अपडेट

परिप्रेक्ष्य और महत्व

संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और रूस के बीच बढ़ती बड़ी ताकतों की टकराहट के बीच भारत के लिए रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वित्त जैसे अहम क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करना रणनीतिक दृष्टि से अनिवार्य हो गया है। ये देश व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, वित्तीय प्रणालियों और तकनीकी पहुंच को हथियार बनाकर भू-राजनीतिक नतीजों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। भारत का संविधान, विशेषकर Article 246, संसद को रक्षा, व्यापार और विदेशी मामलों में कानून बनाने का अधिकार देता है, जो रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत करने वाली नीतियों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत की विदेश नीति, रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा खरीद सुधार।
  • GS पेपर 3: आर्थिक आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, व्यापार नीति।
  • निबंध: बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भू-राजनीतिक रणनीति; आत्मनिर्भरता बनाम संरक्षणवाद।

ऐतिहासिक बाहरी निर्भरताएं और उनसे मिली सीख

  • खाद्य सुरक्षा: 1960 के दशक में PL-480 कार्यक्रम के तहत अमेरिका से खाद्य सहायता पर निर्भरता ने 1965-67 के सूखे के दौरान कमजोरियां उजागर कीं। इस संकट ने ग्रीन रिवॉल्यूशन को जन्म दिया, जिससे गेहूं की पैदावार 1965 में 12 मिलियन टन से बढ़कर 2020 में 107 मिलियन टन हो गई और खाद्य आत्मनिर्भरता स्थापित हुई (कृषि मंत्रालय)।
  • रक्षा उपकरण: 1962 के चीन-भारत युद्ध में देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की कमी सामने आई। इसके बाद आधुनिकीकरण और रक्षा साझेदारियों में विविधता आई, जो Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 में परिणत हुई, जिसके तहत 2025 तक स्वदेशी खरीद को 68% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है (रक्षा मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • ऊर्जा निर्भरता: 1990 के गल्फ युद्ध ने तेल की कीमतों में उछाल और प्रवासी मजदूरों की रेमिटेंस में गिरावट से 1991 के भुगतान संतुलन संकट को बढ़ावा दिया। भारत की कच्चे तेल की आयात निर्भरता अभी भी 85% है, और वित्तीय वर्ष 2023 में इसका आयात बिल 180 अरब डॉलर रहा (पेट्रोलियम मंत्रालय)।
  • विदेशी मुद्रा जोखिम: 1991 के आर्थिक संकट ने बाहरी वित्तीय निर्भरता के जोखिमों को उजागर किया। तब से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार जून 2024 तक 642 अरब डॉलर तक बढ़ गए हैं, जो बाहरी झटकों से सुरक्षा प्रदान करते हैं (RBI)।

रणनीतिक स्वायत्तता के समकालीन चुनौतियां

  • ऊर्जा सुरक्षा: अस्थिर पश्चिम एशिया से उच्च कच्चे तेल की आयात निर्भरता भारत को आपूर्ति में रुकावट और मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • तकनीकी निर्भरता: भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता 5% से भी कम है, जबकि चीन की घरेलू हिस्सेदारी 60% है, जो उसके Made in China 2025 नीति से प्रेरित है (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय, चीन उद्योग मंत्रालय)।
  • आर्थिक साधनों का हथियार के रूप में इस्तेमाल: प्रमुख शक्तियां प्रतिबंध, निर्यात नियंत्रण और वित्तीय पाबंदियों का भू-राजनीतिक दबाव के उपकरण के रूप में उपयोग बढ़ा रही हैं।
  • व्यापार असंतुलन: 2023 में भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 60 अरब डॉलर था, कुल व्यापार 125 अरब डॉलर पर, जो संरचनात्मक निर्भरताओं को दर्शाता है (वाणिज्य मंत्रालय)।
  • नीति का खंडित स्वरूप: दुर्लभ पृथ्वी खनिज और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए भारत की एकीकृत औद्योगिक नीति का अभाव रणनीतिक स्वायत्तता को कमजोर करता है।

आत्मनिर्भरता के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

  • Article 246 संसद को रक्षा, व्यापार और विदेशी मामलों में विधायी शक्ति देता है, जिससे नीति निर्धारण में सामंजस्य आता है।
  • Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 स्वदेशी रक्षा निर्माण को प्राथमिकता देता है, जिससे 2014 के 70% आयात निर्भरता को 2023 तक 45% तक कम किया गया है (रक्षा मंत्रालय)।
  • Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 व्यापार नीति और निर्यात-आयात नियंत्रण जैसे उपकरणों को नियंत्रित करता है, जो रणनीतिक क्षेत्रों के प्रबंधन में जरूरी हैं।
  • Energy Conservation Act, 2001 ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देता है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से आयात निर्भरता घटती है।
  • National Security Act, 1980 राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान देता है।
  • सुप्रीम कोर्ट का Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) मामला भारतीय राज्य की संप्रभुता और स्वायत्तता को मान्यता देता है, जो रणनीतिक स्वायत्तता का संवैधानिक आधार है।

आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख संस्थान

  • DRDO (Defence Research and Development Organisation): मिसाइल प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध समेत स्वदेशी रक्षा तकनीक विकास में अग्रणी।
  • NITI Aayog: नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाता है।
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय: व्यापार नीतियों, निर्यात-आयात नियंत्रण और मेक इन इंडिया पहलों का संचालन करता है।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय: ऊर्जा विविधीकरण और सुरक्षा रणनीतियों का प्रबंधन करता है।
  • RBI (Reserve Bank of India): विदेशी मुद्रा प्रबंधन करता है और बाहरी झटकों से बचाव के लिए भंडार बनाए रखता है।
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय: खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम लागू करता है और सतत कृषि को बढ़ावा देता है।

