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परिचय: संदर्भ और रणनीतिक आधार

Border Security Force (BSF), जो Border Security Force Act, 1968 के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करता है, ने भारत-बांग्लादेश सीमा के बिना बाड़ वाले नदी किनारे हिस्सों में सांप और मगरमच्छ जैसे सरीसृपों को प्राकृतिक रोकथाम के रूप में तैनात करने का प्रस्ताव दिया है। यह पहल लगभग 864 किमी बिना बाड़ वाली सीमा को लक्षित करती है, खासकर 174 किमी ऐसे हिस्सों को जो नदियों और कठिन भू-भाग के कारण बाड़ लगाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जैसे कि सुंदरबन क्षेत्र। यह योजना भौतिक बाड़ और गश्त के साथ-साथ पारिस्थितिक अवरोधों का उपयोग कर अवैध घुसपैठ और तस्करी को रोकने का प्रयास करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा – सीमा प्रबंधन, नवोन्मेषी सुरक्षा उपाय, पर्यावरण सुरक्षा
  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संपर्क
  • निबंध: सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता का संतुलन

भारत-बांग्लादेश सीमा: भौगोलिक और संचालन संबंधी चुनौतियां

  • भारत-बांग्लादेश सीमा कुल 4,096.7 किमी लंबी है, जो भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है (गृह मंत्रालय, 2024)।
  • इसमें से लगभग 3,232 किमी बाड़ लगी है, जबकि 864 किमी बिना बाड़ के हैं; इनमें से 174 किमी नदियों जैसे इचामति, रायमंगल और हरिभंगा के कारण बाड़ लगाने के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते, खासकर सुंदरबन क्षेत्र में (बीएसएफ वार्षिक रिपोर्ट, 2023; सर्वे ऑफ इंडिया, 2023)।
  • यह सीमा पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है, जिसमें सुंदरबन क्षेत्र पारिस्थितिक और संचालन संबंधी अनूठी चुनौतियां पेश करता है।

बीएसएफ संचालन और वन्यजीव उपयोग के लिए कानूनी एवं संवैधानिक ढांचा

  • Border Security Force Act, 1968 की धारा 3 बीएसएफ को भारत की सीमाओं की रक्षा और सीमा पार अपराधों को रोकने का अधिकार देती है।
  • Indian Wildlife (Protection) Act, 1972 की धाराएं 9 और 40 सांप और मगरमच्छ जैसे सरीसृपों की सुरक्षा और उपयोग को नियंत्रित करती हैं, जिसके तहत तैनाती से पहले पर्यावरण मंजूरी लेना आवश्यक है।
  • संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र को राज्यों की बाहरी आक्रमण से रक्षा का दायित्व देता है, जो बीएसएफ के कार्यक्षेत्र का आधार है।
  • सुप्रीम कोर्ट के M.C. Mehta v. Union of India (1987) जैसे फैसले विकास और सुरक्षा आवश्यकताओं के साथ पारिस्थितिक सुरक्षा के संतुलन पर जोर देते हैं, जो वन्यजीवों को रोकथाम के रूप में उपयोग के लिए प्रासंगिक है।

आर्थिक पहलू: प्राकृतिक रोकथाम की लागत-लाभ विश्लेषण

  • बीएसएफ का वार्षिक बजट वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए लगभग ₹13,000 करोड़ था (संघीय बजट 2024-25)।
  • भौतिक बाड़ लगाने की लागत औसतन ₹10 करोड़ प्रति किमी है (बीएसएफ आंतरिक आंकड़े, 2023), जिससे पूरी बिना बाड़ वाली सीमा को घेरना महंगा और जटिल हो जाता है।
  • भारत-बांग्लादेश सीमा बाड़ परियोजना ने पिछले दशक में ₹30,000 करोड़ से अधिक खर्च किया है।
  • सुंदरबन पारिस्थितिक क्षेत्र स्थानीय आजीविका को सालाना ₹2,000 करोड़ से अधिक का समर्थन देता है, जिसमें मछली पकड़ने और पर्यटन शामिल हैं (MoEFCC, 2023), इसलिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील सीमा प्रबंधन जरूरी है।
  • प्राकृतिक रोकथाम से रखरखाव और निर्माण लागत कम हो सकती है, साथ ही पारिस्थितिक संतुलन और स्थानीय अर्थव्यवस्था भी संरक्षित रहेगी।

