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परिचय: केंद्र ने शुरू की नई ई-बस योजना

साल 2023 में भारत सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक एंटरप्राइजेज (MoHIPE) के तहत नई इलेक्ट्रिक बस (ई-बस) योजना की घोषणा की। इस पहल का मकसद शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना है, जिससे पूर्व में मौजूद बुनियादी ढांचे की कमी और वित्तीय बाधाओं को दूर किया जा सके। यह योजना FAME-II जैसी मौजूदा नीतियों के साथ तालमेल रखती है और भारत के शहरी वायु प्रदूषण कम करने तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के संकल्पों के अनुरूप है।

यह योजना मुख्य रूप से राज्य परिवहन निगमों (STUs) और निजी ऑपरेटरों को लक्षित करती है, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में अंतिम मील चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड इंटीग्रेशन पर जोर देती है। इस कदम से मेट्रो शहरों से बाहर इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन के विस्तार में मदद मिलेगी।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था (परिवहन क्षेत्र, बुनियादी ढांचा), पर्यावरण (प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन)
  • GS पेपर 2: राजनीति (निर्देशक सिद्धांत, पर्यावरणीय कानून)
  • निबंध: सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण

ई-बस योजना का कानूनी और संवैधानिक आधार

यह योजना एक मजबूत कानूनी ढांचे के तहत संचालित होती है। संविधान के अनुच्छेद 48A के तहत राज्य को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है, जो प्रदूषण नियंत्रण नीतियों का संवैधानिक आधार है। मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 (2019 में संशोधित) और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 (2022 में संशोधित) वाहन पंजीकरण, उत्सर्जन मानकों और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रमाणन को नियंत्रित करते हैं, जिससे सुरक्षा और अनुपालन सुनिश्चित होता है।

FAME-II (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) योजना, जो 2019 में MoHIPE द्वारा शुरू की गई थी, इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सब्सिडी देती है, जो नई ई-बस योजना के लिए आधार तैयार करती है। इसके अलावा, एनर्जी कंजर्वेशन एक्ट, 2001 के तहत सरकार को परिवहन क्षेत्र में ऊर्जा खपत को नियंत्रित करने का अधिकार प्राप्त है, जो ऊर्जा दक्ष वाहनों को बढ़ावा देने में मदद करता है।

आर्थिक पहलू और बाजार की संभावनाएं

संघीय बजट 2023-24 में इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष रूप से ₹1,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो वित्तीय समर्थन का संकेत है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) 2023 रिपोर्ट

FAME-II के तहत 2023 तक 1,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों को सब्सिडी मिली है, जो इस क्षेत्र में शुरुआती प्रगति दर्शाता है। परिवहन क्षेत्र भारत के कुल CO2 उत्सर्जन का लगभग 14% हिस्सा है (MoEFCC, 2022), जो पर्यावरणीय आपात स्थिति को दर्शाता है। इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में 20-25% कम परिचालन लागत पर चलती हैं (NITI Aayog, 2023), जिससे ऑपरेटरों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होती हैं।

प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत घरेलू बैटरी निर्माण क्षमता 2025 तक 50% बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आयात निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।

संस्थागत भूमिकाएं और समन्वय

  • MoHIPE: ईवी नीतियों व सब्सिडी सहित नई ई-बस योजना का क्रियान्वयन करता है।
  • मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे (MoRTH): वाहन मानक, पंजीकरण और प्रमाणन का नियंत्रण करता है।
  • नीति आयोग (NITI Aayog): ईवी अपनाने, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर योजना पर नीति सलाह देता है।
  • राज्य परिवहन निगम (STUs): योजना के मुख्य ऑपरेटर और लाभार्थी, जो बस बेड़े का प्रबंधन करते हैं।
  • ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE): एनर्जी कंजर्वेशन एक्ट के तहत ऊर्जा दक्षता मानकों की देखरेख करता है।
  • इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA): डेटा और वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाओं की आपूर्ति करता है।

चीन की नई ऊर्जा वाहन नीति के साथ तुलना

पहलूभारत की नई ई-बस योजनाचीन की NEV नीति
शुरुआत का वर्ष20232015
सब्सिडी प्रणालीFAME-II और नई योजना के माध्यम से सीधे सब्सिडीभारी सब्सिडी और स्थानीय निर्माण अनिवार्यता
इंफ्रास्ट्रक्चर फोकसटियर-2/3 शहरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड क्षमताशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक चार्जिंग नेटवर्क
बाजार का आकार2030 तक $2.5 बिलियन, 1,000+ बसें सब्सिडी प्राप्त2023 तक 4,00,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित
पर्यावरणीय प्रभावशहरी प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन उपयोग में कमीमुख्य शहरों में शहरी वायु प्रदूषण में 30% कमी

मौजूदा ईवी बस नीतियों में महत्वपूर्ण कमियां

हालांकि प्रगति हुई है, मौजूदा योजनाएं अंतिम मील चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय ग्रिड क्षमता की समस्याओं को पर्याप्त रूप से नहीं हल कर पाईं हैं। यह कमी टियर-2 और टियर-3 शहरों में परिचालन में बाधा डालती है, जहां सार्वजनिक परिवहन का इलेक्ट्रिफिकेशन अभी प्रारंभिक चरण में है। नई योजना विशेष रूप से इन चुनौतियों को दूर करने के लिए विकेंद्रीकृत चार्जिंग स्टेशन और ग्रिड अपग्रेडेशन को प्रोत्साहित करती है।

साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ इंटीग्रेशन सीमित है, जो यदि बिजली जीवाश्म ईंधन पर आधारित रही तो इलेक्ट्रिक बसों के पर्यावरणीय लाभों को कमजोर कर सकता है।

महत्व और आगे की राह

  • इंफ्रास्ट्रक्चर की खामियों को दूर करना मेट्रो शहरों के बाहर इलेक्ट्रिक बसों के बड़े पैमाने पर परिचालन को संभव बनाएगा, वायु गुणवत्ता सुधरेगी और कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
  • वित्तीय प्रोत्साहन और STUs के लिए क्षमता निर्माण परिचालन लागत घटाने और बेड़े के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देगा।
  • PLI योजना के जरिए घरेलू बैटरी और घटकों के निर्माण को बढ़ावा देने से आयात निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
  • मंत्रालयों और राज्यों के बीच समन्वित नीति क्रियान्वयन से ग्रिड और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों का समाधान होगा।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में नवीकरणीय ऊर्जा को शामिल करना पर्यावरणीय लाभों को अधिकतम करेगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
FAME-II योजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FAME-II केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी देती है।
  2. यह योजना इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रोत्साहन शामिल करती है।
  3. यह योजना 2019 में मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे द्वारा शुरू की गई थी।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि FAME-II में इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी सब्सिडी शामिल है, केवल दोपहिया और तीनपहिया के लिए नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि योजना इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहित करती है। कथन 3 गलत है; FAME-II मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा लागू की जाती है, न कि MoRTH द्वारा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के इलेक्ट्रिक बस बाजार के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत का इलेक्ट्रिक बस बाजार 2023 से 2030 तक 30% की CAGR से बढ़ेगा।
  2. इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में लगभग 10% परिचालन लागत कम करती हैं।
  3. PLI योजना के तहत घरेलू बैटरी उत्पादन 2025 तक 50% बढ़ने की उम्मीद है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है, जैसा कि IEA 2023 रिपोर्ट में बताया गया है। कथन 2 गलत है; परिचालन लागत में बचत 10% नहीं बल्कि 20-25% के बीच है। कथन 3 सही है, NITI Aayog 2023 डेटा के अनुसार।

मुख्य प्रश्न

भारत की नई ई-बस योजना द्वारा सार्वजनिक परिवहन के इलेक्ट्रिफिकेशन को तेज करने में आने वाली चुनौतियों और अवसरों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। चर्चा करें कि यह योजना भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं और आर्थिक लक्ष्यों के साथ कैसे मेल खाती है।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: जनरल स्टडीज पेपर 3 (बुनियादी ढांचा विकास, पर्यावरण)
  • झारखंड कोण: रांची और जमशेदपुर जैसे झारखंड के शहरी केंद्र इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का परीक्षण कर रहे हैं; योजना का टियर-2 शहरों पर फोकस सीधे प्रासंगिक है।
  • मुख्य बिंदु: राज्य-विशेष प्रदूषण चुनौतियों, स्थानीय विनिर्माण इकाइयों की संभावनाओं और झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के साथ समन्वय पर आधारित उत्तर तैयार करें।
केंद्र की नई ई-बस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यह योजना वित्तीय बाधाओं और बुनियादी ढांचे की कमी, विशेषकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड क्षमता को दूर करके इलेक्ट्रिक बसों को तेजी से अपनाने का लक्ष्य रखती है, जिससे शहरी प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन की निर्भरता कम हो।

नई ई-बस योजना FAME-II योजना को कैसे पूरा करती है?

जहां FAME-II इलेक्ट्रिक बसों सहित वाहनों के लिए सब्सिडी प्रदान करती है, वहीं नई योजना छोटे शहरों में अंतिम मील चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन चुनौतियों को हल करने पर केंद्रित है, जिससे विस्तार में मदद मिलती है।

ई-बस योजना को लागू करने में मुख्य रूप से कौन-कौन से मंत्रालय शामिल हैं?

MoHIPE योजना के क्रियान्वयन का नेतृत्व करता है, MoRTH वाहन मानकों और पंजीकरण में नियामक भूमिका निभाता है, और नीति आयोग नीति सलाह देता है।

इलेक्ट्रिक बसों के डीजल बसों की तुलना में आर्थिक लाभ क्या हैं?

इलेक्ट्रिक बसें 20-25% कम परिचालन लागत पर चलती हैं, मुख्य रूप से ईंधन और रखरखाव खर्च में बचत के कारण, जिससे सार्वजनिक परिवहन ऑपरेटरों के लिए वित्तीय रूप से फायदेमंद होती हैं।

भारत की ई-बस योजना की तुलना चीन की NEV नीति से कैसे की जा सकती है?

चीन की NEV नीति, 2015 में शुरू हुई, भारी सब्सिडी, स्थानीय निर्माण अनिवार्यता और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क के संयोजन से 4,00,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित कर रही है और प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई है। भारत की योजना नई है लेकिन इसी पैमाने पर पहुंचने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और विनिर्माण प्रोत्साहन पर ध्यान देती है।

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