परिचय: INS तारागिरी का कमीशनिंग
प्रोजेक्ट 17A नीलगिरी-क्लास स्टील्थ फ्रिगेट्स की चौथी जहाज INS तारागिरी को 2024 में कमीशन किया जा रहा है। यह युद्धपोत माजगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा भारतीय नौसेना के तहत बनाया गया है और यह भारत के स्वदेशी नौसैनिक जहाज निर्माण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस कमीशनिंग का समय इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच आया है, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और नौसेना आधुनिकीकरण को दर्शाता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: रक्षा - स्वदेशी रक्षा उत्पादन, नौसेना आधुनिकीकरण, रणनीतिक स्वायत्तता
- GS पेपर 2: केंद्र-राज्य संबंध - रक्षा खरीद और नीति ढांचे
- निबंध: रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर भारत
नौसेना कमीशनिंग के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा
रक्षा, जिसमें नौसेना भी शामिल है, अनुच्छेद 246(1) और सूची I के प्रविष्टि 2 के तहत संघ सूची में आता है, जैसा कि संविधान के सातवें अनुसूची में निर्धारित है। भारतीय नौसेना नौसेना अधिनियम, 1957 के अंतर्गत संचालित होती है, जो नौसैनिक अनुशासन और प्रशासन को नियंत्रित करता है। युद्धपोत निर्माण सहित रक्षा खरीद डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2020 के तहत होती है, जो स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देता है। साथ ही, डिफेंस प्रोडक्शन पॉलिसी 2018 रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को संस्थागत रूप देती है।
नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट कार्यक्रम के आर्थिक पहलू
INS तारागिरी के निर्माण का हिस्सा प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट कार्यक्रम ₹20,000 करोड़ के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण पहल का हिस्सा है, जिसे रक्षा मंत्रालय के पूंजी बजट 2023-24 के तहत वित्तपोषित किया गया है। इन फ्रिगेट्स में स्वदेशी सामग्री की मात्रा 70% से अधिक है, जो पहले के 50% की तुलना में काफी बढ़ोतरी है, जिससे घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूती मिली है। भारतीय शिपबिल्डिंग क्षेत्र सालाना लगभग ₹10,000 करोड़ का योगदान देता है और इसकी वार्षिक विकास दर 12% है (MoD वार्षिक रिपोर्ट 2023)। स्वदेशी निर्माण से विदेशी आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे प्लेटफॉर्म के जीवनकाल में लगभग $500 मिलियन की विदेशी मुद्रा बचत होती है।
- प्रोजेक्ट 17A में सात स्टील्थ फ्रिगेट शामिल हैं, जिनमें उन्नत स्टील्थ और हथियार प्रणाली हैं।
- INS तारागिरी का विस्थापन लगभग 6,670 टन और लंबाई 149 मीटर है।
- उन्नत हथियारों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और बराक-8 वायु रक्षा प्रणाली शामिल हैं।
- बेहतर परियोजना प्रबंधन के कारण कमीशनिंग समय में 15% सुधार हुआ है।
नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट कार्यक्रम में प्रमुख संस्थान
भारतीय नौसेना युद्धपोत का संचालन और कमीशनिंग करती है, जिससे परिचालन तत्परता सुनिश्चित होती है। माजगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुख्य शिपयार्ड है जो निर्माण के लिए जिम्मेदार है। रक्षा मंत्रालय (MoD) नीति बनाता है और बजट आवंटित करता है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) स्वदेशी हथियार और सेंसर सिस्टम को एकीकृत करता है। डायरेक्टरेट ऑफ नेवल डिजाइन (DND) युद्धपोतों के डिजाइन और विकास की देखरेख करता है।
तुलना: नीलगिरी-क्लास बनाम अमेरिकी नौसेना की फ्रीडम-क्लास लिटोरल कॉम्बैट शिप्स
| विशेषता | नीलगिरी-क्लास (भारत) | फ्रीडम-क्लास (अमेरिका) |
|---|---|---|
| स्वदेशी सामग्री | 70% से अधिक | आयातित घटकों और मॉड्यूलर मिशन पैकेज पर निर्भर |
| स्टील्थ क्षमता | उन्नत स्टील्थ फीचर्स शामिल | सीमित स्टील्थ पर जोर |
| प्राथमिक भूमिका | क्षेत्रीय निवारण पर केंद्रित बहु-भूमिका फ्रिगेट | लिटोरल कॉम्बैट और मॉड्यूलर मिशन लचीलापन |
| हथियार प्रणाली | ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 वायु रक्षा | मिशन पैकेज के अनुसार विभिन्न; कम एकीकृत मिसाइल प्रणाली |
