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परिचय: जैव प्रौद्योगिकी और भारत की बायोइकोनॉमी में पोषण

भारत की जैव प्रौद्योगिकी उद्योग देश की बायोइकोनॉमी का एक अहम स्तंभ है, जिसकी 2023 में अनुमानित कीमत लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर है, जैसा कि Department of Biotechnology (DBT) की रिपोर्ट में बताया गया है। यह क्षेत्र जीन संपादन, बायोप्रिंटिंग और जैविक संसाधनों के सतत उपयोग जैसी नवाचारों को अपनाकर मानव और पशु पोषण को बेहतर बनाने में सक्रिय है। Environment Protection Act, 1986 और Biological Diversity Act, 2002 जैसे नियामक कानूनों के साथ-साथ Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) और Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) जैसे संस्थान इस उद्योग के विकास को समर्थन देते हैं। ये पहलें आर्थिक वृद्धि, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में योगदान करती हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: कृषि और पशुपालन में जैव प्रौद्योगिकी, बायोइकोनॉमी, खाद्य सुरक्षा, और नियामक ढांचे
  • GS पेपर 2: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जैविक विविधता अधिनियम, और जैव प्रौद्योगिकी के संस्थागत शासन
  • निबंध: सतत विकास और पोषण सुरक्षा में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका

बायोइकोनॉमी की परिभाषा और इसके घटक

बायोइकोनॉमी का मतलब है नवीनीकृत जैविक संसाधनों का उत्पादन और उन्हें खाद्य, जैव-आधारित उत्पादों और ऊर्जा में परिवर्तित करना। यह कृषि, पशुपालन और औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को जोड़ती है। जीन संपादन (जैसे CRISPR-Cas9) और बायोप्रिंटिंग जैसी तकनीकें जीवों को पोषण संबंधी गुणों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए सटीक रूप से संशोधित करने में मदद करती हैं।

  • बायोइकोनॉमी सर्कुलर इकॉनमी के सिद्धांतों को अपनाकर बायोमास को पुनःचक्रित करती है और कचरे को कम करती है।
  • डिजिटल तकनीकों के साथ एकीकरण से जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों में ट्रेसबिलिटी और दक्षता बढ़ती है।
  • यह रासायनिक इनपुट और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करती है।

भारत का जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र: आकार, विकास और उपक्षेत्र

भारत विश्व के शीर्ष 12 जैव प्रौद्योगिकी गंतव्यों में शामिल है और वैश्विक बायोइकोनॉमी में इसका योगदान 3% है (Biospectrum India Report, 2023)। इस क्षेत्र का बाजार आकार 2014 में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023 में 70 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, और 2023-2028 के बीच 15-20% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) की उम्मीद है (DBT वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। पशु पोषण क्षेत्र, जो बायोटेक फीड एडिटिव्स और प्रोबायोटिक्स से संचालित है, 8% वार्षिक वृद्धि दर पर बढ़ने का अनुमान है (FICCI रिपोर्ट, 2023)।

  • जैव प्रौद्योगिकी के उपक्षेत्रों में बायोफार्मास्यूटिकल्स, बायो-एग्रीकल्चर, बायो-आईटी और बायो-सर्विसेज शामिल हैं।
  • सरकार ने 2023-24 में जैव प्रौद्योगिकी के लिए 2800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो ट्रांसलेशनल रिसर्च पर केंद्रित है।
  • जैव प्रौद्योगिकी निर्यात 2022-23 में 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो सालाना 12% की दर से बढ़ रहा है।

भारत में जैव प्रौद्योगिकी के नियामक ढांचे

भारत में जैव प्रौद्योगिकी का नियमन मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिनियमों के तहत होता है:

