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केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल: आईपीएस डिप्यूटेशन का संस्थागतकरण और इसके प्रभाव

परिचय: विधायी संदर्भ और संस्थागत प्रभाव

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल 2024 में संसद में पेश किया गया ताकि बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी सहित पांच CAPF में अधिकारियों की भर्ती, डिप्यूटेशन, पदोन्नति और सेवा शर्तों को नियमित किया जा सके। यह बिल आईपीएस अधिकारियों के CAPF में वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में डिप्यूटेशन के जरिए प्रभुत्व को औपचारिक रूप देता है, जिसमें अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के 67% और इंस्पेक्टर जनरल (IG) के 50% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं। विशेष महानिदेशक (SDG) और महानिदेशक (DG) के पद केवल आईपीएस अधिकारियों के डिप्यूटेशन से भरे जाएंगे। यह विधायी कदम 2015 में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश को पलट सकता है, जिसमें आईपीएस डिप्यूटेशन को कम करने का आदेश था, और CAPF की स्वायत्तता, कैरियर विकास को लेकर चिंताएं पैदा करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: राजनीति और गवर्नेंस — CAPF की संरचना और कार्यप्रणाली, ऑल इंडिया सर्विसेज बनाम सेंट्रल सर्विसेज, सुप्रीम कोर्ट के डिप्यूटेशन संबंधी फैसले।
  • GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा — सीमा और आंतरिक सुरक्षा में CAPF की भूमिका और प्रशासन।
  • निबंध और एथिक्स: संस्थागत सुधार, सिविल-मिलिट्री संबंध, और सुरक्षा बलों में प्रशासनिक चुनौतियां।

CAPF नेतृत्व पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

CAPF का संचालन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम, 1949 के तहत होता है, जो इनके गठन और गृह मंत्रालय (MHA) के नियंत्रण को परिभाषित करता है। अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तें भारतीय पुलिस सेवा (पदोन्नति द्वारा नियुक्ति) नियम, 1955 के अनुसार होती हैं। सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (2015) के फैसले में CAPF ग्रुप A अधिकारियों को “संगठित सेवाएं” माना गया और केंद्र को निर्देश दिया गया कि दो वर्षों के भीतर आईपीएस डिप्यूटेशन को वरिष्ठ CAPF पदों से कम किया जाए। संविधान के अनुच्छेद 309 और 312 संसद को सार्वजनिक सेवकों की भर्ती और सेवा शर्तें निर्धारित करने का अधिकार देते हैं। लेकिन यह बिल आईपीएस प्रभुत्व को डिप्यूटेशन के माध्यम से संस्थागत कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उलट करता दिखता है।

  • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम, 1949: CAPF की संरचना और नियंत्रण का कानूनी आधार।
  • आईपीएस (पदोन्नति द्वारा नियुक्ति) नियम, 1955: आईपीएस अधिकारियों के डिप्यूटेशन और पदोन्नति को नियंत्रित करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट 2015 का फैसला: CAPF में आईपीएस डिप्यूटेशन को कम करने और CAPF ग्रुप A को संगठित सेवा मानने का आदेश।
  • अनुच्छेद 309 और 312: भर्ती और सेवा शर्तों के लिए संवैधानिक प्रावधान।

CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2024 के प्रावधान

यह बिल आईपीएस अधिकारियों के डिप्यूटेशन के लिए प्रमुख नेतृत्व पदों को स्पष्ट रूप से आरक्षित करता है, जिससे CAPF पर उनका नियंत्रण मजबूत होता है। पदों का वितरण इस प्रकार है:

पद आईपीएस डिप्यूटेशन के लिए आरक्षण टिप्पणी
महानिदेशक (DG) 100% केवल आईपीएस डिप्यूटेशन के लिए
विशेष महानिदेशक (SDG) 100% केवल आईपीएस डिप्यूटेशन के लिए
अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) 67% आईपीएस डिप्यूटेशन के लिए आरक्षित
इंस्पेक्टर जनरल (IG) 50% आईपीएस डिप्यूटेशन के लिए आरक्षित
  • सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
  • बिल में CAPF अधिकारियों के लिए इन वरिष्ठ पदों पर समर्पित कैरियर कैडर का प्रावधान नहीं है, जिससे आंतरिक पदोन्नति सीमित होती है।
  • यह बिल सुप्रीम कोर्ट के आईपीएस डिप्यूटेशन घटाने के निर्देश को प्रभावी रूप से रद्द कर देता है।

