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Governance · Exam Notes

भारत में टिकाऊ मानव और पशु पोषण के लिए बायोटेक उद्योग की भूमिका

1 min read GS Paper II

परिचय: बायोटेक्नोलॉजी का पोषण में योगदान

बायोटेक्नोलॉजी उद्योग जीववैज्ञानिक प्रणालियों का उपयोग करके मानव और पशु पोषण में नवाचार लाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता बेहतर होती है। भारत का बायोटेक क्षेत्र मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 6), 1989 के खतरनाक सूक्ष्मजीवों/जैविक रूप से संशोधित जीवों के निर्माण, उपयोग, आयात, निर्यात और भंडारण के नियम, तथा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत संचालित होता है और तेजी से विकसित हो रहा है। यह क्षेत्र जीन एडिटिंग, बायोप्रिंटिंग और बायोइकोनॉमी के सिद्धांतों का उपयोग कर उत्पादकता, पोषक तत्व दक्षता और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ाता है। डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) जैसे प्रमुख संस्थान नीति निर्धारण और अनुसंधान के केंद्र हैं।

UPSC से संबंधित

  • GS पेपर 3: कृषि और पशु पोषण में बायोटेक्नोलॉजी के अनुप्रयोग, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण और पारिस्थितिकी।
  • निबंध: सतत विकास और खाद्य प्रणालियों में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका।
  • नैतिकता और शासन: बायोटेक नवाचारों के नियामक ढांचे।

भारत में बायोटेक्नोलॉजी का नियामक ढांचा

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को जीन संशोधित जीवों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, जिसे 1989 के नियमों के तहत खतरनाक सूक्ष्मजीवों के लिए और मजबूत किया गया है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) बायोटेक उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है। बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी एक्ट, 2002 जैविक संसाधनों की पहुंच और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा करता है। नेशनल बायोटेक्नोलॉजी डेवलपमेंट स्ट्रेटेजी (2015-2020) नवाचार, व्यावसायीकरण और नियमन को जोड़ने के लिए नीति दिशा प्रदान करता है।

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 6: जीन संशोधित जीवों पर केंद्र सरकार का नियंत्रण।
  • FSSAI: जीन संशोधित खाद्य पदार्थों के लिए मानक और लेबलिंग।
  • बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी एक्ट की धाराएं 3 और 4: संसाधन पहुंच और लाभ साझा करने के नियम।
  • DBT: नीति निर्माण, वित्त पोषण और बायोटेक अनुसंधान समन्वय।

भारत की बायोइकोनॉमी का आर्थिक परिदृश्य

2023 में भारत की बायोइकोनॉमी का मूल्य लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो 15-20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रही है (DBT, 2023)। सरकार ने 2023-24 के बजट में बायोटेक अनुसंधान के लिए 2200 करोड़ रुपये (~270 मिलियन डॉलर) आवंटित किए। केवल पशु पोषण बाजार 2025 तक 6.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 8.5% की CAGR है (FICCI, 2023)। जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों जैसे बायोटेक उत्पादों का निर्यात वित्तीय वर्ष 2022-23 में 12% बढ़ा (वाणिज्य मंत्रालय)। इस विकास को जीन एडिटिंग, जैव उर्वरक और पशु आहार पूरक में नवाचारों ने गति दी है।

  • बायोइकोनॉमी का विस्तार 2014 के 10 अरब डॉलर से 2024 में 165.7 अरब डॉलर तक।
  • सरकारी अनुसंधान निधि 2023-24 में 2200 करोड़ रुपये तक बढ़ी।
  • पशु पोषण बाजार की CAGR 8.5%, 2025 तक 6.5 अरब डॉलर का अनुमान।
  • वित्तीय वर्ष 2022-23 में बायोटेक उत्पादों का निर्यात 12% बढ़ा।

मानव और पशु पोषण में तकनीकी नवाचार

CRISPR-Cas9 जैसे जीन एडिटिंग उपकरणों का उपयोग पशुधन में रोग प्रतिरोधक क्षमता और आहार दक्षता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है (DBT वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। बायोप्रिंटिंग ने कल्चर मीट के प्रोटोटाइप विकसित किए हैं, जिससे पारंपरिक पशुपालन पर निर्भरता कम हुई है (CSIR, 2023)। 2022 में जैव उर्वरक और जैव कीटनाशकों का उपयोग 18% बढ़ा, जिससे रासायनिक उपयोग में कमी आई (कृषि मंत्रालय, 2023)। बायोटेक-आधारित एंजाइम और प्रोबायोटिक्स से समृद्ध पशु आहार ने फीड कन्वर्जन अनुपात में 10-15% सुधार किया है (ICAR-NIVEDI, 2023)। डिजिटल प्रिसिजन फार्मिंग उपकरणों के साथ समन्वय से पोषक तत्व प्रबंधन की दक्षता 20% तक बढ़ी है (नीति आयोग रिपोर्ट, 2023)।

