अपडेट

साल 2009 में भारत सरकार ने Right of Children to Free and Compulsory Education Act (RTE Act), 2009 की धारा 21 और 22 के तहत स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) के गठन को अनिवार्य कर दिया। इन स्थानीय समितियों में कम से कम 75% सदस्य वह माता-पिता होते हैं जिनके बच्चे स्कूल में नामांकित हैं, जैसा कि धारा 21(1) में उल्लेख है। इन समितियों का उद्देश्य स्कूलों के शासन को विकेंद्रीकृत करना और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है। यह व्यवस्था संविधान के Article 21A (शिक्षा का अधिकार) और Article 243D (पंचायतों के अधिकार) के प्रावधानों के अनुरूप है, और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा सुप्रीम कोर्ट के Pramati Educational and Cultural Trust v. Union of India (2014) जैसे फैसलों से भी बल मिलता है। केंद्र सरकार का यह प्रयास स्थानीय निगरानी को मजबूत कर, जवाबदेही बढ़ाकर और स्कूल शिक्षा में धन के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए है।

UPSC Relevance

  • GS Paper 2: शासन - विकेंद्रीकरण, RTE एक्ट, पंचायत राज संस्थान
  • GS Paper 1: भारतीय संविधान - मूल अधिकार, निर्देशक सिद्धांत
  • निबंध: सार्वजनिक सेवा वितरण में विकेंद्रीकरण की भूमिका

स्थानीय स्कूल शासन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

RTE एक्ट 2009 की धारा 21 और 22 के तहत सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में SMCs का गठन अनिवार्य है। इन समितियों में कम से कम 75% सदस्य ऐसे माता-पिता या अभिभावक होते हैं जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, ताकि स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो। Article 21A बच्चों को 6 से 14 वर्ष की उम्र तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, जबकि Article 243D पंचायतों को स्वशासन संस्थान के रूप में शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में अधिकार प्रदान करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी स्कूल शासन में विकेंद्रीकरण और समुदाय की भागीदारी पर जोर देती है। सुप्रीम कोर्ट ने Pramati Educational and Cultural Trust v. Union of India (2014) मामले में SMCs की निगरानी और RTE के नियमों के पालन में भूमिका को मान्यता दी है।

  • SMCs एक वैधानिक निकाय हैं जिनके कर्तव्य में उपस्थिति, बुनियादी ढांचा, मध्याह्न भोजन, और धन के उपयोग की निगरानी शामिल है।
  • पंचायती राज संस्थान (PRIs) संविधान के Article 243D के तहत SMCs के साथ सहयोग और समन्वय करते हैं।
  • शिक्षा मंत्रालय SMCs के गठन, संचालन और क्षमता विकास के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है।
  • राज्य शिक्षा विभाग इनके क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं।

स्थानीय समितियों के अनिवार्य होने के आर्थिक पहलू

संघीय बजट 2023-24 में स्कूल शिक्षा के लिए ₹1.15 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें SMCs समेत शासन संरचनाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र प्रायोजित शिक्षा योजनाओं में लगभग 15% धनराशि का रिसाव होता है, जिसका मुख्य कारण कमजोर स्थानीय निगरानी है। सक्रिय SMCs के माध्यम से बेहतर स्थानीय शासन इन खामियों को कम कर धन के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित कर सकता है। विश्व बैंक की 2022 की शिक्षा रिपोर्ट बताती है कि विकेंद्रीकरण से स्कूल की कार्यक्षमता में 20% सुधार हो सकता है, जिससे सीखने के परिणाम बेहतर होंगे। बेहतर शासन के चलते मानव पूंजी विकास में सुधार से अगले दशक में भारत की GDP में 1.5% तक की वृद्धि संभव है।

  • प्रभावी SMCs से धन के रिसाव में कमी आती है और वित्तीय जवाबदेही बढ़ती है।
  • बेहतर शासन के कारण सीखने के परिणामों में 12% की वृद्धि हुई है (NAS 2021 के अनुसार)।
  • बेहतर सीखने के परिणाम रोजगार योग्यता और आर्थिक उत्पादकता को बढ़ाते हैं।
  • SMC सदस्यों की क्षमता विकास इसके आर्थिक लाभों को साकार करने के लिए जरूरी है।

