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भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार सहयोग: परिचय और रणनीतिक संदर्भ

2022 में DRDO-DAPA MoU पर हस्ताक्षर के बाद से भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा नवाचार में अपने संबंधों को गहरा किया है। इस साझेदारी का मुख्य फोकस बिना पायलट वाले विमान (UAV) और मिसाइल तकनीक के संयुक्त विकास पर है। यह सहयोग व्यापक इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे के अंतर्गत आता है, जहाँ दोनों देश क्षेत्रीय तनावों के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया का उन्नत रक्षा नवाचार तंत्र भारत के Make in India Initiative के तहत बढ़ती स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता के साथ मेल खाता है, जिससे सह-विकास और तकनीकी हस्तांतरण की संभावनाएँ बढ़ती हैं। यह सहयोग भारत के Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 और दक्षिण कोरिया के Defence Acquisition Program Administration (DAPA) Act 2006 जैसे कानूनी ढांचों के तहत संचालित होता है।

UPSC Relevance

  • GS Paper 2: भारत की विदेश नीति, द्विपक्षीय संबंध, रक्षा सहयोग
  • GS Paper 3: रक्षा तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, रणनीतिक स्वायत्तता
  • निबंध: भारत की रणनीतिक साझेदारियाँ और रक्षा में तकनीकी आत्मनिर्भरता

रक्षा नवाचार सहयोग के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत में रक्षा खरीद और नवाचार सहयोग Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के तहत नियंत्रित होते हैं, जो स्वदेशी उत्पादन और रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देता है। Defence Production Policy 2018 का लक्ष्य 2025 तक रक्षा निर्यात को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाना है और रक्षा निर्माण में Make in India को प्रोत्साहित करना है। Defence of India Act, 1917 की धारा 3 रक्षा तकनीक में रणनीतिक साझेदारी को कानूनी आधार प्रदान करती है। दक्षिण कोरिया का DAPA Act 2006 रक्षा खरीद और नवाचार को संस्थागत रूप देता है, जिससे उन्नत तकनीकों का तेजी से विकास और तैनाती संभव होती है। प्रमुख संस्थान हैं भारत का DRDO और रक्षा मंत्रालय, तथा दक्षिण कोरिया का DAPA और KIDA, जिनके साथ हान्वा और LIG Nex1 जैसे रक्षा निर्माता संयुक्त परियोजनाओं में सक्रिय हैं।

  • भारत का रक्षा मंत्रालय नीतियाँ बनाता है और DPP 2020 के अनुरूप खरीद की निगरानी करता है।
  • DRDO स्वदेशी अनुसंधान और विकास का नेतृत्व करता है, जिसका बजट 2023-24 में 12% बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये हुआ है।
  • दक्षिण कोरिया का DAPA रक्षा खरीद और नवाचार का प्रबंधन करता है, जिसे DAPA Act के तहत अधिकार प्राप्त हैं।
  • KIDA रणनीतिक शोध करता है जो नवाचार और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनियाँ भारत के साझेदारों के साथ मिलकर Make in India के तहत संयुक्त उत्पादन करती हैं।

आर्थिक पहलू और रक्षा व्यापार की स्थिति

भारत का रक्षा बजट 2023-24 लगभग 5.94 लाख करोड़ रुपये (~72 अरब डॉलर) है, जिसमें 25% पूंजीगत व्यय आधुनिककरण के लिए रखा गया है। दक्षिण कोरिया का रक्षा बजट 2023 में 50 अरब डॉलर है, जो सालाना 7.5% की दर से बढ़ रहा है। द्विपक्षीय रक्षा तकनीक व्यापार 2022 में 500 मिलियन डॉलर तक पहुंचा, जो 15% वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है, जिससे सहयोग की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। भारत के रक्षा निर्यात 2022-23 में 45% बढ़कर 1.3 अरब डॉलर हो गए, हालांकि यह लक्ष्य के मुकाबले अभी कम है। दक्षिण कोरिया रक्षा एआई और स्वायत्त प्रणालियों में हर साल 1.2 अरब डॉलर निवेश करता है, जो DRDO-DAPA MoU के तहत संयुक्त रुचि के क्षेत्र हैं।

  • भारत का पूंजीगत व्यय आधुनिककरण और स्वदेशी नवाचार को समर्थन देता है।
  • दक्षिण कोरिया का बजट स्थिर वृद्धि के साथ अनुसंधान और खरीद को मजबूत करता है।
  • संयुक्त व्यापार वृद्धि तकनीकी हस्तांतरण और सह-विकास को दर्शाती है।
  • भारत 2025 तक 5 अरब डॉलर रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखता है।
  • दक्षिण कोरिया के एआई निवेश भारत के उभरते स्वायत्त प्रणालियों अनुसंधान से मेल खाते हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-दक्षिण कोरिया बनाम भारत-इज़राइल रक्षा नवाचार साझेदारी

