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Governance · Exam Notes

ब्रिक्स और मेना के राजदूतों ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर जताई संयुक्त चिंता: बहुपक्षीय कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव

अक्टूबर 2023 में, ब्रिक्स और मेना के राजदूतों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को लेकर संयुक्त चिंता जताई और बहुपक्षीय कूटनीतिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत की विदेश नीति, जो संविधान के आर्टिकल 253 और अंतरराष्ट्रीय संधियों के आधार पर चलती है, ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाती है। तेल आयात और व्यापार के माध्यम से आर्थिक परस्पर निर्भरता इस संघर्ष के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।
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Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

अक्टूबर 2023 में, ब्रिक्स और मेना के राजदूतों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को लेकर संयुक्त चिंता जताई और बहुपक्षीय कूटनीतिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत की विदेश नीति, जो संविधान के आर्टिकल 253 और अंतरराष्ट्रीय संधियों के आधार पर चलती है, ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाती है। तेल आयात और व्यापार के माध्यम से आर्थिक परस्पर निर्भरता इस संघर्ष के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।

ब्रिक्स-मेना राजदूतों ने पश्चिम एशिया युद्ध पर जताई चिंता

अक्टूबर 2023 में, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के ब्रिक्स समूह के साथ-साथ मेना (मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका) क्षेत्र के राजदूतों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को लेकर संयुक्त चिंता व्यक्त की। इस बैठक में युद्ध के मानवीय प्रभाव और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा पर इसके अस्थिर प्रभाव को तत्काल संबोधित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बढ़ती शत्रुता के बीच यह कूटनीतिक संवाद उभरती अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय खिलाड़ियों के भू-राजनीतिक हितों व आर्थिक आवश्यकताओं के मेल को उजागर करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – बहुपक्षीय समूह, भारत की पश्चिम एशिया नीति, संघर्ष समाधान के उपाय
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक तेल बाजार, भू-राजनीतिक संघर्षों का आर्थिक प्रभाव
  • निबंध: पश्चिम एशिया में भारत की भू-राजनीतिक हितों और मानवीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन की भूमिका

भारत की कूटनीतिक नीति का कानूनी और संवैधानिक आधार

भारत की विदेश नीति के लिए कोई स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है, लेकिन यह संविधान के आर्टिकल 253 के तहत संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है। भारतीय विदेश सेवा (आचरण) नियम, 1961 राजनयिक आचरण को नियंत्रित करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन सुनिश्चित करते हैं। वैश्विक स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) के आर्टिकल 1 और 2 विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को अनिवार्य करते हैं, जबकि वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस, 1961 राजनयिक संरक्षण और कर्तव्यों को निर्धारित करता है। ये सभी ढांचे मिलकर भारत की पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति को आकार देते हैं।

  • आर्टिकल 253, संविधान भारत: संसद को संधि लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • भारतीय विदेश सेवा (आचरण) नियम, 1961: कूटनीतिक आचरण के मानक निर्धारित करते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर आर्टिकल 1 और 2: विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर।
  • वियना कन्वेंशन, 1961: राजनयिक विशेषाधिकार और संरक्षण को नियंत्रित करता है।

आर्थिक हित: ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार परस्पर निर्भरता

पश्चिम एशिया विश्व के लगभग 40% तेल निर्यात का स्रोत है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है (IEA, 2023)। भारत का पश्चिम एशिया से कच्चे तेल का आयात वित्त वर्ष 2022-23 में कुल आयात का 85% था (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय)। ब्रिक्स देशों का वैश्विक GDP में हिस्सा 42% है (विश्व बैंक, 2023), जो इन देशों की आर्थिक ताकत को दर्शाता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में 15-20% तक की वृद्धि हो सकती है, जिससे मेना और ब्रिक्स देशों में मुद्रास्फीति और व्यापार असंतुलन बढ़ सकता है (IMF, 2023)। इसके अलावा, भारत और मेना देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2022 में 150 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि मेना में बसे भारतीय प्रवासियों की भेजी गई रकम 40 अरब डॉलर से अधिक है (विश्व बैंक, 2023), जो गहरी आर्थिक परस्पर निर्भरता को दर्शाता है।

  • पश्चिम एशिया विश्व के 40% तेल निर्यात का स्रोत (IEA, 2023)।
  • भारत का पश्चिम एशिया से कच्चा तेल आयात 85% (वित्त वर्ष 2022-23) (पेट्रोलियम मंत्रालय)।
  • ब्रिक्स देशों का वैश्विक GDP में हिस्सा 42% (विश्व बैंक, 2023)।
  • संघर्ष के कारण वैश्विक तेल मूल्य अस्थिरता में 18% की वृद्धि (IMF, 2023)।
  • भारत-मेना द्विपक्षीय व्यापार 150 अरब डॉलर (2022) (वाणिज्य मंत्रालय)।
  • मेना में भारतीय प्रवासियों की रेमिटेंस 40 अरब डॉलर से अधिक (2022) (विश्व बैंक)।

