परिचय: संदर्भ और महत्व
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO, 2023) के अनुसार, ठोस ईंधनों से होने वाला घरेलू वायु प्रदूषण विश्वभर में हर साल लगभग 3.8 मिलियन समयपूर्व मौतों का कारण बनता है। भारत में लगभग 40% ग्रामीण परिवार बायोमास चूल्हों पर निर्भर हैं, जो घर के अंदर वायु प्रदूषण और श्वसन रोगों को बढ़ावा देते हैं। सरकार ने 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत LPG चूल्हों को बढ़ावा दिया है, जिससे गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को 10 करोड़ से अधिक LPG कनेक्शन मिल चुके हैं (MoPNG वार्षिक रिपोर्ट 2023)। यह लेख बायोमास चूल्हों को LPG चूल्हों के मुकाबले प्रदूषण, लागत, स्वास्थ्य प्रभाव और नीतिगत समर्थन के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जा सकता है या नहीं, इसका विश्लेषण करता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: पर्यावरण - वायु प्रदूषण, सरकारी योजनाएं (PMUY, राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा मिशन)
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था - ऊर्जा सब्सिडी, ग्रामीण ऊर्जा पहुंच
- निबंध: स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और सार्वजनिक स्वास्थ्य
प्रदूषण और स्वास्थ्य प्रभाव की तुलना
परंपरागत बायोमास चूल्हे उच्च स्तर पर कण पदार्थ (PM2.5) और कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ते हैं, जो सुरक्षित सीमा से काफी अधिक है। सुधारित बायोमास चूल्हे पारंपरिक चूल्हों की तुलना में कण उत्सर्जन को लगभग 50% तक कम करते हैं (TERI, 2022), लेकिन फिर भी LPG चूल्हों की तुलना में प्रदूषण बहुत अधिक करते हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB, 2023) के अनुसार, LPG चूल्हे परंपरागत बायोमास चूल्हों की तुलना में 1% से भी कम कण पदार्थ उत्सर्जित करते हैं।
- भारत के राष्ट्रीय रोग भार का 6% हिस्सा घरेलू वायु प्रदूषण से जुड़ा है (राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल, 2023)।
- WHO के अनुमान के अनुसार, घरेलू वायु प्रदूषण श्वसन रोग, हृदय रोग और विश्व स्तर पर 4 मिलियन समयपूर्व मौतों से जुड़ा है।
- बायोमास ईंधन के जलने से घर के अंदर और बाहरी वायु दोनों प्रदूषित होती है, जिससे शहरी वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
आर्थिक पहलू: लागत और सब्सिडी
बायोमास ईंधन इकट्ठा करना आमतौर पर मुफ्त होता है, लेकिन इसमें काफी समय लगता है, जो खासकर ग्रामीण परिवारों और महिलाओं के लिए अवसर लागत बन जाती है। LPG सिलेंडर की प्रति रिफिल लागत औसतन ₹500-600 है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24), लेकिन PMUY के तहत सब्सिडी मिलने से गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के लिए यह लागत कम हो जाती है। सरकार ने 2023-24 में LPG सब्सिडी के लिए ₹8,000 करोड़ आवंटित किए हैं, जो स्वच्छ रसोई ईंधन के प्रति मजबूत वित्तीय प्रतिबद्धता दर्शाता है।
- 2016 से PMUY के तहत 10 करोड़ से अधिक LPG कनेक्शन वितरित किए गए हैं, जिससे स्वच्छ ईंधन की पहुंच बढ़ी है।
- ग्रामीण भारत में बायोमास चूल्हों की पहुंच लगभग 40% है, लेकिन सुधारित चूल्हों को अपनाने की दर कम है, जिसके पीछे व्यवहारिक और अवसंरचनात्मक बाधाएं हैं।
- बायोमास उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी बाहरी लागतें उत्पादकता में कमी और स्वास्थ्य खर्च के रूप में छिपी हुई आर्थिक हानि उत्पन्न करती हैं।
नीति और संस्थागत ढांचा
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा मिशन के तहत बायोमास ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा देता है, जिसमें सुधारित चूल्हे और बायोमास गैसीकरण शामिल हैं। वहीं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) LPG वितरण और PMUY जैसी सब्सिडी योजनाओं को लागू करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) वायु गुणवत्ता की निगरानी करता है और उत्सर्जन मानकों को लागू करता है। न्यायपालिका, खासकर MC मेहता बनाम भारत संघ (1996) के मामले में, ने वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत स्वच्छ रसोई ईंधन के प्रचार का आदेश दिया है।
