अपडेट

2023 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जम्मू-कश्मीर (J&K) की कुल 697 झीलों में से 518 झीलें या तो पूरी तरह गायब हो चुकी हैं या उनका आकार काफी सिकुड़ गया है। यह बेहद चिंताजनक स्थिति क्षेत्र की झीलों में 74% गिरावट को दर्शाती है। ISRO की 2022 की उपग्रह तस्वीरों ने पिछले दो दशकों में झीलों के क्षेत्र में लगभग 40% की कमी की पुष्टि की है। रिपोर्ट में पर्यावरणीय शासन, जल संसाधन प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों की असफलताओं को रेखांकित किया गया है, जो पहले से ही जलवायु अस्थिरता और राजनीतिक जटिलताओं से ग्रस्त इस क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण - जैव विविधता, जल संसाधन, पर्यावरण प्रदूषण, आपदा प्रबंधन
  • GS पेपर 1: भूगोल - जम्मू-कश्मीर और हिमालयी क्षेत्र की भौतिक भूगोल
  • निबंध: भारत में पर्यावरणीय गिरावट और सतत विकास की चुनौतियां

जम्मू-कश्मीर में झील संरक्षण के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का निर्देश देता है, जो झील संरक्षण के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करता है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण मानक तय करने का अधिकार देता है, जबकि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 (धारा 24-26) जल निकायों को प्रदूषण से बचाने का प्रावधान करता है। जम्मू-कश्मीर का विशेष कानून, जम्मू-कश्मीर झीलें और जल निकाय (संरक्षण एवं प्रबंधन) अधिनियम, 2010, झीलों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1987) जैसे फैसले पर्यावरण संरक्षण और राज्य की जवाबदेही में न्यायपालिका की भूमिका को मजबूत करते हैं।

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरण सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा
  • जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974: जल प्रदूषण नियंत्रण
  • जम्मू-कश्मीर झील अधिनियम, 2010: क्षेत्रीय झील संरक्षण कानून
  • एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (1987): पर्यावरण शासन में न्यायिक सक्रियता

जम्मू-कश्मीर में झीलों के क्षरण का आर्थिक प्रभाव

झीलों के गायब होने और सिकुड़ने से मछली पालन और पर्यटन जैसे जीविकोपार्जन के स्रोतों को खतरा है, जो जम्मू-कश्मीर की GDP में 5-7% का योगदान देते हैं (आर्थिक सर्वेक्षण J&K, 2023)। J&K पर्यटन विभाग के अनुसार झीलों के क्षरण के कारण वार्षिक लगभग 150 करोड़ रुपये की इको-टूरिज्म आय में कमी आई है। प्राकृतिक जलाशयों में कमी से जल शोधन और आपूर्ति की लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, झीलों के सिकुड़ने से बाढ़ और सूखे की जोखिम बढ़ जाती है, जिससे आपदा प्रबंधन पर खर्च भी बढ़ता है। 2023-24 के बजट में पर्यावरण संरक्षण के लिए 120 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन 2022-23 में मात्र 35% धन का प्रभावी उपयोग हुआ (CAG रिपोर्ट), जो संसाधन प्रबंधन में कमियों को दर्शाता है।

  • मछली पालन और पर्यटन से 5-7% GDP योगदान (आर्थिक सर्वेक्षण J&K, 2023)
  • झील क्षरण से 150 करोड़ रुपये वार्षिक इको-टूरिज्म राजस्व हानि (J&K पर्यटन विभाग, 2023)
  • जल शोधन और आपूर्ति की बढ़ी हुई लागत
  • जलवायु चरम स्थितियों के कारण आपदा प्रबंधन व्यय में वृद्धि
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए 120 करोड़ रुपये बजट (2023-24), 35% धन उपयोग (CAG 2023)

झील प्रबंधन में संस्थागत भूमिकाएं और जवाबदेही

CAG पर्यावरणीय शासन और संसाधन प्रबंधन का लेखा-जोखा रखता है और नीतिगत कार्यान्वयन में कमियों को उजागर करता है। जम्मू और कश्मीर झीलें और जल निकाय संरक्षण प्राधिकरण (JKLWCA) झील संरक्षण के लिए जिम्मेदार है, लेकिन इसकी प्रवर्तन क्षमता सीमित है। जम्मू और कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JKPCB) जल प्रदूषण की निगरानी करता है, लेकिन झील संरक्षण प्रयासों के साथ समन्वय कमजोर है। राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) नीतिगत रूपरेखा बनाता है, जबकि केंद्रीय जल आयोग (CWC) जल संसाधन डेटा और प्रबंधन देखता है। संस्थागत भूमिकाओं में बिखराव और स्थानीय जवाबदेही की कमी प्रभावी झील पुनरुद्धार में बाधा है।

