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भारत-बांग्लादेश सीमा पर रेंगने वाले जीवों को प्राकृतिक रक्षक बनाने का बीएसएफ का प्रस्ताव: चुनौतियां और प्रभाव

परिचय: बीएसएफ का अभिनव सीमा सुरक्षा प्रस्ताव

Border Security Force (BSF) ने भारत-बांग्लादेश सीमा के बिना बाड़ वाले नदी-क्षेत्रों में सांप और मगरमच्छ जैसे रेंगने वाले जीवों को प्राकृतिक रक्षक के तौर पर तैनात करने का प्रस्ताव रखा है। यह पहल 174 किमी की ऐसी जगहों के लिए है जहां जटिल भू-भाग और नदी की स्थिति के कारण बाड़ लगाना संभव नहीं है, खासकर सुंदरबन क्षेत्र में। भारत-बांग्लादेश सीमा कुल 4,096.7 किमी लंबी है, जिसमें लगभग 3,232 किमी बाड़ लगी है और 864 किमी बिना बाड़ के (MHA, 2023)। इस प्रस्ताव का मकसद बाड़ लगाने की लागत कम करना और सीमा सुरक्षा बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ ही यह पारिस्थितिक, कानूनी और संचालन संबंधी कई जटिलताएं भी सामने लाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा (सीमा प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण कानून)
  • GS पेपर 1: भूगोल (नदी-सीमा, सुंदरबन पारिस्थितिकी)
  • निबंध: सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता का संतुलन

भारत-बांग्लादेश सीमा का भौगोलिक और सुरक्षा संदर्भ

भारत-बांग्लादेश सीमा भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है। बिना बाड़ वाले क्षेत्र, खासकर 174 किमी की गैर-व्यवहार्य जगहें, नदी-क्षेत्रों और मैंग्रोव वन जैसे इछामति, रायमंगल, और हरिभंगा नदियों के आसपास और सुंदरबन में केंद्रित हैं। ये इलाके बाढ़, कटाव और नदी के मार्ग बदलने के कारण पारंपरिक बाड़ लगाने में कठिनाई पैदा करते हैं (BSF रिपोर्ट, 2023)।

  • इन सीमाओं की छिद्रपूर्णता आर्थिक असमानता और पर्यावरणीय विस्थापन के कारण अवैध प्रवासन को बढ़ावा देती है।
  • जैसे पशु तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और नकली मुद्रा का कारोबार कठिन भू-भाग का फायदा उठाता है।
  • ऐसे इलाके में पारंपरिक बाड़ लगाने की लागत औसतन प्रति किलोमीटर ₹10 करोड़ है (MHA, 2022), जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है।

बीएसएफ और वन्यजीव उपयोग के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

Border Security Force Act, 1968 बीएसएफ को भारत की सीमाओं की सुरक्षा का अधिकार देता है, साथ ही संविधान के Article 355 के तहत केंद्र सरकार को बाहरी आक्रमण से सुरक्षा का दायित्व दिया गया है। लेकिन वन्यजीवों को रक्षक के रूप में तैनात करना पर्यावरण कानूनों से जुड़ा है:

  • Wildlife Protection Act, 1972 (संशोधन 2006): सेक्शन 9 और 40 रेंगने वाले जीवों की सुरक्षा और उनके उपयोग को नियंत्रित करते हैं, बिना अनुमति के नुकसान या शोषण मना है।
  • Environment Protection Act, 1986: पारिस्थितिक सुरक्षा और प्रभाव आकलन के लिए दिशा-निर्देश देता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले जैसे Animal Welfare Board of India vs. A. Nagaraja (2014) वन्यजीवों के नैतिक संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर जोर देते हैं।

इस प्रस्ताव को इन कानूनों का पालन करते हुए लागू करना होगा ताकि कानूनी और नैतिक उल्लंघन न हों, जिसके लिए कई एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी है।

आर्थिक पहलू: लागत-लाभ और आजीविका पर प्रभाव

संघीय बजट 2024-25 में सीमा प्रबंधन के लिए ₹33,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें बाड़ और अवसंरचना शामिल है। कठिन भू-भाग में बाड़ लगाने की लागत लगभग ₹10 करोड़ प्रति किमी है, जिससे 174 किमी गैर-व्यवहार्य हिस्सों में बाड़ न लगाने से ₹1,740 करोड़ की बचत हो सकती है (MHA, 2022)। लेकिन आर्थिक गणना में निम्नलिखित शामिल करने होंगे:

