वाणिज्य विभाग द्वारा संशोधित RoDTEP अनुसूचियों का अधिसूचना
15 मार्च 2024 को वाणिज्य विभाग ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर वापसी (RoDTEP) की अनुसूचियाँ संशोधित करने की अधिसूचना जारी की, जो 1 अप्रैल 2024 से प्रभावी कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 में किए गए संशोधनों के अनुरूप हैं। इस संशोधन में 2023 के संशोधन के तहत घोषित कस्टम्स शुल्कों के अनुरूप टैरिफ लाइनों और वापसी दरों को अपडेट किया गया है। इसका उद्देश्य निर्यातकों को वे केंद्रीय, राज्य और स्थानीय कर-शुल्क की सही वापसी सुनिश्चित करना है, जो मौजूदा योजनाओं में पुनर्भुगतान नहीं होते, जिससे निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – निर्यात प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति, कस्टम्स टैरिफ संशोधन
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – WTO नियमों के तहत निर्यात सब्सिडी
- निबंध: भारत की व्यापार नीति और निर्यात प्रतिस्पर्धा
RoDTEP और कस्टम्स टैरिफ संशोधनों का कानूनी ढांचा
कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 का 2023 में संशोधन कस्टम शुल्क संरचना का कानूनी आधार है और इसके सेक्शन 3 के तहत केंद्र सरकार को टैरिफ दरों में बदलाव करने का अधिकार मिलता है। विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं जैसे RoDTEP का आधार है, जिसे मूल रूप से विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2015-20 के तहत शुरू किया गया और बाद में बढ़ाया गया। सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम आज़ादी बचाओ आंदोलन (2003) के फैसले ने WTO नियमों के अनुरूप निर्यात शुल्क वापसी योजनाओं को लागू करने पर जोर दिया, जिससे व्यापार में विकृति पैदा करने वाली सब्सिडी सीमित हों। RoDTEP को WTO द्वारा पूर्व मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) को अस्वीकार करने के बाद डिजाइन किया गया।
- 2023 के कस्टम्स टैरिफ एक्ट संशोधन ने 5,000 से अधिक टैरिफ लाइनों के शुल्क स्लैब को सुव्यवस्थित किया।
- सेक्शन 3 व्यापार नीति लक्ष्यों के अनुरूप टैरिफ संशोधन का अधिकार देता है।
- RoDTEP को FTP 2015-20 के तहत अधिसूचित किया गया और बाद में अवधि बढ़ाई गई।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले WTO अनुरूप निर्यात प्रोत्साहन सुनिश्चित करते हैं।
RoDTEP अनुसूची संशोधन का आर्थिक महत्व और प्रभाव
RoDTEP का लक्ष्य उन छिपे हुए करों और शुल्कों की वापसी है, जैसे VAT, बिजली शुल्क, मंडी कर और अन्य लेवी, जो कस्टम्स और केंद्रीय उत्पाद शुल्क ड्रोबैक जैसी योजनाओं के तहत वापस नहीं होते। संशोधित अनुसूचियाँ 1 अप्रैल 2024 से लागू संशोधित कस्टम्स टैरिफ के अनुरूप हैं, जिससे निर्यातकों को वर्तमान शुल्क संरचना के अनुसार वापसी मिल सके। निर्यात भारत के GDP का लगभग 18% योगदान देता है (आर्थिक सर्वे 2023-24), और FY23 में माल निर्यात $450 बिलियन तक पहुंचा (वाणिज्य मंत्रालय)। FY24 के लिए RoDTEP का बजट आवंटन ₹13,000 करोड़ है (PIB, 2024), और वाणिज्य विभाग इन संशोधनों के कारण 5-7% वार्षिक निर्यात वृद्धि का अनुमान लगाता है।
- RoDTEP उन छिपे करों की वापसी करता है जो ड्रोबैक योजनाओं में नहीं आते।
