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2023 में असम और मेघालय ने सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (SLHP) से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली खरीदने से इंकार कर दिया। इसका कारण था केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) द्वारा तय किए गए उच्च टैरिफ। यह परियोजना नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) द्वारा संचालित है, जिसकी स्थापित क्षमता 2,000 मेगावाट है और लागत ₹9,000 करोड़ से अधिक है (CEA 2023)। असम और मेघालय द्वारा लगभग ₹4.50 प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदने से इनकार से इस महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर का अध:उपयोग होने का खतरा है और यह भारत के संघीय बिजली शासन में राज्यों और केंद्र के बीच टैरिफ स्वीकार्यता को लेकर मौजूद खामियों को उजागर करता है।

यह विवाद केंद्र द्वारा टैरिफ निर्धारित करने और राज्यों द्वारा उसे स्वीकार करने के बीच टकराव को दर्शाता है, जो विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत स्पष्ट और प्रभावी सहयोगात्मक संघवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, विद्युत अधिनियम 2003, अंतर-राज्य विद्युत विवाद
  • GS पेपर 3: अवसंरचना — ऊर्जा सुरक्षा, विद्युत क्षेत्र सुधार
  • निबंध: भारत में सहयोगात्मक संघवाद और संसाधन साझा करना

अंतर-राज्य विद्युत टैरिफ पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

संविधान का अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्य जल विवादों पर कानून बनाने का अधिकार देता है, लेकिन यह विद्युत टैरिफ विवादों को स्पष्ट रूप से कवर नहीं करता। विद्युत अधिनियम, 2003 (संख्या 36, 2003) विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण को नियंत्रित करता है, जिसमें धारा 61-64 के तहत CERC को केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए पारदर्शी टैरिफ निर्धारण सुनिश्चित करना होता है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), विद्युत (आपूर्ति) अधिनियम, 1948 के तहत तकनीकी सलाहकार और परियोजना निगरानी की भूमिका निभाता है। CERC के टैरिफ आदेश बाध्यकारी होते हैं, लेकिन बिजली खरीद समझौतों (PPA) के लिए राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) राज्य के भीतर टैरिफ और PPA पर अधिकार रखते हैं, जिससे संभावित टकराव पैदा होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में Energy Watchdog बनाम CERC मामले में टैरिफ पारदर्शिता पर जोर दिया, लेकिन राज्य द्वारा बिजली खरीद से इनकार के मामलों को स्पष्ट रूप से हल नहीं किया, जिससे अंतर-राज्य टैरिफ समन्वय में नियामक खामियां बनी हुई हैं।

सुबनसिरी पावर टैरिफ विवाद के आर्थिक पहलू

SLHP की 2,000 मेगावाट क्षमता पूर्वोत्तर के कुल जलविद्युत उत्पादन का 60% से अधिक है (CEA 2023)। ₹9,000 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ CERC द्वारा प्रस्तावित ₹4.50 प्रति यूनिट टैरिफ परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता और पूंजी लागत वसूली के लिए जरूरी है।

  • असम और मेघालय द्वारा इस टैरिफ पर बिजली खरीदने से इनकार से NEEPCO को वार्षिक ₹500 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान हो सकता है।
  • 2023 में पूर्वोत्तर क्षेत्र में 8.5% बिजली की कमी थी, जबकि पिछले पांच वर्षों में मांग 7% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है (CEA 2023)।
  • SLHP क्षमता का अध:उपयोग क्षेत्रीय बिजली संकट को और बढ़ाता है और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से जुड़ी आर्थिक प्रगति में देरी करता है।

आर्थिक नुकसान केवल राजस्व हानि तक सीमित नहीं, बल्कि संसाधन आवंटन में अक्षमता और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के अवसरों के खोने का भी परिणाम है।

विवाद में प्रमुख संस्थानों की भूमिका

संस्थानिक परस्पर क्रिया इस विवाद की जटिलता को परिभाषित करती है:

