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Governance · Exam Notes

मलेरिया नियंत्रण में जीन ड्राइव तकनीक और इसकी क्रांतिकारी संभावनाएं

जीन ड्राइव तकनीक CRISPR-Cas9 का उपयोग कर मच्छर की आबादी में तेजी से आनुवंशिक बदलाव लाती है, जो मलेरिया नियंत्रण में एक नया रास्ता खोलती है। भारत जहां कीटनाशकों पर निर्भर है, वहां जीन ड्राइव से मलेरिया की घटनाओं और खर्चों में बड़ी कटौती संभव है, लेकिन नियामक और पारिस्थितिक चुनौतियां अभी भी अनसुलझी हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

जीन ड्राइव तकनीक CRISPR-Cas9 का उपयोग कर मच्छर की आबादी में तेजी से आनुवंशिक बदलाव लाती है, जो मलेरिया नियंत्रण में एक नया रास्ता खोलती है। भारत जहां कीटनाशकों पर निर्भर है, वहां जीन ड्राइव से मलेरिया की घटनाओं और खर्चों में बड़ी कटौती संभव है, लेकिन नियामक और पारिस्थितिक चुनौतियां अभी भी अनसुलझी हैं।

मलेरिया नियंत्रण में जीन ड्राइव का परिचय

मलेरिया आज भी विश्व स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। 2024 में विश्वभर में 282 मिलियन मामले और 610,000 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 95% मामले WHO के अफ्रीकी क्षेत्र से हैं और 76% प्रभावित बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं (WHO World Malaria Report 2024)। जीन ड्राइव तकनीक CRISPR-Cas9 का उपयोग कर आनुवंशिक पैटर्न को प्रभावित करती है, जिससे कोई खास जीन 90% से अधिक संतानों में पहुंचता है, जबकि सामान्य मेन्डेलियन विरासत में यह 50% होता है (Nature Biotechnology, 2023)। यह तरीका मच्छर की आबादी में तेजी से आनुवंशिक बदलाव लाकर मलेरिया के प्रसार को कम करने के लिए एक प्रभावी उपाय प्रदान करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य – वेक्टर जनित रोग नियंत्रण, सार्वजनिक स्वास्थ्य कानून
  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – बायोटेक्नोलॉजी के अनुप्रयोग, आनुवंशिक अभियांत्रण
  • निबंध: सार्वजनिक स्वास्थ्य में उभरती तकनीकें और उनके नैतिक पहलू

जीन ड्राइव तकनीक: कार्यप्रणाली और फायदे

जीन ड्राइव CRISPR-Cas9 की मदद से प्रजनन के दौरान इच्छित जीन को दोनों क्रोमोसोमों पर कॉपी कर देता है, जिससे पारंपरिक विरासत की प्रक्रिया को पीछे छोड़ते हुए यह जीन आबादी में तेजी से फैलता है। इससे मच्छरों में मलेरिया प्रतिरोध या उनकी संख्या घटाने जैसे गुण जल्दी फैलते हैं। पारंपरिक वेक्टर नियंत्रण जैसे कीटनाशक युक्त जाल (ITNs) और इनडोर रेसिडुअल स्प्रे (IRS) की तुलना में जीन ड्राइव एक स्व-संरक्षित और विशिष्ट तरीका है, जो रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर सकता है।

  • विरासत में पक्षपात: प्राकृतिक 50% की बजाय 90% से अधिक जीन संचरण
  • लक्षित आनुवंशिक बदलाव: जैसे मच्छर बांझपन या परजीवी प्रतिरोध
  • दीर्घकालिक आबादी नियंत्रण या प्रतिस्थापन की संभावना
  • कीटनाशकों की तुलना में पर्यावरणीय प्रभाव में कमी

भारत में नियामक और कानूनी ढांचा

भारत में जीन ड्राइव तकनीक के लिए कोई विशिष्ट कानून नहीं है, जिससे नियामक खामियां बनी हुई हैं। वर्तमान में आनुवंशिक हस्तक्षेपों को नियंत्रित करने वाले कानूनों में Epidemic Diseases Act, 1897 सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए, Biological Diversity Act, 2002 (धारा 3 और 40) आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित करता है, और Environment Protection Act, 1986 (धारा 6) GMO के पर्यावरणीय विमोचन को विनियमित करता है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) GMO अनुमोदन की मुख्य संस्था है, लेकिन जीन ड्राइव के लिए कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं, जिससे शोध और उपयोग में देरी हो सकती है।