संस्थागत भूमिका और संघर्ष कूटनीति में योगदान

ब्रिक्स समूह मुख्यतः उभरती अर्थव्यवस्थाओं का आर्थिक-राजनीतिक गठबंधन है, लेकिन इसका कोई एकीकृत विदेश नीति तंत्र नहीं है, जिससे पश्चिम एशिया संघर्षों पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं। मेना क्षेत्र, जो भू-राजनीतिक और आर्थिक हित साझा करता है, सीधे युद्ध के प्रभाव में है। संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद, संघर्ष समाधान का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच है, जबकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) आर्थिक आंकड़े और पूर्वानुमान प्रदान करते हैं जो कूटनीतिक रणनीतियों को प्रभावित करते हैं। भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) अपनी संतुलित कूटनीति के माध्यम से पश्चिम एशियाई देशों के साथ जटिल संबंधों को संभालता है।

संस्था/समूहभूमिकापश्चिम एशिया संघर्ष पर दृष्टिकोणमुख्य चुनौती
ब्रिक्सउभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोगविभिन्न रुख; कोई एकीकृत विदेश नीति नहींसदस्य देशों के विरोधी हितों का संतुलन (जैसे चीन-ईरान बनाम भारत)
मेनाभू-राजनीतिक और आर्थिक हित साझा करने वाला क्षेत्रीय समूहप्रत्यक्ष प्रभावित; क्षेत्रीय स्थिरता चाहता हैराजनीतिक विखंडन; आंतरिक प्रतिस्पर्धाएं
संयुक्त राष्ट्रवैश्विक शांति और सुरक्षा लागू करनायुद्धविराम और वार्ता का आह्वानवेटो शक्तियों के कारण निर्णायक कार्रवाई में बाधा
MEA, भारतभारत की विदेश नीति का संचालनसंतुलित कूटनीति; ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यानजटिल द्विपक्षीय संबंध और प्रवासी हितों का प्रबंधन

ब्रिक्स बनाम यूरोपीय संघ: विदेश नीति तंत्र की तुलना

यूरोपीय संघ (EU) की कॉमन फॉरेन एंड सिक्योरिटी पॉलिसी (CFSP) सदस्य देशों को क्षेत्रीय संघर्षों पर संयुक्त कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है। इसके विपरीत, ब्रिक्स में ऐसा कोई संस्थागत समन्वय नहीं है, जिससे पश्चिम एशिया संघर्षों पर प्रतिक्रियाएँ बिखरी हुई हैं। उदाहरण के लिए, चीन का ईरान के साथ रणनीतिक संबंध हैं, जबकि भारत ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी हितों के लिए संतुलित कूटनीति अपनाता है। यह भिन्नता ब्रिक्स की सामूहिक प्रभावशीलता को कमजोर करती है।

पहलूब्रिक्सयूरोपीय संघ (EU)
विदेश नीति समन्वयअभाव; सदस्य स्वतंत्र नीतियाँ अपनाते हैंस्थापित CFSP जो संयुक्त रुख बनाता है
पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रतिक्रियाविभिन्न रुख (चीन-ईरान बनाम भारत)एकीकृत कूटनीतिक और आर्थिक कदम
संस्थागत तंत्रढीला सहयोग; कोई सर्वोच्च संस्था नहींसंरचित संस्थाएं जैसे यूरोपीय बाह्य कार्य सेवा
संघर्ष समाधान पर प्रभावसीमित सामूहिक प्रभावएकीकृत कार्रवाई से अधिक प्रभाव

ब्रिक्स-मेना कूटनीतिक संवाद में प्रमुख कमियां

साझा चिंताओं के बावजूद, ब्रिक्स और मेना के पास आर्थिक प्रतिबंध, शांति स्थापना और मानवीय सहायता को एकीकृत करने वाला कोई ठोस संघर्ष समाधान ढांचा नहीं है। इस विखंडन के कारण प्रतिक्रियात्मक कूटनीति होती है, जो राजनीतिक असंतोष, सांप्रदायिक विभाजनों और बाहरी हस्तक्षेप जैसे जड़ कारणों को संबोधित करने में विफल रहती है। समन्वित तंत्रों के अभाव में ये समूह युद्धविराम वार्ता या युद्धोपरांत पुनर्निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने में असमर्थ रहते हैं।

  • ब्रिक्स के भीतर कोई एकीकृत आर्थिक प्रतिबंध प्रणाली नहीं।
  • ब्रिक्स या मेना संस्थानों द्वारा सीमित शांति स्थापना या मध्यस्थता।
  • मानवीय सहायता के प्रयास अक्सर असंगठित, जिससे प्रभाव कम।
  • संघर्ष के राजनीतिक और सांप्रदायिक कारणों को संबोधित करने में विफलता।