  • CEA: तकनीकी सलाहकार, परियोजना निगरानी और क्षमता आकलन के लिए जिम्मेदार।
  • CERC: केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए टैरिफ निर्धारण का नियामक।
  • NEEPCO: परियोजना संचालक, जो टैरिफ स्वीकार्यता पर निर्भर है।
  • असम और मेघालय के SERC: राज्य स्तर पर टैरिफ अनुमोदन और PPA पर नियंत्रण, प्रस्तावित टैरिफ पर बिजली खरीद स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार।
  • विद्युत मंत्रालय: नीति समन्वय और अंतर-राज्य सहयोग को बढ़ावा देता है, लेकिन टैरिफ विवादों में प्रवर्तन शक्ति नहीं रखता।

भारत बनाम चीन: जलविद्युत परियोजनाओं में टैरिफ और समन्वय का तुलनात्मक अध्ययन

चीन का केंद्रीकृत मॉडल, जिसका उदाहरण थ्री गॉर्जेज बांध है, भारत के संघीय मॉडल से काफी अलग है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) 2022 की रिपोर्ट में उल्लेख है:

पहलूभारत (सुबनसिरी विवाद)चीन (थ्री गॉर्जेज बांध)
टैरिफ नियमनविकेंद्रीकृत; CERC टैरिफ तय करता है लेकिन राज्य बिजली खरीद से इनकार कर सकते हैंकेंद्र सरकार एकसमान टैरिफ लागू करती है; राज्य स्तर पर कोई अस्वीकृति नहीं
ग्रिड समन्वयराज्य स्तर की स्वतंत्रता के कारण अध:उपयोगअनिवार्य ग्रिड समन्वय और 90% से अधिक क्षमता उपयोग
संघीय समन्वयअंतर-राज्य टैरिफ समन्वय के लिए कमजोर बाध्यकारी तंत्रमजबूत केंद्रीय नियंत्रण और प्रवर्तन
आर्थिक परिणामराजस्व नुकसान और बिजली की कमी बनी हुई हैक्षेत्रीय आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार

भारत के संघीय बिजली शासन में संरचनात्मक खामियां

असम और मेघालय का बिजली खरीद से इनकार विद्युत अधिनियम, 2003 में बाध्यकारी अंतर-राज्य टैरिफ समन्वय तंत्र की कमी को उजागर करता है। CERC के टैरिफ आदेश नियमात्मक होते हैं, लेकिन राज्य उपयोगिताएं PPA पर स्वीकृति देती हैं या नहीं, यह उनकी मर्जी पर निर्भर है, जिससे टैरिफ विवाद उत्पन्न होते हैं और बिजली वितरण बाधित होता है।

यह सहयोगात्मक संघवाद में एक बड़ी चुनौती है, जहां CERC और SERC के अधिकार क्षेत्र के ओवरलैप से नियामक अनिश्चितता पैदा होती है। राज्यों और केंद्रीय परियोजनाओं के बीच टैरिफ विवादों के समाधान के लिए कोई विशेष विवाद निवारण तंत्र न होना संसाधनों के कुशल उपयोग को कमजोर करता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • विद्युत अधिनियम के तहत बाध्यकारी अंतर-राज्य टैरिफ समन्वय तंत्र लागू किया जाना चाहिए ताकि केंद्र द्वारा उत्पन्न बिजली खरीदने से इनकार न हो।
  • विद्युत मंत्रालय की भूमिका को मध्यस्थ के रूप में मजबूत किया जाए और टैरिफ विवादों में अनुपालन लागू करने का अधिकार दिया जाए।
  • टैरिफ निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और हितधारकों की व्यापक सलाह ली जाए ताकि उपभोक्ता की पहुंच और परियोजना की व्यवहार्यता में संतुलन बना रहे।
  • पूर्वोत्तर में एकीकृत क्षेत्रीय बिजली बाजार को बढ़ावा दिया जाए ताकि जलविद्युत संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और बिजली की कमी कम हो।
  • चीन के केंद्रीकृत टैरिफ और ग्रिड समन्वय नीतियों से सीख लेकर क्षमता उपयोग और क्षेत्रीय विकास में सुधार किया जाए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
विद्युत अधिनियम, 2003 के संदर्भ में टैरिफ नियमन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. CERC भारत में सभी विद्युत टैरिफ, जिसमें राज्य-आंतरिक टैरिफ भी शामिल हैं, पर पूर्ण अधिकार रखता है।
  2. राज्य विद्युत नियामक आयोग (SERC) अपने-अपने राज्यों में टैरिफ नियंत्रित करते हैं।
  3. अधिनियम सभी राज्य उपयोगिताओं के लिए CERC के टैरिफ आदेशों को बाध्यकारी रूप से स्वीकार करने का प्रावधान करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि CERC केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं और अंतर-राज्य संचरण के लिए टैरिफ निर्धारित करता है, राज्य-आंतरिक टैरिफ SERC के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि SERC राज्य के भीतर टैरिफ नियंत्रित करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि CERC के टैरिफ आदेशों को राज्यों द्वारा बाध्यकारी रूप से स्वीकार करना आवश्यक नहीं है, जिससे वे बिजली खरीद से इनकार कर सकते हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
संविधान के अनुच्छेद 262 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह संसद को अंतर-राज्य जल विवादों पर कानून बनाने का अधिकार देता है।
  2. यह अंतर-राज्य विद्युत टैरिफ विवादों के समाधान के लिए तंत्र प्रदान करता है।
  3. यह उन विवादों पर न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को रोकता है जो अंतर-राज्य न्यायाधिकरण को संदर्भित किए गए हों।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्य जल विवादों पर कानून बनाने का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह अनुच्छेद विद्युत टैरिफ विवादों को कवर नहीं करता। कथन 3 सही है क्योंकि यह उन विवादों पर न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को रोकता है जो इस अनुच्छेद के तहत न्यायाधिकरण को भेजे गए हों।

