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आर्टेमिस II मिशन का परिचय

आर्टेमिस II नासा के आर्टेमिस चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन है, जिसका प्रक्षेपण 2024 के अंत में निर्धारित है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्ष यान में चंद्रमा की कक्षा में 10 दिनों की यात्रा करेंगे, जो 1972 में अपोलो 17 के बाद मानव द्वारा चंद्र कक्षा में पहली बार यात्रा होगी (नासा आधिकारिक बयान, 2024)। यह मिशन फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से संचालित होगा और आर्टेमिस III के लिए महत्वपूर्ण तैयारी का काम करेगा, जिसका लक्ष्य चंद्र सतह पर मानव को उतारना है। आर्टेमिस II गहरे अंतरिक्ष में मानव अन्वेषण के तकनीकी और परिचालन क्षेत्र में बड़ा मील का पत्थर है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष उड़ान तकनीकों पर जोर दिया गया है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष मिशन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – अंतरिक्ष कूटनीति, बाहरी अंतरिक्ष संधि
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, बजटीय आवंटन
  • निबंध: अंतरिक्ष अन्वेषण में प्रौद्योगिकी और वैश्विक सहयोग

आर्टेमिस II के कानूनी और संस्थागत ढांचे

आर्टेमिस II मिशन National Aeronautics and Space Act of 1958 के तहत संचालित होता है, जो नासा को शांतिपूर्ण अंतरिक्ष अन्वेषण और वैज्ञानिक अनुसंधान करने का अधिकार देता है। यह अधिनियम मानवयुक्त चंद्र मिशनों सहित नासा की गतिविधियों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, आर्टेमिस II Outer Space Treaty of 1967 का पालन करता है, जो खगोलीय पिंडों पर राष्ट्रीय अधिकार की मनाही करता है और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करता है। मिशन में बहुराष्ट्रीय साझेदारी शामिल हैं, जो अंतर-संस्थागत समझौतों और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के नियमों द्वारा नियंत्रित हैं।

  • NASA: मिशन योजना, यान विकास, और चालक दल प्रशिक्षण की प्रमुख एजेंसी।
  • ESA (European Space Agency): यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल (ESM) प्रदान करता है, जो ओरियन को 50 kW शक्ति और प्रणोदन देता है (ESA प्रेस रिलीज, 2023)।
  • JAXA (Japan Aerospace Exploration Agency): वैज्ञानिक पेलोड और तकनीकी समर्थन में सहयोगी।
  • ISRO (Indian Space Research Organisation): चंद्र अन्वेषण तकनीकों में उभरता सहयोगी और भविष्य में संभावित भागीदार।
  • SpaceX: आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत वाणिज्यिक ठेकेदार, चंद्र लैंडर तकनीक विकसित कर रहा है।

आर्थिक पहलू और आर्टेमिस कार्यक्रम

आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए वित्तीय आवंटन FY2025 तक लगभग $93 बिलियन है, जो नासा के बजट अनुमान (2024) पर आधारित है। यह राशि चीन के लगभग $10 बिलियन के चंद्र कार्यक्रम से काफी अधिक है, जो अमेरिका सरकार की मानव अंतरिक्ष उड़ान और स्थायी चंद्र आधारभूत संरचना को प्राथमिकता देने को दर्शाता है। वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य 2021 में $469 बिलियन था, जो 6.7% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (Space Foundation, 2022)। आर्टेमिस II की सफलता से चंद्र संसाधन उपयोग बाजार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो 2030 तक $10 बिलियन तक पहुंच सकता है (Morgan Stanley, 2023)। पुन: प्रयोज्य तकनीकों के माध्यम से लागत में 20% तक कमी लाई जा रही है, जो अपोलो युग की मिशनों की तुलना में अधिक किफायती है (NASA बजट विश्लेषण, 2024)।

  • आर्टेमिस II मिशन की अवधि: चंद्रमा की कक्षा में 10 दिन, चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ।
  • यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल 50 kW शक्ति और प्रणोदन प्रदान करता है, ESA का नासा मानवयुक्त मिशन में सबसे बड़ा योगदान।
  • ओरियन अंतरिक्ष यान के पुन: प्रयोज्य घटक मिशन लागत कम करते हैं और स्थिरता बढ़ाते हैं।
  • आर्टेमिस कार्यक्रम का लक्ष्य 2028 तक स्थायी चंद्र उपस्थिति स्थापित करना है, जिसकी शुरुआत आर्टेमिस II के कक्षीय मिशन से होगी।

