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परिचय: भूकंप जोखिम और भवन कोड में देरी

भारत की भूकंपीय संवेदनशीलता, खासकर हिमालयी क्षेत्र में, भूकंप के नुकसान को कम करने के लिए सख्त भवन कोड की मांग करती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) और अन्य विशेषज्ञों द्वारा 2013-2023 के दशक में किए गए वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन से पता चला कि भूकंपीय खतरों का आकलन 20-30% कम किया गया है। इसके बावजूद सरकार ने 2023 में अद्यतन भूकंपीय मानकों को वापस ले लिया। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने IS 1893 Part 1 (2016) में जोन IV और V के लिए बेस शियर गुणांक 15-25% बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन कैबिनेट सचिवालय ने निर्माण लागत में 8-12% वृद्धि को लेकर आपत्ति जताई और संशोधन को रद्द कर दिया। इस फैसले से देश की आपदा प्रतिरोधक क्षमता और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में गंभीर कमी सामने आई है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: आपदा प्रबंधन (भूकंप क्षेत्रीकरण, IS 1893 प्रावधान, NDMA की भूमिका)
  • GS पेपर 3: बुनियादी ढांचा (भवन कोड, शहरी लचीलापन, लागत-लाभ विश्लेषण)
  • GS पेपर 1: भूगोल (भूकंपीय क्षेत्र, हिमालयीय टेक्टोनिक्स)
  • निबंध: विकास लागत और आपदा तैयारी के बीच संतुलन

भूकंप-प्रतिरोधी निर्माण के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 6 और 10 के तहत तैयारी और जोखिम कम करने के उपायों में संरचनात्मक सुरक्षा शामिल है। भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 BIS को IS 1893 जैसे मानक तैयार करने का अधिकार देता है, जो भूकंपीय जोन और संरचनात्मक डिजाइन के मानदंड निर्धारित करता है। राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) 2016 में IS 1893 के भूकंपीय प्रावधान शामिल हैं, जिनका पालन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) की व्याख्या करते हुए M.C. मेहता बनाम भारत संघ (1987) में राज्य की जिम्मेदारी को बल दिया है। प्रमुख संस्थान हैं BIS (मानक निर्माण), NDMA (आपदा तैयारी), IMD (भूकंपीय खतरा आकलन), कैबिनेट सचिवालय (नीति अनुमोदन), और MoHUA (शहरी बुनियादी ढांचे का क्रियान्वयन)।

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005: धारा 6 और 10 में जोखिम कम करने और संरचनात्मक सुरक्षा की आवश्यकता।
  • BIS अधिनियम, 1986: IS कोड के निर्माण और संशोधन का प्रावधान।
  • IS 1893 Part 1 (2016): भूकंपीय जोन II से V तक और डिजाइन मानदंड निर्धारित करता है।
  • NBC 2016: IS 1893 के भूकंपीय प्रावधानों को भवन नियमों में शामिल करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले: अनुच्छेद 21 के तहत राज्य की सार्वजनिक सुरक्षा की जिम्मेदारी।

भूकंपीय क्षेत्रीकरण और वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन

IS 1893 के अनुसार भारत को चार भूकंपीय जोन में बांटा गया है: II (सबसे कम सक्रिय), III, IV, और V (सबसे सक्रिय)। हिमालयी क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के हिस्से आते हैं, मुख्यतः जोन IV और V में आते हैं। IMD की दस साल की अध्ययन अवधि (2013-2023) में पता चला कि इन क्षेत्रों में भूकंपीय खतरा 20-30% कम आंका गया है, जिसके कारण पुराने जोन मानचित्र, सूक्ष्म क्षेत्रीकरण की कमी और मिट्टी के प्रभाव को पूरी तरह शामिल न करना मुख्य वजहें हैं। BIS के प्रस्तावित ड्राफ्ट मानकों में जोन IV और V के लिए बेस शियर गुणांक 15-25% बढ़ाने का सुझाव दिया गया था, जो इस नए खतरे को दर्शाता है।

  • IS 1893 के जोन II से V तक भारत के भूकंप जोखिम की तीव्रता को दर्शाते हैं।
  • हिमालयी क्षेत्र भारत के 20-30 मध्यम से गंभीर भूकंपों का 70% हिस्सा रखता है (IMD, 2023)।
  • पुराने जोन मानचित्र और डेटा की कमी के कारण खतरे का 20-30% कम आकलन।
  • BIS के प्रस्तावित संशोधनों में जोन IV और V के लिए बेस शियर गुणांक 15-25% बढ़ाने का प्रस्ताव।
  • जोन IV और V में 60% से अधिक आवासीय भवन मौजूदा IS 1893 मानकों का पालन नहीं करते (BIS सर्वे, 2022)।