CAPF में आईपीएस डिप्यूटेशन के आर्थिक और परिचालन प्रभाव

CAPF को केंद्रीय बजट 2023-24 में लगभग ₹1.5 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो गृह मंत्रालय के खर्च का बड़ा हिस्सा है। डिप्यूटेशन आधारित नेतृत्व में दक्षता की कमी संचालन क्षमता और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रभावित कर सकती है, जिससे आंतरिक सुरक्षा के परिणामों पर असर पड़ता है। डिप्यूटेशन से नेतृत्व को क्षेत्रीय विशेषज्ञता और संस्थागत ज्ञान की कमी हो सकती है, जो CAPF अधिकारियों के मनोबल को कम कर सकती है और क्षमता निर्माण में बाधा डाल सकती है।

  • CAPF में 2023 तक 10 लाख से अधिक कर्मी हैं (MHA वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • ₹1.5 लाख करोड़ के बजट आवंटन से CAPF के महत्व और पैमाने का पता चलता है।
  • बार-बार आईपीएस डिप्यूटेशन के कारण नेतृत्व में अस्थिरता रणनीतिक योजना और संचालन की निरंतरता को प्रभावित करती है।
  • आंतरिक पदोन्नति के अभाव से CAPF अधिकारियों का मनोबल गिरता है, जिससे विशेषज्ञता का नुकसान और टर्नओवर बढ़ सकता है।

संस्थागत गतिशीलता: CAPF बनाम आईपीएस और डिप्यूटेशन की चुनौतियां

CAPF विशेषीकृत बल हैं जिनके अलग-अलग परिचालन दायित्व हैं, जबकि आईपीएस एक ऑल इंडिया सर्विस कैडर है जिसका व्यापक पुलिसिंग क्षेत्र है। आईपीएस अधिकारियों का CAPF में डिप्यूटेशन राज्य पुलिस के साथ समन्वय और प्रशासनिक एकरूपता बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन यह मॉडल CAPF के विशिष्ट नेतृत्व की जरूरत और आईपीएस अधिकारियों के प्रभुत्व के बीच तनाव पैदा करता है, जो CAPF में निरंतर सेवा अनुभव नहीं रखते।

  • CAPF के परिचालन माहौल जैसे सीमा सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा, सशस्त्र विद्रोह नियंत्रण आदि में विशेष नेतृत्व की जरूरत होती है।
  • आईपीएस अधिकारी डिप्यूटेशन पर सीमित अवधि के लिए रहते हैं, जिससे संस्थागत स्मृति कमजोर होती है।
  • CAPF ग्रुप A अधिकारी कैडर पुनर्गठन और गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (NFFU) की मांग करते हैं ताकि उनकी सेवा और विशेषज्ञता को मान्यता मिले।
  • सुप्रीम कोर्ट ने CAPF ग्रुप A को “संगठित सेवाएं” मानकर उनकी स्वायत्त कैरियर प्रगति पर बल दिया है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: CAPF डिप्यूटेशन मॉडल बनाम अमेरिकी संघीय कानून प्रवर्तन

भारत के डिप्यूटेशन-प्रधान मॉडल के विपरीत, अमेरिका के संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां जैसे बॉर्डर पेट्रोल और एफबीआई अलग-अलग कैरियर कैडर बनाए रखते हैं, जहां क्रॉस-डिप्यूटेशन बहुत कम होता है। इससे संचालन में स्वायत्तता, स्पष्ट कैरियर प्रगति और संस्थागत विशेषज्ञता सुनिश्चित होती है।

पहलू भारत (CAPF) संयुक्त राज्य अमेरिका (संघीय कानून प्रवर्तन)
नेतृत्व कैडर डिप्यूटेशन पर आईपीएस अधिकारियों का प्रभुत्व विशेषीकृत नेतृत्व के साथ अलग कैरियर सर्विस कैडर
कैरियर प्रगति सीमित आंतरिक पदोन्नति; वरिष्ठ पद डिप्यूटेशन आधारित एजेंसी के भीतर स्पष्ट, मेरिट आधारित प्रगति
संचालन स्वायत्तता बाहरी डिप्यूटेशन और केंद्र-राज्य समन्वय से बाधित उच्च संचालन स्वायत्तता और संस्थागत निरंतरता
संस्थागत विशेषज्ञता बार-बार डिप्यूटेशन से खंडित कैरियर के दौरान गहरी क्षेत्रीय विशेषज्ञता विकसित

