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भारत में गुप्त जंगल बिल्लियों के आवास की जरूरतें

2023 में Wildlife Institute of India (WII) द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि Rusty-spotted cat (Prionailurus rubiginosus) और Jungle cat (Felis chaus) जैसी गुप्त जंगल बिल्लियों के 60% से अधिक आवास निर्धारित संरक्षित क्षेत्रों के बाहर स्थित हैं। ये प्रजातियां वन के टुकड़ों, कृषि भूमि और मानव-प्रभावित इलाकों में रहती हैं, जो यह दर्शाता है कि केवल संरक्षित क्षेत्रों पर आधारित वर्तमान संरक्षण रणनीतियाँ अपर्याप्त हैं। भारत के कुल वन क्षेत्र का केवल लगभग 5% संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत आता है, जबकि 70% वन-निर्भर प्रजातियां इन क्षेत्रों के बाहर के आवासों का उपयोग करती हैं (MoEFCC Forest Survey of India, 2021)।

  • गुप्त जंगल बिल्लियां ऐसे मोज़ेक परिदृश्यों पर निर्भर हैं जहाँ वन के टुकड़े और मानव-प्रभावित भूमि साथ मिलती हैं।
  • पिछले दशक में बफर और गैर-संरक्षित क्षेत्रों में जंगल बिल्लियों से जुड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष में 15% की वृद्धि हुई है (National Crime Records Bureau, 2022)।
  • केंद्रीय भारत में संरक्षित क्षेत्रों के बाहर परिदृश्य कनेक्टिविटी कृषि विस्तार के कारण पिछले 20 वर्षों में 25% घट गई है (WII, 2023)।

वन्यजीव आवास संरक्षण के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा

संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण संरक्षण और सुधार का दायित्व देता है। Wildlife Protection Act, 1972 की धारा 2(b) में संरक्षित क्षेत्रों की परिभाषा है और धारा 18 के तहत शिकार को नियंत्रित किया गया है। धारा 38V वन्यजीव सलाहकार बोर्डों के गठन का प्रावधान करती है। Forest Conservation Act, 1980 वन भूमि के उपयोग को सीमित करता है, जबकि Environment Protection Act, 1986 पर्यावरण सुरक्षा के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करता है।

T.N. Godavarman Thirumulpad बनाम भारत संघ (1996) के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने वन और वन्यजीव संरक्षण की सीमा को घोषित अभयारण्यों से आगे बढ़ाते हुए वन के टुकड़ों और गलियारों में आवास संरक्षण पर जोर दिया। हालांकि, लागू करने में अभी भी संरक्षित क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिससे व्यापक परिदृश्य प्रबंधन की कमी बनी हुई है।

  • Wildlife Protection Act मुख्यतः अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों पर केंद्रित है और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर आवास प्रबंधन का प्रावधान नहीं करता।
  • Forest Conservation Act वन भूमि के उपयोग को नियंत्रित करता है, लेकिन संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन के टुकड़ों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
  • न्यायिक सक्रियता ने व्यापक आवास संरक्षण की मांग की है, लेकिन नीति क्रियान्वयन पीछे है।

आवास संरक्षण के आर्थिक पहलू

भारत सरकार का MoEFCC के तहत वन्यजीव संरक्षण के लिए वार्षिक बजट लगभग 2,500 करोड़ रुपये है (संघीय Budget 2023-24)। वन क्षेत्रों में इकोटूरिज्म से हर साल 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होती है, जो जैव विविधता के आर्थिक महत्व को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर आवासों के नुकसान से लगभग 450 अरब डॉलर के पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं को खतरा है (IPBES 2019 report)।

संरक्षित क्षेत्रों के बाहर आवास संरक्षण में विफलता से मानव-वन्यजीव संघर्ष की लागत बढ़ेगी और परागण, जल नियमन, कार्बन अवशोषण जैसी पारिस्थितिक सेवाओं का नुकसान होगा। 12 मिलियन हेक्टेयर तक फैले समुदायिक वन प्रबंधन कार्यक्रम आर्थिक और पारिस्थितिक दोनों दृष्टिकोण से संरक्षित क्षेत्रों के बाहर आवास संरक्षण के लिए अवसर प्रस्तुत करते हैं (MoEFCC, 2022)।