अद्यतन भूकंपीय मानकों के आर्थिक परिणाम

कैबिनेट सचिवालय की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, नए भूकंपीय कोड अपनाने से निर्माण लागत में 5-10% की वृद्धि होगी। यह भारत के 2030 तक $1.4 ट्रिलियन के बुनियादी ढांचा निवेश लक्ष्य (NITI Aayog, 2023) के लिए चिंता का विषय है। भूकंपीय जोन III-V के मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स में रेट्रोफिटिंग की वजह से ₹500 करोड़ से अधिक लागत बढ़ने का खतरा है। हालांकि, भूकंप के बाद पुनर्निर्माण की लागत अक्सर 2-3 गुना अधिक होती है, जो कमजोर भवन मानकों से हुई बचत को नकार देती है (विश्व बैंक, 2021)। इस तरह, तत्काल लागत बचत के चक्कर में दीर्घकालिक आर्थिक और मानवीय नुकसान को नजरअंदाज किया जा रहा है।

  • अद्यतन भूकंपीय कोड से निर्माण लागत में 5-10% की वृद्धि (कैबिनेट सचिवालय, 2023)।
  • भारत का बुनियादी ढांचा निवेश लक्ष्य: 2030 तक $1.4 ट्रिलियन (NITI Aayog, 2023)।
  • जोन III-V के मेट्रो प्रोजेक्ट्स में ₹500 करोड़ से अधिक लागत बढ़ने का खतरा (MoHUA, 2023)।
  • आपदा के बाद पुनर्निर्माण लागत प्रारंभिक बचत से 2-3 गुना अधिक (विश्व बैंक, 2021)।
  • लघुकालिक लागत को लेकर चिंताएं दीर्घकालिक जोखिमों को नजरअंदाज कर रही हैं।

जापान के भूकंप-प्रतिरोधी भवन ढांचे से तुलना

जापान का भवन मानक कानून भूमि, बुनियादी ढांचा, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है, जो सख्त भूकंप-प्रतिरोधी डिजाइन को अनिवार्य करता है। 2011 के तोहोकू भूकंप के बाद किए गए सुधारों से निर्माण लागत में लगभग 5% वृद्धि हुई, लेकिन इसके बाद आए भूकंपों में मौतों में 90% से अधिक की कमी आई (जापान मौसम एजेंसी, 2022)। यह दिखाता है कि मामूली लागत वृद्धि से भी मानव और आर्थिक सुरक्षा में बड़ा लाभ हो सकता है। भारत में इसी तरह के मानकों को अपनाने में देरी नीति में दीर्घकालिक जोखिम प्रबंधन की कमी को उजागर करती है।

पहलूभारतजापान
भूकंपीय क्षेत्रीकरण4 जोन (II-V), हिमालय में खतरे का कम आकलननियमित रूप से अपडेट होने वाला विस्तृत सूक्ष्म क्षेत्रीकरण
भवन कोड लागू करनाIS 1893 और NBC 2016; लागू करना असमानदेशव्यापी अनिवार्य और सख्त पालन
आपदा के बाद मृत्यु दर में कमीहिमालयी भूकंपों में उच्च मृत्यु दर2011 सुधारों के बाद 90% से अधिक कमी
अद्यतन कोड की लागत प्रभाव5-10% वृद्धि; कार्यान्वयन में देरीलगभग 5% वृद्धि; तुरंत लागू

महत्वपूर्ण नीति अंतर: लागू करना और समन्वय

सबसे बड़ी नीति खामी यह है कि वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन के बावजूद अद्यतन भूकंपीय जोखिम को अनिवार्य और लागू करने योग्य भवन कोड में शामिल नहीं किया गया। लागत को लेकर संकुचित दृष्टिकोण के कारण BIS के ड्राफ्ट मानक वापस ले लिए गए। इसके अलावा, जोन IV और V में 60% से अधिक आवासीय भवन मौजूदा मानकों का पालन नहीं करते, जो लागू करने में कमजोरी को दर्शाता है। यह स्थिति भारत की आपदा तैयारी को कमजोर करती है और अनुच्छेद 21 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लंघन है।

  • अद्यतन भूकंपीय मानकों का अनिवार्य पालन नहीं हो पा रहा।
  • लागत बचत की सोच दीर्घकालिक जोखिम कम करने से ऊपर।
  • जोन IV और V में 60% से अधिक भवन गैर-अनुपालन।
  • BIS, NDMA और क्रियान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय कमजोर।
  • अनुच्छेद 21 के तहत सार्वजनिक सुरक्षा की संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी नहीं हो रही।

