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आर्टेमिस II मिशन का परिचय और महत्व

आर्टेमिस II मिशन, जिसे नासा 2024 में लॉन्च करने जा रहा है, अपोलो 13 द्वारा तय की गई दूरी से आगे जाकर लगभग 450,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष यान होगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार होंगे, जिसे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) ब्लॉक 1 रॉकेट द्वारा भेजा जाएगा। आर्टेमिस II 1972 में अपोलो 17 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्रमा का फ्लाईबाय मिशन होगा, जिसकी कुल अवधि 10 दिन निर्धारित है, जिसमें चंद्रमा के पास से गुजरना और पृथ्वी पर वापसी शामिल है। यह मिशन नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना और भविष्य में मंगल ग्रह की खोज के लिए तैयारी करना है।

UPSC से संबंधित

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी - अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अन्वेषण
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध - अंतरिक्ष सहयोग और संधियाँ
  • निबंध: वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून

आर्टेमिस II में तकनीकी प्रगति

आर्टेमिस II मिशन में ऐसी उन्नत प्रणोदन और अंतरिक्ष यान तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो अपोलो युग से कहीं आगे है। SLS ब्लॉक 1 रॉकेट 95 मीट्रिक टन वजन को लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचा सकता है, जिससे भारी पेलोड और लंबे मिशन संभव हो पाते हैं। ओरियन यान में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल (ESM) शामिल है, जो प्रणोदन, ऊर्जा और जीवन समर्थन प्रदान करता है। ये तकनीकें चालक दल को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर गहरे अंतरिक्ष में अधिक दूरी तक और लंबे समय तक रहने की सुविधा देती हैं, जहाँ उच्च स्तर की विकिरण सुरक्षा और मजबूत जीवन समर्थन प्रणालियाँ जरूरी होती हैं।

  • ओरियन यान में उन्नत एवियोनिक्स और ताप संरक्षण प्रणाली (NASA तकनीकी रिपोर्ट, 2023)
  • चंद्रमा की दूरी पर संपर्क बनाए रखने के लिए बेहतर संचार प्रणाली
  • बेहतर नेविगेशन और स्वायत्त डॉकिंग क्षमताएं

आर्टेमिस II के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

आर्टेमिस II मिशन अमेरिकी National Aeronautics and Space Act, 1958 के तहत संचालित होता है, विशेष रूप से सेक्शन 201-203 के अंतर्गत, जो मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान और चंद्र मिशनों को अनुमति देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मिशन 1967 के Outer Space Treaty का पालन करता है, जो अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और संप्रभुता के दावों पर रोक लगाता है। भारत के अंतरिक्ष कार्य Indian Space Research Organisation Act, 1969 के अंतर्गत आते हैं, जबकि आर्टेमिस II नासा का नेतृत्व वाला मिशन है जिसमें ESA और JAXA का महत्वपूर्ण सहयोग है। यह बहुपक्षीय सहयोग अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीक साझा करने के नए मानदंडों को दर्शाता है।

  • नासा: आर्टेमिस कार्यक्रम की नेतृत्व एजेंसी, लॉन्च और मिशन संचालन की जिम्मेदारी
  • ESA: ओरियन के लिए यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल प्रदान करता है, जो प्रणोदन और जीवन समर्थन के लिए आवश्यक है
  • JAXA: चंद्र सतह अन्वेषण तकनीकों में सहयोग करता है
  • ISRO: स्वदेशी चंद्र अन्वेषण क्षमताओं का विकास कर रहा है, फिलहाल रोबोटिक मिशनों पर केंद्रित

