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परिचय: INS तरागिरी का कमीशनिंग

मार्च 2024 में भारतीय नौसेना ने मुंबई के माजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में तलवार-क्लास स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला के चौथे जहाज INS तरागिरी को कमीशन किया। यह फ्रिगेट लगभग 4,000 टन विस्थापन वाला है, जिसकी लंबाई 125 मीटर है और यह 30 नॉट्स की रफ्तार तक पहुंच सकता है। इसमें उन्नत स्टील्थ तकनीक शामिल है, जो पुराने वर्गों की तुलना में रडार क्रॉस-सेक्शन को 50% तक कम करती है। INS तरागिरी में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और आधुनिक टॉरपीडो लॉन्चर लगे हैं। यह घटना भारत के स्वदेशी नौसैनिक जहाज निर्माण और रणनीतिक समुद्री स्वायत्तता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा - स्वदेशी रक्षा उत्पादन, नौसैनिक आधुनिकीकरण
  • GS पेपर 2: राजनीति - रक्षा विधायी ढांचा और केंद्र-राज्य संबंध
  • निबंध: स्वदेशी रक्षा निर्माण के जरिए रणनीतिक स्वायत्तता

रक्षा खरीद पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

संसद को अनुच्छेद 246(1) और संघ सूची के प्रविष्टि 2 के तहत रक्षा से संबंधित कानून बनाने का विशेष अधिकार प्राप्त है, जो रक्षा नीति और खरीद को संवैधानिक आधार देता है। डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2020 में स्वदेशी सामग्री को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, जो डिफेंस प्रोडक्शन पॉलिसी 2018 के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से मेल खाता है। भारतीय नौसेना नौसेना अधिनियम, 1957 के तहत कार्य करती है, जो INS तरागिरी जैसे युद्धपोतों के कमीशनिंग समेत संचालन और प्रशासनिक मामलों को नियंत्रित करता है। रक्षा मंत्रालय नीति बनाता है, बजट आवंटित करता है और कार्यान्वयन की निगरानी करता है।

स्वदेशी जहाज निर्माण के आर्थिक पहलू

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भारतीय नौसेना का पूंजी बजट लगभग ₹45,000 करोड़ (~USD 5.5 बिलियन) है, जिसमें स्वदेशी जहाज निर्माण परियोजनाओं के लिए बड़ा हिस्सा रखा गया है। INS तरागिरी का निर्माण करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड MDL ने वित्त वर्ष 2023 में ₹5,000 करोड़ का कारोबार दर्ज किया, जो क्षमता और विस्तार को दर्शाता है। नौसैनिक युद्धपोतों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 2010 में 30% से बढ़कर हाल के जहाजों में 70% से अधिक हो गई है, जिससे आयात निर्भरता कम हुई और स्थानीय MSMEs को प्रोत्साहन मिला। यह बदलाव मेक इन इंडिया पहल को बल देता है और घरेलू रक्षा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करता है।

प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

  • भारतीय नौसेना (IN): प्रमुख समुद्री रक्षा बल, जो INS तरागिरी का संचालन और तैनाती करता है।
  • माजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL): सार्वजनिक क्षेत्र का शिपयार्ड, जो INS तरागिरी का स्वदेशी निर्माण और एकीकरण करता है।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO): फ्रिगेट में लगे स्टील्थ तकनीक और हथियार प्रणालियों का प्रदाता।
  • रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्धारण, बजट आवंटन और खरीद प्रक्रिया की देखरेख।
  • नौसेना डिजाइन निदेशालय (DND): फ्रिगेट के डिजाइन और स्टील्थ विशेषताओं के लिए जिम्मेदार।

तकनीकी विशेषताएं और परिचालन क्षमता

INS तरागिरी का विस्थापन 4,000 टन और लंबाई 125 मीटर है, जो इसे मध्यम वर्ग की फ्रिगेट बनाता है। इसकी स्टील्थ तकनीक पुराने तलवार-क्लास जहाजों की तुलना में रडार क्रॉस-सेक्शन को 50% तक कम करती है, जिससे यह मुकाबला क्षेत्रों में जीवित रहने की क्षमता बढ़ाता है। जहाज में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें हैं जो जहाज और ज़मीन दोनों के खिलाफ प्रभावी हैं, बराक-8 मिसाइलें जो हवाई रक्षा के लिए हैं, और उन्नत टॉरपीडो लॉन्चर जो पनडुब्बी रोधी युद्ध में सक्षम हैं। यह फ्रिगेट भारतीय नौसेना की ब्लू-वाटर परिचालन सीमा को अपने पूर्ववर्तियों से 20% तक बढ़ाता है, जिससे समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और शक्ति प्रदर्शन मजबूत होता है।