  • Epidemic Diseases Act, 1897: महामारी नियंत्रण के लिए प्रावधान, लेकिन आनुवंशिक उपकरणों का नियमन नहीं।
  • Biological Diversity Act, 2002: आनुवंशिक संसाधनों की पहुँच और लाभ साझा करने का नियंत्रण।
  • Environment Protection Act, 1986: GMO के पर्यावरणीय विमोचन का नियमन।
  • GEAC: GMO अनुसंधान और विमोचन की मंजूरी; जीन ड्राइव इसके अंतर्गत आते हैं लेकिन विशेष नियम नहीं।

जीन ड्राइव के आर्थिक पहलू

2023 में वैश्विक मलेरिया नियंत्रण बाजार लगभग 3.5 बिलियन USD का था, जो 2030 तक 6.2% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने का अनुमान है (Global Market Insights 2024)। भारत के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) ने 2023-24 में मलेरिया नियंत्रण के लिए लगभग 1,200 करोड़ रुपये (~160 मिलियन USD) आवंटित किए। जीन ड्राइव तकनीक मलेरिया के मामलों को कम कर, अस्पताल में भर्ती और कीटनाशक उपयोग घटाकर दीर्घकालिक खर्चों में 20% से अधिक बचत कर सकती है।

  • भारत में वार्षिक मलेरिया मामले: लगभग 1.5 मिलियन (NVBDCP 2023)
  • उपचार और वेक्टर नियंत्रण खर्च में कटौती
  • स्वास्थ्य ढांचे पर आर्थिक दबाव में कमी
  • बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे वैश्विक संस्थानों से वित्तीय सहायता

केस स्टडी: तंजानिया का ‘Transmission Zero’ प्रोजेक्ट

तंजानिया के ‘Transmission Zero’ अध्ययन में जीन संशोधित मच्छरों ने परजीवी विकास को 85% से अधिक कम कर दिया, जिससे 18 महीनों में मलेरिया का प्रसार प्रभावी रूप से रुक गया (Lancet Infectious Diseases, 2024)। यह सफलता जीन ड्राइव की क्षमता को दर्शाती है, खासकर उच्च रोग भार वाले क्षेत्रों में, जबकि भारत अभी भी ITNs और IRS पर निर्भर है, जहां कीटनाशक प्रतिरोध और कवरेज की चुनौतियां हैं।

पैरामीटरभारततंजानिया (‘Transmission Zero’)
प्राथमिक वेक्टर नियंत्रणकीटनाशक युक्त जाल, इनडोर स्प्रेजीन ड्राइव मच्छर, जिनमें संशोधित गुण होते हैं
मलेरिया घटना में कमीसीमित, धीरे-धीरे गिरावट; ~1.5 मिलियन मामले वार्षिक18 महीनों में परजीवी प्रचलन में 85% कमी
चुनौतियांकीटनाशक प्रतिरोध, संचालन में कमी, नियामक खामियांपारिस्थितिक जोखिम, नैतिक चिंताएं, नियामक फ्रेमवर्क विकासाधीन
लागत प्रभावकीटनाशक और उपचार के लिए उच्च आवर्ती खर्चस्व-संरक्षित हस्तक्षेप के कारण दीर्घकालिक लागत बचत की संभावना

चुनौतियां और नैतिक पहलू

वैज्ञानिक चुनौतियों में मच्छरों और परजीवियों का विकासशील प्रतिरोध शामिल है, जिसके लिए बहु-लक्षित जीन ड्राइव की जरूरत है। पारिस्थितिक जोखिमों में मच्छर आबादी में कमी से खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। नैतिक मुद्दों में प्रभावित समुदायों की सहमति, सीमापार प्रभाव, और जैव सुरक्षा शामिल हैं। भारत में इन पहलुओं पर चर्चा अभी अधूरी है, इसलिए एक व्यापक नीति फ्रेमवर्क आवश्यक है।

  • मच्छरों और परजीवियों में प्रतिरोध विकास का खतरा
  • खाद्य जाल और जैव विविधता में संभावित व्यवधान
  • पारदर्शी हितधारक संवाद और सूचित सहमति की जरूरत
  • भारत में जीन ड्राइव के लिए स्पष्ट नियामक नियमों का अभाव