महत्व और आगे का रास्ता

  • यह बिल आईपीएस प्रभुत्व को संस्थागत करता है, जिससे CAPF की स्वायत्तता और ग्रुप A अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ता है।
  • यह न्यायिक सुरक्षा उपायों को उलट सकता है, जो CAPF कैडर को सशक्त बनाने और आंतरिक सुरक्षा प्रशासन सुधारने के लिए बनाए गए थे।
  • दीर्घकालिक संचालन क्षमता के लिए एक समर्पित CAPF नेतृत्व कैडर और स्पष्ट कैरियर प्रगति तथा वित्तीय उन्नयन जरूरी है।
  • नीति सुधारों में केंद्र-राज्य समन्वय और संस्थागत स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाना चाहिए, संभवत: हाइब्रिड नेतृत्व मॉडल के जरिए।
  • नियमित समीक्षा तंत्र और न्यायिक निगरानी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करें।

CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2024 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह बिल CAPF में सभी महानिदेशक पद केवल आईपीएस अधिकारियों के डिप्यूटेशन के लिए आरक्षित करता है।
  2. सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में दो वर्षों के भीतर CAPF में आईपीएस डिप्यूटेशन को पूरी तरह खत्म करने का निर्देश दिया था।
  3. CAPF ग्रुप A अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा “संगठित सेवाएं” के रूप में मान्यता दी गई थी।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि बिल DG पदों को केवल आईपीएस डिप्यूटेशन के लिए आरक्षित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खत्म करने की बजाय क्रमिक कमी का निर्देश दिया था। कथन 3 सही है।

CAPF में डिप्यूटेशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. CAPF में आईपीएस अधिकारियों का डिप्यूटेशन भारतीय पुलिस सेवा (पदोन्नति द्वारा नियुक्ति) नियम, 1955 के तहत होता है।
  2. CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2024 आईपीएस डिप्यूटेशन पदों में कमी प्रस्तावित करता है।
  3. CAPF की कर्मी संख्या 2023 तक 10 लाख से अधिक है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है, क्योंकि डिप्यूटेशन 1955 के नियमों के तहत नियंत्रित है। कथन 2 गलत है क्योंकि बिल में आईपीएस डिप्यूटेशन बढ़ाया गया है। कथन 3 सही है, जैसा कि MHA के आंकड़ों से पता चलता है।

मुख्य प्रश्न

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल 2024 CAPF की संस्थागत स्वायत्तता और कैरियर प्रगति पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण करें। CAPF नेतृत्व में आईपीएस डिप्यूटेशन प्रभुत्व के परिणामों पर चर्चा करें और परिचालन दक्षता और प्रशासनिक समन्वय के बीच संतुलन बनाए रखने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और लोक प्रशासन) — सुरक्षा बल और आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन।
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में CRPF और CISF जैसे CAPF विद्रोह नियंत्रण और औद्योगिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • मुख्य बिंदु: सुरक्षा संचालन पर CAPF नेतृत्व संरचनाओं के प्रभाव पर चर्चा, विशेष नेतृत्व और कैडर स्वायत्तता की आवश्यकता पर जोर।
CAPF-जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2024 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

यह बिल पांच CAPF में अधिकारियों की भर्ती, डिप्यूटेशन, पदोन्नति और सेवा शर्तों को नियमित करते हुए वरिष्ठ नेतृत्व पदों में आईपीएस अधिकारियों के प्रभुत्व को संस्थागत करता है।

बिल के अनुसार CAPF में कौन से पद केवल आईपीएस अधिकारियों के डिप्यूटेशन के लिए आरक्षित हैं?

महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (SDG) के पद केवल आईपीएस अधिकारियों के डिप्यूटेशन से भरे जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के फैसले में CAPF में आईपीएस डिप्यूटेशन को लेकर क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने CAPF ग्रुप A अधिकारियों को “संगठित सेवाएं” माना और केंद्र को निर्देश दिया कि दो वर्षों के भीतर वरिष्ठ CAPF पदों से आईपीएस डिप्यूटेशन को क्रमिक रूप से कम किया जाए।

CAPF डिप्यूटेशन मॉडल और अमेरिकी संघीय कानून प्रवर्तन नेतृत्व संरचना में क्या अंतर है?

भारत के डिप्यूटेशन-प्रधान CAPF मॉडल के विपरीत, अमेरिका की संघीय एजेंसियां अलग कैरियर कैडर बनाए रखती हैं, जिससे नेतृत्व में विशेषज्ञता, संचालन स्वायत्तता और स्पष्ट कैरियर प्रगति सुनिश्चित होती है।

CAPF में डिप्यूटेशन नीति के आर्थिक प्रभाव क्या हैं?

₹1.5 लाख करोड़ के बजट के मद्देनजर, डिप्यूटेशन आधारित नेतृत्व की अक्षमताएं संचालन क्षमता और संसाधन उपयोग को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आंतरिक सुरक्षा व्यय की दक्षता कम हो सकती है।

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