  • पारिस्थितिक प्रबंधन और रेंगने वाले जीवों के संरक्षण की लागत, जो अभी मापी नहीं गई है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए चिकित्सा और मुआवजे पर खर्च।
  • स्थानीय आजीविका पर संभावित नकारात्मक प्रभाव, खासकर सुंदरबन में मछली पकड़ने और पर्यटन पर निर्भर लगभग 40 लाख लोगों के लिए (Census 2011; सुंदरबन विकास बोर्ड)।

कार्यान्वयन और निगरानी में संस्थागत भूमिकाएं

  • BSF: सीमा सुरक्षा और रक्षक तैनाती की जिम्मेदारी।
  • Ministry of Home Affairs (MHA): नीति निर्माण, बजट आवंटन, और एजेंसियों के बीच समन्वय।
  • Wildlife Institute of India (WII): पारिस्थितिक प्रभाव आकलन और संरक्षण रणनीतियों में विशेषज्ञता।
  • Sundarbans Development Board (SDB): क्षेत्रीय पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक संतुलन की देखरेख।
  • पश्चिम बंगाल और असम के वन विभाग: स्थानीय वन्यजीव प्रबंधन और पर्यावरण कानूनों का पालन।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और बांग्लादेश की सीमा प्रबंधन रणनीतियां

पहलू भारत बांग्लादेश
सीमा लंबाई 4,096.7 किमी (MHA, 2023) भारत के समान (साझा सीमा)
बाड़ की स्थिति 3,232 किमी बाड़ लगी; 864 किमी बिना बाड़ (174 किमी गैर-व्यवहार्य) प्राकृतिक नदी रक्षक के साथ बाड़
प्राकृतिक रक्षक का उपयोग रेंगने वाले जीवों के उपयोग का प्रस्ताव (BSF, 2023) नदी रक्षक और मैंग्रोव संरक्षण के साथ स्थापित मॉडल (Bangladesh Forest Department, 2022)
समुदाय की भागीदारी वर्तमान बीएसएफ प्रस्तावों में सीमित सक्रिय समुदाय आधारित प्रबंधन, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने वाला
पारिस्थितिक समन्वय व्यापक प्रभाव आकलन लंबित पारिस्थितिक और आजीविका संरक्षण का समन्वित मॉडल

महत्वपूर्ण खामियां और चुनौतियां

  • व्यापक पारिस्थितिक प्रभाव आकलन का अभाव जैव विविधता हानि और अनचाही परिणामों का खतरा बढ़ाता है।
  • समुदाय की भागीदारी के बिना मानव-वन्यजीव संघर्ष और स्थानीय आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
  • सुरक्षा में वन्यजीव उपयोग के कानूनी अस्पष्टताएं स्पष्ट करनी होंगी ताकि उल्लंघन न हों।
  • गतिशील नदी-क्षेत्रों में रेंगने वाले जीवों की निगरानी और नियंत्रण में संचालन संबंधी कठिनाइयां।

आगे का रास्ता: सुरक्षा के साथ पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक स्थिरता का संयोजन

  • WII और वन विभागों के साथ मिलकर तैनाती से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का कड़ा आकलन करें।
  • SDB और स्थानीय समुदायों को शामिल करते हुए बहु-हितधारक भागीदारी मंच बनाएं।
  • बीएसएफ के संचालन को Wildlife Protection Act और Environment Protection Act के अनुरूप कानूनी प्रोटोकॉल बनाएं।
  • पायलट परियोजनाएं लागू करें, निरंतर निगरानी और अनुकूलन प्रबंधन के साथ प्रभाव और जोखिम का मूल्यांकन करें।
  • बांग्लादेश के समन्वित सीमा प्रबंधन मॉडल से सीखें, जो पारिस्थितिक संरक्षण और आजीविका सुरक्षा पर केंद्रित है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर रेंगने वाले जीवों के उपयोग के बीएसएफ प्रस्ताव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह प्रस्ताव सीमा के सभी बिना बाड़ वाले हिस्सों में बाड़ की जगह लेने का लक्ष्य रखता है।
  2. Wildlife Protection Act, 1972 के तहत बिना अनुमति रेंगने वाले जीवों को संभालना मना है।
  3. सुंदरबन क्षेत्र नदी और मैंग्रोव भू-भाग के कारण प्रमुख चुनौती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि यह प्रस्ताव केवल 174 किमी गैर-व्यवहार्य हिस्सों के लिए है, सभी बिना बाड़ वाले हिस्सों के लिए नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि Wildlife Protection Act के तहत रेंगने वाले जीवों को अनुमति के बिना संभालना मना है। कथन 3 सही है क्योंकि सुंदरबन का भू-भाग बाड़ लगाने और सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण है।

