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2024 में 9,400 खातों पर प्रतिबंध का सारांश

जून 2024 में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत भर में साइबर अपराध से जुड़े 9,400 डिजिटल खातों को प्रतिबंधित करने की जानकारी दी, जैसा कि The Hindu ने रिपोर्ट किया। यह कदम Information Technology Act, 2000 की धारा 69A के तहत उठाया गया, जो सरकार को साइबर खतरों से बचाव के लिए सार्वजनिक रूप से सूचना तक पहुंच को रोकने का अधिकार देता है। ये प्रतिबंध गलत सूचना फैलाने से लेकर साइबर आतंकवाद तक की गतिविधियों में शामिल खातों को निशाना बनाते हैं, जो भारत में बढ़ते साइबर अपराध के बीच डिजिटल खतरों को रोकने के लिए सरकार की सख्त कार्रवाई को दर्शाते हैं।

इस कार्रवाई की अहमियत उसके दायरे और डिजिटल शासन पर इसके प्रभाव में निहित है, जो साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की जटिलता को सामने लाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन — साइबर कानून, डिजिटल अधिकार और सूचना प्रौद्योगिकी नीतियां
  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी — साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, IT Act के प्रावधान
  • निबंध: डिजिटल युग में सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संतुलन

डिजिटल खातों पर प्रतिबंध के लिए कानूनी ढांचा

भारत के साइबर शासन की नींव IT Act, 2000 है। धारा 69A सरकार को सार्वजनिक मंचों पर सूचना तक पहुंच को रोकने का अधिकार देती है ताकि संप्रभुता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा की जा सके। इसी प्रावधान के तहत हाल ही में 9,400 खातों पर प्रतिबंध लगाया गया।

धारा 66 कंप्यूटर से जुड़े अपराध जैसे हैकिंग और डेटा चोरी से संबंधित है, जबकि धारा 66F साइबर आतंकवाद को परिभाषित करती है। धारा 79 मध्यस्थों को सुरक्षित छत प्रदान करती है, बशर्ते वे उचित परिश्रम बरतें।

हालांकि, धारा 66A, जो आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री के लिए दंडात्मक थी, को सुप्रीम कोर्ट ने Shreya Singhal v. Union of India (2015) मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध तर्कसंगत, सीमित और न्यायिक समीक्षा के अधीन होने चाहिए।

इसके अलावा, Anuradha Bhasin v. Union of India (2020) के फैसले ने मनमाने इंटरनेट बंदों पर रोक लगाई, यह स्पष्ट करते हुए कि सूचना तक पहुंच का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है।

साइबर शासन और प्रवर्तन में संस्थागत भूमिकाएं

  • CERT-In (भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम): साइबर घटनाओं की निगरानी करती है, सलाह जारी करती है और साइबर खतरों के जवाब में समन्वय करती है।
  • MeitY: नीतियां बनाता है, IT कानूनों को लागू करता है और डिजिटल शासन के ढांचे की देखरेख करता है।
  • NCIIPC (राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र): महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को साइबर हमलों से बचाता है।
  • साइबर अपराध सेल्स: राज्य स्तर पर साइबर अपराधों की जांच करती हैं और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करती हैं।
  • TRAI: डिजिटल संचार प्लेटफॉर्म का नियमन करता है और इंटरनेट की पहुंच तथा उपयोग के रुझानों की निगरानी करता है।

साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन का आर्थिक पक्ष

2023 के NASSCOM रिपोर्ट के अनुसार, भारत का साइबर सुरक्षा बाजार 2025 तक 35 बिलियन USD तक पहुंचने का अनुमान है, जो डिजिटल अपनाने और साइबर खतरों में वृद्धि से प्रेरित है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत के GDP में 15% से अधिक योगदान देती है।

CERT-In 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, साइबर अपराध भारत को लगभग 1.5 बिलियन USD का सालाना नुकसान पहुंचाता है। सरकार ने 2023-24 में इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय का बजट 12% बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये किया है ताकि साइबर शासन और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