- MNRE के सुधारित चूल्हे कार्यक्रमों में प्रभावी निगरानी और व्यवहारिक बदलाव के लिए निरंतर प्रयासों की कमी है।
- PMUY की सफलता सीधे सब्सिडी और LPG वितरण के बुनियादी ढांचे से जुड़ी है।
- TERI के शोध में तकनीक, वित्तपोषण और जागरूकता को मिलाकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत और केन्या
| पहलू | भारत | केन्या |
|---|---|---|
| LPG उपयोग में वृद्धि | 2016 से 10 करोड़ से अधिक कनेक्शन (PMUY) | 2015 में 15% से बढ़कर 2022 में 30% (केन्या ऊर्जा मंत्रालय, 2023) |
| सब्सिडी तंत्र | ₹8,000 करोड़ की प्रत्यक्ष सब्सिडी (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24) | लक्षित सब्सिडी और अवसंरचना विकास |
| स्वास्थ्य परिणाम | घरेलू वायु प्रदूषण से 6% रोग भार | LPG प्रचार से श्वसन रोगों में 25% कमी |
| बायोमास चूल्हा अपनाना | ग्रामीण क्षेत्र में 40% पहुंच, सुधारित चूल्हों का कम उपयोग | सीमित डेटा, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बायोमास प्रचलित |
बायोमास चूल्हा अपनाने में प्रमुख चुनौतियां
उपलब्धता के बावजूद, सुधारित बायोमास चूल्हों का लगातार उपयोग कम है, जिसका कारण व्यवहार में जड़ता, ईंधन इकट्ठा करने की असुविधा और उत्सर्जन की निगरानी का अभाव है। कई कार्यक्रम वास्तविक उत्सर्जन में कमी को मापने में विफल रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य लाभ सीमित रहते हैं। इसके अलावा, बायोमास जलने से स्वाभाविक रूप से प्रदूषक निकलते हैं, जो LPG की स्वच्छता तक पहुंचना कठिन बनाता है।
- ईंधन स्टैकिंग: परिवार अक्सर LPG और बायोमास दोनों का उपयोग करते हैं, जिससे कुल लाभ कम होता है।
- बायोमास इकट्ठा करने में लगने वाला समय महिलाओं और बच्चों पर अधिक प्रभाव डालता है।
- जागरूकता की कमी और प्रारंभिक लागत सुधारित चूल्हों को अपनाने में बाधा हैं।
सारांश तालिका: बायोमास चूल्हे बनाम LPG चूल्हे
| पैरामीटर | बायोमास चूल्हे | LPG चूल्हे |
|---|---|---|
| ईंधन लागत | लगभग शून्य (इकट्ठा करने में समय की लागत) | ₹500-600 प्रति रिफिल (सब्सिडी सहित) |
| उत्सर्जन स्तर | उच्च PM2.5 और CO; सुधारित चूल्हे ~50% तक कम करते हैं | परंपरागत बायोमास की तुलना में 1% से भी कम कण पदार्थ |
| स्वास्थ्य प्रभाव | उच्च घरेलू वायु प्रदूषण; श्वसन रोगों से जुड़ा | न्यूनतम घरेलू प्रदूषण; बेहतर स्वास्थ्य परिणाम |
| सरकारी समर्थन | MNRE के कार्यक्रम, सीमित पैमाना और निगरानी | PMUY और MoPNG के तहत सब्सिडी; व्यापक वितरण |
| अपनाने की दर | ग्रामीण 40%; सुधारित चूल्हों का कम उपयोग | 10 करोड़ से अधिक कनेक्शन; शहरी और ग्रामीण उपयोग बढ़ रहा है |
आगे का रास्ता
- LPG अवसंरचना का विस्तार करें और ईंधन स्टैकिंग को कम करने के लिए सब्सिडी का सतत समर्थन सुनिश्चित करें।
- बायोमास चूल्हा कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन बेहतर बनाएं ताकि उत्सर्जन में कमी की पुष्टि हो सके।
- ग्रामीण परिवारों में स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए व्यवहारिक बदलाव के अभियान चलाएं।
- ऊर्जा नीति में स्वास्थ्य प्रभाव के आकलन को शामिल करें ताकि अनुच्छेद 21 (स्वास्थ्य का अधिकार) के अनुरूप हो।
- केन्या जैसे अंतरराष्ट्रीय मॉडल से सब्सिडी डिजाइन और अवसंरचना विकास के लिए सीखें।
- सुधारित बायोमास चूल्हे सभी कण पदार्थ उत्सर्जन को समाप्त कर देते हैं।
- LPG चूल्हे परंपरागत बायोमास चूल्हों की तुलना में 1% से भी कम कण पदार्थ उत्सर्जित करते हैं।