  • परिदृश्य स्तर पर निवेश से संघर्ष कम और पारिस्थितिक सेवाएं बेहतर हो सकती हैं।
  • समुदाय की भागीदारी आर्थिक प्रोत्साहनों को आवास संरक्षण से जोड़ सकती है।
  • इकोटूरिज्म के लाभ जीवित वन्यजीव आबादी पर निर्भर करते हैं जो पूरे परिदृश्य में फैली हो।

वन्यजीव आवास प्रबंधन में संस्थागत भूमिकाएं

MoEFCC वन्यजीव संरक्षण की नीतियां बनाता है। Wildlife Institute of India (WII) वन्यजीव पारिस्थितिकी पर शोध और प्रशिक्षण करता है। National Tiger Conservation Authority (NTCA) बाघ अभयारण्यों और संबंधित आवासों का प्रबंधन करता है। राज्य वन विभाग जमीन स्तर पर वन और वन्यजीव प्रबंधन लागू करते हैं। Zoological Survey of India (ZSI) जैव विविधता और प्रजातियों के वितरण का दस्तावेजीकरण करता है।

इन संस्थाओं के बीच समन्वय संरक्षित क्षेत्रों के बाहर संरक्षण के विस्तार के लिए जरूरी है। वर्तमान में अधिकतर फोकस संरक्षित क्षेत्रों पर है, जिससे वन के टुकड़े और गलियारों का प्रबंधन कम हो रहा है जो गुप्त जंगल बिल्लियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

  • MoEFCC की नीतियों में परिदृश्य स्तर के संरक्षण रणनीतियों को शामिल करना आवश्यक है।
  • WII का शोध संरक्षित क्षेत्रों के बाहर महत्वपूर्ण आवासों की पहचान में सहायक है।
  • राज्य वन विभागों को मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के लिए क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

तुलनात्मक अध्ययन: नेपाल का Terai Arc Landscape कार्यक्रम

नेपाल का Terai Arc Landscape कार्यक्रम संरक्षित क्षेत्रों के बाहर समुदायिक वन और वन्यजीव गलियारों को जोड़ता है। 2010-2020 के बीच इस परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण से तेंदुओं की संख्या में 27% की वृद्धि हुई (Nepal Department of National Parks and Wildlife Conservation, 2021)।

पहलूभारतनेपाल (Terai Arc Landscape)
संरक्षित क्षेत्र कवरेजवन क्षेत्र का 5%लगभग 8%
परिदृश्य कनेक्टिविटीकेंद्रीय भारत में 20 वर्षों में 25% गिरावटगलियारों और समुदायिक वनों से सुधार
समुदायिक वन प्रबंधन12 मिलियन हेक्टेयर (सीमित समावेशन)संरक्षण रणनीति का अभिन्न हिस्सा
वन्यजीव आबादी रुझान (बड़ी बिल्लियां)गैर-संरक्षित क्षेत्रों में स्थिर या घटती2010-2020 में तेंदुओं में 27% वृद्धि

भारतीय संरक्षण नीति में महत्वपूर्ण अंतराल

भारत की संरक्षण नीति मुख्यतः संरक्षित क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिससे गुप्त जंगल बिल्लियों के लिए आवश्यक वन के टुकड़े और गलियारों की उपेक्षा होती है। इसका परिणाम आवास विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि और अभयारण्यों के बाहर जैव विविधता के नुकसान के रूप में सामने आता है।

  • कानूनी ढांचे में संरक्षित क्षेत्रों के बाहर आवास प्रबंधन के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
  • परिदृश्य स्तर के संरक्षण के लिए संस्थागत समन्वय कम है।
  • समुदायिक वन प्रबंधन की क्षमता का संरक्षण में पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा।