आर्थिक पहलू और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था

आर्टेमिस कार्यक्रम का बजट 2019 में 3.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2023 में 7.2 बिलियन डॉलर हो गया है, और 2025 तक कुल आवंटन लगभग 93 बिलियन डॉलर अनुमानित है। यह गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए रणनीतिक निवेश को दर्शाता है। वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2021 में 469 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है, जिसमें 6.7% की वार्षिक वृद्धि दर रही है, जो सरकारी और वाणिज्यिक निवेशों से प्रेरित है। आर्टेमिस II की सफलता वाणिज्यिक चंद्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी, जो 2030 तक 10 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें खनन, पर्यटन और निर्माण शामिल हैं।

  • वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में लगभग 60% हिस्सा सरकारी खर्च का है (Space Foundation, 2022)
  • वाणिज्यिक चंद्र मिशनों में संसाधन निष्कर्षण और इन-सिटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन (ISRU) शामिल हैं
  • आर्टेमिस II भविष्य के सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए तकनीकी प्रदर्शक के रूप में काम करेगा

तुलनात्मक अध्ययन: आर्टेमिस II बनाम चीन के चंद्र मिशन

पहलूआर्टेमिस II (अमेरिका)चीन के चांग-ए मिशन
मिशन का प्रकारमानवयुक्त चंद्र फ्लाईबायरोबोटिक चंद्र अन्वेषण और नमूना वापसी
पृथ्वी से दूरीलगभग 450,000 किलोमीटर (अपोलो 13 से आगे)चंद्रमा की कक्षा और सतह पर संचालन (~384,400 किलोमीटर)
मानव उपस्थिति1972 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशनअब तक कोई मानवयुक्त मिशन नहीं
तकनीकी केंद्रितउन्नत प्रणोदन, जीवन समर्थन, गहरे अंतरिक्ष नेविगेशनरोबोटिक नमूना वापसी, चंद्र रोवर तकनीक, ISRU प्रयोग
रणनीतिक लक्ष्यचंद्रमा और मंगल पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करनारोबोटिक चंद्र बेस और संसाधन उपयोग

आर्टेमिस II की चुनौतियां और भविष्य के कदम

आर्टेमिस II तकनीकी प्रगति दिखाता है, लेकिन स्थायी चंद्र सतह आधार और दीर्घकालिक मानव आवास की कमी को भी उजागर करता है। चीन के रोबोटिक चंद्र बेस संसाधन उपयोग और आवास विकास पर केंद्रित हैं, जबकि आर्टेमिस को स्थायी चंद्र पोस्ट स्थापित करने के लिए भविष्य के मिशनों पर निर्भर रहना होगा। विकिरण सुरक्षा, जीवन समर्थन की टिकाऊ व्यवस्था और ISRU तकनीकों का विकास आर्टेमिस के अगले चरणों के लिए जरूरी है। इन चुनौतियों को पूरा करना आवश्यक है ताकि अल्पकालिक फ्लाईबाय से स्थायी मानव उपस्थिति की ओर बढ़ा जा सके।

  • विकिरण सुरक्षा के साथ चंद्र सतह आवास विकसित करने की जरूरत
  • पानी, ऑक्सीजन और ईंधन उत्पादन के लिए ISRU तकनीकों का विकास
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में वाणिज्यिक साझेदारों का समावेश