2024 में इंटरनेट पहुंच 75% है (TRAI वार्षिक रिपोर्ट), जिससे साइबर खतरों के प्रति संवेदनशील उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है, और इसलिए कड़े नियामक और प्रवर्तन तंत्र की जरूरत है।

डेटा रुझान और प्रवर्तन के आंकड़े

  • 2024 में साइबर अपराध से जुड़े 9,400 डिजिटल खातों पर प्रतिबंध लगाया गया (The Hindu, जून 2024)।
  • भारत वार्षिक साइबर हमलों की संख्या में विश्व में तीसरे स्थान पर है (CERT-In वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • 2021 से 2023 के बीच साइबर अपराध की शिकायतों में 50% से अधिक की वृद्धि हुई (NCRB अपराध आंकड़े 2023)।
  • 2023 में धारा 69A के तहत ब्लॉकिंग आदेशों में 2022 की तुलना में 40% की वृद्धि हुई (MeitY वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • डिजिटल इंडिया पहल के लिए बजट आवंटन 2023-24 में 15% बढ़ाया गया ताकि सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना को बढ़ावा दिया जा सके।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम यूरोपीय संघ का डिजिटल शासन

पहलूभारतयूरोपीय संघ (EU)
कानूनी ढांचाIT Act, 2000 — धारा 69A के तहत प्रतिक्रियात्मक ब्लॉकिंगDigital Services Act (2022) — सक्रिय सामग्री मॉडरेशन अनिवार्य
सामग्री मॉडरेशनसरकार आदेश जारी करती है बिना पारदर्शिता या उपयोगकर्ता पुनर्विचार केपारदर्शिता और उपयोगकर्ता अपील तंत्र लागू
प्रभावशीलताब्लॉकिंग आदेशों में 40% वृद्धि; न्यायिक निगरानी पर चिंता1 साल में अवैध सामग्री प्रसार में 30% कमी (EU आयोग रिपोर्ट 2023)
उपयोगकर्ता अधिकारव्यापक डेटा संरक्षण और लागू उपयोगकर्ता अधिकारों की कमीGDPR के तहत मजबूत डेटा संरक्षण, स्पष्ट उपयोगकर्ता सहमति और अधिकार

भारत के साइबर शासन में प्रमुख कमियां

  • व्यापक डेटा संरक्षण कानून का अभाव, जिसमें लागू उपयोगकर्ता अधिकार और पारदर्शिता के नियम हों।
  • धारा 69A के तहत प्रतिबंध आदेशों पर न्यायिक निगरानी और अपील तंत्र का अभाव।
  • अधिकारों के दुरुपयोग की संभावना, जिससे मनमाना सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।
  • प्रतिक्रियात्मक ब्लॉकिंग पर निर्भरता और सक्रिय सामग्री मॉडरेशन की कमी।
  • केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच संस्थागत समन्वय की कमी।