  • पशुधन में रोग प्रतिरोधक और उत्पादकता के लिए CRISPR का उपयोग।
  • बायोप्रिंटिंग से कल्चर मीट, पर्यावरणीय प्रभाव में कमी।
  • जैव उर्वरक/कीटनाशक के बढ़ते उपयोग से रासायनिक निर्भरता में कमी।
  • बायोटेक-संवर्धित पशु आहार से फीड कन्वर्जन में 15% तक सुधार।
  • डिजिटल-बायोटेक संयोजन से पोषक तत्व उपयोग दक्षता में 20% वृद्धि।

पोषण क्षेत्र में बायोटेक के प्रमुख संस्थान

डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) नीति और वित्त पोषण का नेतृत्व करता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) कृषि और पशु पोषण अनुसंधान करता है। FSSAI बायोटेक उत्पादों के खाद्य सुरक्षा मानकों को नियंत्रित करता है। ICAR-NIVEDI पशु पोषण और पशु रोग विज्ञान पर केंद्रित है। बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) स्टार्टअप और उद्योग नवाचार को समर्थन देता है। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) बहुविषयक बायोटेक अनुसंधान करता है।

  • DBT: नीति, वित्त पोषण, समन्वय।
  • ICAR: कृषि और पशु पोषण अनुसंधान।
  • FSSAI: खाद्य सुरक्षा और बायोटेक उत्पाद नियमन।
  • ICAR-NIVEDI: पशु पोषण और रोग सूचना विज्ञान।
  • BIRAC: उद्योग नवाचार और स्टार्टअप समर्थन।
  • CSIR: बहुविषयक बायोटेक अनुसंधान।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम अमेरिका बायोटेक पोषण में

पहलूभारतसंयुक्त राज्य अमेरिका
बायोइकोनॉमी का आकार (2023)लगभग 70 अरब डॉलरलगभग 350 अरब डॉलर
वृद्धि दर15-20% CAGR8-10% CAGR
नियामक ढांचापर्यावरण संरक्षण अधिनियम, FSSAI, विभाजित निगरानी1986 का समन्वित बायोटेक नियामक ढांचा, FDA, USDA, EPA
संघीय वित्त पोषणR&D के लिए 2200 करोड़ रुपये (~270 मिलियन डॉलर)NIH, USDA जैसे कई एजेंसियां अरबों डॉलर के बजट के साथ
व्यावसायीकरणधीमा, उद्योग-शैक्षणिक संबंध कमजोरमजबूत, सार्वजनिक-निजी भागीदारी स्थापित
पशु पोषण नवाचारउभरता हुआ जीन एडिटिंग और फीड बायोटेकउन्नत जीन एडिटिंग, कल्चर मीट, प्रिसिजन पोषण

भारत के बायोटेक क्षेत्र की चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतर

भारत के बायोटेक उद्योग को नियामक विखंडन का सामना करना पड़ता है, जिससे अनुमोदन में देरी होती है। व्यावसायीकरण धीमा है क्योंकि उद्योग-शैक्षणिक सहयोग सीमित है और पशु पोषण में मानकीकृत प्रोटोकॉल की कमी है। बुनियादी ढांचे की कमी और बौद्धिक संपदा सुरक्षा की समस्याएं भी विस्तार में बाधक हैं। अमेरिका की तुलना में भारत को नियामक ढांचे को समेकित करने और नवाचार से बाजार तक के रास्ते को आसान बनाने की जरूरत है।

  • कई एजेंसियों में नियामक विखंडन।
  • धीमा व्यावसायीकरण और बाजार में प्रवेश।
  • पशु पोषण बायोटेक के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल की कमी।
  • सीमित उद्योग-शैक्षणिक सहयोग।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईपी सुरक्षा की चुनौतियां।

महत्व और आगे का रास्ता

  • नियामक ढांचे को एकीकृत कर अनुमोदन समय और अनिश्चितता कम करें।
  • तेजी से नवाचार के लिए उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी बढ़ाएं।
  • पशु पोषण में बायोटेक के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल विकसित करें।
  • बायोटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाएं।
  • प्रिसिजन पोषण और स्थिरता के लिए डिजिटल-बायोटेक एकीकरण को बढ़ावा दें।
  • वैश्विक बाजारों का लाभ उठाने के लिए बायोटेक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दें।