  • CAG: पर्यावरणीय शासन और धन उपयोग का लेखा-जोखा
  • JKLWCA: सीमित प्रवर्तन क्षमता वाली झील संरक्षण संस्था
  • JKPCB: जल प्रदूषण निगरानी और नियंत्रण
  • MoEFCC: राष्ट्रीय पर्यावरण नीति निर्माण
  • CWC: जल संसाधन प्रबंधन और डेटा निगरानी

झील क्षरण पर पर्यावरणीय और जलवायु कारक

पिछले दशक में जम्मू-कश्मीर में वार्षिक वर्षा में 15% की अस्थिरता बढ़ी है (IMD रिपोर्ट 2023), जिससे झीलों के प्राकृतिक पुनर्भरण चक्र प्रभावित हुए हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना और अनियमित वर्षा झीलों के सिकुड़ने को और बढ़ा रहे हैं। मानवीय दबाव जैसे अव्यवस्थित शहरीकरण, वनों की कटाई और प्रदूषण भी गिरावट को तेज कर रहे हैं। इन सबका संयुक्त प्रभाव झीलों की सेहत में 74% कमी के रूप में सामने आया है, जो जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए खतरा है।

  • वर्षा अस्थिरता में 15% वृद्धि (IMD, 2023)
  • ग्लेशियर पिघलने से झीलों में जल प्रवाह प्रभावित
  • शहरीकरण और वनों की कटाई से तलछट और प्रदूषण बढ़ा
  • 74% झीलें क्षरण से प्रभावित (CAG, 2023)

तुलनात्मक अध्ययन: जम्मू-कश्मीर बनाम स्विट्जरलैंड झील प्रबंधन

पहलूजम्मू और कश्मीरस्विट्जरलैंड
कानूनी ढांचाJ&K Lakes Act, 2010; बिखरे हुए प्रवर्तनFederal Act on the Protection of Waters, 1991; समेकित प्रवर्तन
झील क्षेत्र में परिवर्तन (पिछले 20-30 साल)लगभग 40% कमी (ISRO, 2022)झील जल गुणवत्ता और क्षेत्र में 25% वृद्धि
सामुदायिक भागीदारीसीमित स्थानीय सहभागितामजबूत समुदाय की भागीदारी संरक्षण में
आर्थिक कड़ीमछली पालन और पर्यटन से 5-7% GDP; क्षरण से राजस्व हानिझील स्वास्थ्य से समर्थित सतत पर्यटन
संस्थागत समन्वयबिखरा हुआ, कमजोर जवाबदेहीसमेकित बहु-स्तरीय शासन

जम्मू-कश्मीर में झील संरक्षण की नीतिगत कमजोरियां और चुनौतियां

एक समग्र, लागू करने योग्य झील पुनरुद्धार और निगरानी ढांचे का अभाव और स्पष्ट स्थानीय जवाबदेही की कमी सबसे बड़ी कमी है। JKLWCA, JKPCB और अन्य एजेंसियों के बीच संस्थागत बिखराव overlapping जिम्मेदारियों और अक्षमता को जन्म देता है। सीमित समुदाय सहभागिता स्थानीय संरक्षण और नियम पालन को कमजोर करती है। बजट की कमी और धन के खराब उपयोग से संरक्षण प्रयास प्रभावित होते हैं। जलवायु अस्थिरता भी स्थिति को जटिल बनाती है, जिसके लिए अनुकूलन रणनीतियों की जरूरत है।

  • एकीकृत झील पुनरुद्धार और निगरानी ढांचे का अभाव
  • संस्थागत भूमिकाओं में बिखराव और कमजोर प्रवर्तन
  • सीमित समुदाय भागीदारी और जागरूकता
  • बजटीय कमी और धन के अध:प्रयोग
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए अनुकूलन नीतियों की जरूरत

