परिचय: नियुक्ति का विवरण और रणनीतिक महत्व
अप्रैल 2024 में पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अशोक लाहिरी को भारत की प्रमुख नीति संस्थान निति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिसे 2015 में स्थापित किया गया था। यह नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यकारी विवेकाधिकार के तहत की गई है क्योंकि निति आयोग का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। मार्च 2019 से दिसंबर 2022 तक लाहिरी ने CEA के रूप में कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग ₹20 लाख करोड़ (GDP का 10%) के प्रोत्साहन पैकेज सहित महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक सलाह दी। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार नीति योजना और सहयोगात्मक संघवाद के प्रयासों में व्यापक आर्थिक विशेषज्ञता को सीधे शामिल करना चाहती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: शासन – निति आयोग की भूमिका, कार्य, कार्यकारी नियुक्तियां, सहयोगात्मक संघवाद
- GS पेपर 3: आर्थिक विकास – व्यापक आर्थिक नीति, आर्थिक सुधार, प्रोत्साहन उपाय
- निबंध: भारत में आर्थिक योजना और संस्थागत सुधार
निति आयोग का कानूनी और संस्थागत ढांचा
निति आयोग की स्थापना निति आयोग प्रस्ताव, 2015 के माध्यम से हुई, जिसने पूर्व योजना आयोग की जगह ली। यह एक नीति सलाहकार संस्था है जिसके पास वैधानिक अधिकार नहीं हैं। इसका उपाध्यक्ष प्रधानमंत्री कार्यालय के कार्यकारी विवेकाधिकार से नियुक्त होता है। भारत सरकार (कारोबार का आवंटन) नियम, 1961 मंत्रालयों के बीच जिम्मेदारियां तय करते हैं, जिससे निति आयोग को रणनीतिक योजना और सहयोगात्मक संघवाद का प्रोत्साहक माना जाता है, न कि कार्यकारी एजेंसी।
- निति आयोग का उद्देश्य सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देना, सतत विकास को प्रोत्साहित करना और नीति क्रियान्वयन की निगरानी करना है।
- उपाध्यक्ष के रूप में वह कार्यकारी निदेशक की तरह काम करते हैं, विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के बीच समन्वय करते हैं।
- संवैधानिक प्रवर्तन शक्तियों के अभाव में निति आयोग सीधे नीति लागू करने में सक्षम नहीं है, वह प्रेरणा और समन्वय पर निर्भर रहता है।
आर्थिक संदर्भ: व्यापक आर्थिक चुनौतियां और नीति प्राथमिकताएं
भारत की GDP वृद्धि दर वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 6.5% अनुमानित है, जो महामारी के बाद सुधार की राह दिखाती है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)। निति आयोग का बजट 2015 में ₹500 करोड़ से बढ़कर 2023 में ₹1,200 करोड़ हो गया है, जो संसाधनों की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। CEA के रूप में अशोक लाहिरी ने कोविड-19 संकट के दौरान व्यापक आर्थिक स्थिरीकरण पर सलाह दी और ₹20 लाख करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज की निगरानी की, जो GDP का लगभग 10% था। उनकी विशेषज्ञता उन क्षेत्रों में सुधारों को प्रभावित करेगी जो लगभग 60% GDP में योगदान करते हैं, जैसे विनिर्माण और सेवा क्षेत्र।
- कोविड-19 प्रोत्साहन में सीधे वित्तीय समर्थन, क्रेडिट गारंटी और क्षेत्र विशेष राहत शामिल थी, जो MSME की मजबूती के लिए अहम रही।
- निति आयोग के समर्थन से आत्मनिर्भर भारत पहल ने MSME क्षेत्र में 15% विकास दर्ज किया (MSME मंत्रालय रिपोर्ट 2023)।
- निति आयोग की नीति सलाह ने 2023 में अक्षय ऊर्जा क्षमता में 5% की वृद्धि में योगदान दिया, जो सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।
आर्थिक शासन में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका
अशोक लाहिरी की नियुक्ति भारत के आर्थिक शासन को आकार देने वाले कई प्रमुख संस्थानों से जुड़ी है। वित्त मंत्रालय वित्तीय नीति और बजट आवंटन देखता है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए मौद्रिक नीति नियंत्रित करता है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) निति आयोग की नियुक्तियों पर कार्यकारी अधिकार रखता है। MSME मंत्रालय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास पर केंद्रित है, जो आर्थिक विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- CEA सरकार को स्वतंत्र व्यापक आर्थिक विश्लेषण प्रदान करता है, जो वित्तीय और मौद्रिक समन्वय को प्रभावित करता है।
- निति आयोग केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के बीच पुल का काम करता है, सहयोगात्मक संघवाद को बढ़ावा देता है।
- PMO की निति आयोग नेतृत्व नियुक्ति नीति प्राथमिकताओं में राजनीतिक-कार्यकारी संबंध को दर्शाती है।
तुलनात्मक विश्लेषण: निति आयोग और चीन का NDRC
| पहलू | निति आयोग (भारत) | NDRC (चीन) |
|---|---|---|
| स्थापना | 2015, योजना आयोग की जगह | 2003, स्टेट प्लानिंग कमीशन से विकसित |
| कानूनी स्थिति | सलाहकार संस्था, बिना वैधानिक प्रवर्तन के | सरकारी एजेंसी, नियामक और योजना प्राधिकरण के साथ |
| भूमिका | नीति समन्वय, रणनीतिक योजना, सहयोगात्मक संघवाद | आर्थिक योजना, नीति क्रियान्वयन, औद्योगिक नियमन |
