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Governance · Exam Notes

CARA ने भारत में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए राष्ट्रव्यापी निर्देश जारी किए

2023 में CARA ने Juvenile Justice Act के तहत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए SARAs को तीन महत्वपूर्ण मेमोरेंडम जारी किए, जिनका उद्देश्य बाल संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। इन निर्देशों में उचित जांच, रिकॉर्ड की सुरक्षित डिजिटलीकरण और कड़ाई से गोपनीयता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं, जो भारत की दत्तक ग्रहण व्यवस्था में मौजूद देरी और कार्यान्वयन की खामियों को दूर करने के लिए हैं।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

2023 में CARA ने Juvenile Justice Act के तहत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए SARAs को तीन महत्वपूर्ण मेमोरेंडम जारी किए, जिनका उद्देश्य बाल संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। इन निर्देशों में उचित जांच, रिकॉर्ड की सुरक्षित डिजिटलीकरण और कड़ाई से गोपनीयता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं, जो भारत की दत्तक ग्रहण व्यवस्था में मौजूद देरी और कार्यान्वयन की खामियों को दूर करने के लिए हैं।

परिचय: CARA के दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रव्यापी निर्देश

सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA), जो Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 (JJ Act) के तहत स्थापित एक वैधानिक संस्था है, ने 2023 में सभी State Adoption Resource Agencies (SARAs) को तीन अहम ऑफिस मेमोरेंडम जारी किए। इन निर्देशों का मकसद दत्तक ग्रहण नियमों का सख्ती से पालन कराना, बच्चों की सुरक्षा बढ़ाना और पूरे देश में दत्तक ग्रहण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को बेहतर बनाना है। CARA की यह पहल उन प्रणालीगत कमियों को दूर करने की कोशिश है, जो उचित जांच, रिकॉर्ड प्रबंधन और गोपनीयता नियमों के पालन में बाधा बन रही थीं और समय पर सुरक्षित दत्तक ग्रहण में रुकावट डाल रही थीं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 1: समाज – बाल अधिकार, नाबालिग न्याय प्रणाली, दत्तक ग्रहण कानून
  • GS पेपर 2: राजनीति और शासन – CARA, MWCD जैसे संस्थानों की भूमिका
  • निबंध: भारत में बाल संरक्षण और कल्याण

भारत में दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी ढांचा

भारत में दत्तक ग्रहण दो अलग-अलग कानूनी ढांचों के तहत संचालित होता है। Hindu Adoption and Maintenance Act (HAMA), 1956 हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के लिए लागू होता है, जो लगभग 80% जनसंख्या को कवर करता है। HAMA के तहत दत्तक ग्रहण के लिए अदालत की भागीदारी जरूरी नहीं होती और यह व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आता है। वहीं, Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 (JJ Act) सभी भारतीय नागरिकों पर धर्म की परवाह किए बिना लागू होता है और दत्तक ग्रहण केवल अदालत के आदेश और मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से ही संभव है।

  • JJ Act के सेक्शन 61-74: दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया, पात्रता और गोपनीयता के नियम बताते हैं।
  • सेक्शन 74: कानून के तहत विवादित या संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की पहचान उजागर करने पर रोक लगाता है।
  • CARA: JJ Act के तहत स्थापित, यह अनाथ, परित्यक्त और समर्पित बच्चों के दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करता है।

CARA के तीन ऑफिस मेमोरेंडम: दत्तक ग्रहण नियमों को मजबूत करना

  • पहला मेमोरेंडम: उचित जांच पूरी किए बिना किसी भी बच्चे को कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित नहीं किया जा सकता। समर्पित बच्चों के मामले में दो महीने की पुनर्विचार अवधि अनिवार्य है, ताकि उनकी स्वेच्छा सुनिश्चित हो सके।
  • दूसरा मेमोरेंडम: सभी भौतिक और डिजिटल दत्तक ग्रहण रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से डिजिटाइज कर संबंधित अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़े और प्रशासनिक खर्चों में लगभग 20% की बचत हो।
  • तीसरा मेमोरेंडम: JJ Act के सेक्शन 74 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया गया है, ताकि विवादित या संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की पहचान का खुलासा न हो। MWCD के 2023 के आंकड़ों के अनुसार यह करीब 1 लाख बच्चों की सुरक्षा करता है।