| रणनीतिक फोकस | आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय सुरक्षा | वैश्विक शक्ति प्रदर्शन और मॉड्यूलर अनुकूलन |
स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं में प्रमुख चुनौतियां
70% से अधिक स्वदेशी सामग्री के बावजूद, उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण उपप्रणालियां विदेशी तकनीक पर निर्भर हैं। इससे आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और तकनीकी हस्तांतरण में कमजोरियां आती हैं। चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देश घरेलू अनुसंधान एवं विकास में भारी निवेश कर इन जोखिमों को कम कर चुके हैं, जो भारत के लिए पूर्ण तकनीकी स्वायत्तता हासिल करने में एक रणनीतिक चुनौती है।
महत्व और आगे की राह
- INS तारागिरी की कमीशनिंग से भारत की इंडो-पैसिफिक में समुद्री निवारण और परिचालन पहुंच मजबूत होती है।
- स्वदेशी सामग्री में वृद्धि आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है, जो आयात निर्भरता और विदेशी मुद्रा बहिर्वाह को कम करती है।
- रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में तकनीकी खामियों को लक्षित R&D और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दूर करना जरूरी है।
- परियोजना प्रबंधन और जहाज निर्माण की समयसीमा सुधार कर नौसेना आधुनिकीकरण की गति बनाए रखना होगा।
- घरेलू रक्षा उद्योग के बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश व्यापक आर्थिक लाभ को बढ़ावा देगा।
- इनमें पिछली कक्षाओं की तुलना में 70% से अधिक स्वदेशी सामग्री है।
- INS तारागिरी प्रोजेक्ट 17A श्रृंखला का पहला जहाज है।
- इन जहाजों में बराक-8 वायु रक्षा प्रणाली और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें लगी हैं।
- नौसेना अधिनियम, 1957 नौसैनिक अनुशासन और प्रशासन को नियंत्रित करता है।
- रक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है।
- डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर 2020 स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देता है।
मुख्य प्रश्न
भारत के स्वदेशी नौसेना आधुनिकीकरण प्रयासों के संदर्भ में नीलगिरी-क्लास INS तारागिरी के कमीशनिंग का रणनीतिक और आर्थिक महत्व चर्चा करें। (250 शब्द)
प्रोजेक्ट 17A नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट कार्यक्रम क्या है?
प्रोजेक्ट 17A भारतीय नौसेना की पहल है जिसमें सात स्टील्थ फ्रिगेट बनाए जाते हैं, जिनमें उन्नत स्टील्थ फीचर्स, स्वदेशी हथियार प्रणाली और आधुनिक सेंसर शामिल हैं। इसका उद्देश्य पुराने फ्रिगेट्स को बदलना और भारत की समुद्री क्षमताओं को 70% से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ मजबूत करना है।
नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स का निर्माण कौन करता है?
माजगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), जो रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का शिपयार्ड है, नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स के निर्माण के लिए मुख्य जिम्मेदार है।
INS तारागिरी पर कौन-कौन सी प्रमुख हथियार प्रणाली लगी हैं?
INS तारागिरी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली और बराक-8 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली लगी हैं, जो महत्वपूर्ण स्वदेशी तकनीकी योगदान के साथ विकसित की गई हैं।
डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2020 नौसैनिक जहाज निर्माण को कैसे प्रभावित करता है?
DPP 2020 रक्षा खरीद में स्वदेशी सामग्री और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देता है, जिससे प्रोजेक्ट 17A जैसे जहाज निर्माण परियोजनाओं में घरेलू निर्माण और तकनीकी एकीकरण को बढ़ावा मिलता है।
नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स में कौन-कौन सी तकनीकी खामियां हैं?
उच्च स्वदेशी सामग्री के बावजूद, उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण उपप्रणालियां विदेशी तकनीक पर निर्भर हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा में कमजोरियां पैदा करती हैं।
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