परिचय: अंडमान द्वीपसमूह में रिकॉर्ड तोड़ घटनाएं
2024 में, अंडमान द्वीपसमूह ने लगातार दो दिनों में दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए, जैसा कि The Hindu ने बताया। ये आयोजन अंडमान और निकोबार प्रशासन (ANA) द्वारा पर्यटन मंत्रालय (MoT) के सहयोग से और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (GWR) के प्रमाणन के तहत राजधानी पोर्ट ब्लेयर में हुए। इस सफलता ने द्वीपों की अनूठी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संपदा को उजागर किया। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने द्वीपों की विरासत और प्राकृतिक वातावरण को रणनीतिक रूप से पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिए उपयोग किया, जो संवैधानिक सुरक्षा और आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 1: भूगोल – द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र, अंडमान और निकोबार की सांस्कृतिक विरासत
- GS पेपर 3: आर्थिक विकास – पर्यटन, क्षेत्रीय विकास, सतत वृद्धि
- GS पेपर 2: राजनीति और शासन – अनुच्छेद 371B के तहत विशेष प्रावधान, जनजातीय संरक्षण कानून
- निबंध: द्वीपीय क्षेत्रों में विकास और पर्यावरणीय सततता का संतुलन
अंडमान द्वीपसमूह पर लागू कानूनी और संवैधानिक ढांचा
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में आदिवासी समुदायों और नाजुक पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा के लिए विशेष संवैधानिक और कानूनी प्रावधान लागू हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371B के तहत द्वीपों के लिए विशेष प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई है, जो स्थानीय शासन को स्वायत्तता देती है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह आदिवासी संरक्षण विनियमन, 1956 (ANPATR) जनजातीय क्षेत्रों में प्रवेश को सीमित करता है ताकि आदिवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2002) की धाराएं 38V और 38W संरक्षित क्षेत्रों में इको-टूरिज्म और संरक्षण को नियंत्रित करती हैं, जो पर्यटन गतिविधियों पर सीधे प्रभाव डालती हैं।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धाराएं 3 और 5 सरकार को नाजुक द्वीपीय पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती हैं।
- ये कानून मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड जैसे पर्यटन कार्यक्रम पर्यावरणीय और जनजातीय सुरक्षा नियमों के अनुरूप हों।
पर्यटन और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का आर्थिक प्रभाव
पर्यटन मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2023बजट 2023-24 में द्वीपों के पर्यटन अवसंरचना विकास के लिए ₹200 करोड़ आवंटित किए गए, जो सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
- 2023 में पर्यटकों की संख्या में 12% की वृद्धि हुई, जो मजबूत विकास संकेत है।
- हाल ही में हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कार्यक्रमों से अगले वित्तीय वर्ष में पर्यटन में 8-10% की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे ₹50 करोड़ अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न हो सकता है।
- पर्यटन क्षेत्र में रोजगार 2023 में 7% बढ़ा, जो लगभग 1.5 लाख लोगों को रोजगार देता है (स्रोत: लेबर ब्यूरो, 2023)।
- समुद्री उत्पादों का निर्यात 2023 में 5% बढ़ा, जिसका लाभ पर्यटन प्रचार से बढ़ी वैश्विक पहचान को मिला (स्रोत: मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी, 2023)।
अंडमान के विकास और संरक्षण में प्रमुख संस्थान
अंडमान में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक संरक्षण को संतुलित करने के लिए कई संस्थान काम करते हैं:
- पर्यटन मंत्रालय (MoT): पर्यटन प्रचार और अवसंरचना विकास की देखरेख करता है।
- अंडमान और निकोबार प्रशासन (ANA): स्थानीय स्तर पर नीतियों को लागू करता है और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय करता है।
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (GWR): रिकॉर्ड उपलब्धियों को प्रमाणित कर वैश्विक पहचान प्रदान करता है।
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): पर्यावरणीय नियमों और संरक्षण प्रयासों को नियंत्रित करता है।
- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह वन विभाग (ANIFD): वन और वन्यजीव संरक्षण का प्रबंधन करता है।
- मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA): समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देता है, जो पर्यटन से जुड़ी मांग से लाभान्वित होता है।
तुलनात्मक दृष्टिकोण: अंडमान द्वीपसमूह बनाम मालदीव
| पहलू | अंडमान द्वीपसमूह | मालदीव |
|---|---|---|
| पर्यटन विकास दर (वार्षिक) | 12% (2023) | 15% (2018 के बाद) |
| पर्यटन का GDP में योगदान | लगभग 15% | लगभग 28% |
| प्रमुख कानूनी ढांचे | अनुच्छेद 371B, ANPATR, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, सतत पर्यटन नीतियां |
| सततता पर जोर | इको-टूरिज्म नियम, जनजातीय संरक्षण | कठोर पर्यावरण मानक, मूंगा चट्टान संरक्षण |
| सरकारी निवेश (पर्यटन में) | ₹200 करोड़ (2023-24) | अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के साथ उच्च अवसंरचना निवेश |