  • Environment Protection Act, 1986: धारा 6 और 1989 के नियम खतरनाक सूक्ष्मजीवों और जीन संशोधित जीवों के निर्माण, उपयोग, आयात, निर्यात और भंडारण को नियंत्रित करते हैं।
  • Biological Diversity Act, 2002: धारा 3-6 जैविक संसाधनों तक पहुंच और लाभ साझा करने के नियम निर्धारित करती हैं।
  • Food Safety and Standards Act, 2006: धारा 22-24 जैव प्रौद्योगिकी से प्राप्त खाद्य उत्पादों के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों और एडिटिव्स को नियंत्रित करती हैं।

Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC), जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन है, जीन संशोधित जीवों (GMOs) की पर्यावरणीय रिलीज को मंजूरी देने वाली शीर्ष संस्था है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े खाद्य उत्पादों की सुरक्षा मानकों की देखरेख करता है।

जैव प्रौद्योगिकी नवाचार और नियमन में प्रमुख संस्थान

  • Department of Biotechnology (DBT): नीति निर्धारण, वित्त पोषण और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास का समन्वय करता है।
  • Indian Council of Agricultural Research (ICAR): कृषि और पशुपालन में जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को लागू करता है।
  • Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC): GMOs के लिए नियामक प्राधिकरण।
  • Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI): जैव प्रौद्योगिकी से प्राप्त खाद्य उत्पादों के लिए खाद्य सुरक्षा का नियमन।
  • ICAR-National Institute on Veterinary Epidemiology and Disease Informatics (NIVEDI): पशु पोषण और स्वास्थ्य अनुसंधान पर केंद्रित।
  • Biotechnology Industry Research Assistance Council (BIRAC): जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स और उद्योग-अकादमी सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारत और अमेरिका की जैव प्रौद्योगिकी और बायोइकोनॉमी की तुलनात्मक समीक्षा

पहलू भारत अमेरिका
बायोइकोनॉमी मूल्य (2023) लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर (DBT) 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक (US Dept. of Commerce, 2023)
वृद्धि दर 15-20% CAGR (2023-28) 5-7% CAGR
नियामक ढांचा Environment Protection Act, Biological Diversity Act के तहत GEAC; मंजूरी में विखंडन Coordinated Framework for Regulation of Biotechnology; सुव्यवस्थित व्यावसायीकरण
नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र उभरता हुआ, सरकारी वित्त पोषण और BIRAC समर्थन के साथ; सीमित सार्वजनिक-निजी भागीदारी परिपक्व, उद्योग-अकादमी-सरकार सहयोग के साथ एकीकृत
पशु पोषण जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र 8% अनुमानित CAGR; प्रोबायोटिक्स और फीड एडिटिव्स पर ध्यान उन्नत जैव प्रौद्योगिकी फीड फॉर्मूलेशन और आनुवंशिक सुधार

भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की चुनौतियाँ और महत्वपूर्ण अंतर