- संशोधित अनुसूचियाँ 5,000 से अधिक टैरिफ लाइनों को कस्टम्स टैरिफ के अनुरूप कवर करती हैं।
- निर्यात GDP में 18% योगदान, FY23 में माल निर्यात $450 बिलियन।
- FY24 में ₹13,000 करोड़ का RoDTEP बजट, 5-7% निर्यात वृद्धि का समर्थन।
RoDTEP कार्यान्वयन और टैरिफ संशोधनों में संस्थागत भूमिकाएँ
वाणिज्य विभाग (DoC) निर्यात नीतियों का निर्माण करता है और संशोधित RoDTEP अनुसूचियाँ जारी करता है। विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) RoDTEP योजना का संचालन करता है, जिसमें क्रेडिट जारी करना और निगरानी शामिल है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और कस्टम बोर्ड (CBIC) कस्टम्स टैरिफ संशोधनों को लागू करता है और बंदरगाहों पर शुल्क वापसी सुनिश्चित करता है। वित्त मंत्रालय बजट आवंटन देखता है और टैरिफ में बदलाव को मंजूरी देता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) निर्यात सब्सिडी पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।
- DoC: नीति निर्माण और अनुसूची अधिसूचना।
- DGFT: योजना संचालन और क्रेडिट जारी करना।
- CBIC: कस्टम्स टैरिफ लागू करना और शुल्क वापसी।
- वित्त मंत्रालय: बजट और टैरिफ मंजूरी।
- WTO: निर्यात सब्सिडी पर नियामक नियंत्रण।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत का RoDTEP बनाम चीन की निर्यात छूट प्रणाली
| पहलू | भारत (RoDTEP) | चीन (निर्यात छूट) |
|---|---|---|
| औसत वापसी दर | 3-5% (उत्पाद के अनुसार भिन्न) | लगभग 13% (मानक VAT वापसी) |
| छिपे करों का कवरेज | केंद्रीय, कुछ राज्य/स्थानीय कर; जटिल राज्य उपकर शामिल नहीं | VAT, उपभोग कर और स्थानीय करों का व्यापक कवरेज |
| निर्यात वृद्धि प्रभाव (2022) | संशोधन के बाद अनुमानित 5-7% वार्षिक वृद्धि | करीब 10% वार्षिक निर्यात वृद्धि हासिल की |
| कर संरचना | जटिल अंतर-राज्यीय कर प्रणाली पूर्ण वापसी में बाधक | केंद्रीकृत कर वापसी प्रणाली वापसी को सरल बनाती है |
| WTO अनुरूपता | WTO सब्सिडी नियमों के अनुरूप डिज़ाइन किया गया | WTO अनुरूप है लेकिन व्यापक कर वापसी के साथ |
RoDTEP कार्यान्वयन में प्रमुख कमियाँ
संशोधनों के बावजूद, भारत की जटिल अंतर-राज्यीय कर संरचना के कारण कुछ राज्य स्तर के कर और उपकर RoDTEP में शामिल नहीं हैं, जिससे आंशिक वापसी और क्षेत्रीय असमान लाभ होता है। यह चीन की केंद्रीकृत कर वापसी प्रणाली से भिन्न है, जो व्यापक वापसी प्रदान कर उच्च निर्यात वृद्धि में सहायक है। कुछ छिपे करों के बहिष्कार से योजना की पूरी प्रभावशीलता सीमित होती है और वैश्विक बाजारों में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।
- अंतर-राज्यीय कर जटिलता के कारण कुछ राज्य कर और उपकर बाहर।
- आंशिक वापसी से निर्यात क्षेत्रों में असमान लाभ।
- पूर्ण लागत प्रतिपूर्ति सीमित, चीन के मुकाबले प्रतिस्पर्धा कम।
- RoDTEP लाभों को बढ़ाने के लिए राज्य करों का समन्वय आवश्यक।
महत्व और आगे का रास्ता
संशोधित कस्टम्स टैरिफ के अनुरूप RoDTEP अनुसूचियों का संशोधन भारत के निर्यात प्रोत्साहन ढांचे को मजबूत करने का अहम कदम है। छिपे करों की सही वापसी से निर्यातकों की कीमत प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। प्रभाव बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है ताकि राज्य स्तर के कर भी योजना में शामिल हो सकें। साथ ही योजना का दायरा बढ़ाना और कर संरचनाओं को सरल बनाना भारत को चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में मदद करेगा। निर्यात प्रदर्शन की निरंतर निगरानी आवश्यक समायोजन करने में सहायक होगी।
