Constitution, governance, social justice and institutional analysis
2024 में भारत का उर्वरक संकट वैश्विक कीमतों में तेज बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आपूर्ति में बाधा के चलते उभरा है, जो आयात निर्भरता, सब्सिडी से पोषक तत्वों के असंतुलन और घरेलू उत्पादन की सीमाओं को उजागर करता है। यूरिया की कीमतें कुछ महीनों में दोगुनी हो गईं, जबकि भारत का 25% यूरिया मुख्य रूप से संवेदनशील गल्फ देशों से आयातित होता है। आपूर्ति विविधीकरण, सब्सिडी सुधार और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए नीति सुधार जरूरी हैं।
2024 में भारत के उर्वरक संकट का सिंहावलोकन
भारत का उर्वरक क्षेत्र इस समय एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जो मुख्य रूप से वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न हुआ है, विशेषकर अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच होर्मुज जलसंधि पर चल रहे संघर्ष के कारण। फरवरी से अप्रैल 2024 के बीच यूरिया की कीमतें लगभग दोगुनी होकर $508 से $935 प्रति टन हो गईं, जो आपूर्ति में हुई तेज कमी और बढ़ती उत्पादन लागत को दर्शाता है। भारत वार्षिक लगभग 39-40 मिलियन टन यूरिया का उपभोग करता है, जिसमें से 25% आयात पर निर्भर है, जिससे देश बाहरी जोखिमों के प्रति संवेदनशील हो गया है। यह संकट आयात निर्भरता, सब्सिडी-प्रेरित खपत पैटर्न और घरेलू उत्पादन क्षमता की सीमाओं जैसी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (कृषि, औद्योगिक नीति, सब्सिडी)
- GS पेपर 2: राजनीति और शासन (आवश्यक वस्तु अधिनियम, नियामक ढांचा)
- निबंध: भारतीय कृषि और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियां
वैश्विक आपूर्ति बाधाएं और भू-राजनीतिक जोखिम
भारत के उर्वरक आयात का बड़ा हिस्सा गल्फ क्षेत्र से आता है, जो लगभग 40% यूरिया आयात का स्रोत है। होर्मुज जलसंधि के आसपास की भू-राजनीतिक अस्थिरता इन आपूर्ति श्रृंखलाओं को खतरे में डालती है। इसके अलावा, भारत अपने घरेलू यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का 60% से अधिक पश्चिम एशिया से आयात करता है। अमोनिया और सल्फर जैसे मुख्य कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में 2024 की शुरुआत से 50% से अधिक की वृद्धि ने घरेलू उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है, जिससे निर्माण क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है।
- फरवरी 2024 में $508 प्रति टन से अप्रैल 2024 में $935 प्रति टन तक यूरिया की कीमत में वृद्धि (Fertilizer Association of India)
- पश्चिम एशिया से 60% से अधिक LNG आयात (Ministry of Petroleum, 2024)
- गल्फ देशों से 40% यूरिया आयात (Department of Fertilizers Annual Report 2023-24)
घरेलू उत्पादन की सीमाएं और आयात निर्भरता
भारत का घरेलू उर्वरक उत्पादन कच्चे माल की उपलब्धता, पुराने संयंत्रों और बढ़ती लागत के कारण सीमित है। विश्व में दूसरा सबसे बड़ा यूरिया उपभोक्ता होने के बावजूद भारत अपनी जरूरत का एक चौथाई हिस्सा आयात करता है। घरेलू उद्योग प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और कीमत की स्थिरता पर काफी निर्भर है। रणनीतिक उर्वरक भंडार का अभाव और उत्पादन तकनीकों में विविधता न होने से आपूर्ति की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
- पूरी मांग को पूरा करने के लिए घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता अपर्याप्त
- LNG कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण कच्चे माल की अस्थिरता
- आपूर्ति संकट से निपटने के लिए रणनीतिक उर्वरक भंडार का अभाव
सब्सिडी प्रणाली और पोषक तत्व असंतुलन
रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स द्वारा संचालित सब्सिडी प्रणाली यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है, जिससे इसके अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा मिलता है। यूरिया कुल उर्वरक खपत का 55% हिस्सा है, जो पोषक तत्वों के असंतुलन और मिट्टी के क्षरण का कारण बनता है। फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 कीमतों और वितरण को नियंत्रित करता है, लेकिन सब्सिडी के कारण बाजार में विकृतियां और पर्यावरणीय नुकसान होते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में सब्सिडी व्यय लगभग ₹1.4 लाख करोड़ था, जो वित्तीय दबाव को दर्शाता है।
- कुल उर्वरक खपत का 55% यूरिया है, जिससे नाइट्रोजन की अधिक मात्रा लगती है (Soil Health Card Scheme, 2023)
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में उर्वरक सब्सिडी ₹1.4 लाख करोड़ (Union Budget 2024-25)
- सब्सिडी आधारित खपत संतुलित पोषक तत्व उपयोग को रोकती है
कानूनी और नियामक ढांचा
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 सरकार को संकट के समय उर्वरक के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार देती है। इसी अधिनियम के तहत जारी फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 कीमतों को तय करता है और वितरण को नियंत्रित करता है ताकि किसान इसे किफायती दामों पर प्राप्त कर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने Indian Farmers Fertilizer Cooperative Ltd. vs. Union of India (2018) के फैसले में सब्सिडी आवंटन और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता पर जोर दिया। ये नियम किसान और उद्योग दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन बढ़ती वैश्विक लागत के बीच लागू करने में चुनौतियां हैं।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955: धारा 3 के तहत उर्वरक आपूर्ति नियंत्रण
- फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985: कीमत निर्धारण और वितरण नियंत्रण