भारत और इज़राइल की रक्षा नवाचार साझेदारी ने बाराक मिसाइल और UAV जैसे कई सिस्टम विकसित किए हैं, जिनका वार्षिक निर्यात 1 अरब डॉलर से अधिक है। इसकी सफलता इज़राइल की केंद्रित द्वि-उपयोग तकनीक नीतियों और Defence Export Control Order 2020 के तहत सुव्यवस्थित खरीद प्रक्रिया से है। इसके विपरीत, भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों में संयुक्त नवाचार के व्यावसायीकरण और तकनीकी हस्तांतरण के लिए समर्पित संस्थागत ढांचा नहीं है, जिससे उन्नत तकनीकों के आत्मसात में देरी होती है। भारत की इज़राइल और अमेरिका के साथ साझेदारियाँ स्थापित रक्षा नवाचार हब और निर्यात सुविधा केंद्रों से समर्थित हैं, जो तकनीक के त्वरित उपयोग और निर्यात को सक्षम बनाते हैं।

पहलूभारत-दक्षिण कोरियाभारत-इज़राइल
कानूनी ढांचाDPP 2020, DAPA Act 2006; संयुक्त व्यावसायीकरण निकाय नहींDefence Export Control Order 2020; स्थापित नवाचार हब
तकनीकी हस्तांतरणसीमित, धीमातेज, संचालित प्रणालियाँ
रक्षा व्यापार मात्रा (2022)500 मिलियन डॉलर1 अरब डॉलर से अधिक
प्रमुख क्षेत्रUAV, मिसाइल, एआई संयुक्त अनुसंधानमिसाइल, UAV, द्वि-उपयोग तकनीक
संस्थागत समर्थनDRDO-DAPA MoU; समर्पित निर्यात सुविधा नहींसमर्पित नवाचार हब और निर्यात केंद्र

भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार सहयोग में चुनौतियाँ और महत्वपूर्ण अंतर

संयुक्त नवाचार के व्यावसायीकरण के लिए समर्पित संस्थागत तंत्र की कमी तकनीकी हस्तांतरण और सह-विकसित प्रणालियों की त्वरित तैनाती में बाधा है। DPP 2020 के तहत नौकरशाही देरी और खरीद चक्र में असमानताएँ सहयोगी परियोजनाओं को धीमा करती हैं। साथ ही, दक्षिण कोरिया की उन्नत एआई और स्वायत्त रक्षा क्षमताओं का भारत के तंत्र में सीमित समावेश पूर्ण लाभ उठाने में बाधा डालता है। इज़राइल और अमेरिका के साथ तुलना में, भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार संबंधों को बेहतर नीति समन्वय और संस्थागत ढांचे की आवश्यकता है ताकि प्रभाव अधिकतम हो सके।

  • तकनीकी हस्तांतरण को तेज करने के लिए संयुक्त रक्षा नवाचार व्यावसायीकरण सेल की जरूरत।
  • द्विपक्षीय अनुसंधान परियोजनाओं के साथ खरीद समयसीमा को समन्वित करना।
  • दक्षिण कोरिया के एआई निवेश को भारत के स्वायत्त प्रणालियों के साथ बेहतर जोड़ना।
  • Make in India के तहत निजी क्षेत्र और MSME की भागीदारी बढ़ाना।
  • द्वि-उपयोग तकनीक विकास और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए नीति समन्वय।

महत्व और आगे का रास्ता

भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार सहयोग को मजबूत करना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा, पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करेगा और स्वदेशी तकनीक विकास को तेज करेगा। यह भारत की वैश्विक रक्षा निर्यातक बनने की महत्वाकांक्षा को भी समर्थन देगा और बदलते इंडो-पैसिफिक सुरक्षा माहौल में क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगा। संयुक्त नवाचार के व्यावसायीकरण को संस्थागत करना, एआई और स्वायत्त प्रणालियों में संयुक्त अनुसंधान बढ़ाना, और खरीद नीतियों का समन्वय करना आवश्यक अगले कदम हैं। दक्षिण कोरिया की तकनीकी ताकत और भारत के उत्पादन आधार का संयोजन एक मजबूत, नवाचार-आधारित रक्षा साझेदारी बना सकता है।