तुलनात्मक अध्ययन: INS तरागिरी बनाम चीन की Type 054A फ्रिगेट

विशेषताINS तरागिरी (भारत)Type 054A (चीन)
विस्थापन~4,000 टन~4,000 टन
लंबाई125 मीटर134 मीटर
स्टील्थ विशेषताएंरडार क्रॉस-सेक्शन में 50% कमीसमान स्टील्थ डिजाइन
स्वदेशी सामग्री70% से अधिकलगभग 85%
उत्पादन दर2024 में 1 जहाज कमीशन (तलवार-क्लास)प्रति वर्ष 3-4 जहाज
हथियारब्रह्मोस, बराक-8, उन्नत टॉरपीडोYJ-83 एंटी-शिप मिसाइल, HHQ-16 SAM, टॉरपीडो

स्वदेशी जहाज निर्माण में महत्वपूर्ण चुनौतियां

प्रगति के बावजूद, भारत के जहाज निर्माण में आपूर्ति श्रृंखला, खासकर प्रणोदन प्रणालियों में विदेशी घटकों पर निर्भरता बनी हुई है। इसके विपरीत, चीन की रक्षा उद्योग प्रणाली पूरी तरह से एकीकृत है, जिससे स्वदेशी सामग्री अधिक और उत्पादन तेज होता है। यह अंतर भारत की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने की राह में बाधा है। इन कमजोरियों को दूर करना नौसैनिक आधुनिकीकरण और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • INS तरागिरी का कमीशनिंग भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमता में ठोस प्रगति को दर्शाता है, जो रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया के विजन को मजबूती देता है।
  • बेहतर स्टील्थ और हथियार प्रणालियां भारत की ब्लू-वाटर परिचालन पहुंच को बढ़ाती हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए अहम है।
  • स्वदेशी प्रणोदन और आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण में निरंतर निवेश विदेशी निर्भरता कम करने और उत्पादन गति बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
  • DRDO, शिपयार्ड और निजी MSMEs के बीच सहयोग मजबूत कर नवाचार और लागत दक्षता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • DPP के तहत नीति सुधारों से स्वदेशी विकास को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जिसमें महत्वपूर्ण उपप्रणालियां भी शामिल हों।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
INS तरागिरी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. INS तरागिरी तलवार-क्लास स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला का पहला जहाज है।
  2. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं।
  3. निर्माण और प्रणालियों के एकीकरण में इसकी स्वदेशी सामग्री 70% से अधिक है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि INS तरागिरी तलवार-क्लास श्रृंखला का पहला जहाज नहीं बल्कि चौथा है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि फ्रिगेट में ब्रह्मोस और बराक-8 मिसाइलें लगी हैं और स्वदेशी सामग्री 70% से अधिक है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. DPP 2020 सभी रक्षा खरीद के लिए न्यूनतम 40% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य करता है।
  2. यह 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देता है और स्वदेशी विक्रेताओं को प्राथमिकता देता है।
  3. DPP नौसेना अधिनियम, 1957 के तहत विधायित है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि DPP 2020 में सभी खरीद के लिए समान न्यूनतम 40% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य नहीं है; यह श्रेणी के अनुसार भिन्न होता है। कथन 3 भी गलत है क्योंकि DPP एक खरीद नीति है, जो नौसेना अधिनियम, 1957 के तहत विधायित नहीं है। कथन 2 सही है।

मुख्य प्रश्न

स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट जैसे INS तरागिरी के कमीशनिंग से भारत की रणनीतिक समुद्री स्वायत्तता और रक्षा आधुनिकीकरण में कैसे योगदान होता है, इसका विश्लेषण करें। नौसैनिक जहाज निर्माण में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने में अभी भी कौन-कौन सी चुनौतियां हैं, इस पर चर्चा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

INS तरागिरी का विस्थापन और गति क्या है?

INS तरागिरी का विस्थापन लगभग 4,000 टन है और इसकी अधिकतम गति 30 नॉट्स है, जो इसे बहुमुखी ब्लू-वाटर परिचालन के लिए सक्षम बनाता है।

INS तरागिरी में कौन-कौन सी मिसाइलें लगी हैं?

फ्रिगेट में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें आक्रमण के लिए और बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हवाई रक्षा के लिए लगी हैं, साथ ही उन्नत टॉरपीडो लॉन्चर भी हैं।

INS तरागिरी के निर्माण में माजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) की क्या भूमिका है?

MDL स्वदेशी निर्माण, एकीकरण और कमीशनिंग के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र का शिपयार्ड है, जो युद्धपोत उत्पादन में अपनी बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

INS तरागिरी की स्वदेशी सामग्री की तुलना चीन की Type 054A फ्रिगेट से कैसे होती है?

INS तरागिरी में 70% से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जबकि चीन की Type 054A फ्रिगेट में लगभग 85% है, जो भारत की तेजी से हो रही प्रगति के बावजूद पूर्ण आत्मनिर्भरता में अंतर को दर्शाता है।

रक्षा खरीद पर संसद किस संवैधानिक प्रावधान के तहत कानून बनाती है?

रक्षा खरीद पर संसद का कानून बनाने का अधिकार भारत के अनुच्छेद 246(1) और संघ सूची के प्रविष्टि 2 से आता है।

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