2026 SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक का अवलोकन
2026 शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक किर्गिज़स्तान में आयोजित हुई, जिसमें 10 सदस्यीय यूरेशियाई समूह के रक्षा मंत्री शामिल हुए। इस बैठक में क्षेत्र में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए एकजुट बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग की अनिवार्यता पर जोर दिया गया। भारत, जो 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और 2023 से अध्यक्ष पद संभाले हुए है, ने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की वकालत की और सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दोहरे मानदंडों की चुनौतियों को उजागर किया।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – क्षेत्रीय समूह, सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोधी उपाय।
- GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा – आतंकवाद, रक्षा सहयोग।
- निबंध: यूरेशिया में बहुपक्षीयता और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ।
SCO का विकास और संस्थागत ढांचा
SCO की शुरुआत 1996 में शंघाई फाइव के रूप में हुई थी, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान और ताजिकिस्तान शामिल थे, जो सीमा निर्धारण और सैन्यीकरण कम करने पर केंद्रित था। 2001 में उज्बेकिस्तान के शामिल होने से यह SCO बन गया और इसका दायरा क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग तक बढ़ गया।
- SCO चार्टर (2002) ने इसके उद्देश्यों को संस्थागत रूप दिया: आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई।
- वर्तमान सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस और चार मध्य एशियाई देश शामिल हैं।
- राज्य प्रमुखों की परिषद (CHS) सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, जो सालाना मिलती है।
- दो स्थायी निकाय हैं: सचिवालय (बीजिंग) और क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) (ताशकंद), जो 2004 से आतंकवाद विरोधी प्रयासों का समन्वय करती है।
भारत की भागीदारी का कानूनी और संवैधानिक संदर्भ
भारत की SCO में भागीदारी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 के अनुरूप है, जो संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है। हालांकि SCO एक अंतर-सरकारी संगठन है और इसका कोई प्रत्यक्ष संवैधानिक शासन नहीं है, इसका आतंकवाद विरोधी ढांचा घरेलू कानूनों के पूरक के रूप में काम करता है:
- अनैतिक गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) – धारा 15 और 16 आतंकवादी संगठनों और साजिशों को संबोधित करती हैं, SCO सहयोग से पहचाने गए आतंकवादी तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में मदद मिलती है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 – आंतरिक सुरक्षा खतरों के लिए रोकथाम संबंधी हिरासत की अनुमति देता है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, SCO चार्टर और RATS फ्रेमवर्क सामूहिक आतंकवाद विरोधी कदम, खुफिया साझा करने और संयुक्त अभ्यास को मार्गदर्शित करते हैं।
SCO सुरक्षा सहयोग के आर्थिक आयाम
SCO सदस्य देश विश्व की लगभग 30% GDP (वर्ल्ड बैंक, 2023) और 40% विश्व जनसंख्या (UN DESA, 2023) का प्रतिनिधित्व करते हैं। बेहतर सुरक्षा सहयोग महत्वपूर्ण व्यापार गलियारों की स्थिरता का आधार है।
- चीन के नेतृत्व में Belt and Road Initiative (BRI) कई SCO सदस्यों से होकर गुजरती है, जो वार्षिक $1 ट्रिलियन से अधिक व्यापार को सक्षम बनाती है (एशियाई विकास बैंक, 2024)।
- रक्षा बजट रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं: चीन ($230 बिलियन), रूस ($86 बिलियन), भारत ($80 बिलियन) 2023 में (SIPRI)।
- स्थिर सुरक्षा माहौल निवेश आत्मविश्वास और यूरेशिया में बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देता है।
SCO और NATO सुरक्षा सहयोग की तुलना
| पहलू | शंघाई सहयोग संगठन (SCO) | नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) |
|---|---|---|
| स्थापना वर्ष | 2001 (SCO के रूप में) | 1949 |
| सदस्यता | 10 सदस्य (यूरेशियाई देश, भारत और पाकिस्तान सहित) | 31 सदस्य (उत्तर अमेरिका और यूरोप) |
| सुरक्षा तंत्र | सहमति आधारित, बाध्यकारी पारस्परिक रक्षा प्रतिबद्धता नहीं | अनुच्छेद 5 के तहत सामूहिक रक्षा (बाध्यकारी) |
| संचालनात्मक संरचना | RATS के माध्यम से विकेंद्रीकृत समन्वय; एकीकृत कमांड नहीं | एकीकृत सैन्य कमांड और त्वरित तैनाती बल |
| ध्यान केंद्रित क्षेत्र | आतंकवाद विरोधी, क्षेत्रीय स्थिरता, अलगाववाद और उग्रवाद से मुकाबला | सामूहिक रक्षा, संकट प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी, निरोध |
SCO सुरक्षा सहयोग की चुनौतियाँ और कमियाँ