तकनीकी नवाचार और मिशन उद्देश्य

आर्टेमिस II जीवन-समर्थन प्रणालियों, गहरे अंतरिक्ष नेविगेशन और संचार तकनीकों का परीक्षण करेगा, जो आर्टेमिस III के मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग के लिए जरूरी हैं। ओरियन यान, यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल से लैस, चालक दल के साथ पृथ्वी की कक्षा से बाहर प्रणोदन, शक्ति और ताप नियंत्रण प्रणालियों का परीक्षण करेगा। मिशन गहरे अंतरिक्ष में चालक दल के स्वास्थ्य प्रबंधन को भी परखता है, जो लंबी अवधि के चंद्र सतह मिशन और अंततः मंगल अभियान के लिए जरूरी है।

  • 1972 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र कक्षा मिशन, वास्तविक गहरे अंतरिक्ष वातावरण में प्रणालियों का परीक्षण।
  • जीवन-समर्थन प्रणाली जो कई दिनों के मिशन के लिए उपयुक्त है।
  • पृथ्वी और चंद्र कक्षीय यानों से संपर्क बनाए रखने के लिए उन्नत नेविगेशन और संचार तकनीक।
  • पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष यान घटक, जो लागत कम करते हैं और मिशन आवृत्ति बढ़ाते हैं।

आर्टेमिस II और चीन के चांग-ए मिशनों की तुलना

पहलूआर्टेमिस II (अमेरिका)चीन का चांग-ए कार्यक्रम
मिशन प्रकारमानवयुक्त चंद्र कक्षा मिशनरोबोटिक चंद्र अन्वेषण और नमूना वापसी
बजटलगभग $93 बिलियन (FY2025 तक आर्टेमिस कार्यक्रम)अनुमानित $10 बिलियन (संपूर्ण चंद्र कार्यक्रम)
तकनीकी फोकसमानव अंतरिक्ष उड़ान, पुन: प्रयोज्य यान, अंतरराष्ट्रीय सहयोगरोबोटिक लैंडर, रोवर, नमूना वापसी, स्वायत्त संचालन
अंतरराष्ट्रीय सहयोगESA, JAXA, ISRO, वाणिज्यिक ठेकेदारों के साथ साझेदारीमुख्यतः घरेलू, सीमित अंतरराष्ट्रीय सहयोग
रणनीतिक लक्ष्य2028 तक चंद्र पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करनावैज्ञानिक अन्वेषण और तकनीकी प्रदर्शन

चंद्र संसाधन शासन में नीतिगत चुनौतियाँ

जहां आर्टेमिस II तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाता है, वहीं यह चंद्र संसाधन उपयोग और संपत्ति अधिकारों के लिए बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय ढांचे की कमी को भी उजागर करता है। Outer Space Treaty राष्ट्रीय संप्रभुता को रोकता है, लेकिन वाणिज्यिक संसाधन निष्कर्षण पर अस्पष्ट है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और अनियमित दोहन का खतरा रहता है। पृथ्वी पर संसाधन शासन के विपरीत, चंद्र खनन या संपत्ति अधिकारों के लिए कोई व्यापक कानूनी व्यवस्था नहीं है, जो शांतिपूर्ण सहयोग और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को प्रभावित कर सकती है।

  • चंद्र खनन और संसाधन स्वामित्व पर बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौतों का अभाव।
  • ओवरलैपिंग दावों या वाणिज्यिक गतिविधियों से संघर्ष की संभावना।
  • वाणिज्यिक दोहन को नियंत्रित करने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बहुपक्षीय ढांचे की जरूरत।

महत्त्व और आगे का रास्ता

आर्टेमिस II एक आधारभूत मिशन है जो अपोलो की विरासत को भविष्य के स्थायी चंद्र अन्वेषण से जोड़ता है। यह मानवयुक्त गहरे अंतरिक्ष मिशनों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की संभावनाओं को दिखाता है और आर्टेमिस III तथा उससे आगे के लिए जरूरी तकनीकों का परीक्षण करता है। अधिकतम लाभ के लिए अमेरिका और उसके साझेदारों को चंद्र संसाधन शासन के लिए स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे बनाने की पहल करनी चाहिए। भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताएं उसे आर्टेमिस मिशनों या स्वतंत्र चंद्र अभियानों में संभावित सहयोगी बनाती हैं, जो देश की अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीकी विकास के हित में है।