प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिकाएं

  • Border Security Force (BSF): सीमा सुरक्षा और नवाचारों के क्रियान्वयन की मुख्य एजेंसी।
  • गृह मंत्रालय (MHA): नीति निर्धारण और बीएसएफ संचालन की प्रशासनिक निगरानी।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): पर्यावरण मंजूरी प्रदान करता है और वन्यजीव संरक्षण कानूनों का पालन सुनिश्चित करता है।
  • Wildlife Institute of India (WII): पारिस्थितिक प्रभाव आकलन और वन्यजीव सुरक्षा रणनीतियों पर सलाह देता है।
  • Bangladesh Border Guard (BGB): प्राकृतिक नदी अवरोध और सामुदायिक निगरानी का उपयोग करता है, जो एक तुलना योग्य मॉडल प्रदान करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा रणनीतियां

पहलू भारत बांग्लादेश
सीमा लंबाई 4,096.7 किमी 4,096.7 किमी (साझा)
बाड़ कवरेज लगभग 3,232 किमी बाड़; 864 किमी बिना बाड़ भौतिक बाड़ पर कम निर्भरता; प्राकृतिक नदी अवरोधों पर जोर
प्राकृतिक रोकथाम का उपयोग नदी किनारे हिस्सों में सरीसृपों (सांप, मगरमच्छ) के उपयोग का प्रस्ताव सुंदरबन में सक्रिय वन्यजीव रोकथाम और सामुदायिक निगरानी
अवैध घुसपैठ में कमी बाड़ और गश्त पर अधिक निर्भरता; पारिस्थितिक समावेशन सीमित पिछले 5 वर्षों में 15% कमी, प्राकृतिक और सामुदायिक उपायों के कारण (बांग्लादेश गृह मंत्रालय, 2022)
पर्यावरण प्रभाव ध्यान उभरता हुआ फोकस; सुरक्षा और पारिस्थितिकी में संतुलन की चुनौतियां सीमा क्षेत्रों में स्थापित सामुदायिक आधारित पारिस्थितिक प्रबंधन

वर्तमान सीमा सुरक्षा रणनीति में प्रमुख कमियां

  • सुंदरबन जैसे नदी किनारे और वन क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को भौतिक बाड़ और गश्त पर्याप्त रूप से नहीं संभाल पाती।
  • पर्यावरण और सामुदायिक कारकों का समुचित समावेशन न होने से लागू करने में दिक्कतें और पारिस्थितिक क्षति होती है।
  • Wildlife (Protection) Act के तहत कानूनी जटिलताएं और पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता नवाचारों को धीमा करती है।
  • बीएसएफ, MoEFCC और पारिस्थितिक विशेषज्ञों के बीच सीमित समन्वय सतत सुरक्षा समाधान को रोकता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • सरीसृपों को प्राकृतिक रोकथाम के रूप में तैनात करने से गैर-योग्य क्षेत्रों में बाड़ की लागत और पारिस्थितिक नुकसान कम हो सकता है, साथ ही पर्यावरण कानूनों का पालन भी सुनिश्चित होगा।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और Wildlife (Protection) Act का पालन आवश्यक है ताकि कानूनी चुनौतियों से बचा जा सके।
  • बीएसएफ, MoEFCC और WII के बीच समन्वय पारिस्थितिक प्रभाव पर निगरानी और वन्यजीवों के मानवीय व्यवहार के लिए जरूरी है।
  • सामुदायिक भागीदारी और बांग्लादेश के BGB के साथ सहयोग से निगरानी बेहतर होगी और अवैध गतिविधियां कम होंगी।
  • ड्रोन, सेंसर जैसे तकनीकी साधनों के साथ पारिस्थितिक रोकथाम को मिलाकर बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-बांग्लादेश सीमा पर सरीसृपों के उपयोग के बीएसएफ प्रस्ताव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह प्रस्ताव Border Security Force Act, 1968 के अंतर्गत आता है।
  2. Indian Wildlife (Protection) Act, 1972 सुरक्षा संचालन में सरीसृपों के उपयोग को नियंत्रित नहीं करता।
  3. संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र को राज्यों की बाहरी आक्रमण से रक्षा का दायित्व देता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि बीएसएफ का संचालन Border Security Force Act, 1968 के तहत होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Indian Wildlife (Protection) Act, 1972 सरीसृपों के उपयोग को नियंत्रित करता है और पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य करता है। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 355 केंद्र को बाहरी आक्रमण से राज्यों की रक्षा का दायित्व देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-बांग्लादेश सीमा बाड़ के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. बाड़ भारत-बांग्लादेश सीमा के 3,200 किमी से अधिक हिस्से को कवर करती है।
  2. सभी बिना बाड़ वाले हिस्से बाड़ के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन बजट की कमी के कारण बाड़ नहीं लगी है।
  3. सुंदरबन क्षेत्र बाड़ लगाने में पारिस्थितिक चुनौतियां प्रस्तुत करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि बाड़ लगभग 3,232 किमी तक लगी है। कथन 2 गलत है क्योंकि कुछ बिना बाड़ वाले हिस्से नदियों और भू-भाग की वजह से बाड़ के लिए उपयुक्त नहीं हैं, केवल बजट की कमी की वजह से नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि सुंदरबन की पारिस्थितिकी बाड़ लगाने में जटिलताएं पैदा करती है।