पशु पोषण में बायोटेक्नोलॉजी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. CRISPR तकनीक का उपयोग पशुधन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  2. बायोप्रिंटिंग मुख्य रूप से कृषि में फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती है।
  3. पशु आहार में बायोटेक-उत्पन्न एंजाइम फीड कन्वर्जन अनुपात सुधारते हैं।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि CRISPR का उपयोग पशुधन में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि बायोप्रिंटिंग कल्चर मीट के लिए होती है, फसल उत्पादन के लिए नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि बायोटेक-उत्पन्न एंजाइम फीड कन्वर्जन अनुपात में सुधार करते हैं।

भारत के बायोटेक नियामक ढांचे के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट जीन संशोधित खाद्य पदार्थों को नियंत्रित करता है।
  2. बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी एक्ट जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग को नियंत्रित करता है।
  3. कोऑर्डिनेटेड फ्रेमवर्क फॉर रेगुलेशन ऑफ बायोटेक्नोलॉजी भारत की नियामक नीति है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि FSSAI बायोटेक खाद्य पदार्थों को नियंत्रित करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी एक्ट जैव संसाधनों की पहुंच को नियंत्रित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि कोऑर्डिनेटेड फ्रेमवर्क अमेरिका की नीति है।

मुख्य प्रश्न

भारत में मानव और पशु पोषण में बायोटेक्नोलॉजी कैसे बदलाव ला रही है, इसे विस्तार से चर्चा करें। इसके नियामक ढांचे, प्रमुख नवाचारों और क्षेत्र को मिलने वाली चुनौतियों को उजागर करें। बायोटेक समाधानों के व्यावसायीकरण और प्रभाव को बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: पेपर 3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी), कृषि और पशुपालन में बायोटेक अनुप्रयोग।
  • झारखंड का नजरिया: राज्य का पशुधन क्षेत्र फीड दक्षता और रोग प्रतिरोधक क्षमता में बायोटेक नवाचारों से लाभान्वित हो सकता है; झारखंड की कृषि में जैव उर्वरक के उपयोग की संभावना।
  • मुख्य बिंदु: पशुधन उत्पादकता और सतत कृषि में बायोटेक के स्थानीय प्रभाव पर जोर; राज्य स्तर पर नियामक सुविधा और अनुसंधान समर्थन पर चर्चा।
बायोइकोनॉमी क्या है और इसका बायोटेक्नोलॉजी से क्या संबंध है?

बायोइकोनॉमी नवीनीकृत जैविक संसाधनों का उपयोग कर खाद्य, ऊर्जा और औद्योगिक वस्तुएं बनाने की प्रक्रिया है। बायोटेक्नोलॉजी जीन एडिटिंग, बायोप्रिंटिंग और बायो-आधारित उत्पादों के माध्यम से बायोइकोनॉमी को बढ़ावा देती है, जिससे स्थिरता और आर्थिक विकास संभव होता है।

भारत में बायोटेक्नोलॉजी को कौन-कौन से कानून नियंत्रित करते हैं?

भारत में बायोटेक्नोलॉजी को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 6), 1989 के खतरनाक सूक्ष्मजीव नियम, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006, और बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी एक्ट, 2002 के तहत नियंत्रित किया जाता है।

पशु पोषण में सुधार लाने वाले प्रमुख बायोटेक नवाचार कौन से हैं?

रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जीन एडिटिंग (CRISPR), पशु आहार में बायोटेक-उत्पन्न एंजाइम और प्रोबायोटिक्स, और कल्चर मीट के लिए बायोप्रिंटिंग प्रमुख नवाचार हैं जो पशु पोषण को बेहतर बनाते हैं।

भारत का बायोटेक क्षेत्र अमेरिका से कैसे तुलना करता है?

भारत की बायोइकोनॉमी आकार में छोटी (~70 अरब डॉलर) है, नियामक विखंडन और धीमे व्यावसायीकरण के साथ, जबकि अमेरिका की बायोइकोनॉमी (~350 अरब डॉलर) समन्वित नियमन और व्यापक संघीय वित्त पोषण से लाभान्वित होती है।

भारत में बायोटेक नवाचारों के व्यावसायीकरण में क्या चुनौतियां हैं?

चुनौतियों में नियामक विखंडन, सीमित उद्योग-शैक्षणिक सहयोग, मानकीकृत प्रोटोकॉल की कमी, बुनियादी ढांचा और आईपी सुरक्षा की समस्याएं शामिल हैं।

Sources and further reading

Tags:Governance