  • संयुक्त अनुसंधान और व्यावसायीकरण के लिए द्विपक्षीय रक्षा नवाचार हब स्थापित करना।
  • प्रोजेक्ट समय कम करने और तकनीकी आत्मसात बेहतर करने के लिए खरीद प्रक्रियाओं का समन्वय।
  • एआई, स्वायत्त प्रणालियाँ और साइबर रक्षा जैसी नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाना।
  • Make in India के तहत भारतीय MSME और दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनियों के संयुक्त उद्यमों को प्रोत्साहित करना।
  • द्वि-उपयोग तकनीकों के विकास और निर्यात को आसान बनाने के लिए निर्यात सुविधा तंत्र विकसित करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार सहयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत का Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 रक्षा खरीद को नियंत्रित करता है और स्वदेशी निर्माण को प्राथमिकता देता है।
  2. दक्षिण कोरिया का Defence Acquisition Program Administration (DAPA) Act 2006 केवल रक्षा निर्यात को नियंत्रित करता है।
  3. 2022 में हस्ताक्षरित DRDO-DAPA MoU UAV और मिसाइल तकनीकों के संयुक्त विकास पर केंद्रित है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि DPP 2020 रक्षा खरीद को नियंत्रित करता है और स्वदेशी निर्माण को प्राथमिकता देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि DAPA Act 2006 रक्षा खरीद और नवाचार को नियंत्रित करता है, केवल निर्यात को नहीं। कथन 3 सही है; 2022 का MoU UAV और मिसाइल विकास पर केंद्रित है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के रक्षा निर्यात के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. भारत के रक्षा निर्यात 2022-23 में 1.3 अरब डॉलर तक पहुँच गए।
  2. भारत 2025 तक Defence Production Policy 2018 के तहत रक्षा निर्यात को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
  3. भारत के रक्षा निर्यात में केवल लाइसेंस प्राप्त उत्पादन शामिल है, स्वदेशी प्रणालियाँ नहीं।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 आधिकारिक आंकड़ों और नीतिगत लक्ष्यों के अनुसार सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत के रक्षा निर्यात में लाइसेंस प्राप्त उत्पादन के साथ-साथ स्वदेशी प्रणालियाँ भी शामिल हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना के संदर्भ में भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार संबंधों के महत्व का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इस द्विपक्षीय साझेदारी में मौजूद चुनौतियों को दूर करने के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और रक्षा सहयोग
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में रक्षा निर्माण इकाइयां और DRDO प्रयोगशालाएँ हैं जो स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास में योगदान देती हैं; भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों में सुधार से स्थानीय उद्योग को तकनीकी लाभ मिल सकता है।
  • मुख्य बिंदु: रणनीतिक स्वायत्तता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, और क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में उत्तर तैयार करें जो झारखंड के रक्षा तंत्र से संबंधित हो।
भारत के रक्षा नवाचार साझेदारी को कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

भारत के रक्षा नवाचार साझेदारी मुख्य रूप से Defence Procurement Procedure (DPP) 2020, Defence Production Policy 2018, और Defence of India Act, 1917 की धारा 3 के तहत नियंत्रित होती हैं, जो रणनीतिक सहयोग और स्वदेशी निर्माण को सशक्त बनाती हैं।

दक्षिण कोरिया का रक्षा नवाचार तंत्र द्विपक्षीय सहयोग को कैसे समर्थन देता है?

दक्षिण कोरिया का Defence Acquisition Program Administration (DAPA) Act 2006 खरीद और नवाचार को संगठित करता है, जिससे उन्नत तकनीक का तेजी से विकास संभव होता है और KIDA तथा रक्षा कंपनियों के माध्यम से भारत के साथ संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा मिलता है।

भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा नवाचार सहयोग में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में संयुक्त नवाचार के व्यावसायीकरण के लिए समर्पित संस्थागत तंत्र की कमी, खरीद में नौकरशाही देरी, और उन्नत तकनीकों जैसे एआई का सीमित समावेश शामिल हैं।

भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा व्यापार की तुलना भारत-इज़राइल से कैसे होती है?

भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा व्यापार 2022 में 500 मिलियन डॉलर था, जो 15% की वार्षिक वृद्धि दर पर है, जबकि भारत-इज़राइल का रक्षा निर्यात वार्षिक 1 अरब डॉलर से अधिक है, जो तेज तकनीकी आत्मसात और तैनाती दर्शाता है।

भारत को दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ते रक्षा नवाचार संबंधों से क्या रणनीतिक लाभ मिलते हैं?

सशक्त सहयोग भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाता है, पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है, स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देता है और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करता है।

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