  • नियामक देरी और जटिल मंजूरी प्रक्रियाएँ तेजी से व्यावसायीकरण में बाधा डालती हैं।
  • मंत्रालयों और राज्यों में नीति कार्यान्वयन में विखंडन दक्षता को कम करता है।
  • सीमित सार्वजनिक-निजी भागीदारी अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने में रुकावट है।
  • अवसंरचना की कमी और वित्तीय प्रतिबंध ट्रांसलेशनल रिसर्च को प्रभावित करते हैं।
  • डिजिटल एकीकरण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की धीमी अपनाने की दर वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से पीछे है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • GEAC और FSSAI की मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर नियामक बाधाओं को कम करना।
  • DBT, ICAR और उद्योग हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाकर केंद्रित ट्रांसलेशनल रिसर्च को प्रोत्साहित करना।
  • BIRAC और समान प्लेटफार्मों के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा देना।
  • AI और बिग डेटा जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर सटीक पोषण और निगरानी को बढ़ाना।
  • पशु पोषण जैव प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाकर पशुधन उत्पादकता और पोषण सुरक्षा में सुधार करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में जैव प्रौद्योगिकी नियमन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  2. Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) पर्यावरण में जीन संशोधित जीवों (GMOs) के रिलीज को नियंत्रित करता है।
  3. Biological Diversity Act, 2002 जैविक संसाधनों तक पहुंच और लाभ साझा करने को नियंत्रित करता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि GEAC MoEFCC के अधीन काम करता है। कथन 3 सही है क्योंकि Biological Diversity Act जैविक संसाधनों तक पहुंच और लाभ साझा करने को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि FSSAI खाद्य सुरक्षा का नियमन करता है लेकिन पर्यावरण में GMO रिलीज को नियंत्रित नहीं करता।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की बायोइकोनॉमी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत की बायोइकोनॉमी ने 2023 में राष्ट्रीय GDP में लगभग 4.25% का योगदान दिया।
  2. भारत के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग के पशु पोषण क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर 15% अनुमानित है।
  3. भारत विश्व के शीर्ष 12 जैव प्रौद्योगिकी गंतव्यों में शामिल है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि बायोइकोनॉमी ने GDP में 4.25% का योगदान दिया है। कथन 3 सही है क्योंकि भारत शीर्ष 12 जैव प्रौद्योगिकी गंतव्यों में है। कथन 2 गलत है; पशु पोषण क्षेत्र की वृद्धि दर 15% नहीं बल्कि 8% अनुमानित है।

मेन प्रश्न

भारत में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग मानवीय और पशु पोषण में कैसे प्रगति कर रहा है, इस पर चर्चा करें। इस विकास में नियामक ढांचे और प्रमुख संस्थानों की भूमिका को उजागर करें तथा क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 - कृषि और पशुपालन; पशुधन पोषण में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के पशुपालन क्षेत्र को जैव प्रौद्योगिकी फीड एडिटिव्स और प्रोबायोटिक्स से पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता सुधार में लाभ हो सकता है, जिससे ग्रामीण आजीविका मजबूत हो।
  • मेन पॉइंटर: राज्य-विशिष्ट पशुपालन चुनौतियों को जैव प्रौद्योगिकी समाधानों और ICAR-NIVEDI तथा DBT पहलों के संस्थागत समर्थन से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत में Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) की भूमिका क्या है?

GEAC पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत शीर्ष नियामक संस्था है, जो Environment Protection Act, 1986 और संबंधित नियमों के अनुसार जीन संशोधित जीवों (GMOs) और जीन संशोधित उत्पादों की पर्यावरणीय रिलीज को मंजूरी देती है।

जैव प्रौद्योगिकी पशु पोषण में कैसे योगदान देती है?

जैव प्रौद्योगिकी फीड एडिटिव्स, प्रोबायोटिक्स और आनुवंशिक रूप से सुधारे गए पशु नस्लों के विकास के जरिये पशु पोषण को बेहतर बनाती है, जिससे चारे की दक्षता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और कुल उत्पादकता बढ़ती है।

भारत में जैव प्रौद्योगिकी नियमन किन अधिनियमों के तहत होता है?

मुख्य कानूनों में Environment Protection Act, 1986 (1989 के नियम सहित), Biological Diversity Act, 2002, और Food Safety and Standards Act, 2006 शामिल हैं, जो GMO मंजूरी, जैविक संसाधनों तक पहुंच और खाद्य सुरक्षा को नियंत्रित करते हैं।

भारत का 2030 तक बायोइकोनॉमी विकास लक्ष्य क्या है?

भारत 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की बायोइकोनॉमी हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जो कृषि, पशु पोषण, स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों पर आधारित है।

भारत का जैव प्रौद्योगिकी नियामक ढांचा अमेरिका की तुलना में कैसा है?

भारत का नियामक ढांचा कई अधिनियमों और समितियों जैसे GEAC के तहत आता है, जिसमें अक्सर देरी होती है, जबकि अमेरिका के पास एक सुव्यवस्थित Coordinated Framework है जो तेज व्यावसायीकरण और समन्वित निगरानी को संभव बनाता है।

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