- सुप्रीम कोर्ट का 2018 का निर्णय: सब्सिडी और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और चीन की उर्वरक रणनीति
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| यूरिया खपत | वार्षिक 39-40 मिलियन टन; कुल उर्वरक उपयोग का 55% | पिछले 5 वर्षों में यूरिया खपत में 15% की कमी |
| आयात निर्भरता | 25% यूरिया आयात; 60% LNG पश्चिम एशिया से | घरेलू नाइट्रोजन उर्वरक संयंत्रों के कारण कम आयात निर्भरता |
| सब्सिडी नीति | यूरिया पर भारी सब्सिडी, पोषक तत्व असंतुलन पैदा करती है | संतुलित पोषक तत्व उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत मिट्टी उर्वरता प्रबंधन |
| उत्पादन क्षमता | कच्चे माल की कमी और पुराने संयंत्र उत्पादन को सीमित करते हैं | आधुनिक घरेलू संयंत्रों में भारी निवेश |
| पर्यावरणीय प्रभाव | नाइट्रोजन उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी का क्षरण | पोषक तत्व संतुलन के कारण मिट्टी की सेहत में सुधार |
नीतिगत आवश्यकताएं और आगे का रास्ता
- सब्सिडी प्रणाली में सुधार कर संतुलित पोषक तत्व उपयोग को प्रोत्साहित करें और यूरिया के अत्यधिक उपयोग को कम करें।
- आधुनिक तकनीकों और वैकल्पिक कच्चे माल के साथ घरेलू उर्वरक उत्पादन क्षमता बढ़ाएं।
- वैश्विक आपूर्ति संकट से निपटने के लिए रणनीतिक उर्वरक भंडार विकसित करें।
- पश्चिम एशिया के अलावा अन्य स्रोतों से आयात विविधीकरण कर भू-राजनीतिक जोखिम कम करें।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाएं।
- मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना और विस्तार सेवाओं के माध्यम से एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और किसान जागरूकता को बढ़ावा दें।
भारत की उर्वरक सब्सिडी प्रणाली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह मुख्य रूप से यूरिया को सब्सिडी देती है, जिससे नाइट्रोजन उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग होता है।
- सब्सिडी सीधे फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़ी है।
- फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 उर्वरक की कीमत और वितरण को नियंत्रित करता है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि सब्सिडी प्रणाली यूरिया को प्राथमिकता देती है, जिससे पोषक तत्व असंतुलन होता है। कथन 2 गलत है; उर्वरक सब्सिडी MSP से स्वतंत्र है। कथन 3 सही है क्योंकि फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर कीमत और वितरण को नियंत्रित करता है।
भारत की उर्वरक आयात निर्भरता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारत अपना लगभग 40% यूरिया गल्फ देशों से आयात करता है।
- भारत यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक LNG में आत्मनिर्भर है।
- होर्मुज जलसंधि के आसपास भू-राजनीतिक तनाव उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करते हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि गल्फ देश 40% यूरिया आयात का स्रोत हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत LNG का 60% से अधिक आयात करता है। कथन 3 सही है, भू-राजनीतिक तनाव आपूर्ति को प्रभावित करते हैं।
मुख्य प्रश्न
भारत में वर्तमान उर्वरक संकट के कारणों और परिणामों की समीक्षा करें। भारतीय कृषि में सतत उर्वरक आपूर्ति और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और कृषि) – उर्वरक आपूर्ति और सब्सिडी नीतियां
- झारखंड का नजरिया: झारखंड की कृषि यूरिया पर काफी निर्भर है; आपूर्ति बाधाएं स्थानीय किसानों और फसल उपज को प्रभावित करती हैं।
- मुख्य बिंदु: राज्य के उर्वरक उपलब्धता, सब्सिडी लाभ और मिट्टी स्वास्थ्य पहलों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करें।
आवश्यक वस्तु अधिनियम की उर्वरक विनियमन में क्या भूमिका है?
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 सरकार को संकट के समय उर्वरक के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार देती है ताकि इसकी उपलब्धता और किफायती कीमत सुनिश्चित की जा सके। इसी अधिनियम के तहत जारी फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 कीमतों और वितरण को नियंत्रित करता है।
भारत में यूरिया की खपत इतना अधिक क्यों है?
यूरिया पर भारी सब्सिडी और कीमत नियंत्रण के कारण यह अन्य पोषक तत्वों के मुकाबले सस्ता होता है, जिससे इसका अत्यधिक उपयोग होता है और पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा होता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भारत के उर्वरक आपूर्ति को कैसे प्रभावित करते हैं?
भारत अपना 40% यूरिया गल्फ देशों से और 60% LNG पश्चिम एशिया से आयात करता है। होर्मुज जलसंधि के आसपास के भू-राजनीतिक तनाव इन आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं, जिससे कीमतें बढ़ती हैं और आपूर्ति में कमी आती है।
भारत की उर्वरक सब्सिडी का वित्तीय प्रभाव क्या है?
वित्तीय वर्ष 2023-24 में उर्वरक सब्सिडी का व्यय लगभग ₹1.4 लाख करोड़ था, जिससे सरकार पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा है और स्थिरता के लिए सुधार आवश्यक हैं।
चीन की उर्वरक रणनीति भारत से कैसे अलग है?
चीन ने घरेलू नाइट्रोजन उर्वरक संयंत्रों में निवेश कर आयात निर्भरता कम की है और संतुलित पोषक तत्व उपयोग को बढ़ावा दिया है, जिससे यूरिया खपत में 15% की कमी और मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है, जबकि भारत में सब्सिडी आधारित यूरिया के अत्यधिक उपयोग की समस्या बनी हुई है।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ें
Sources and further reading
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