महत्व और आगे का रास्ता

  • डिजिटल अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक डेटा संरक्षण कानून बनाना और लागू करना।
  • प्रतिबंध आदेशों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र निगरानी संस्थाएं स्थापित करना और संवैधानिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करना।
  • CERT-In, MeitY, साइबर अपराध सेल्स और TRAI के बीच समन्वय को मजबूत करना ताकि खतरे का समय पर जवाब दिया जा सके।
  • EU मॉडल से सीख लेकर सक्रिय सामग्री मॉडरेशन के स्पष्ट दिशानिर्देश, उपयोगकर्ता पुनर्विचार और पारदर्शिता अपनाना।
  • साइबर सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के प्रति जनता में जागरूकता और क्षमता निर्माण बढ़ाना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
IT Act, 2000 की धारा 69A के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह सरकार को संप्रभुता और सुरक्षा के हित में सूचना तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने का अधिकार देती है।
  2. इस धारा को सुप्रीम कोर्ट ने Shreya Singhal v. Union of India (2015) में रद्द कर दिया था।
  3. इस धारा के तहत ब्लॉकिंग आदेश जारी करने से पहले अनिवार्य न्यायिक समीक्षा का प्रावधान नहीं है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि धारा 69A संप्रभुता और सुरक्षा के लिए ब्लॉकिंग का अधिकार देती है। कथन 2 गलत है; सुप्रीम कोर्ट ने धारा 69A को बरकरार रखा है। कथन 3 सही है; ब्लॉकिंग आदेशों से पहले अनिवार्य न्यायिक समीक्षा नहीं होती।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
IT Act, 2000 की धारा 66A के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह संचार सेवा के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश भेजने को अपराध मानती है।
  2. यह वर्तमान में लागू प्रावधान है और कानून प्रवर्तन द्वारा अक्सर इस्तेमाल किया जाता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने इसे Shreya Singhal v. Union of India (2015) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के कारण रद्द कर दिया।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; धारा 66A आपत्तिजनक संदेश भेजने को अपराध मानती थी। कथन 2 गलत है; इसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। कथन 3 सही है, जैसा कि 2015 के फैसले में कहा गया।

मुख्य प्रश्न

IT Act, 2000 की धारा 69A के तहत साइबर अपराध से जुड़े 9,400 डिजिटल खातों पर प्रतिबंध लगाने के प्रभावों की आलोचनात्मक समीक्षा करें। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों पर चर्चा करें और भारत में साइबर सुरक्षा और डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए सुधार सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (गवर्नेंस और एथिक्स) — साइबर कानून और डिजिटल शासन
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में इंटरनेट पहुंच 2024 में लगभग 60% है, जिससे साइबर अपराध के प्रति संवेदनशीलता बढ़ी है; स्थानीय साइबर अपराध सेल्स ने दो वर्षों में शिकायतों में 45% की वृद्धि दर्ज की है।
  • मुख्य बिंदु: राष्ट्रीय साइबर शासन नीतियों को राज्य स्तर के प्रवर्तन चुनौतियों और झारखंड में डिजिटल साक्षरता पहलों से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत सरकार को साइबर अपराध से जुड़े डिजिटल खातों को ब्लॉक करने का कानूनी अधिकार कौन सा प्रावधान देता है?

Information Technology Act, 2000 की धारा 69A सरकार को संप्रभुता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में डिजिटल सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच को रोकने का अधिकार देती है।

क्या IT Act की धारा 66A अभी भी आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री के लिए दंडात्मक है?

नहीं। धारा 66A को सुप्रीम कोर्ट ने Shreya Singhal v. Union of India (2015) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए रद्द कर दिया।

भारत में कौन सी संस्था साइबर घटनाओं की निगरानी और प्रतिक्रिया करती है?

भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) राष्ट्रीय स्तर पर साइबर घटनाओं की निगरानी करती है और साइबर खतरों का जवाब देती है।

भारत के वर्तमान साइबर शासन ढांचे के मुख्य चिंताएं क्या हैं?

मुख्य चिंताएं हैं व्यापक डेटा संरक्षण कानून की कमी, ब्लॉकिंग आदेशों पर न्यायिक निगरानी का अभाव, शक्तियों के दुरुपयोग से सेंसरशिप का खतरा, और पारदर्शिता तथा उपयोगकर्ता पुनर्विचार तंत्र की कमी।

भारत की डिजिटल कंटेंट ब्लॉकिंग नीति यूरोपीय संघ से कैसे अलग है?

भारत धारा 69A के तहत प्रतिक्रियात्मक ब्लॉकिंग मॉडल अपनाता है जिसमें पारदर्शिता या अपील प्रक्रिया अनिवार्य नहीं है, जबकि यूरोपीय संघ का Digital Services Act सक्रिय मॉडरेशन, पारदर्शिता, उपयोगकर्ता पुनर्विचार को अनिवार्य करता है और अवैध सामग्री प्रसार में 30% कमी हासिल की है।

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