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परिचय: गगनयान मिशन और सुरक्षित वापसी का सारांश

गगनयान मिशन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की निचली पृथ्वी कक्षा में छह दिन तक भेजने और सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य रखता है। 2024-25 में लॉन्च होने वाले इस मिशन में जटिल पुनःप्रवेश और पुनर्प्राप्ति कार्य शामिल हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और जीवन समर्थन प्रणालियों पर निर्भर हैं। यह मिशन भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अन्वेषण
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – अंतरिक्ष संधियाँ और भारत की प्रतिबद्धताएँ
  • निबंध: अंतरिक्ष में भारत की बढ़ती भूमिका और रणनीतिक स्वायत्तता

सुरक्षित वापसी के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत की अंतरिक्ष गतिविधियाँ, जिनमें अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा प्रोटोकॉल भी शामिल हैं, मुख्य रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे का पालन, विशेषकर आउटर स्पेस ट्रिटी, 1967 के तहत, वैश्विक अंतरिक्ष सुरक्षा और जिम्मेदारी के मानकों का पालन सुनिश्चित करता है। एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962 का अप्रत्यक्ष प्रभाव प्रोपल्शन और पावर सिस्टम में नाभिकीय सामग्री के उपयोग के कारण पड़ता है। पुनर्प्राप्ति के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के तहत नागरिक और सैन्य एजेंसियों का समन्वय होता है।

  • ISRO: मिशन की डिजाइनिंग, अंतरिक्ष यान का विकास, लॉन्च और पुनःप्रवेश संचालन।
  • IN-SPACe: निजी क्षेत्र की भागीदारी और सुरक्षा अनुपालन के लिए नियामक निगरानी।
  • DRDO: अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन समर्थन और सुरक्षा प्रणालियों का विकास।
  • ISAC: क्रू मॉड्यूल और हीट शील्ड सहित महत्वपूर्ण अंतरिक्ष यान घटकों का निर्माण।
  • भारतीय वायु सेना (IAF): अरब सागर में स्प्लैशडाउन के बाद खोज और पुनर्प्राप्ति कार्य।

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए पुनःप्रवेश तकनीकें

गगनयान का क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 7.8 किमी/सेकंड की गति से पुनःप्रवेश करता है, जहां इसे अत्यधिक तापीय और यांत्रिक दबावों का सामना करना पड़ता है (ISRO, 2023)। अंतरिक्ष यान नियंत्रित पुनःप्रवेश पथ अपनाता है, जिससे धीमा होने वाली ताकत 4-5 G तक सीमित रहती है, जो रूस के सोयूज जैसे बैलिस्टिक पुनःप्रवेश की तुलना में कम है, जहां 6-7 G तक का दबाव होता है (NASA तकनीकी रिपोर्ट, 2022; रोस्कोस्मोस डेटा, 2023)। हीट शील्ड में देशी स्तर पर विकसित एब्लेटिव सामग्री का उपयोग किया गया है, जो 1,500°C से अधिक तापमान सहन कर सकती है।

  • तीन-चरण पैराशूट तैनाती: पायलट चूट, ड्रोग चूट, और मुख्य चूट, जो उतराई की गति को 24 किमी/घंटा तक कम करती है (ISRO, 2023)।
  • लॉन्च विफलता की स्थिति में 0.5 सेकंड के भीतर सक्रिय होने वाली क्रू एस्केप सिस्टम, जो अंतरिक्ष यात्रियों को लॉन्च वाहन से तुरंत अलग कर देती है (ISRO तकनीकी विवरण, 2023)।
  • अरब सागर में 10 किमी के दायरे में 99% सटीकता के साथ स्प्लैशडाउन की योजना, जिससे त्वरित पुनर्प्राप्ति संभव हो सके (ISRO मिशन रिपोर्ट, 2024)।

जीवन समर्थन और पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली

जीवन समर्थन प्रणाली के तहत केबिन दबाव 1 वायुमंडल और ऑक्सीजन की मात्रा 21% पर बनाए रखी जाती है, जिससे पृथ्वी जैसी स्थिति का अनुकरण होता है (ISRO जीवन समर्थन मैनुअल, 2023)। कार्बन डाइऑक्साइड को 0.5% से नीचे रखने के लिए स्क्रबर का उपयोग किया जाता है, जो छह दिन के कक्षीय मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। तापमान और आर्द्रता नियंत्रण स्वचालित हैं ताकि स्थिर सूक्ष्म वातावरण बना रहे। जीवन समर्थन के घटकों में डुप्लिकेट सिस्टम जोखिम को कम करते हैं।