सीमा सुरक्षा में वन्यजीव उपयोग से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करें:

  1. Border Security Force Act, 1968 वन्यजीवों के असीमित उपयोग की अनुमति देता है।
  2. संविधान के Article 355 के तहत केंद्र सरकार को बाहरी आक्रमण से सुरक्षा का दायित्व है।
  3. Environment Protection Act, 1986 विकास परियोजनाओं में पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि BSF Act वन्यजीवों के असीमित उपयोग की अनुमति नहीं देता। कथन 2 और 3 संविधान और पर्यावरण कानून के प्रावधानों के अनुसार सही हैं।

मेन्स प्रश्न

भारत-बांग्लादेश सीमा पर रेंगने वाले जीवों को प्राकृतिक रक्षक के रूप में तैनात करने के बीएसएफ प्रस्ताव का मूल्यांकन करें। इसके पारिस्थितिक, कानूनी और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करें और सीमा सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण के संतुलित दृष्टिकोण के लिए उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – आंतरिक सुरक्षा और पर्यावरण
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड की सीमा बांग्लादेश से नहीं मिलती, पर बीएसएफ के पारिस्थितिक सुरक्षा मॉडल से राज्य के वन सीमाओं और वन्यजीव गलियारों के प्रबंधन में सीख ली जा सकती है।
  • मेन्स के लिए संकेत: बहु-क्षेत्रीय समन्वय, कानूनी अनुपालन, और समुदाय की भागीदारी पर आधारित उत्तर तैयार करें, जो झारखंड के जनजातीय और वन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हों।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ हिस्सों में बाड़ लगाना क्यों संभव नहीं है?

लगभग 174 किमी सीमा पर नदी-क्षेत्र, बार-बार बाढ़, नदी मार्ग का बदलाव, और घने मैंग्रोव जंगल के कारण बाड़ लगाना व्यावहारिक नहीं है, खासकर सुंदरबन क्षेत्र में (BSF रिपोर्ट, 2023)।

सीमा सुरक्षा में रेंगने वाले जीवों के उपयोग को कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

Wildlife Protection Act, 1972 (सेक्शन 9 और 40) रेंगने वाले जीवों को नुकसान पहुंचाने और बिना अनुमति संभालने पर रोक लगाता है। Environment Protection Act, 1986 पारिस्थितिक सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश देता है। बीएसएफ को इन कानूनों का पालन करना होगा।

बांग्लादेश सुंदरबन क्षेत्र में अपनी सीमा कैसे प्रबंधित करता है?

बांग्लादेश प्राकृतिक नदी रक्षकों और समुदाय आधारित सीमा प्रबंधन को मैंग्रोव संरक्षण के साथ जोड़कर मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करता है और स्थानीय आजीविका का समर्थन करता है (Bangladesh Forest Department, 2022)।

रेंगने वाले जीवों को प्राकृतिक रक्षक बनाने के संभावित जोखिम क्या हैं?

इनमें मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ना, पारिस्थितिक असंतुलन, जैव विविधता को खतरा, और स्थानीय मछली पकड़ने व पर्यटन आधारित समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव शामिल हैं।

बीएसएफ के रेंगने वाले जीवों के उपयोग प्रस्ताव को लागू करने में कौन-कौन सी संस्थाएं महत्वपूर्ण हैं?

मुख्य संस्थाओं में BSF, Ministry of Home Affairs, Wildlife Institute of India, Sundarbans Development Board, और राज्य वन विभाग शामिल हैं।

आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई

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