स्कूल प्रबंधन समितियों का संचालन और चुनौतियाँ

UDISE+ 2022-23 के अनुसार, देश के 68% स्कूलों में SMCs सक्रिय हैं, लेकिन शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक केवल 40% सदस्यों को शासन की भूमिकाओं पर औपचारिक प्रशिक्षण मिला है। यह कमी प्रभावी निगरानी और जवाबदेही में बाधा है। कई SMCs के पास वित्तीय स्वायत्तता नहीं है और वे निर्णय लागू करने में भी कठिनाई महसूस करते हैं, जिससे स्कूल की गुणवत्ता पर उनका प्रभाव सीमित हो जाता है। CAG 2021 की रिपोर्ट में कमजोर क्षमता और प्रशिक्षण की कमी को प्रमुख बाधा बताया गया है। SMCs और अभिभावक-शिक्षक संघों (PTAs) के बीच भूमिका की अस्पष्टता भी भ्रम पैदा करती है।

  • SMCs के पास वैधानिक अधिकार होते हैं, लेकिन वित्तीय नियंत्रण सीमित होता है।
  • SMC सदस्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम अपर्याप्त और अनियमित हैं।
  • अभिभावकों में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता कम है।
  • राज्यों में SMCs और पंचायत राज संस्थानों के बीच समन्वय में काफी भिन्नता है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और फिनलैंड के स्थानीय स्कूल शासन

पहलूभारत (SMCs)फिनलैंड (स्थानीय स्कूल परिषद)
कानूनी प्रावधानRTE एक्ट 2009, Article 243Dराष्ट्रीय शिक्षा अधिनियम, स्थानीय सरकार अधिनियम
संरचनाकम से कम 75% माता-पिता, कुछ शिक्षकमाता-पिता, शिक्षक, स्थानीय अधिकारी, छात्र प्रतिनिधि
प्रशिक्षण और क्षमता विकासकेवल 40% प्रशिक्षित; अनियमित कार्यक्रमअनिवार्य, निरंतर प्रशिक्षण
वित्तीय स्वायत्ततासीमित; राज्य निधि पर निर्भरबजट आवंटन में व्यापक स्वायत्तता
जवाबदेही तंत्रकमजोर प्रवर्तन; राज्य पर निर्भरमजबूत कानूनी जवाबदेही और प्रदर्शन समीक्षा
माता-पिता की भागीदारी68% सक्रिय SMCs; विभिन्न स्तर की भागीदारीलगातार 90% भागीदारी
शिक्षा के परिणामसक्रिय SMCs से 12% सुधार (NAS 2021)विश्व स्तर पर शीर्ष PISA रैंकिंग

महत्व और आगे का रास्ता

स्थानीय समितियों जैसे SMCs को अनिवार्य करना शिक्षा के शासन को विकेंद्रीकृत करता है और समुदाय की भागीदारी बढ़ाता है, जो जवाबदेही और स्कूल के परिणाम सुधारने के लिए जरूरी है। हालांकि, केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं; मजबूत क्षमता निर्माण, नियमित प्रशिक्षण और वित्तीय स्वायत्तता भी जरूरी है। राज्यों को नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करने चाहिए और SMCs की भूमिकाओं को PTA से स्पष्ट रूप से अलग करना चाहिए। SMCs और पंचायत राज संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत कर संविधान के Article 243D का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। धन के रिसाव को कम करने और शासन की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए निगरानी और जवाबदेही तंत्र, जैसे प्रदर्शन ऑडिट, आवश्यक हैं।

