Connect Karo 2021 का परिचय
Connect Karo 2021 एक वर्चुअल आयोजन था जिसे 2021 में World Resources Institute (WRI) ने आयोजित किया। इस कार्यक्रम में भारत और विश्व के नेता, नीति निर्माता तथा विभिन्न हितधारक जुड़े। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के लिए समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-सहनशील शहरी भविष्य की रूपरेखा तैयार करना था। इस आयोजन का उद्घाटन आवास और शहरी मामलों तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रियों ने किया, जो शहरी बदलाव के लिए बहु-क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत को दर्शाता है।
यह पहल जलवायु सहनशीलता, समावेशी विकास और संसाधन दक्षता को भारत के शहरी शासन ढांचे में जोड़ती है। यह तेजी से हो रहे शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान संवैधानिक प्रावधानों और पर्यावरणीय कानूनों के अनुरूप करती है।
UPSC से जुड़ाव
- GS पेपर 2: शहरी शासन, 74वां संवैधानिक संशोधन (Article 243W), स्मार्ट सिटी मिशन, पर्यावरण कानून और नीतियां।
- GS पेपर 3: शहरी अवसंरचना, टिकाऊ विकास, जलवायु सहनशीलता, ऊर्जा दक्षता, और परिवहन नीतियां।
- निबंध: भारत में टिकाऊ शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन शमन।
Connect Karo 2021 के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार
Article 243W शहरी योजना और विकास के लिए जिम्मेदार शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के गठन और सशक्तिकरण का प्रावधान करता है। यह संवैधानिक प्रावधान विकेंद्रीकृत शहरी शासन की कानूनी नींव है।
स्मार्ट सिटी मिशन (2015), जो आवास और शहरी मामलों मंत्रालय (MoHUA) के अंतर्गत है, 100 चुनी हुई शहरों में टिकाऊ शहरी अवसंरचना के विकास के लिए नीति निर्देश और वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिसका बजट ₹2.04 लाख करोड़ है (MoHUA, 2021)। यह मिशन Connect Karo के लक्ष्यों को पूरा करता है।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Section 3): केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है, जो शहरी योजना में जलवायु सहनशीलता को जोड़ने में अहम है।
- वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981: शहरी वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मानक और प्रवर्तन तंत्र स्थापित करता है।
- ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (Sections 14 और 15): शहरी अवसंरचना में ऊर्जा दक्षता को अनिवार्य बनाता है, जो संसाधन दक्षता के उद्देश्य का समर्थन करता है।
- राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2014: टिकाऊ शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देती है, जो Connect Karo के एजेंडा का अहम हिस्सा है।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले: जैसे M.C. Mehta बनाम भारत संघ (1987) ने शहरी विकास परियोजनाओं में पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
आर्थिक और जनसांख्यिकीय आवश्यकताएं
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत की शहरी आबादी 2030 तक 600 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है (UN DESA, 2018), जिससे अवसंरचना, आवास, परिवहन और ऊर्जा पर दबाव बढ़ेगा। शहरी परिवहन क्षेत्र भारत की GDP में लगभग 7% योगदान देता है (MoRTH, 2022), जबकि शहरों में ऊर्जा खपत कुल बिजली उपयोग का करीब 70% है (CEA, 2023)।
अगले दो दशकों में शहरी अवसंरचना के लिए निवेश की जरूरत लगभग $1.2 ट्रिलियन आंकी गई है (NITI Aayog, 2020)। Connect Karo की वकालत करता टिकाऊ शहरी नियोजन 2030 तक शहरों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 30% तक कम कर सकता है (WRI India, 2021), जो आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
Connect Karo 2021 में संस्थागत भूमिकाएं और हितधारक
- World Resources Institute (WRI): आयोजक और ज्ञान साझेदार, जो प्रमाण-आधारित टिकाऊ शहरी समाधान को बढ़ावा देता है।
- आवास और शहरी मामलों मंत्रालय (MoHUA): नीति निर्माण और स्मार्ट सिटी मिशन सहित शहरी विकास योजनाओं का क्रियान्वयन।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय: शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को सुविधाजनक बनाता है।
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs): जमीनी स्तर पर शहरी शासन, सेवा वितरण और स्थानीय योजना के लिए जिम्मेदार।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण मानकों की निगरानी और प्रवर्तन।
- नीति आयोग: टिकाऊ शहरीकरण के लिए रणनीतिक योजना और नीति सलाह प्रदान करता है।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत और सिंगापुर के शहरी शासन मॉडल
| पहलू | भारत (Connect Karo संदर्भ) | सिंगापुर (URA मॉडल) |
|---|---|---|