आगे का रास्ता: जम्मू-कश्मीर में झील संरक्षण को मजबूत बनाना

  • स्थानीय, जिला और राज्य स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही के साथ एक समेकित झील पुनरुद्धार और निगरानी ढांचा विकसित करना
  • JKLWCA, JKPCB, MoEFCC और CWC के बीच बेहतर समन्वय के लिए संयुक्त कार्ययोजना और डेटा साझा करना
  • बजट आवंटन बढ़ाना और पारदर्शी लेखा परीक्षा के माध्यम से प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना
  • जागरूकता अभियानों और स्थानीय संरक्षण को प्रोत्साहित कर समुदाय की भागीदारी बढ़ाना
  • जलवायु सहनशीलता को झील प्रबंधन में शामिल करना, जैसे जलग्रहण क्षेत्र पुनर्स्थापन और सतत भूमि उपयोग प्रथाएं
📝 प्रारंभिक अभ्यास
जम्मू और कश्मीर में झील संरक्षण कानूनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. जम्मू और कश्मीर झीलें और जल निकाय (संरक्षण एवं प्रबंधन) अधिनियम, 2010 क्षेत्र में जल प्रदूषण को नियंत्रित करने वाला एकमात्र कानून है।
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार का निर्देश देता है।
  3. जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 जम्मू-कश्मीर की जल निकायों सहित झीलों पर लागू होता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि J&K Lakes Act, 2010 झील संरक्षण पर केंद्रित है, लेकिन जल प्रदूषण नियंत्रित करने वाला एकमात्र कानून नहीं है; जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 भी लागू होता है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि अनुच्छेद 48A पर्यावरण संरक्षण का निर्देश देता है और 1974 का अधिनियम जल प्रदूषण को नियंत्रित करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
जम्मू और कश्मीर में झील क्षरण के आर्थिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. मछली पालन और पर्यटन जम्मू-कश्मीर की GDP में लगभग 5-7% का योगदान देते हैं।
  2. झील क्षरण के कारण क्षेत्र में इको-टूरिज्म राजस्व में वृद्धि हुई है।
  3. 2022-23 में आवंटित पर्यावरण संरक्षण निधि का केवल 35% प्रभावी रूप से उपयोग हुआ।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि झील क्षरण के कारण इको-टूरिज्म राजस्व में वृद्धि नहीं, बल्कि कमी हुई है। कथन 1 और 3 सही हैं, जो आर्थिक सर्वेक्षण J&K (2023) और CAG रिपोर्ट (2023) पर आधारित हैं।

मुख्य प्रश्न

जम्मू और कश्मीर में झीलों के गायब होने और सिकुड़ने के पीछे मुख्य पर्यावरणीय शासन चुनौतियों पर चर्चा करें। क्षेत्र में झील संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 - पर्यावरण और पारिस्थितिकी, जल संसाधन प्रबंधन
  • झारखंड का दृष्टिकोण: खनन और वनों की कटाई के कारण झील और आर्द्रभूमि क्षरण की समान चुनौतियां; जम्मू-कश्मीर के संस्थागत अंतराल से झारखंड के जल निकायों के लिए सीख
  • मुख्य बिंदु: J&K और झारखंड में संस्थागत समन्वय और समुदाय भागीदारी की तुलना करें; निधि उपयोग और जलवायु सहनशीलता पर जोर दें
जम्मू और कश्मीर में झील क्षरण की सीमा CAG रिपोर्ट 2023 के अनुसार क्या है?

CAG रिपोर्ट 2023 के अनुसार जम्मू-कश्मीर की 697 झीलों में से 518 झीलें या तो गायब हो चुकी हैं या सिकुड़ गई हैं, जो क्षेत्र में 74% गिरावट को दर्शाता है।

जम्मू और कश्मीर में झील संरक्षण के लिए कौन सा विशेष कानून लागू है?

जम्मू और कश्मीर झीलें और जल निकाय (संरक्षण एवं प्रबंधन) अधिनियम, 2010 क्षेत्र में झील संरक्षण के लिए विशेष कानून है।

झील क्षरण जम्मू और कश्मीर की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?

झील क्षरण मछली पालन और पर्यटन क्षेत्रों को खतरा पहुंचाता है, जो J&K की GDP में 5-7% योगदान देते हैं, लगभग 150 करोड़ रुपये की वार्षिक इको-टूरिज्म आय में कमी करता है, और जल शोधन व आपदा प्रबंधन की लागत बढ़ाता है।

जम्मू-कश्मीर में प्रभावी झील संरक्षण में कौन-कौन सी संस्थागत चुनौतियां हैं?

JKLWCA, JKPCB और अन्य एजेंसियों के बीच संस्थागत भूमिकाओं में बिखराव, कमजोर प्रवर्तन, सीमित समुदाय भागीदारी और खराब धन उपयोग प्रभावी झील संरक्षण में बाधा हैं।

स्विट्जरलैंड का झील प्रबंधन जम्मू और कश्मीर से किस प्रकार भिन्न है?

स्विट्जरलैंड में Federal Act on the Protection of Waters (1991) के तहत एकीकृत कानूनी प्रवर्तन, मजबूत समुदाय भागीदारी और बहु-स्तरीय शासन है, जिससे झीलों की गुणवत्ता और क्षेत्र में सुधार हुआ है, जबकि J&K में संस्थागत बिखराव और संसाधन कमी है।

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