महत्व और आगे की दिशा

  • आर्टेमिस II पांच दशकों बाद मानव गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में अमेरिका की नेतृत्व भूमिका को पुनः स्थापित करता है
  • यह लो अर्थ ऑर्बिट से बाहर मानवयुक्त मिशनों के लिए तकनीकी मानक तय करता है
  • आर्टेमिस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भू-राजनीतिक अंतरिक्ष साझेदारी को मजबूत करता है
  • आर्टेमिस II की सफलता वाणिज्यिक चंद्र अर्थव्यवस्था और तकनीकी नवाचार को तेज करेगी
  • भविष्य के मिशनों में स्थायी चंद्र अवसंरचना और दीर्घकालिक मानव उपस्थिति को प्राथमिकता देनी होगी
📝 प्रारंभिक अभ्यास
आर्टेमिस II मिशन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. आर्टेमिस II ओरियन अंतरिक्ष यान की पहली बिना चालक दल वाली परीक्षण उड़ान है।
  2. मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्र फ्लाईबाय पर जाएंगे।
  3. आर्टेमिस II के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) ब्लॉक 1 रॉकेट का उपयोग किया जाता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि आर्टेमिस II मानवयुक्त मिशन है; आर्टेमिस I बिना चालक दल वाली परीक्षण उड़ान थी। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि आर्टेमिस II में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्र फ्लाईबाय के लिए जाएंगे और SLS ब्लॉक 1 रॉकेट का उपयोग होगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
आर्टेमिस II से संबंधित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. 1967 का Outer Space Treaty अंतरिक्ष के किसी भी सैन्य उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है।
  2. 1958 का National Aeronautics and Space Act नासा के मानवयुक्त चंद्र मिशनों को नियंत्रित करता है।
  3. आर्टेमिस समझौते चंद्र संसाधन उपयोग के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी दायित्व स्थापित करते हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; Outer Space Treaty अंतरिक्ष में विनाशकारी हथियारों पर रोक लगाता है लेकिन सभी सैन्य उपयोगों पर नहीं। कथन 2 भी सही है; नासा के मिशन 1958 के Act के तहत आते हैं। कथन 3 गलत है; आर्टेमिस समझौते गैर-बाध्यकारी सिद्धांत हैं, कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं।

मेन्स प्रश्न

आर्टेमिस II मिशन को पृथ्वी से सबसे दूर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने में मदद करने वाले तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कारकों पर चर्चा करें। आर्टेमिस II की तुलना चीन के चंद्र अन्वेषण प्रयासों से करें और चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति के लिए आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करें।

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पेपर 3 - अंतरराष्ट्रीय संबंध
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में अंतरिक्ष शिक्षा और एयरोस्पेस उद्योग के विकास की बढ़ती रुचि राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रगति जैसे आर्टेमिस से मेल खाती है।
  • मेन्स पॉइंटर: भारत की अंतरिक्ष नीति को वैश्विक मिशनों के संदर्भ में प्रस्तुत करें, तकनीक हस्तांतरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दें।
आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

आर्टेमिस II का उद्देश्य मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को अपोलो 13 की दूरी से आगे चंद्र फ्लाईबाय पर भेजना है, साथ ही जीवन समर्थन और नेविगेशन सिस्टम का गहरे अंतरिक्ष में परीक्षण करना है, जो भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों के लिए तैयारी है।

आर्टेमिस II मिशन में कौन-कौन सी एजेंसियां सहयोग कर रही हैं?

नासा इस मिशन का नेतृत्व करता है, जिसमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल प्रदान करती है और जापान की JAXA भी सहयोगी है, जो मानवयुक्त चंद्र अन्वेषण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है।

आर्टेमिस II मिशन चीन के चांग-ए चंद्र मिशनों से कैसे अलग है?

आर्टेमिस II मानवयुक्त चंद्र फ्लाईबाय मिशन है, जबकि चांग-ए मिशन रोबोटिक हैं, जो नमूना वापसी और चंद्र सतह अन्वेषण पर केंद्रित हैं, बिना मानव उपस्थिति के।

आर्टेमिस II किस कानूनी ढांचे के तहत संचालित होता है?

आर्टेमिस II अमेरिकी National Aeronautics and Space Act, 1958 के तहत संचालित होता है और 1967 के Outer Space Treaty जैसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है।

आर्टेमिस II में इस्तेमाल ओरियन अंतरिक्ष यान की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं क्या हैं?

ओरियन में उन्नत जीवन समर्थन, नेविगेशन, ताप संरक्षण प्रणाली और यूरोपियन सर्विस मॉड्यूल शामिल है, जो प्रणोदन और ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे गहरे अंतरिक्ष में मानवयुक्त मिशन संभव होते हैं।

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