परिचय: चीन का एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम और उसकी सैन्य तैनाती
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने 2023 से एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम को ऑपरेशनल कर दिया है, जो एक साथ 100 से अधिक स्वायत्त ड्रोन तैनात कर सकता है, जिनका रियल-टाइम समन्वय 50 मिलीसेकंड से भी कम विलंबता पर होता है (Indian Express, 2024; Chinese Military White Paper 2023)। यह प्रणाली AI एल्गोरिदम और 5G नेटवर्क के साथ जुड़ी है, जो बिना सीधे मानव नियंत्रण के तेज़ स्वायत्त हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और लक्ष्य प्राप्ति संभव बनाती है। PLA ने 2021 से इन स्वार्म ड्रोन को संयुक्त अभ्यासों में शामिल किया है, जिससे उनकी ऑपरेशनल दक्षता में 30% की बढ़ोतरी हुई है (SIPRI 2023)। यह विकास चीन की अनमैंड युद्ध क्षमताओं में एक बड़ा कदम है, जो भारत की मौजूदा ड्रोन युद्ध और काउंटर-स्वार्म तैयारियों के लिए एक रणनीतिक चुनौती पेश करता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी — उभरती सैन्य तकनीकें, रक्षा आधुनिकीकरण
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध — भारत-चीन सीमा सुरक्षा, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
- निबंध: भारत-चीन संदर्भ में रक्षा तैयारियां और तकनीकी बढ़त
भारत के ड्रोन और रक्षा संचालन के लिए कानूनी एवं संवैधानिक ढांचा
भारत में ड्रोन युद्ध और रक्षा तैयारियां कई कानूनी प्रावधानों के अधीन हैं। Defence of India Act, 1962 सरकार को युद्धकालीन उपाय लागू करने का अधिकार देता है, जिसमें ड्रोन तैनाती भी शामिल है। Arms Act, 1959 हथियारों के स्वामित्व और उपयोग को नियंत्रित करता है, जिसमें सशस्त्र UAV भी आते हैं। ड्रोन पर साइबर सुरक्षा खतरों जैसे हैकिंग या इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप को Information Technology Act, 2000 की धारा 66F के तहत साइबर आतंकवाद माना गया है। Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 उन्नत सैन्य तकनीकों की खरीद को नियंत्रित करता है, जिसमें UAV और काउंटर-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं। हालांकि ड्रोन उपयोग के लिए कोई प्रत्यक्ष संवैधानिक अनुच्छेद नहीं है, परंतु अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों पर देश की रक्षा का मौलिक कर्तव्य थोपता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से सैन्य आधुनिकीकरण का समर्थन करता है।
आर्थिक पहलू: रक्षा बजट आवंटन और ड्रोन बाजार के रुझान
भारत का रक्षा बजट 2023-24 लगभग ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) है, जिसमें लगभग 15% धनराशि UAV विकास सहित आधुनिकीकरण के लिए रखी गई है (Union Budget 2023-24)। इसके विपरीत, चीन का सैन्य व्यय 2023 में $230 बिलियन तक पहुंच गया (SIPRI)। वैश्विक सैन्य ड्रोन बाजार 2027 तक $42.8 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 14.6% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (MarketsandMarkets 2023)। भारत का स्वदेशी ड्रोन बाजार 2023 में $885 मिलियन का था, जो सालाना 20% की दर से बढ़ रहा है (FICCI 2023)। हालांकि विकास हो रहा है, पर भारत की उन्नत स्वार्म AI एल्गोरिदम में निवेश चीन के एकीकृत सिस्टम की तुलना में सीमित है।
भारत के ड्रोन और काउंटर-ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र में संस्थागत भूमिका
- DRDO (Defence Research and Development Organisation): UAV और काउंटर-स्वार्म तकनीकों पर स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास का नेतृत्व करता है, वर्तमान में सीमित स्वार्म क्षमताओं का विकास कर रहा है।
- भारतीय वायु सेना (IAF): UAV का प्रमुख ऑपरेटर, लगभग 300 ड्रोन सेवाओं में हैं, जिनमें से केवल 10% स्वार्म संचालन योग्य हैं (DRDO वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
- रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्माण और DPP 2020 के तहत खरीद का जिम्मेदार।
- SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute): सैन्य व्यय और तकनीकी एकीकरण पर विश्वसनीय डेटा प्रदान करता है।
- FICCI (Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry): रक्षा उद्योग के बाजार रुझानों और स्वदेशी उत्पादन की वृद्धि पर रिपोर्ट करता है।
तकनीकी और परिचालन तुलना: भारत बनाम चीन ड्रोन स्वार्म क्षमताओं में
| पैरामीटर | चीन (एटलस सिस्टम) | भारत |
|---|---|---|
| स्वार्म आकार | एक साथ 100 से अधिक ड्रोन | लगभग 300 UAV कुल; 10% स्वार्म सक्षम |
| समन्वय विलंबता | 50 मिलीसेकंड से कम (रियल-टाइम AI सक्षम) | सीमित रियल-टाइम समन्वय; मुख्यतः मैनुअल नियंत्रण |
| एकीकरण | AI + 5G नेटवर्क + इलेक्ट्रॉनिक युद्ध | प्राथमिक रूप से विकासाधीन AI; 5G एकीकरण प्रारंभिक अवस्था में |
| परिचालन उपयोग | 2021 से संयुक्त अभ्यासों में शामिल; 30% दक्षता वृद्धि | सीमित स्वार्म तैनाती; UAV टोही और हमले पर केंद्रित |
