अप्रैल 2024 में, केंद्र सरकार ने भारत में दो नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी दी, जो देश की चिप आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत PLI योजना के अंतर्गत दी गई है, जो बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को प्रोत्साहित करती है। इन प्लांट्स में अगले पांच वर्षों में लगभग 76,000 करोड़ रुपये (~9.3 बिलियन डॉलर) का निवेश होने का अनुमान है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करना है।
यह निर्णय इसलिए भी अहम है क्योंकि वर्तमान में भारत अपनी सेमीकंडक्टर जरूरतों का 90% से अधिक आयात करता है, FY 2023 में इसका आयात बिल 24 अरब डॉलर था। नए प्लांट्स घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाएंगे, रोजगार सृजित करेंगे और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र को मजबूत करेंगे, जो पिछले तीन वर्षों में 15% की CAGR से बढ़ा है, लेकिन इसमें चिप फैब्रिकेशन की पर्याप्त क्षमता नहीं थी।
UPSC Relevance
- GS Paper 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति, PLI योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण
- GS Paper 2: शासन – नीति कार्यान्वयन, FDI नीति, केंद्र-राज्य संबंध
- निबंध: प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास, भारत की रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता
सेमीकंडक्टर प्लांट मंजूरी के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचा
कैबिनेट की यह मंजूरी इंडस्ट्रियल पॉलिसी रेजोल्यूशन 2020 और MeitY द्वारा अधिसूचित PLI योजना (बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए) के तहत दी गई है। PLI योजना, जिसका बजट 2022-27 के लिए 76,000 करोड़ रुपये है, घरेलू सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्रिकेशन को प्रोत्साहित करती है।
कंसोलिडेटेड FDI पॉलिसी 2020 के तहत, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आती है, सेमीकंडक्टर निर्माण में 100% FDI ऑटोमेटिक रूट के माध्यम से अनुमति प्राप्त है। यह मंजूरी सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2022 के अनुरूप भी है, जो एक समग्र सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के उपाय निर्धारित करती है।
संवैधानिक रूप से, यह पहल भारत के संविधान की अनुसूची VII के संघ सूची के प्रविष्टि 54 (उद्योग) और 42 (व्यापार और वाणिज्य) के अंतर्गत आती है, जो केंद्र सरकार को इस प्रकार की औद्योगिक नीतियों को बनाने और लागू करने का अधिकार देती है।
आर्थिक प्रभाव और रणनीतिक महत्व
दो नए सेमीकंडक्टर प्लांट्स में अगले पांच वर्षों में 76,000 करोड़ रुपये (~9.3 बिलियन डॉलर) के निवेश की उम्मीद है, जो इस क्षेत्र में पूंजी निर्माण को काफी बढ़ावा देगा। FY 2023 में भारत का सेमीकंडक्टर आयात बिल 24 अरब डॉलर था, जिसमें 90% से अधिक मांग आयात के माध्यम से पूरी होती है, जो घरेलू उत्पादन क्षमता में गंभीर कमी को दर्शाता है।
PLI योजना के वित्तीय प्रोत्साहन इस कमी को दूर करने के लिए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के निर्माण को गति देंगे। वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 8.6% की CAGR से बढ़ रहा है, और भारत के लिए यहां बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का सुनहरा अवसर है।
निवेश के अलावा, इन प्लांट्स से लगभग 10,000 प्रत्यक्ष और 50,000 अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है, जो सप्लायर, उपकरण निर्माता और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों सहित पूरे इकोसिस्टम को विकसित करेगा।
| पैरामीटर | भारत (नए चिप प्लांट) | दक्षिण कोरिया |
|---|---|---|
| निवेश आकार | 76,000 करोड़ रुपये (~9.3 बिलियन डॉलर) | 20+ बिलियन डॉलर (Samsung, SK Hynix संयुक्त) |
| सरकारी नीति | PLI योजना (2022-27 के लिए 76,000 करोड़), सेमीकंडक्टर पॉलिसी 2022 | सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री प्रमोशन एक्ट (2019) |
| वैश्विक बाजार हिस्सेदारी | वर्तमान में नगण्य | 20% (2023) |
| निर्यात (2023) | न्यूनतम | 100 बिलियन डॉलर |
| निर्माण इकोसिस्टम | कच्चे माल और उपकरणों की कमी | एकीकृत अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम |
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकास में प्रमुख संस्थागत भूमिकाएँ
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): नीतियां बनाना और PLI योजना का क्रियान्वयन।
- उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT): औद्योगिक मंजूरी देना और FDI नीति की निगरानी।
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI): सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए पूंजी बाजार का नियमन।
- NITI आयोग: इकोसिस्टम विकास और नवाचार के लिए रणनीतिक सलाह।
- इंडियन सेल्युलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन (ICSI): उद्योग हितधारकों का प्रतिनिधित्व और सरकार-उद्योग संवाद।
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में प्रमुख कमियां