महत्व और आगे की राह

ब्रिक्स-मेना राजदूतों की संयुक्त चिंता पश्चिम एशिया की रणनीतिक अहमियत और सुरक्षा व आर्थिक स्थिरता की आपसी निर्भरता को दर्शाती है। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी कल्याण और भू-राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना जटिल कूटनीति मांगता है। ब्रिक्स के भीतर विदेश नीति समन्वय को मजबूत करना संघर्ष समाधान क्षमता बढ़ा सकता है। साथ ही, मेना देशों के साथ मानवीय सहायता और शांति निर्माण में सहयोग को संस्थागत रूप देना युद्ध के प्रभाव को कम कर सकता है।

  • संघर्ष क्षेत्रों पर केंद्रित ब्रिक्स विदेश नीति समन्वय तंत्र विकसित करें।
  • ब्रिक्स सदस्यों के विभिन्न हितों के बीच मध्यस्थता के लिए भारत की कूटनीतिक भूमिका बढ़ाएं।
  • संयुक्त ब्रिक्स-मेना मानवीय और पुनर्निर्माण पहल को प्रोत्साहित करें।
  • संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से बहुपक्षीय शांति प्रयासों को बढ़ावा दें।

ब्रिक्स और मेना के कूटनीतिक संवाद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ब्रिक्स के पास यूरोपीय संघ के CFSP जैसा एकीकृत विदेश नीति तंत्र है।
  2. मेना एक औपचारिक संस्थागत इकाई है जिसके पास केंद्रीकृत निर्णय लेने की संरचना है।
  3. भारत की पश्चिम एशिया नीति संविधान के आर्टिकल 253 द्वारा निर्देशित है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) केवल 3

उत्तर: (d)

कथन 1 गलत है क्योंकि ब्रिक्स के पास यूरोपीय संघ के CFSP जैसा कोई एकीकृत विदेश नीति तंत्र नहीं है। कथन 2 भी गलत है क्योंकि मेना एक क्षेत्रीय समूह है, न कि कोई औपचारिक केंद्रीकृत संस्था। कथन 3 सही है; आर्टिकल 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।

भारत के पश्चिम एशिया के साथ आर्थिक संबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत अपने कच्चे तेल का 80% से अधिक पश्चिम एशिया से आयात करता है।
  2. मेना में बसे भारतीय प्रवासियों की रेमिटेंस सालाना 20 अरब डॉलर से कम है।
  3. ब्रिक्स देश वैश्विक GDP का 40% से अधिक हिस्सा रखते हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; वित्त वर्ष 2022-23 में भारत के कच्चे तेल का 85% आयात पश्चिम एशिया से हुआ। कथन 2 गलत है; मेना से रेमिटेंस 40 अरब डॉलर से अधिक है। कथन 3 सही है; ब्रिक्स देशों का वैश्विक GDP में हिस्सा 42% है (विश्व बैंक, 2023)।

मेन प्रश्न

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए ब्रिक्स और मेना देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों में संतुलन बनाए रखने की चुनौतियों और अवसरों का मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं, इसलिए भारत की पश्चिम एशिया कूटनीति राज्य की आर्थिक स्थिरता से प्रत्यक्ष जुड़ी है।
  • मेन प्वाइंट: उत्तर में भारत की ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं को कूटनीतिक संतुलन के साथ जोड़ें और वैश्विक तेल मूल्य अस्थिरता के झारखंड की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को रेखांकित करें।
भारत की विदेश नीति में आर्टिकल 253 का क्या महत्व है?

संविधान के आर्टिकल 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देता है, जो भारत की विदेश नीति और संधि दायित्वों के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करता है।

ब्रिक्स में पश्चिम एशिया पर एकीकृत विदेश नीति क्यों नहीं है?

ब्रिक्स में विभिन्न देशों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हित और गठजोड़ हैं, जैसे चीन का ईरान के साथ संबंध और भारत की संतुलित कूटनीति, जो एकीकृत विदेश नीति को बाधित करते हैं।

पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

पश्चिम एशिया भारत के कच्चे तेल आयात का 85% प्रदान करता है, जिससे यह ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

पश्चिम एशिया संघर्ष में संयुक्त राष्ट्र की क्या भूमिका है?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देता है, हालांकि स्थायी सदस्यों के वेटो अधिकार के कारण निर्णायक कार्रवाई में बाधा आती है।

मेना क्षेत्र भारत के लिए आर्थिक रूप से कैसे महत्वपूर्ण है?

भारत और मेना के बीच 2022 में द्विपक्षीय व्यापार 150 अरब डॉलर था, और मेना में बसे भारतीय प्रवासियों की भेजी गई रकम 40 अरब डॉलर से अधिक है, जो मजबूत आर्थिक जुड़ाव को दर्शाता है।

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