- PMUY ने 2016 से 10 करोड़ से अधिक LPG कनेक्शन वितरित किए हैं।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा मिशन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को LPG कनेक्शन प्रदान करना है।
- सुप्रीम कोर्ट ने MC मेहता बनाम भारत संघ मामले में स्वच्छ रसोई ईंधन के प्रचार पर जोर दिया।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत में बायोमास चूल्हों को LPG का स्वच्छ और सस्ता विकल्प मानने की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। स्वास्थ्य, आर्थिक और नीतिगत पहलुओं पर चर्चा करें, साथ ही संबंधित सरकारी योजनाओं और आंकड़ों का हवाला दें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), पेपर 3 (आर्थिक विकास और ऊर्जा)
- झारखंड का दृष्टिकोण: ग्रामीण आबादी अधिक बायोमास ईंधन पर निर्भर; आदिवासी और वन क्षेत्र में PMUY जैसी योजनाएं LPG पहुंचा रही हैं।
- मुख्य बिंदु: स्वच्छ ईंधन अपनाने में राज्य विशेष चुनौतियों, घरेलू प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभाव, और MNRE एवं MoPNG योजनाओं के समन्वय को उजागर करें।
बायोमास चूल्हे LPG की तुलना में कम स्वच्छ क्यों माने जाते हैं?
बायोमास चूल्हे ठोस ईंधन के अधूरा दहन के कारण उच्च मात्रा में कण पदार्थ और कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं। सुधारित बायोमास चूल्हे उत्सर्जन को लगभग 50% तक कम करते हैं, जबकि LPG चूल्हे पारंपरिक बायोमास की तुलना में 1% से भी कम कण पदार्थ उत्सर्जित करते हैं (CPCB, 2023)।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) का क्या महत्व है?
PMUY, जो 2016 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा शुरू की गई, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं को LPG कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। इस योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं, जिससे स्वच्छ रसोई ईंधन की पहुंच बढ़ी है और घरेलू वायु प्रदूषण कम हुआ है (MoPNG वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।
बायोमास से होने वाला घरेलू वायु प्रदूषण स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
बायोमास जलने से उत्पन्न घरेलू वायु प्रदूषण श्वसन रोग, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है, जो भारत के राष्ट्रीय रोग भार का 6% हिस्सा है (राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल, 2023)। WHO के अनुमान के अनुसार, यह विश्व स्तर पर हर साल 3.8 मिलियन समयपूर्व मौतों से जुड़ा है।
सुधारित बायोमास चूल्हों को बढ़ावा देने में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
मुख्य चुनौतियों में व्यवहार में जड़ता, निरंतर उपयोग की कमी, उत्सर्जन कमी की निगरानी का अभाव, और ईंधन इकट्ठा करने में लगने वाला समय शामिल है। ये कारण स्वास्थ्य लाभों को सीमित करते हैं, भले ही चूल्हे उपलब्ध हों (TERI, 2022)।
भारत में बायोमास और LPG प्रचार के लिए कौन-कौन से मंत्रालय जिम्मेदार हैं?
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) बायोमास ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा देता है, जबकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) LPG वितरण और PMUY जैसी सब्सिडी योजनाओं को लागू करता है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
लर्नप्रो की संपादकीय सामग्री सिविल सेवा तैयारी में अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा शोधित और समीक्षित है। हमारे लेख सरकारी स्रोतों, NCERT पाठ्यपुस्तकों, मानक संदर्भ सामग्री और प्रतिष्ठित प्रकाशनों जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस और PIB से लिए गए हैं।
सामग्री को नवीनतम पाठ्यक्रम परिवर्तनों, परीक्षा पैटर्न और वर्तमान घटनाक्रमों के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। सुधार या प्रतिक्रिया के लिए admin@learnpro.in पर संपर्क करें।