| काउंटर-स्वार्म क्षमता | एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और AI कमांड सिस्टम | कोई व्यापक काउंटर-स्वार्म नीति नहीं; इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अधूरा |
भारत की रक्षा तैयारियों पर रणनीतिक प्रभाव
चीन का एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम PLA को बेहतर स्वायत्त हमले, तेज लक्ष्य प्राप्ति और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में बढ़त देता है। इससे भारत-चीन सीमा पर पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों को ड्रोन स्वार्म से मात देने की क्षमता बढ़ती है। भारत की सीमित स्वार्म UAV फ्लीट और काउंटर-स्वार्म नीति की कमी वास्तविक समय में खतरों को नष्ट करने में कमजोरियां पैदा करती है। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और AI सक्षम कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों में संरचनात्मक अंतर भारत की बड़ी संख्या में स्वायत्त ड्रोन हमलों का प्रभावी जवाब देने की क्षमता को कमजोर करता है।
आगे का रास्ता: भारत के ड्रोन युद्ध और काउंटर-स्वार्म तकनीकों का आधुनिकीकरण
- DRDO और निजी स्टार्टअप्स के माध्यम से AI सक्षम स्वार्म एल्गोरिदम में स्वदेशी R&D को तेज करें।
- रियल-टाइम ड्रोन समन्वय के लिए 5G और सुरक्षित संचार नेटवर्क का बेहतर एकीकरण सुनिश्चित करें।
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर रक्षा को शामिल करते हुए व्यापक काउंटर-स्वार्म ड्रोन रक्षा नीति विकसित और लागू करें।
- स्वार्म और काउंटर-स्वार्म प्रणालियों के लिए आधुनिकीकरण कोष में बजट आवंटन बढ़ाएं।
- ड्रोन स्वार्म हमलों के सिमुलेशन के लिए संयुक्त अभ्यासों को मजबूत कर परिचालन तत्परता बढ़ाएं।
- ड्रोन स्वार्म के प्रभावी संचालन के लिए रियल-टाइम AI समन्वय आवश्यक है।
- भारत द्वारा संचालित सभी UAV स्वार्म संचालन योग्य हैं।
- चीन का एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम संचार के लिए 5G नेटवर्क का उपयोग करता है।
- Defence of India Act, 1962 युद्धकालीन ड्रोन तैनाती को नियंत्रित करता है।
- Arms Act, 1959 ड्रोन के युद्ध में उपयोग पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाता है।
- Information Technology Act, 2000 की धारा 66F ड्रोन से जुड़े साइबर आतंकवाद को संबोधित करती है।
मुख्य प्रश्न
चीन के एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम द्वारा भारत की रक्षा तैयारियों पर उत्पन्न रणनीतिक चुनौतियों की समीक्षा करें। भारत को अपने ड्रोन युद्ध और काउंटर-स्वार्म क्षमताओं के आधुनिकीकरण के लिए कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध) और पेपर 3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
- झारखंड का पहलू: झारखंड में DRDO और रक्षा निर्माण इकाइयां स्थित हैं, जो UAV अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन में सक्रिय हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और तकनीकी हस्तांतरण प्रभावित होता है।
- मुख्य बिंदु: जवाबों में झारखंड की स्वदेशी ड्रोन विकास में भूमिका और उभरते खतरों से निपटने के लिए स्थानीय रक्षा अवसंरचना के आधुनिकीकरण की रणनीतिक आवश्यकता पर जोर दें।
चीन के एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम की मुख्य क्षमता क्या है?
एटलस सिस्टम एक साथ 100 से अधिक ड्रोन तैनात कर सकता है, जो स्वायत्त लक्ष्य प्राप्ति और 50 मिलीसेकंड से कम विलंबता के साथ रियल-टाइम समन्वय करता है, AI और 5G नेटवर्क के संयोजन से तेज हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध संभव बनाता है (Indian Express, 2024; Chinese Military White Paper 2023)।
भारत में वर्तमान में कितने UAV स्वार्म संचालन योग्य हैं?
भारत की सशस्त्र सेनाओं में लगभग 300 UAV हैं, जिनमें से केवल लगभग 10% स्वार्म संचालन सक्षम हैं (DRDO वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
ड्रोन से जुड़े साइबर आतंकवाद को भारत में कौन सा कानून नियंत्रित करता है?
Information Technology Act, 2000 की धारा 66F साइबर आतंकवाद को अपराध मानती है, जिसमें ड्रोन सिस्टम की हैकिंग या इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप शामिल हैं।
ड्रोन विकास सहित भारत के रक्षा आधुनिकीकरण के लिए बजट आवंटन कितना है?
भारत का रक्षा बजट 2023-24 ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) है, जिसमें लगभग 15% आधुनिकीकरण प्रयासों, विशेषकर UAV विकास और खरीद के लिए रखा गया है (Union Budget 2023-24)।
भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र में DRDO की मुख्य भूमिका क्या है?
DRDO स्वदेशी UAV और काउंटर-ड्रोन तकनीकों का अनुसंधान और विकास करता है, खासकर स्वार्म AI एल्गोरिदम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित।
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