  • आर्टेमिस II की सफलता का उपयोग अंतरराष्ट्रीय चंद्र संसाधन शासन संधियों को आगे बढ़ाने के लिए करें।
  • भारत की आर्टेमिस से जुड़ी तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग में भूमिका बढ़ाएं।
  • लागत-कुशल पुन: प्रयोज्य तकनीकों को प्राथमिकता दें ताकि दीर्घकालिक चंद्र उपस्थिति बनी रहे।
  • चंद्र के सैन्यीकरण को रोकने और शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
आर्टेमिस II मिशन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. आर्टेमिस II नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का पहला बिना चालक दल वाला मिशन है।
  2. यह चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर 10 दिनों के चंद्र कक्षा मिशन पर जाएगा।
  3. यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल ओरियन यान को प्रणोदन और शक्ति प्रदान करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि आर्टेमिस II पहला मानवयुक्त मिशन है, बिना चालक दल वाला नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं, क्योंकि मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों तक चंद्र कक्षा में रहेंगे और यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल ओरियन को शक्ति और प्रणोदन देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
आर्टेमिस II के कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. National Aeronautics and Space Act of 1958 नासा के आर्टेमिस मिशनों को नियंत्रित करता है।
  2. Outer Space Treaty of 1967 चंद्र क्षेत्र के राष्ट्रीय अधिग्रहण की अनुमति देता है।
  3. आर्टेमिस II में ESA, JAXA और ISRO के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि National Aeronautics and Space Act of 1958 नासा की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Outer Space Treaty राष्ट्रीय संप्रभुता को मना करता है। कथन 3 सही है क्योंकि आर्टेमिस II में ESA, JAXA और ISRO के साथ सहयोग है।

मुख्य प्रश्न

आर्टेमिस II मिशन मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में कैसे एक नया मोड़ साबित हो रहा है? इस मिशन से जुड़े मुख्य तकनीकी और कानूनी चुनौतियाँ क्या हैं? (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; पेपर 3 – अंतरराष्ट्रीय संबंध
  • झारखंड का दृष्टिकोण: ISRO की आर्टेमिस कार्यक्रम में बढ़ती भूमिका झारखंड के अंतरिक्ष विज्ञान शिक्षा और तकनीकी विकास के रुचि से मेल खाती है।
  • मुख्य बिंदु: भारत के रणनीतिक अंतरिक्ष साझेदारी, अंतरिक्ष गतिविधियों के कानूनी ढांचे और क्षेत्रीय तकनीकी विकास के प्रभाव पर उत्तर तैयार करें।
आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

आर्टेमिस II का उद्देश्य चार अंतरिक्ष यात्रियों को 10 दिनों के लिए चंद्र कक्षा में भेजना है ताकि जीवन-समर्थन, नेविगेशन और प्रणोदन प्रणालियों का परीक्षण किया जा सके, जो भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों के लिए जरूरी हैं।

आर्टेमिस II में कौन-कौन सी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सहयोग कर रही हैं?

नासा आर्टेमिस II का नेतृत्व करता है, जिसमें ESA (यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल), JAXA (वैज्ञानिक पेलोड) और ISRO के साथ उभरता सहयोग शामिल है।

Outer Space Treaty का आर्टेमिस II मिशन पर क्या प्रभाव है?

Outer Space Treaty चंद्रमा पर राष्ट्रीय अधिकारों को मना करता है और शांतिपूर्ण उपयोग की शर्तें तय करता है, जिससे आर्टेमिस II अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून का पालन करता है।

आर्टेमिस II के वैश्विक अंतरिक्ष बाजार पर आर्थिक प्रभाव क्या होंगे?

आर्टेमिस II की सफलता से चंद्र संसाधन बाजार को बढ़ावा मिलेगा, जो 2030 तक $10 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है, और $469 बिलियन के वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी।

आर्टेमिस II मिशन चीन के चांग-ए मिशनों से कैसे अलग है?

आर्टेमिस II मानवयुक्त चंद्र कक्षा मिशन है जो मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित है, जबकि चांग-ए मिशन रोबोटिक अन्वेषण और नमूना वापसी पर जोर देते हैं और बजट भी कम है।

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