मुख्य प्रश्न

असम और मेघालय द्वारा उच्च टैरिफ के कारण सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से बिजली स्वीकार करने से इनकार का गंभीर विश्लेषण करें। इस विवाद से भारत के संघीय बिजली शासन में सामने आने वाली संवैधानिक और नियामक चुनौतियों पर चर्चा करें और ऐसे विवादों को सुलझाने के लिए संस्थागत सुधारों का सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 — शासन और लोक प्रशासन; पेपर 3 — अवसंरचना और ऊर्जा
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड की अपनी जलविद्युत और विद्युत परियोजनाओं में टैरिफ और अंतर-राज्य सहयोग की चुनौतियां हैं, जो संघीय ऊर्जा शासन को समझने में मदद करती हैं।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर में केंद्र और राज्य नियामकों के बीच संस्थागत समन्वय की कमी, टैरिफ पारदर्शिता और ऊर्जा क्षेत्र सुधारों में सहयोगात्मक संघवाद को उजागर करें।
असम और मेघालय ने सुबनसिरी परियोजना से बिजली क्यों ठुकराई?

असम और मेघालय ने CERC द्वारा लगभग ₹4.50 प्रति यूनिट निर्धारित उच्च टैरिफ को आर्थिक रूप से अस्वीकार्य मानते हुए अतिरिक्त बिजली खरीदने से इनकार किया।

टैरिफ निर्धारण में CERC की भूमिका क्या है?

CERC केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं और अंतर-राज्य संचरण के लिए टैरिफ नियंत्रित करता है, लागत वसूली और उचित लाभ के आधार पर टैरिफ आदेश जारी करता है, लेकिन राज्य उपयोगिताओं की स्वीकृति आवश्यक होती है।

क्या संविधान का अनुच्छेद 262 विद्युत टैरिफ विवादों को कवर करता है?

नहीं, अनुच्छेद 262 संसद को अंतर-राज्य जल विवादों और संबंधित न्यायाधिकरणों पर कानून बनाने का अधिकार देता है, लेकिन विद्युत टैरिफ विवाद विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत आते हैं।

सुबनसिरी बिजली के अध:उपयोग का आर्थिक प्रभाव क्या है?

अध:उपयोग से NEEPCO को ₹500 करोड़ से अधिक वार्षिक राजस्व नुकसान होता है, पूर्वोत्तर क्षेत्र की 8.5% बिजली कमी बढ़ती है और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से जुड़ी आर्थिक प्रगति में देरी होती है।

चीन की जलविद्युत टैरिफ नीति भारत से कैसे अलग है?

चीन केंद्रीकृत टैरिफ नियमन और अनिवार्य ग्रिड समन्वय अपनाता है, जिससे 90% से अधिक क्षमता उपयोग सुनिश्चित होता है, जबकि भारत में संघीय ढांचे के कारण राज्य टैरिफ को ठुकरा सकते हैं, जिससे परियोजनाओं का अध:उपयोग होता है।

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