रणनीतिक स्वायत्तता में भारत और चीन की तुलना

पहलू भारत चीन
रक्षा आयात निर्भरता 2014 में 70% से घटकर 2023 में 45%; 2025 तक 32% स्वदेशी खरीद लक्ष्य 90% से अधिक स्वदेशी रक्षा उत्पादन; मजबूत राज्य समर्थित रक्षा उद्योग
सेमीकंडक्टर निर्माण 5% से कम घरेलू क्षमता; उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र अभी विकसित हो रहा है 60% घरेलू उत्पादन हिस्सेदारी, Made in China 2025 नीति के तहत
ऊर्जा आयात निर्भरता लगभग 85% कच्चे तेल की आयात निर्भरता; विविध आपूर्तिकर्ता पर निर्भर लेकिन उच्च आयात बिल लगभग 70% तेल आयात निर्भरता; ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में आक्रामक निवेश
प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के साथ व्यापार घाटा 2023 में चीन के साथ 60 अरब डॉलर का घाटा, कुल व्यापार 125 अरब डॉलर भारत के साथ व्यापार अधिशेष; व्यापार को रणनीतिक रूप से उपयोग करता है
औद्योगिक नीति खंडित नीतियां; हाल ही में PLI योजनाओं और DPP सुधारों के जरिए जोर एकीकृत औद्योगिक नीतियां और मजबूत राज्य-नेतृत्व वाली नवाचार प्रणालियां

रणनीतिक निहितार्थ और आगे का रास्ता

  • सेमीकंडक्टर और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों में खासकर महत्वपूर्ण आयात निर्भरताओं को कम करने के लिए औद्योगिक, व्यापार और तकनीकी नीतियों का गहरा समन्वय जरूरी है।
  • स्वदेशी रक्षा निर्माण को मजबूत करने के लिए निरंतर अनुसंधान-प्रयोग और खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना आवश्यक होगा, जिससे बाहरी कमजोरियों में कमी आए।
  • ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना, 175 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाना और ऊर्जा दक्षता सुधार भू-राजनीतिक जोखिमों को कम कर सकते हैं।
  • विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और वित्तीय नियामक ढांचे को सुदृढ़ करना आर्थिक साधनों के हथियार के रूप में इस्तेमाल से सुरक्षा प्रदान करेगा।
  • बहुपक्षीय मंचों और रणनीतिक साझेदारियों का उपयोग तकनीक और बाजारों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित कर आत्मनिर्भरता प्रयासों को पूरा कर सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. आत्मनिर्भरता का अर्थ आर्थिक स्वायत्तता और पूर्ण आयात प्रतिस्थापन है।
  2. Defence Procurement Procedure 2020 का लक्ष्य 2025 तक स्वदेशी रक्षा निर्माण को 68% तक बढ़ाना है।
  3. भारतीय संविधान का Article 246 संसद को विदेशी मामलों और रक्षा पर कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि आत्मनिर्भरता का मतलब पूर्ण स्वायत्तता नहीं बल्कि लक्षित आत्मनिर्भरता है। कथन 2 और 3 रक्षा मंत्रालय और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% जरूरतें आयात करता है।
  2. भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2023 तक 175 GW तक पहुंच गई है।
  3. भारत ने कच्चे तेल उत्पादन में पूर्ण ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल कर ली है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 3 गलत है; भारत अभी भी कच्चे तेल के आयात पर भारी निर्भर है।

मुख्य प्रश्न

बढ़ती बड़ी ताकतों की प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने में आत्मनिर्भरता की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (राजनीति और शासन), पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और अवसंरचना)
  • झारखंड का पहलू: झारखंड के खनिज संसाधन, जैसे दुर्लभ पृथ्वी खनिज और कोयला, भारत की ऊर्जा और तकनीक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लिए अहम हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के संसाधन आधार को राष्ट्रीय रणनीतिक स्वायत्तता के लक्ष्यों से जोड़कर उत्तर तैयार करें, साथ ही संसाधन निष्कर्षण और प्रसंस्करण की चुनौतियों पर भी ध्यान दें।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का संवैधानिक आधार क्या है?

भारतीय संविधान का Article 246 संसद को रक्षा, व्यापार और विदेशी मामलों में विधायी अधिकार देता है, जो रणनीतिक स्वायत्तता की नीति रूपरेखा को संभव बनाता है।

Defence Procurement Procedure 2020 ने आत्मनिर्भरता को कैसे बढ़ावा दिया है?

DPP 2020 स्वदेशी रक्षा निर्माण को प्राथमिकता देता है, जिसका लक्ष्य 2023 के 45% से 2025 तक 68% तक स्वदेशी खरीद बढ़ाना है, जिससे आयात निर्भरता कम हो।

सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

सेमीकंडक्टर रक्षा, संचार और तकनीक क्षेत्रों के लिए जरूरी हैं। भारत की क्षमता 5% से कम होने से स्वायत्तता सीमित रहती है, जबकि चीन की 60% घरेलू उत्पादन हिस्सेदारी आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरी को दूर करती है।

1965-67 के खाद्य संकट से भारत ने क्या सीख ली?

PL-480 के तहत अमेरिका की खाद्य सहायता पर निर्भरता ने कमजोरियां दिखाईं। इस संकट ने ग्रीन रिवॉल्यूशन को जन्म दिया, जिससे खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल हुई और बाहरी निर्भरता कम हुई।

बड़ी ताकतों की टकराहट भारत के व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को कैसे प्रभावित करती है?

प्रमुख शक्तियां प्रतिबंध, निर्यात नियंत्रण और ऊर्जा आपूर्ति को हथियार बनाकर भारत की महत्वपूर्ण आयात वस्तुओं तक पहुंच और विदेश नीति विकल्पों को प्रभावित करती हैं।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us