मालदीव की सफलता द्वीप पर्यटन को पर्यावरणीय ब्रांडिंग के साथ जोड़ने में एक मॉडल पेश करती है। अंडमान के रिकॉर्ड-तोड़ आयोजन सतत नीतियों के साथ जुड़कर इसी तरह के विकास को प्रेरित कर सकते हैं।
मुख्य चुनौतियां: अवसंरचना और पर्यावरणीय सततता
प्रचारात्मक सफलता के बावजूद, अंडमान को अवसंरचनात्मक समस्याओं का सामना है:
- हवाई और समुद्री मार्गों की सीमित कनेक्टिविटी पर्यटन के प्रवेश को सीमित करती है।
- अपर्याप्त कचरा प्रबंधन प्रणाली पारिस्थितिक संतुलन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है।
- नाजुक पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव पर्यावरणीय कानूनों के सख्त पालन के बिना गिरावट का कारण बन सकता है।
- पर्यटन वृद्धि और ANPATR के तहत जनजातीय संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना शासन चुनौती है।
महत्व और आगे की राह
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की उपलब्धियां सांस्कृतिक और पर्यावरणीय ब्रांडिंग को प्रभावी ढंग से दर्शाती हैं, जिससे पर्यटन आकर्षण बढ़ता है।
- इस गति को बनाए रखने के लिए विशेष रूप से परिवहन और कचरा प्रबंधन में अवसंरचना निवेश बढ़ाना आवश्यक है।
- पर्यावरणीय और जनजातीय संरक्षण कानूनों का सख्ती से पालन करना जरूरी है ताकि पारिस्थितिकी और सामाजिक विवाद से बचा जा सके।
- MoT, MoEFCC, ANA और स्थानीय हितधारकों के समन्वित प्रयास सतत पर्यटन और आर्थिक विकास को सुनिश्चित कर सकते हैं।
- मालदीव जैसे द्वीपीय पर्यटन नेताओं से सीख लेकर विकास और संरक्षण में संतुलन बनाया जा सकता है।
- अनुच्छेद 371B अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के लिए विशेष प्रशासनिक प्रावधान प्रदान करता है।
- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह आदिवासी संरक्षण विनियमन, 1956 (ANPATR) जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन के लिए असीमित प्रवेश की अनुमति देता है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2002) संरक्षित क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को नियंत्रित करने के प्रावधान शामिल करता है।
- पर्यटन अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की GDP में लगभग 15% योगदान देता है।
- संघीय बजट 2023-24 में द्वीपों के लिए पर्यटन अवसंरचना हेतु ₹500 करोड़ आवंटित किए गए।
- 2023 में पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 12% बढ़ी।
मेन प्रश्न
अंडमान द्वीपसमूह की हाल की गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धियों को सतत पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए कैसे उपयोग किया जा सकता है, इस पर चर्चा करें। विकास को पर्यावरणीय और जनजातीय सुरक्षा के साथ संतुलित करने के लिए किन कानूनी और आर्थिक ढांचों को ध्यान में रखना चाहिए, इसका विश्लेषण करें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 1 (भूगोल) – द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता; पेपर 3 (आर्थिक विकास) – पर्यटन और क्षेत्रीय विकास
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड का उभरता पर्यटन क्षेत्र अंडमान के सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के समन्वित पर्यटन विकास से सीख सकता है।
- मेन पॉइंटर: कानूनी सुरक्षा, अवसंरचना विकास और सतत प्रथाओं की भूमिका को उजागर करते हुए पर्यटन-आधारित क्षेत्रीय विकास पर उत्तर तैयार करें।
अंडमान द्वीपसमूह ने 2024 में कौन से दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए?
अंडमान द्वीपसमूह ने 2024 में सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विषयों से जुड़े दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए, जिनमें सबसे बड़ा नारियल वृक्ष रोपण अभियान और सबसे लंबा पारंपरिक नृत्य कार्यक्रम शामिल हैं, जिन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया और The Hindu ने रिपोर्ट किया।
अनुच्छेद 371B अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की कैसे रक्षा करता है?
अनुच्छेद 371B अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान देता है, जिससे राष्ट्रपति को शांति और सुशासन के लिए नियम बनाने का अधिकार मिलता है, जिसमें आदिवासी समुदायों की रक्षा भी शामिल है।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह आदिवासी संरक्षण विनियमन, 1956 का महत्व क्या है?
ANPATR जनजातीय क्षेत्रों में बाहरी प्रवेश को सीमित करता है ताकि आदिवासियों की सांस्कृतिक और सामाजिक अखंडता सुरक्षित रहे।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कार्यक्रमों से अंडमान को क्या आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है?
इन कार्यक्रमों से अगले वर्ष पर्यटन में 8-10% की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे लगभग ₹50 करोड़ अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होगा और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
अंडमान द्वीपसमूह में पर्यावरणीय नियमों के लिए कौन-कौन सी संस्थाएं जिम्मेदार हैं?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह वन विभाग (ANIFD) मुख्य रूप से पर्यावरणीय नियमों और संरक्षण कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
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