  • वायुमंडलीय नियंत्रण में ऑक्सीजन की पूर्ति और लिथियम हाइड्रॉक्साइड स्क्रबर द्वारा CO2 हटाना शामिल है।
  • तापमान नियंत्रण के लिए सक्रिय कूलिंग और इन्सुलेशन का उपयोग।
  • जीवन समर्थन के साथ एकीकृत संचार प्रणाली, जो वास्तविक समय में स्वास्थ्य निगरानी करती है।

पुनर्प्राप्ति कार्य और समन्वय

पुनःप्रवेश के बाद, भारतीय वायु सेना अरब सागर में खोज और पुनर्प्राप्ति का नेतृत्व करती है। पुनर्प्राप्ति दल हेलीकॉप्टर, जहाज और चिकित्सा इकाइयों से लैस होते हैं ताकि तुरंत अंतरिक्ष यात्रियों को सहायता मिल सके। मिशन की 99% संभावना है कि स्प्लैशडाउन 10 किमी के दायरे में होगा, जिससे खोज का समय कम होता है, जो मिशन की सफलता और यात्रियों की जान बचाने के लिए अहम है। ISRO, IAF और DRDO के बीच समन्वय से लैंडिंग से लेकर चिकित्सा जांच तक का काम सुचारू रूप से होता है।

  • सुरक्षा के लिहाज से कक्षा यांत्रिकी और मौसम के पैटर्न के आधार पर पुनर्प्राप्ति क्षेत्र चुना गया है।
  • डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 के तहत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल तेजी से सक्रिय होते हैं।
  • अवतरण और स्प्लैशडाउन के दौरान टेलीमेट्री और GPS का उपयोग सटीक ट्रैकिंग के लिए किया जाता है।

तुलनात्मक अध्ययन: गगनयान बनाम अन्य मानवयुक्त मिशन

पहलूगगनयानNASA Orionरूसी सोयूज
पुनःप्रवेश प्रकारनियंत्रित पथनियंत्रित पथबैलिस्टिक पथ
धीमा होने वाली ताकत4-5 G4-5 G6-7 G
पैराशूट तैनातीतीन-चरण (पायलट, ड्रोग, मुख्य)मल्टी-स्टेजदो-चरण
लैंडिंग क्षेत्रअरब सागर (जल क्षेत्र)महासागर स्प्लैशडाउनकजाखस्तान के मैदान (भूमि)
एबॉर्ट सिस्टम प्रतिक्रिया समय0.5 सेकंड0.5 सेकंडलगभग 1 सेकंड

महत्वपूर्ण कमी: मानव-युक्त एबॉर्ट और आपातकालीन प्रोटोकॉल

भारत ने अभी तक उड़ान के दौरान आपात स्थिति का अनुकरण करते हुए पूर्ण मानव-युक्त एबॉर्ट परीक्षण नहीं किया है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। हालांकि क्रू एस्केप सिस्टम तेजी से सक्रिय हो सकता है, पर इसकी व्यावहारिक पुष्टि मानव-युक्त एबॉर्ट परिक्षण से ही संभव है। NASA और Roscosmos जैसे देशों के विपरीत, जिनके पास व्यापक एबॉर्ट परीक्षण इतिहास हैं, भारत को इस क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है ताकि अप्रत्याशित लॉन्च या कक्षा में उत्पन्न समस्याओं के दौरान जोखिम कम किया जा सके।

सुरक्षित वापसी तकनीकों का आर्थिक महत्व

गगनयान मिशन का ₹10,000 करोड़ का बजट (ISRO, 2023) पुनःप्रवेश और जीवन समर्थन तकनीकों में भारी निवेश दर्शाता है। यह खर्च भारत के एयरोस्पेस निर्माण और तकनीकी क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देता है, जो 2030 तक USD 50 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है (India Brand Equity Foundation, 2023)। देशी विकास विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करता है, उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित करता है और रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत करता है।

  • हीट शील्ड, पैराशूट और जीवन समर्थन घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा।
  • IN-SPACe के नियामक ढांचे के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन।
  • ड्रेडो-ISRO सहयोग से द्वि-उपयोगी तकनीकों का विकास।