महत्व और आगे का रास्ता

  • कानूनी परिभाषाओं और संरक्षण कवरेज को वन के टुकड़ों और गलियारों तक बढ़ाना चाहिए।
  • मानव-प्रभावित क्षेत्रों को पारिस्थितिक जरूरतों के साथ जोड़ते हुए परिदृश्य स्तर पर संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए।
  • समुदायिक वन प्रबंधन कार्यक्रमों को तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ मजबूत करना जरूरी है।
  • MoEFCC, WII, NTCA और राज्य वन विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना चाहिए।
  • नेपाल के Terai Arc Landscape के सफल मॉडल से सीख लेकर गलियारों की बहाली और समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी — वन्यजीव संरक्षण, वन प्रबंधन, मानव-वन्यजीव संघर्ष
  • GS पेपर 2: राजनीति — संवैधानिक प्रावधान (Article 48A), Wildlife Protection Act, Forest Conservation Act
  • निबंध विषय — जैव विविधता संरक्षण, सतत विकास, पर्यावरण शासन
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Wildlife Protection Act, 1972 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह धारा 2(b) के तहत संरक्षित क्षेत्रों को परिभाषित करता है।
  2. धारा 18 कुछ प्रजातियों के नियंत्रित शिकार की अनुमति देती है।
  3. धारा 38V वन्यजीव सलाहकार बोर्डों के गठन का प्रावधान करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि धारा 18 कड़े नियमों के तहत शिकार को प्रतिबंधित करती है; यह व्यापक रूप से नियंत्रित शिकार की अनुमति नहीं देती। धारा 2(b) और 38V सही रूप से संरक्षित क्षेत्रों की परिभाषा और वन्यजीव सलाहकार बोर्डों के गठन का प्रावधान करती हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में वन आवरण और आवास कनेक्टिविटी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. 2019-21 के बीच भारत का वन आवरण 2,200 वर्ग किमी से अधिक बढ़ा।
  2. उसी अवधि में गुप्त जंगल बिल्लियों के लिए उपयुक्त घने वन क्षेत्र में 1.5% की वृद्धि हुई।
  3. पिछले 20 वर्षों में केंद्रीय भारत में संरक्षित क्षेत्रों के बाहर परिदृश्य कनेक्टिविटी में 25% की गिरावट आई।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि 2019-21 के बीच गुप्त जंगल बिल्लियों के लिए उपयुक्त घने वन क्षेत्र में 1.5% की कमी हुई है (Forest Survey of India, 2021)। कथन 1 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत में गुप्त जंगल बिल्लियों के संरक्षण में चुनौतियों और अवसरों का मूल्यांकन करें, विशेष रूप से संरक्षित क्षेत्रों से परे आवास संरक्षण की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए। संबंधित कानूनी प्रावधानों और संस्थागत भूमिकाओं पर चर्चा करें।

भारत में गुप्त जंगल बिल्लियों के कितने प्रतिशत आवास संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हैं?

Wildlife Institute of India के 2023 के अध्ययन के अनुसार, Rusty-spotted cat और Jungle cat जैसे गुप्त जंगल बिल्लियों के 60% से अधिक आवास संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हैं।

वन्यजीव संरक्षण से संबंधित पर्यावरण संरक्षण का कौन सा संवैधानिक प्रावधान है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A, जो राज्य नीति के निर्देशात्मक सिद्धांतों के अंतर्गत आता है, राज्य को पर्यावरण और वन्यजीव आवासों के संरक्षण और सुधार का दायित्व देता है।

Wildlife Protection Act, 1972 का आवास संरक्षण में क्या योगदान है?

Wildlife Protection Act, 1972 संरक्षित क्षेत्रों को परिभाषित करता है (धारा 2(b)), शिकार को नियंत्रित करता है (धारा 18), और वन्यजीव सलाहकार बोर्डों के गठन का प्रावधान करता है (धारा 38V), जो मुख्यतः संरक्षित क्षेत्रों के भीतर वन्यजीव और आवास संरक्षण का कानूनी आधार हैं।

नेपाल के Terai Arc Landscape कार्यक्रम ने वन्यजीव संरक्षण में क्या योगदान दिया है?

नेपाल का Terai Arc Landscape कार्यक्रम संरक्षित क्षेत्रों के बाहर समुदायिक वन और वन्यजीव गलियारों को जोड़ता है, जिससे 2010-2020 के बीच तेंदुओं की संख्या में 27% की वृद्धि हुई, जो परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

भारत में वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े आर्थिक लाभ क्या हैं?

भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये वार्षिक आवंटित हैं, और वन क्षेत्रों में इकोटूरिज्म से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय होती है, जो जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं के महत्वपूर्ण आर्थिक मूल्य को दर्शाता है।

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