| नेतृत्व नियुक्ति | PMO द्वारा नियुक्त, कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं | स्टेट काउंसिल द्वारा नियुक्त, सरकारी ढांचे में समाहित |
| GDP वृद्धि पर प्रभाव | FY2024-25 के लिए 6.5% अनुमानित | 2010-2020 के बीच औसत वार्षिक वृद्धि 6.1% |
| नीति क्रियान्वयन | सीमित प्रवर्तन, समन्वय पर निर्भर | नीति लागू करने और नियंत्रित करने का प्रत्यक्ष अधिकार |
संरचनात्मक चुनौतियां और नीति क्रियान्वयन में अंतर
निति आयोग की भूमिका बढ़ने और बजट में वृद्धि के बावजूद, इसके पास वैधानिक अधिकार न होने के कारण नीति प्रवर्तन में बाधाएं हैं, खासकर राज्यों में। इससे क्रियान्वयन में असंगति और समन्वय की समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो लाहिरी जैसे तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति के संभावित प्रभाव को कमजोर करती हैं। इसका संस्थागत ढांचा चीन के NDRC से अलग है, जो नियोजन और नियामक शक्तियों को जोड़ता है, जिससे नीति क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होता है।
- राज्य अपनी कई आर्थिक नीतियों पर स्वायत्तता बनाए रखते हैं, जिससे निति आयोग की पहुंच सीमित होती है।
- विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय अक्सर अधिकार क्षेत्र के ओवरलैप के कारण प्रभावित होता है।
- विशेषज्ञों की नियुक्ति नीति सलाह की गुणवत्ता बढ़ाती है लेकिन संरचनात्मक प्रवर्तन समस्याओं का समाधान नहीं करती।
महत्व और आगे का रास्ता
- निति आयोग के शीर्ष पर व्यापक आर्थिक विशेषज्ञता को शामिल करने से नीति सलाह की गुणवत्ता और समन्वय बेहतर होगा।
- केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तंत्र आवश्यक हैं ताकि नीति सिफारिशों को प्रभावी परिणामों में बदला जा सके।
- संस्थागत सुधारों के तहत निति आयोग को सीमित वैधानिक अधिकार दिए जाने से क्रियान्वयन की खामियों को दूर किया जा सकता है।
- लाहिरी के महामारी काल के अनुभव का लाभ उठाकर विनिर्माण, सेवा और MSME क्षेत्रों में आर्थिक मजबूती और सुधार एजेंडा को मजबूत किया जा सकता है।
- निति आयोग की स्थापना योजना आयोग की जगह संवैधानिक संशोधन द्वारा हुई।
- निति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा कार्यकारी विवेकाधिकार के तहत की जाती है।
- निति आयोग के पास राज्यों में नीति निर्णयों को लागू करने का वैधानिक अधिकार है।
- उन्होंने मार्च 2019 से दिसंबर 2022 तक CEA के रूप में सेवा दी।
- उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने लगभग GDP के 20% के प्रोत्साहन पैकेजों पर सलाह दी।
- CEA के पास वित्तीय नीतियों को लागू करने का प्रत्यक्ष अधिकार होता है।
मुख्य प्रश्न
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार की निति आयोग उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति से भारत की आर्थिक नीति निर्माण और क्रियान्वयन पर क्या प्रभाव पड़ सकते हैं? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: GS पेपर 2 – शासन और आर्थिक विकास
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के औद्योगिक और MSME क्षेत्रों को निति आयोग द्वारा बेहतर नीति समन्वय और व्यापक आर्थिक सुधारों से लाभ मिल सकता है।
- मुख्य बिंदु: उत्तर में निति आयोग की राज्य स्तर की आर्थिक योजना और सहयोगात्मक संघवाद में भूमिका को झारखंड की संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था के उदाहरणों के साथ शामिल करें।
निति आयोग की संवैधानिक स्थिति क्या है?
निति आयोग की स्थापना 2015 में एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा हुई थी और इसका कोई संवैधानिक दर्जा नहीं है। यह योजना आयोग की जगह एक नीति सलाहकार संस्था के रूप में काम करता है, जिसके पास वैधानिक प्रवर्तन शक्तियां नहीं हैं।
निति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
निति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय के कार्यकारी विवेकाधिकार के तहत की जाती है। इस नियुक्ति के लिए कोई विशेष संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान नहीं है।
अशोक लाहिरी का मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में क्या योगदान था?
अशोक लाहिरी ने मार्च 2019 से दिसंबर 2022 तक CEA के रूप में सेवा दी, कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार को व्यापक आर्थिक नीति पर सलाह दी, जिसमें लगभग ₹20 लाख करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज शामिल थे।
निति आयोग चीन के NDRC से कैसे अलग है?
निति आयोग एक सलाहकार संस्था है जिसके पास नीति लागू करने की शक्तियां नहीं हैं, जबकि चीन का राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग (NDRC) नियोजन और नियामक अधिकारों को मिलाकर सीधे नीति क्रियान्वयन और समन्वय करता है।
निति आयोग को नीति क्रियान्वयन में कौन-सी मुख्य चुनौतियां हैं?
निति आयोग के पास वैधानिक अधिकार न होने के कारण यह नीति क्रियान्वयन में बाधाओं का सामना करता है, जिससे राज्यों में कार्यान्वयन बिखरा हुआ रहता है और समन्वय सीमित होता है, हालांकि इसकी सलाहकारी भूमिका मजबूत है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 25 April 2026 | अंतिम अपडेट: 26 April 2026
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