संस्थागत भूमिकाएं और दत्तक ग्रहण व्यवस्था

  • CARA: राष्ट्रीय स्तर पर दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करने वाली एजेंसी, जो नीतियां बनाती है और SARAs की निगरानी करती है।
  • SARAs: राज्य स्तर पर दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को लागू करने और रिकॉर्ड रखने वाली संस्थाएं।
  • Juvenile Justice Boards (JJBs): बच्चों के कल्याण मामलों और दत्तक ग्रहण अनुमोदन की कानूनी निगरानी करने वाले बोर्ड।
  • Child Welfare Committees (CWCs): स्थानीय स्तर पर बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने वाले निकाय।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD): नीतिगत निर्माण और बजट आवंटन का प्राधिकार; 2023-24 में बाल कल्याण योजनाओं के लिए ₹3,500 करोड़ आवंटित।

आंकड़ों से झलकती दत्तक ग्रहण की स्थिति और चुनौतियां

परिमाणभारत (CARA डेटा 2022)संयुक्त राज्य अमेरिका (ASFA 1997)
वार्षिक रूप से दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित बच्चे40,000+~120,000
1 वर्ष के भीतर दत्तक ग्रहण की दर30%80%
समर्पित बच्चों के लिए अनिवार्य पुनर्विचार अवधि2 महीनेप्रासंगिक नहीं
प्रत्येक बच्चे के लिए औसत संस्थागत देखभाल लागत प्रति माह₹15,000अधिकतर अधिक
दत्तक ग्रहण रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण कवरेजलक्ष्य: 2025 तक 100%पूरी तरह डिजिटाइज और एकीकृत
औसत दत्तक ग्रहण समय सीमाप्रक्रियात्मक देरी के कारण 1 वर्ष से अधिककानून द्वारा 12 महीने निर्धारित

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और अमेरिका के दत्तक ग्रहण ढांचे

अमेरिका में Adoption and Safe Families Act (ASFA), 1997 लागू है, जो 12 महीनों के भीतर स्थायी दत्तक ग्रहण सुनवाई करने का प्रावधान करता है। इस कानून के कारण अमेरिका में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया भारत की तुलना में लगभग 50% तेज है और बच्चों के कल्याण में बेहतर परिणाम मिलते हैं। भारत में देरी के कारणों में उचित जांच के असंगत पालन, निगरानी की कमी और डिजिटलीकरण का अभाव शामिल हैं। अमेरिकी मॉडल समयबद्धता और स्थायित्व को प्राथमिकता देता है, जिससे संस्थागत देखभाल की लागत और बच्चों के मानसिक आघात में कमी आती है।

भारत की दत्तक ग्रहण व्यवस्था में मुख्य कमियां

  • राज्यों में JJ Act के प्रावधानों का असमान पालन, जिससे उचित जांच और गोपनीयता नियमों का पालन अनियमित होता है।
  • SARAs और CARA के बीच डेटा साझा करने और डिजिटलीकरण की कमी, जो पारदर्शिता को प्रभावित करती है और प्रक्रिया में देरी लाती है।
  • 1 वर्ष के भीतर दत्तक ग्रहण की कम दर (30%), जो प्रक्रियागत अड़चनों और संभावित दत्तक माता-पिता में जागरूकता की कमी को दर्शाती है।
  • अनौपचारिक और अवैध दत्तक ग्रहण अभी भी जारी है, जो देरी और पारदर्शिता की कमी के कारण होता है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • CARA के मेमोरेंडम का सख्ती से पालन करने से केवल पात्र बच्चों को उचित जांच के बाद कानूनी रूप से मुक्त घोषित किया जाएगा, जिससे बाल संरक्षण मजबूत होगा।
  • डिजिटलीकरण और सुरक्षित रिकॉर्ड रखरखाव से पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रशासनिक खर्च कम होंगे और राज्यों के बीच डेटा साझा करना आसान होगा।
  • राज्यों में एक समान निगरानी तंत्र आवश्यक है ताकि सेक्शन 74 के तहत गोपनीयता नियमों का पालन हो और बच्चों की पहचान का खुलासा रोका जा सके।
  • जन जागरूकता अभियान और SARAs तथा CWCs की क्षमता बढ़ाने से दत्तक ग्रहण की दर बढ़ेगी और संस्थागत देखभाल पर निर्भरता कम होगी।
  • अमेरिका के ASFA जैसे स्थायित्व समय सीमा अपनाने से दत्तक ग्रहण प्रक्रिया तेज होगी और बच्चों के कल्याण में सुधार होगा।

Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. सेक्शन 74 बच्चों की पहचान उजागर करने का आदेश देता है जो संरक्षण के हकदार हैं।
  2. यह अधिनियम सभी भारतीय नागरिकों पर धर्म की परवाह किए बिना लागू होता है।
  3. CARA इसी अधिनियम के तहत स्थापित है जो अनाथ, परित्यक्त और समर्पित बच्चों के दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि सेक्शन 74 बच्चों की पहचान उजागर करने से रोकता है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि JJ Act सभी नागरिकों पर लागू होता है और CARA इसी अधिनियम के तहत स्थापित है।

Hindu Adoption and Maintenance Act (HAMA), 1956 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. HAMA के तहत दत्तक ग्रहण के लिए अदालत की भागीदारी जरूरी है।
  2. HAMA हिंदू के साथ-साथ बौद्ध, जैन और सिखों पर लागू होता है।
  3. HAMA व्यक्तिगत कानूनों के तहत दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करता है और पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि HAMA में अदालत की भागीदारी जरूरी नहीं है। कथन 2 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) द्वारा हाल ही में जारी किए गए निर्देशों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें, जिनका उद्देश्य भारत में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को मजबूत करना है। चर्चा करें कि ये उपाय प्रणालीगत चुनौतियों को कैसे दूर करते हैं और बाल संरक्षण तथा दत्तक ग्रहण परिणामों में सुधार के लिए आगे कौन से सुधार आवश्यक हैं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 1 – सामाजिक मुद्दे; पेपर 2 – शासन और कल्याण योजनाएं
  • झारखंड कोण: झारखंड में कई SARAs और CWCs हैं; दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के कार्यान्वयन में खामियां कम दत्तक ग्रहण दर और बाल कल्याण चुनौतियों को दर्शाती हैं।
  • मेन प्वाइंट: राज्य स्तर पर कार्यान्वयन की चुनौतियां, डिजिटलीकरण की जरूरत और CARA के निर्देशों का झारखंड की बाल सुरक्षा प्रणाली पर प्रभाव उजागर करें।
CARA की दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में क्या भूमिका है?

CARA राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो JJ Act, 2015 के तहत स्थापित है और भारत में मान्यता प्राप्त दत्तक ग्रहण एजेंसियों के माध्यम से अनाथ, परित्यक्त और समर्पित बच्चों के दत्तक ग्रहण को नियंत्रित और मॉनिटर करती है।

JJ Act, 2015 का सेक्शन 74 क्या कहता है?

सेक्शन 74 बच्चों की पहचान उजागर करने से रोकता है, खासकर उन बच्चों की जो कानून के विवाद में हैं या जिन्हें संरक्षण की जरूरत है, ताकि उनकी निजता और गरिमा बनी रहे।

HAMA और JJ Act में दत्तक ग्रहण को लेकर क्या अंतर है?

HAMA हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों के लिए व्यक्तिगत कानूनों के तहत दत्तक ग्रहण को नियंत्रित करता है और इसमें अदालत की भागीदारी अनिवार्य नहीं होती, जबकि JJ Act सभी नागरिकों पर लागू होता है, अदालत के आदेश जरूरी हैं और CARA के माध्यम से दत्तक ग्रहण नियंत्रित होता है।

भारत की दत्तक ग्रहण व्यवस्था में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

प्रमुख चुनौतियों में प्रक्रियागत देरी, उचित जांच और गोपनीयता नियमों का असमान पालन, रिकॉर्ड का अपर्याप्त डिजिटलीकरण, एक वर्ष के भीतर कम दत्तक ग्रहण दर और अनौपचारिक या अवैध दत्तक ग्रहण शामिल हैं।

डिजिटलीकरण का दत्तक ग्रहण प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

डिजिटलीकरण पारदर्शिता बढ़ा सकता है, प्रशासनिक खर्चों को लगभग 20% तक कम कर सकता है, सुरक्षित रिकॉर्ड रखरखाव और राज्यों के बीच डेटा साझा करने में मदद करता है, और दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को तेज करता है।

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