता है। NITI आयोग डिजिटल शासन और डेटा आधारित नीति निर्धारण में सलाहकार भूमिका निभाता है, जो डिजिटल जनगणना रणनीतियों को प्रभावित करता है।

  • रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त: जनगणना का क्रियान्वयन और डेटा की विश्वसनीयता
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): पोर्टल विकास और रखरखाव
  • राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC): तकनीकी कार्यान्वयन और साइबर सुरक्षा
  • NITI आयोग: डिजिटल शासन और डेटा विश्लेषण पर नीति सलाह

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया डिजिटल जनगणना भागीदारी

पैरामीटरभारत (2021 जनगणना)ऑस्ट्रेलिया (2021 जनगणना)
डिजिटल भागीदारी वाले परिवार55,000 (~0.05%)65% परिवार
जनसंख्या कवरेज~290 मिलियन परिवार~10 मिलियन परिवार
डिजिटल गणना से लागत बचत15-20%AUD 50 मिलियन
इंटरनेट पहुंच~75% (2023 TRAI रिपोर्ट)~90%
डेटा प्रसंस्करण गतिकम डिजिटल भागीदारी के कारण सीमित सुधारडेटा प्रसंस्करण में उल्लेखनीय तेजी

डिजिटल स्व-गणना में चुनौतियाँ: डिजिटल विभाजन और डेटा सुरक्षा

कम डिजिटल भागीदारी से डिजिटल विभाजन स्पष्ट होता है, खासकर ग्रामीण और वंचित समुदायों में जहां डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच कम है। इससे जनगणना में कम प्रतिनिधित्व और डेटा पक्षपात का खतरा रहता है, जो जनगणना की सटीकता को प्रभावित करता है। साथ ही, डिजिटल गणना से डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर भी चिंता बढ़ी है, क्योंकि जनगणना डेटा संवेदनशील होता है और कानूनी ढांचा अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। एक व्यापक डेटा संरक्षण कानून की कमी डिजिटल जनगणना पर भरोसे को चुनौती देती है।

  • ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी
  • इंटरनेट पहुंच में असमानता से पोर्टल उपयोग सीमित
  • कम प्रतिनिधित्व और पक्षपाती डेटा का खतरा
  • अधूरी कानूनी सुरक्षा के कारण डेटा गोपनीयता की चिंताएं
  • संवेदनशील जनगणना डेटा की साइबर सुरक्षा चुनौतियाँ

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • डिजिटल स्व-गणना का क्रमिक अपनाना जनगणना के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम है, लेकिन इसे डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से बढ़ाने की जरूरत है।
  • डेटा सुरक्षा कानूनों को मजबूत करना, खासकर व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक को पारित करना, नागरिकों का भरोसा बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
  • ग्रामीण इंटरनेट अवसंरचना और किफायती पहुंच के जरिये डिजिटल विभाजन को कम करके समावेशन बढ़ाना होगा।
  • डिजिटल और पारंपरिक तरीकों को मिलाकर हाइब्रिड गणना मॉडल अपनाना व्यापक कवरेज सुनिश्चित करेगा।
  • सटीक डिजिटल जनगणना डेटा का उपयोग शासन, कल्याण योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण और संसाधन आवंटन की दक्षता बढ़ाने में किया जा सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारतीय जनगणना में डिजिटल स्व-गणना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. जनगणना अधिनियम, 1948 डिजिटल गणना सहित जनगणना डेटा संग्रह को कानूनी रूप से अनिवार्य करता है।
  2. जनगणना 2021 में 50% से अधिक भारतीय परिवारों ने डिजिटल स्व-गणना पोर्टल का उपयोग किया।
  3. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 डिजिटल जनगणना डेटा से संबंधित डेटा गोपनीयता को नियंत्रित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4 डेटा संग्रह को अनिवार्य करती है, जिसमें अब डिजिटल तरीके भी शामिल हैं। कथन 2 गलत है; केवल 0.05% परिवारों ने डिजिटल पोर्टल का उपयोग किया। कथन 3 सही है क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 वर्तमान में डिजिटल डेटा गोपनीयता को नियंत्रित करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में डिजिटल जनगणना के चुनौतियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच डिजिटल जनगणना भागीदारी के मुख्य बाधक हैं।
  2. साल 2023 तक भारत की इंटरनेट पहुंच 30% से कम है।
  3. व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक पारित हो चुका है और जनगणना डेटा गोपनीयता को नियंत्रित करता है।
  • aकेवल 1
  • bऔर (c) केवल
  • cकेवल
  • aऔर (b) केवल
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच भागीदारी सीमित करती है। कथन 2 गलत है; इंटरनेट पहुंच लगभग 75% है (TRAI 2023)। कथन 3 गलत है; व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक अभी लंबित है, पारित नहीं हुआ।

मुख्य प्रश्न

भारतीय जनगणना में डिजिटल स्व-गणना शुरू करने का महत्व बताइए। इसके कार्यान्वयन में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं और डेटा की सटीकता व समावेशन बढ़ाने के लिए इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (250 शब्द)

भारतीय सरकार को जनगणना कराने का संवैधानिक अधिकार किन प्रावधानों से प्राप्त होता है?

भारतीय सरकार को जनगणना कराने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत प्राप्त है, जो अनुसूचित जाति और जनजाति की पहचान से भी संबंधित हैं। ये अनुच्छेद जनसंख्या गणना के संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं।

भारत में जनगणना संचालन और डेटा गोपनीयता को नियंत्रित करने वाला कानूनी अधिनियम कौन सा है?

जनगणना अधिनियम, 1948 जनगणना संचालन, डेटा संग्रह, गोपनीयता और दुरुपयोग पर जुर्माने के प्रावधानों को नियंत्रित करता है। धारा 4 के तहत जनसंख्या डेटा संग्रह अनिवार्य है, और अधिनियम में डिजिटल गणना के तरीके भी शामिल किए गए हैं।

जनगणना 2021 में कितने परिवारों ने डिजिटल स्व-गणना पोर्टल का उपयोग किया?

लगभग 55,000 परिवारों ने जनगणना 2021 के लिए डिजिटल स्व-गणना पोर्टल का उपयोग किया, जो भारत के अनुमानित 290 मिलियन परिवारों का 0.05% से भी कम हिस्सा है।

डिजिटल जनगणना के कार्यान्वयन के लिए कौन-कौन से संस्थान जिम्मेदार हैं?

रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कार्यालय (गृह मंत्रालय के अंतर्गत) जनगणना संचालित करता है। MeitY ने डिजिटल पोर्टल विकसित किया है, और NIC तकनीकी कार्यान्वयन व साइबर सुरक्षा संभालता है। NITI आयोग नीति सलाहकार के रूप में कार्य करता है।

भारत में डिजिटल स्व-गणना को अपनाने में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में कम डिजिटल साक्षरता, ग्रामीण व वंचित क्षेत्रों में सीमित इंटरनेट पहुंच, अधूरी कानूनी सुरक्षा के कारण डेटा गोपनीयता की चिंताएं, और साइबर सुरक्षा जोखिम शामिल हैं। ये कारक भागीदारी को सीमित करते हैं और डेटा में पक्षपात का खतरा बढ़ाते हैं।

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