  • देशभर में SMC सदस्यों के लिए औपचारिक प्रशिक्षण बढ़ाएं।
  • स्थानीय निर्णय लेने के लिए SMCs को अधिक वित्तीय स्वायत्तता दें।
  • माता-पिता की भागीदारी बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं।
  • विकेंद्रीकृत शासन के लिए SMCs को पंचायत राज संस्थानों के साथ अधिक जोड़ें।
  • SMC गतिविधियों और धन उपयोग का नियमित ऑडिट और सार्वजनिक खुलासा सुनिश्चित करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. SMCs में कम से कम 75% सदस्य ऐसे माता-पिता होने चाहिए जिनके बच्चे स्कूल में नामांकित हैं।
  2. SMCs को केंद्र से प्राप्त धन का पूर्ण वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त है।
  3. RTE एक्ट सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में SMCs के गठन का प्रावधान करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि RTE एक्ट की धारा 21(1) के अनुसार SMC में कम से कम 75% सदस्य माता-पिता या अभिभावक होने चाहिए। कथन 2 गलत है क्योंकि SMCs की वित्तीय स्वायत्तता सीमित है और वे मुख्यतः राज्य आवंटन पर निर्भर हैं। कथन 3 सही है क्योंकि RTE एक्ट सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में SMCs के गठन को अनिवार्य करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
स्कूल शासन में विकेंद्रीकरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Article 243D पंचायतों को स्वशासन संस्थान के रूप में कार्य करने का अधिकार देता है, जिसमें शिक्षा शासन भी शामिल है।
  2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्कूल शासन में विकेंद्रीकरण को प्रोत्साहित नहीं करती।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने Pramati Educational and Cultural Trust v. Union of India (2014) मामले में SMCs की भूमिका को मजबूत किया।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि Article 243D पंचायतों को शिक्षा शासन सहित स्वशासन के अधिकार देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विकेंद्रीकरण को प्रोत्साहित करती है। कथन 3 सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के फैसले में SMCs की भूमिका को मान्यता दी।

मेन प्रश्न

भारत में शिक्षा शासन के विकेंद्रीकरण में स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs) की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। SMCs के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें और स्कूल की गुणवत्ता सुधारने के लिए उनकी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - शासन और लोक प्रशासन
  • झारखंड विशेष: झारखंड ने RTE एक्ट के तहत SMCs लागू किए हैं; लेकिन UDISE+ डेटा के अनुसार ग्रामीण स्कूलों में केवल 60% SMCs सक्रिय हैं और प्रशिक्षण स्तर कम है।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड में आदिवासी आबादी की भागीदारी, क्षमता निर्माण और पंचायत राज संस्थानों के साथ समन्वय जैसी राज्य-विशिष्ट चुनौतियों पर चर्चा करें।
RTE एक्ट के तहत स्कूल प्रबंधन समितियों की संरचना क्या होनी चाहिए?

RTE एक्ट की धारा 21(1) के अनुसार, SMC में कम से कम 75% सदस्य ऐसे माता-पिता या अभिभावक होने चाहिए जिनके बच्चे स्कूल में नामांकित हैं, ताकि स्थानीय समुदाय का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

Article 243D का स्कूल शासन से क्या संबंध है?

Article 243D पंचायतों को स्वशासन संस्थान के रूप में अधिकार देता है, जिससे वे विकेंद्रीकृत शासन में भाग ले सकती हैं, जिसमें शिक्षा शासन भी शामिल है, और यह SMCs के समर्थन में सहायक है।

भारत में SMCs को किन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

प्रमुख चुनौतियों में अपर्याप्त प्रशिक्षण (केवल 40% प्रशिक्षित), सीमित वित्तीय स्वायत्तता, अभिभावकों में जागरूकता की कमी, और पंचायत राज संस्थानों के साथ कमजोर समन्वय शामिल हैं, जो शासन की प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।

स्कूलों में बेहतर स्थानीय शासन से आर्थिक लाभ क्या हो सकते हैं?

विश्व बैंक (2022) के अनुसार, विकेंद्रीकरण से स्कूल की कार्यक्षमता में 20% सुधार हो सकता है, और बेहतर सीखने के परिणामों के कारण भारत की GDP में अगले दशक में 1.5% तक की वृद्धि संभव है, जो मानव पूंजी विकास से जुड़ा है।

फिनलैंड के स्थानीय स्कूल शासन मॉडल में भारत के SMCs से क्या अंतर है?

फिनलैंड की स्थानीय स्कूल परिषदों को कानूनी तौर पर अनिवार्य प्रशिक्षण, व्यापक वित्तीय स्वायत्तता और मजबूत जवाबदेही तंत्र प्राप्त हैं, जिससे 90% माता-पिता की भागीदारी होती है और वे विश्व स्तर पर शीर्ष शिक्षण परिणाम प्राप्त करते हैं, जबकि भारत के SMCs क्षमता और स्वायत्तता की सीमाओं से जूझ रहे हैं।

आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए

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