आगे का रास्ता: लागत और लचीलापन में संतुलन

  • जोनों IV और V में प्राथमिकता देते हुए IS 1893 के अद्यतन मानकों को चरणबद्ध तरीके से लागू करें।
  • भूकंप-प्रतिरोधी निर्माण के लिए सब्सिडी या कर लाभ देकर अनुपालन को प्रोत्साहित करें।
  • NDMA और MoHUA के समन्वय से लागू करने की प्रक्रिया मजबूत करें।
  • IMD के भूकंपीय डेटा को शहरी नियोजन और भवन अनुमोदन में शामिल करें।
  • लचीलापन और आर्थिक लाभ के बारे में जनसामान्य में जागरूकता बढ़ाएं।
  • जापान की तरह आपदा के बाद सीख लेकर कोड और लागू करने की प्रक्रिया नियमित रूप से अपडेट करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
IS 1893 के भूकंपीय क्षेत्रीकरण और भवन कोड के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. IS 1893 भारत को I से V तक पांच भूकंपीय जोन में बांटता है।
  2. जोन V भारत में सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम वाला क्षेत्र है।
  3. राष्ट्रीय भवन संहिता 2016 भूकंपीय डिजाइन के लिए IS 1893 का पालन अनिवार्य करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि IS 1893 भारत को चार जोन (II से V) में बांटता है, पांच में नहीं। कथन 2 सही है; जोन V सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र है। कथन 3 भी सही है; NBC 2016 में IS 1893 के अनुसार भूकंपीय डिजाइन का पालन अनिवार्य है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में आपदा प्रबंधन और भवन कोड के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में संरचनात्मक सुरक्षा सहित जोखिम कम करने के उपाय अनिवार्य हैं।
  2. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) आपदा तैयारी समन्वय के लिए जिम्मेदार है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 की व्याख्या करते हुए भवन मानकों में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए राज्य की जिम्मेदारी तय की है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है; आपदा प्रबंधन अधिनियम में संरचनात्मक सुरक्षा समेत जोखिम कम करना अनिवार्य है। कथन 2 गलत है; BIS मानक बनाता है लेकिन आपदा तैयारी का समन्वय नहीं करता। कथन 3 सही है; सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत राज्य की जिम्मेदारी तय की है।

मुख्य प्रश्न

भारत के हिमालयी क्षेत्र में अद्यतन भूकंप-प्रतिरोधी भवन कोड अपनाने में देरी के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इस देरी के आर्थिक और कानूनी प्रभावों पर चर्चा करें और भवन नियमों के माध्यम से आपदा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – आपदा प्रबंधन और पर्यावरण भूगोल
  • झारखंड संदर्भ: झारखंड भूकंपीय जोन II/III में होने के बावजूद, इसकी बुनियादी ढांचा कमजोरियां हिमालयी जोनों से मिलती-जुलती हैं; हिमालयी कोड की देरी से मिली सीख रांची और धनबाद के शहरी नियोजन में उपयोगी है।
  • मुख्य बिंदु: मध्यम जोनों में भी भूकंपीय कोड के पालन का महत्व, राष्ट्रीय कानूनी ढांचे और आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए उत्तर तैयार करें।
IS 1893 क्या है और इसका महत्व क्या है?

IS 1893 भारतीय मानक कोड है जो भवनों के भूकंप-प्रतिरोधी डिजाइन के लिए BIS द्वारा तैयार किया गया है। यह भारत को भूकंपीय जोनों में बांटता है और भवनों को भूकंपीय बलों से सुरक्षित रखने के लिए दिशा-निर्देश देता है, जो आपदा जोखिम कम करने में बेहद जरूरी है।

2023 में अद्यतन भूकंपीय मानक क्यों वापस लिए गए?

कैबिनेट सचिवालय ने यह कारण दिया कि सख्त कोड से निर्माण लागत में 8-12% की वृद्धि होगी, जिससे मेट्रो रेल जैसे चल रहे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट प्रभावित होंगे।

भूकंप-प्रतिरोधी भवन कोड से जुड़े संवैधानिक प्रावधान कौन से हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) की व्याख्या करते हुए राज्य को भवन कोड लागू करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 भी संरचनात्मक सुरक्षा जैसे उपायों की मांग करता है।

जापान के भूकंप भवन कोड प्रणाली भारत से कैसे भिन्न है?

जापान में भवन मानक कानून के तहत सख्त भूकंप-प्रतिरोधी डिजाइन अनिवार्य और कड़ाई से लागू होता है, नियमित अपडेट होता है। 2011 के बाद लागत में लगभग 5% वृद्धि हुई लेकिन मौतों में 90% से अधिक कमी आई, जबकि भारत में लागत को लेकर देरी जारी है।

अद्यतन भूकंपीय कोड लागू करने के आर्थिक लाभ-हानि क्या हैं?

अद्यतन कोड से निर्माण लागत 5-10% बढ़ती है, लेकिन इससे दीर्घकालिक नुकसान कम होते हैं। कमजोर कोड से बचत की तुलना में आपदा के बाद पुनर्निर्माण लागत 2-3 गुना अधिक होती है, इसलिए लचीलापन आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है।

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