SCO की सहमति-आधारित निर्णय प्रक्रिया अक्सर आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई में बाधा डालती है, खासकर भारत-पाकिस्तान के बीच के राजनीतिक तनाव के कारण। इससे त्वरित खुफिया साझा करने और समन्वित अभियानों में कमी आती है।
- भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा SCO को सीमा पार आतंकवादी समूहों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने से रोकती है।
- आतंकवाद की परिभाषा में दोहरे मानदंड एकजुट कार्रवाई में बाधा डालते हैं; कुछ सदस्य देश अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप समूहों को संरक्षण देते हैं।
- बाध्यकारी पारस्परिक रक्षा क्लॉज के अभाव में त्वरित सामूहिक सैन्य प्रतिक्रिया सीमित है।
- RATS के संचालन में संसाधन और राजनीतिक संवेदनशीलताओं के कारण सीमाएँ हैं।
भारत की रणनीतिक भूमिका और हित
भारत SCO मंच का उपयोग सीमा पार आतंकवाद, विशेषकर पाकिस्तान स्थित समूहों से निपटने के लिए करता है। 2023 में भारत की अध्यक्षता का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
- भारत दोहरे मानदंडों को खत्म करने और खुफिया साझा करने को बढ़ावा देने की वकालत करता है।
- SCO के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास और क्षमता निर्माण पहलों में भाग लेता है।
- चीन-रूस के प्रभाव को संतुलित करते हुए बहुध्रुवीय क्षेत्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देता है।
- अफगानिस्तान को पर्यवेक्षक दर्जा देकर क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद को प्रोत्साहित करता है।
आगे का रास्ता: SCO के सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना
- राष्ट्रीय संवेदनशीलताओं का सम्मान करते हुए त्वरित खुफिया साझा करने के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करें।
- आतंकवाद की समान और स्पष्ट परिभाषा विकसित करें ताकि दोहरे मानदंड कम हों।
- RATS की क्षमता बढ़ाने के लिए वित्तीय और संचालनात्मक स्वतंत्रता प्रदान करें।
- SCO के ढांचे में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास निर्माण उपायों को प्रोत्साहित करें।
- आर्थिक एकीकरण (BRI और व्यापार गलियारों) का उपयोग सुरक्षा सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए करें।
- SCO की स्थापना 2001 में छह संस्थापक सदस्यों के साथ हुई थी।
- भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना।
- SCO में NATO के अनुच्छेद 5 के समान बाध्यकारी पारस्परिक रक्षा क्लॉज है।
- RATS का मुख्यालय बीजिंग, चीन में है।
- RATS SCO सदस्य देशों के बीच आतंकवाद विरोधी प्रयासों का समन्वय करता है।
- RATS का एक केंद्रीकृत कमांड संरचना है, जो NATO के समान है।
मुख्य प्रश्न
2026 SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक की क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में भूमिका की समीक्षा करें। SCO ढांचे में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दोहरे मानदंडों की चुनौतियों पर चर्चा करें और आतंकवाद विरोधी प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा सहयोग।
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ, जैसे वामपंथी उग्रवाद, SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों में भारत के आतंकवाद विरोधी सहयोग से अप्रत्यक्ष लाभ उठा सकती हैं।
- मुख्य बिंदु: आतंकवाद के खिलाफ भारत के बहुपक्षीय दृष्टिकोण को उजागर करते हुए राज्य स्तर पर समन्वय के लिए सबक प्रस्तुत करें।
शंघाई सहयोग संगठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना है ताकि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ाई की जा सके, साथ ही यूरेशिया में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।
2024 तक SCO के पूर्ण सदस्य कौन-कौन से देश हैं?
10 पूर्ण सदस्य हैं: चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान।
SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) की भूमिका क्या है?
RATS SCO सदस्य देशों के बीच आतंकवाद विरोधी प्रयासों, खुफिया साझा करने और संयुक्त अभियानों का समन्वय करता है। इसका मुख्यालय ताशकंद, उज्बेकिस्तान में है और यह 2004 से सक्रिय है।
SCO का सुरक्षा सहयोग NATO से कैसे अलग है?
NATO के अनुच्छेद 5 के तहत बाध्यकारी पारस्परिक रक्षा प्रतिबद्धताओं और एकीकृत सैन्य कमांड के विपरीत, SCO सहमति आधारित है और बाध्यकारी सैन्य गठबंधन नहीं है, जो मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित है।
भारत की SCO में भागीदारी उसके संवैधानिक प्रावधानों से कैसे मेल खाती है?
भारत की भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 253 के अनुरूप है, जो संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है। SCO सहयोग घरेलू कानूनों जैसे UAPA और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के आतंकवाद विरोधी और आंतरिक सुरक्षा उपायों को पूरक करता है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
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