- बाहर छूटे राज्य करों और उपकरों को शामिल करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय सुनिश्चित करें।
- RoDTEP के तहत व्यापक वापसी के लिए कर संरचनाएँ सरल बनाएं।
- अधिक टैरिफ लाइनों और क्षेत्रों में RoDTEP कवरेज बढ़ाएं।
- निर्यात वृद्धि की निगरानी करें और आवश्यकतानुसार वापसी दरें समायोजित करें।
- RoDTEP उन केंद्रीय और राज्य करों की वापसी करता है जो अन्य निर्यात योजनाओं में वापस नहीं होते।
- यह योजना कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 के तहत शुरू की गई थी।
- RoDTEP सभी राज्य स्तर के उपकरों और करों को पूरी तरह कवर करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- इस संशोधन ने 5,000 से अधिक टैरिफ लाइनों के शुल्क स्लैब को सुव्यवस्थित किया।
- इस संशोधन के कारण RoDTEP योजना बंद कर दी गई।
- इस संशोधन के तहत निर्यात वापसी अनुसूचियों जैसे RoDTEP को संशोधित करना आवश्यक है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार नीतियाँ
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज और औद्योगिक निर्यात RoDTEP संशोधनों से छिपे करों की सही वापसी से लाभान्वित होंगे।
- मेन प्वाइंट: उत्तरों में निर्यात प्रोत्साहन का झारखंड के निर्यात क्षेत्रों पर प्रभाव, राज्य करों की भूमिका और केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता पर जोर दें।
RoDTEP योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
RoDTEP का उद्देश्य उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों और शुल्कों की वापसी करना है जो अन्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत वापस नहीं होते, जिससे निर्यात लागत कम हो और प्रतिस्पर्धा बढ़े।
RoDTEP योजना किस कानूनी ढांचे के तहत अधिसूचित है?
RoDTEP को विदेशी व्यापार नीति 2015-20 के तहत अधिसूचित किया गया है, जिसे मूल अवधि के बाद बढ़ाया गया है, और यह कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 तथा विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के कानूनी ढांचे में संचालित होती है।
2023 के कस्टम्स टैरिफ संशोधन का RoDTEP पर क्या प्रभाव पड़ा?
2023 के कस्टम्स टैरिफ संशोधन ने 5,000 से अधिक टैरिफ लाइनों के शुल्क स्लैब को सुव्यवस्थित किया, जिसके चलते RoDTEP अनुसूचियों को भी संशोधित करना पड़ा ताकि वापसी दरें नई शुल्क संरचना के अनुरूप हों।
RoDTEP कुछ राज्य स्तर के कर क्यों नहीं शामिल करता?
भारत की जटिल अंतर-राज्यीय कर संरचना के कारण कुछ राज्य स्तर के कर और उपकर RoDTEP में शामिल नहीं किए गए हैं, क्योंकि इससे समान वापसी देना मुश्किल हो जाता है।
भारत का RoDTEP चीन की निर्यात छूट प्रणाली से कैसे तुलना करता है?
चीन की निर्यात छूट प्रणाली अधिक औसत वापसी दर (~13%) और व्यापक छिपे कर कवरेज प्रदान करती है, जिससे निर्यात वृद्धि (~10% वार्षिक) अधिक है, जबकि भारत का RoDTEP 3-5% की भिन्न वापसी देता है और कुछ राज्य करों को छोड़ता है, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित होती है।