भारत के लिए आगे का रास्ता

  • GEAC और संबंधित निकायों के तहत जीन ड्राइव अनुसंधान और उपयोग के लिए विशिष्ट नियामक दिशा-निर्देश बनाना।
  • स्वास्थ्य, पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाना।
  • जैव सुरक्षा मूल्यांकन और पारिस्थितिक निगरानी के लिए क्षमता निर्माण में निवेश।
  • समुदाय और नागरिक समाज को नैतिक बहस और जोखिम संचार में शामिल करना।
  • अफ्रीकी जीन ड्राइव परियोजनाओं से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सीख लेना।

जीन ड्राइव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. जीन ड्राइव किसी जीन की विरासत की संभावना को मेन्डेलियन 50% से अधिक बढ़ाते हैं।
  2. भारत में जीन ड्राइव को लेकर कोई विशेष कानून मौजूद है।
  3. जीन ड्राइव का उपयोग मच्छर की आबादी घटाकर मलेरिया नियंत्रण में किया जा सकता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि जीन ड्राइव विरासत को 50% से अधिक बढ़ाते हैं। कथन 2 गलत है; भारत में जीन ड्राइव के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि जीन ड्राइव मच्छर आबादी घटाने में मदद करते हैं।

मलेरिया नियंत्रण रणनीतियों के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. कीटनाशक युक्त जाल मलेरिया नियंत्रण का स्व-संरक्षित उपाय हैं।
  2. जीन ड्राइव रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
  3. भारत में जीन ड्राइव का बड़े पैमाने पर सफल परीक्षण हो चुका है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) केवल 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है; ITNs स्व-संरक्षित नहीं हैं और निरंतर वितरण व उपयोग की जरूरत होती है। कथन 2 सही है क्योंकि जीन ड्राइव कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हैं। कथन 3 गलत है; भारत में जीन ड्राइव का बड़े पैमाने पर परीक्षण अभी नहीं हुआ है।

मुख्य प्रश्न

भारत में मलेरिया नियंत्रण में जीन ड्राइव तकनीक कैसे क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है? इसके उपयोग से जुड़ी नियामक और नैतिक चुनौतियों पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में मलेरिया का बोझ खासकर आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में अधिक है, जहां नए वेक्टर नियंत्रण तरीकों की जरूरत है।
  • मुख्य बिंदु: स्थानीय मलेरिया महामारी विज्ञान, वन क्षेत्रीय वेक्टर आवास में जीन ड्राइव के लाभ, और राज्य स्तर पर नियामक तैयारी की आवश्यकता।
जीन ड्राइव की पारंपरिक आनुवंशिक विरासत पर क्या मुख्य बढ़त है?

जीन ड्राइव विरासत को इस तरह प्रभावित करता है कि कोई जीन 90% से अधिक संतानों में पहुंचता है, जबकि पारंपरिक मेन्डेलियन विरासत में यह 50% होता है, जिससे आबादी में इच्छित गुण तेजी से फैलते हैं।

भारत में जीन ड्राइव सहित GMO का नियमन कौन करता है?

भारत में GMO के लिए Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC), जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत है, नियामक संस्था है। हालांकि जीन ड्राइव के लिए विशेष दिशानिर्देश अभी नहीं हैं।

जीन ड्राइव से जुड़े मुख्य पारिस्थितिक चिंताएं क्या हैं?

पारिस्थितिक चिंताओं में गैर-लक्षित प्रजातियों पर अनपेक्षित प्रभाव, खाद्य श्रृंखला में व्यवधान, और मच्छर आबादी में कमी से जैव विविधता की हानि शामिल हैं।

तंजानिया के ‘Transmission Zero’ अध्ययन ने जीन ड्राइव की प्रभावशीलता कैसे साबित की?

इस अध्ययन में जीन संशोधित मच्छरों ने परजीवी के विकास को 85% से अधिक कम कर दिया, जिससे मलेरिया के प्रसार को रोकने में सफलता मिली।

भारत में मलेरिया नियंत्रण के लिए जीन ड्राइव के आर्थिक प्रभाव क्या हैं?

जीन ड्राइव मलेरिया के मामलों को घटाकर उपचार और वेक्टर नियंत्रण खर्चों में कटौती कर सकते हैं, जिससे वर्तमान खर्चों में 20% से अधिक की बचत संभव है।

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