| शहरी योजना प्राधिकरण | कई एजेंसियां, जिम्मेदारियां बंटी हुई (MoHUA, ULBs, CPCB) | Urban Redevelopment Authority (URA) - केंद्रीकृत, एकीकृत भूमि उपयोग और परिवहन योजना |
| सार्वजनिक परिवहन उपयोग | विविध, आमतौर पर कम से मध्यम, असंगठित प्रणाली | 65% यात्राएं सार्वजनिक परिवहन द्वारा (URA डेटा, 2020) |
| कार्बन उत्सर्जन में कमी (परिवहन) | सीमित प्रगति; शहरी परिवहन GDP में 7% योगदान देता है, लेकिन उत्सर्जन अधिक है | 2000 से प्रति व्यक्ति परिवहन उत्सर्जन में 50% कमी |
| संस्थागत समन्वय | ULBs, राज्य एजेंसियों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच कमजोर समन्वय | URA के एकीकृत ढांचे के तहत मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय |
| डेटा एकीकरण और उपयोग | ULBs स्तर पर सीमित डेटा एकीकरण और क्षमता की कमी | योजना और निगरानी के लिए उन्नत GIS और डेटा एनालिटिक्स |
भारत के शहरी टिकाऊ प्रयासों में मुख्य कमियां
- संस्थागत जिम्मेदारियों का टुकड़ों में बंटना: MoHUA, ULBs और पर्यावरण एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियां ओवरलैप होने से नीति कार्यान्वयन में बाधा।
- डेटा की कमी: एकीकृत शहरी डेटा सिस्टम न होने से तथ्य-आधारित निर्णय और निगरानी सीमित।
- ULBs में क्षमता की कमी: कई ULBs के पास टिकाऊ पहल लागू करने के लिए तकनीकी और वित्तीय संसाधन नहीं।
- कमजोर समन्वय: जलवायु लक्ष्यों और शहरी अवसंरचना योजना के बीच कमजोर कड़ी से प्रगति धीमी।
महत्त्व और आगे का रास्ता
- संस्थागत समन्वय मजबूत करें: स्पष्ट जिम्मेदारियां और अंतर-एजेंसी मंच स्थापित करें ताकि शहरी शासन एकीकृत हो सके।
- ULBs की क्षमता बढ़ाएं: स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधन और डेटा प्रबंधन प्रणाली में निवेश करें।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग करें: GIS, IoT और बड़े डेटा एनालिटिक्स को अपनाकर वास्तविक समय में शहरी योजना और पर्यावरण निगरानी करें।
- शहरी नीतियों को जलवायु लक्ष्यों से जोड़ें: सभी शहरी अवसंरचना परियोजनाओं में जलवायु सहनशीलता और संसाधन दक्षता को शामिल करें।
- सार्वजनिक परिवहन और गैर-मोटर चालित गतिशीलता को बढ़ावा दें: उत्सर्जन और भीड़ कम करने के लिए टिकाऊ परिवहन विकल्पों को प्रोत्साहन दें।
प्रश्न अभ्यास
- Connect Karo 2021 का आयोजन आवास और शहरी मामलों मंत्रालय ने किया था।
- यह आयोजन शहरी विकास में जलवायु सहनशीलता और समावेशी विकास को जोड़ने पर केंद्रित है।
- इस कार्यक्रम में केवल भारतीय नीति निर्माता शामिल थे, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी नहीं थी।
- Article 243W शहरी योजना के लिए शहरी स्थानीय निकायों के गठन का प्रावधान करता है।
- स्मार्ट सिटी मिशन और AMRUT एक जैसे योजनाएं हैं जिनके उद्देश्य और बजट ओवरलैप करते हैं।
- ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 शहरी अवसंरचना में ऊर्जा दक्षता को अनिवार्य बनाता है।
मुख्य प्रश्न
यह चर्चा करें कि कैसे Connect Karo 2021 भारत में टिकाऊ शहरी विकास के लिए बहु-हितधारक दृष्टिकोण का उदाहरण है। इसमें जिन संस्थागत चुनौतियों को संबोधित किया गया है उनका विश्लेषण करें और इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सुझाव दें।
भारत में शहरी स्थानीय निकायों का संवैधानिक आधार क्या है?
Article 243W संविधान शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के गठन का प्रावधान करता है और उन्हें शहरी योजना और विकास की जिम्मेदारी देता है।
स्मार्ट सिटी मिशन किस मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है?
स्मार्ट सिटी मिशन का निर्माण और क्रियान्वयन आवास और शहरी मामलों मंत्रालय (MoHUA) द्वारा किया जाता है।
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 शहरी विकास में क्या भूमिका निभाता है?
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के Sections 14 और 15 शहरी अवसंरचना में ऊर्जा दक्षता मानकों को अनिवार्य करते हैं, जिससे टिकाऊ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
सिंगापुर का URA मॉडल भारत के शहरी शासन से कैसे अलग है?
सिंगापुर का URA मॉडल केंद्रीकृत प्राधिकरण के तहत भूमि उपयोग और परिवहन योजना को एकीकृत करता है, जिससे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ा और उत्सर्जन में कमी आई, जबकि भारत में जिम्मेदारियां कई एजेंसियों में बंटी हैं।
टिकाऊ पहल लागू करने में शहरी स्थानीय निकायों को मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
ULBs को क्षमता की कमी, सीमित वित्तीय संसाधन, अपर्याप्त डेटा एकीकरण और कमजोर अंतर-एजेंसी समन्वय जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो टिकाऊ पहल के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधक हैं।
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 16 September 2021 | अंतिम अपडेट: 1 April 2026
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