आगे की राह: सुरक्षा और संचालन तत्परता को बढ़ाना

  • आपातकालीन प्रोटोकॉल को मान्य करने के लिए व्यापक मानव-युक्त एबॉर्ट परीक्षण आयोजित करना।
  • अंतरिक्ष यात्रियों और ग्राउंड टीम के लिए उन्नत सिमुलेशन और प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना।
  • पुनःप्रवेश सुरक्षा पर ज्ञान साझा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
  • पुनर्प्राप्ति अवसंरचना में समुद्री और हवाई संसाधनों का विस्तार करना।
  • तापीय सुरक्षा और जीवन समर्थन के लिए देशी सामग्री में निवेश जारी रखना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
गगनयान के पुनःप्रवेश और पुनर्प्राप्ति सिस्टम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 7.8 किमी/सेकंड की गति से पुनःप्रवेश करता है।
  2. पैराशूट तैनाती में उतराई की गति कम करने के लिए चार चरण होते हैं।
  3. पुनर्प्राप्ति क्षेत्र अरब सागर में 10 किमी के दायरे में 99% सटीकता के साथ योजना बद्ध है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 ISRO के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि पैराशूट तैनाती तीन चरणों में होती है, चार नहीं। कथन 3 ISRO मिशन रिपोर्ट के अनुसार सही है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
गगनयान के अंतरिक्ष यात्री सुरक्षा से संबंधित कानूनी ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. आउटर स्पेस ट्रिटी, 1967, अंतरिक्ष यात्री सुरक्षा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को नियंत्रित करता है।
  2. एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962, सीधे क्रू जीवन समर्थन प्रणालियों को नियंत्रित करता है।
  3. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005, पुनर्प्राप्ति के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए ढांचा प्रदान करता है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि भारत आउटर स्पेस ट्रिटी का सदस्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि एटॉमिक एनर्जी एक्ट अप्रत्यक्ष रूप से लागू होता है, सीधे जीवन समर्थन प्रणालियों पर नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट आपातकालीन प्रोटोकॉल का समर्थन करता है।

मेन प्रश्न

गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत द्वारा अपनाए गए तकनीकी और संस्थागत उपायों की व्याख्या करें। महत्वपूर्ण कमियों पर चर्चा करें और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पेपर 3 – आपदा प्रबंधन
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के उभरते एयरोस्पेस निर्माण इकाइयां जीवन समर्थन और पुनःप्रवेश प्रणालियों के लिए देशी घटक उत्पादन में योगदान दे सकती हैं।
  • मेन पॉइंटर: संस्थागत सहयोग, कानूनी ढांचे और झारखंड के औद्योगिक विकास के आर्थिक अवसरों को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
गगनयान अंतरिक्ष यात्रियों को पुनःप्रवेश के दौरान अधिकतम धीमा होने वाली ताकत कितनी होती है?

गगनयान अंतरिक्ष यात्री नियंत्रित पुनःप्रवेश के दौरान 4-5 G की धीमा होने वाली ताकत का अनुभव करते हैं, जो सोयूज जैसे बैलिस्टिक पुनःप्रवेश के 6-7 G से कम है (ISRO, NASA रिपोर्ट)।

भारत में अंतरिक्ष यात्रियों की लैंडिंग के बाद पुनर्प्राप्ति की जिम्मेदारी किस संस्था की होती है?

भारतीय वायु सेना (IAF) अरब सागर में स्प्लैशडाउन के बाद खोज और पुनर्प्राप्ति कार्यों का नेतृत्व करती है, जो ISRO और DRDO के साथ समन्वय में कार्य करती है।

गगनयान मिशन लॉन्च विफलता की स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करता है?

मिशन में 0.5 सेकंड के भीतर सक्रिय होने वाला क्रू एस्केप सिस्टम शामिल है, जो लॉन्च वाहन से तुरंत अंतरिक्ष यात्रियों को अलग कर देता है (ISRO तकनीकी विवरण, 2023)।

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के संबंध में भारत की कानूनी जिम्मेदारी किस ढांचे से नियंत्रित होती है?

भारत आउटर स्पेस ट्रिटी, 1967 का सदस्य है, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान की सुरक्षित संचालन और अंतरिक्ष यात्रियों की जिम्मेदारी निर्धारित करता है, साथ ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अधिनियम, 1969 भी लागू होता है।

गगनयान मिशन के दौरान जीवन समर्थन प्रणालियों की भूमिका क्या है?

जीवन समर्थन प्रणालियां केबिन दबाव को 1 वायुमंडल, ऑक्सीजन को 21%, और CO2 को 0.5% से नीचे बनाए रखती हैं, जिससे छह दिन के मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित होता है (ISRO मैनुअल, 2023)।

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