मुख्य प्रश्न

भारत-बांग्लादेश सीमा के बिना बाड़ वाले नदी किनारे हिस्सों में बीएसएफ द्वारा सरीसृपों को प्राकृतिक रोकथाम के रूप में उपयोग करने के प्रस्ताव के रणनीतिक और पारिस्थितिक प्रभावों पर चर्चा करें। यह तरीका सुरक्षा आवश्यकताओं को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ कैसे संतुलित कर सकता है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन
  • झारखंड संदर्भ: झारखंड भारत-बांग्लादेश सीमा से नहीं जुड़ा है, लेकिन सीमा सुरक्षा में पारिस्थितिक समावेशन के अनुभव नेपाल और अन्य राज्यों के वन्य और आदिवासी सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रबंधन में मददगार हो सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: पारिस्थितिक संवेदनशीलता को सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर उत्तर तैयार करें, संस्थागत समन्वय और सतत प्रथाओं पर जोर दें जो झारखंड के सीमावर्ती जिलों के लिए प्रासंगिक हैं।
बीएसएफ की सीमा सुरक्षा भूमिका को कौन-कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

Border Security Force Act, 1968 बीएसएफ के संचालन को नियंत्रित करता है, जिसमें धारा 3 बीएसएफ को भारत की सीमाओं की रक्षा का अधिकार देती है। इसके अलावा, संविधान का अनुच्छेद 355 केंद्र को राज्यों की बाहरी आक्रमण से रक्षा का दायित्व देता है।

भारत-बांग्लादेश सीमा के किन हिस्सों में बाड़ लगाना संभव नहीं है और क्यों?

लगभग 174 किमी सीमा नदियों (इचामति, रायमंगल, हरिभंगा), बाढ़ और कठिन भू-भाग के कारण बिना बाड़ के हैं, विशेषकर सुंदरबन के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में, जहां भौतिक बाड़ लगाना व्यावहारिक नहीं है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 सरीसृपों के सीमा सुरक्षा में उपयोग को कैसे प्रभावित करता है?

अधिनियम की धाराएं 9 और 40 सरीसृपों की सुरक्षा और उनके उपयोग को नियंत्रित करती हैं, जिसके तहत तैनाती से पहले पर्यावरणीय मंजूरी लेना आवश्यक होता है ताकि वन्यजीवों को नुकसान या अवैध शोषण से बचाया जा सके।

प्राकृतिक रोकथाम के उपयोग से आर्थिक लाभ क्या हो सकते हैं?

प्राकृतिक रोकथाम से बाड़ लगाने और रखरखाव की लागत (₹10 करोड़ प्रति किमी) कम हो सकती है, सुंदरबन में ₹2,000 करोड़ से अधिक की आजीविका संरक्षित रहती है, और पारिस्थितिक नुकसान भी न्यूनतम होता है।

बांग्लादेश भारत के साथ अपनी सीमा को कैसे प्रबंधित करता है?

बांग्लादेश प्राकृतिक नदी अवरोधों और सामुदायिक निगरानी पर अधिक निर्भर करता है, जिसमें वन्यजीव रोकथाम भी शामिल है, जिससे पिछले पांच वर्षों में अवैध घुसपैठ में 15% की कमी आई है (बांग्लादेश गृह मंत्रालय, 2022)।

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