नीति समर्थन के बावजूद, भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कच्चे माल और उपकरणों के अपस्ट्रीम निर्माण की कमी है। सिलिकॉन वेफर्स और फोटोलिथोग्राफी मशीनें ज्यादातर आयातित हैं, जिससे निर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम बढ़ता है।
इसके विपरीत, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों ने इन अपस्ट्रीम क्षेत्रों को घरेलू स्तर पर विकसित कर लिया है, जिससे वे मूल्य श्रृंखला पर बेहतर नियंत्रण रखते हैं और आपूर्ति जोखिम कम करते हैं। यह कमी भारत की पूर्ण सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता हासिल करने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में बाधा है।
महत्व और आगे का रास्ता
- इन प्लांट्स के जरिए घरेलू चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने से आयात निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।
- अपस्ट्रीम कच्चे माल और उपकरण निर्माण का विकास जरूरी है ताकि एक टिकाऊ इकोसिस्टम बन सके।
- सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग से तकनीकी हस्तांतरण और नवाचार में तेजी आएगी।
- नियामकीय मंजूरियों को सरल बनाकर और पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करके वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित किया जा सकता है।
- दक्षिण कोरिया के समेकित नीति-उद्योग मॉडल से सीख लेकर भारत अपना सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित कर सकता है।
- PLI योजना केवल सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियों को प्रोत्साहित करती है, फैब्रिकेशन प्लांट को नहीं।
- इस योजना का बजट 2022-27 के लिए 76,000 करोड़ रुपये है जो बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देती है।
- सेमीकंडक्टर निर्माण में 100% FDI ऑटोमेटिक रूट के तहत अनुमति है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- भारत अपनी सेमीकंडक्टर जरूरतों का 90% से अधिक आयात करता है।
- FY 2023 में भारत का सेमीकंडक्टर आयात बिल लगभग 24 अरब डॉलर था।
- भारत वर्तमान में सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा वैश्विक निर्यातक है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत में दो नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट की कैबिनेट मंजूरी के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें। प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने में भारत को आर्थिक और नीतिगत चुनौतियों का विश्लेषण करें और इन चुनौतियों से निपटने के लिए उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 – आर्थिक विकास और औद्योगिक नीति
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्लस्टर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकास से लाभान्वित हो सकते हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला संबंध और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
- मुख्य बिंदु: उत्तरों में झारखंड की औद्योगिक संभावनाओं, सेमीकंडक्टर निवेश आकर्षित करने में चुनौतियों और केंद्र की PLI जैसी योजनाओं के साथ राज्य नीतियों की भूमिका को उजागर करें।
सेमीकंडक्टर के लिए PLI योजना क्या है?
PLI योजना एक सरकारी पहल है, जिसका बजट 2022-27 के लिए 76,000 करोड़ रुपये है, जो घरेलू बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब्रिकेशन को प्रोत्साहित करके आयात निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
भारत अपनी सेमीकंडक्टर जरूरतों का 90% से अधिक क्यों आयात करता है?
भारत में बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट और कच्चे माल एवं उपकरणों के अपस्ट्रीम निर्माण की कमी है, इसलिए घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भरता ज्यादा है।
संवैधानिक रूप से केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर प्लांट मंजूरी देने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त है?
केंद्र सरकार को यह अधिकार भारत के संविधान की अनुसूची VII के संघ सूची के प्रविष्टि 54 (उद्योग) और 42 (व्यापार और वाणिज्य) के तहत प्राप्त है, जो केंद्र को इन क्षेत्रों में कानून बनाने और नीतियां लागू करने का अधिकार देते हैं।
भारत की सेमीकंडक्टर नीति की तुलना दक्षिण कोरिया की नीति से कैसे की जा सकती है?
दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री प्रमोशन एक्ट (2019) ने एकीकृत अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम विकसित किया, जिससे 2023 में 20% वैश्विक बाजार हिस्सेदारी और 100 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जबकि भारत अभी नीति प्रोत्साहन जैसे PLI योजना के साथ इकोसिस्टम का विकास कर रहा है।
दो नए चिप प्लांट से अपेक्षित रोजगार लाभ क्या हैं?
दो नए सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट से लगभग 10,000 प्रत्यक्ष और 50,000 अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
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