राष्ट्रीय सुरक्षा में AI का समावेशन: संदर्भ और महत्व
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है, जिसने नौकरशाही के कामकाज और संचालन के तरीके ही बदल दिए हैं। 2020 के बाद से राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) जैसी एजेंसियां निगरानी, साइबर खुफिया और स्वायत्त रक्षा प्रणालियों में AI को तेजी से अपना रही हैं। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में AI और उभरती तकनीकों के लिए लगभग 13,000 करोड़ रुपये (~1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आवंटन हुआ है, जो इसकी रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है। इस समावेशन के कारण मौजूदा कानूनी ढांचे और संस्थागत क्षमताओं पर सवाल उठ रहे हैं, जिनके सुधार की जरूरत है ताकि AI से जुड़े खतरों और शासन की जटिलताओं को संभाला जा सके।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – रक्षा, साइबर सुरक्षा और कानूनी ढांचे में AI के उपयोग
- GS पेपर 2: राजनीति और शासन – राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान और कानून
- निबंध: राष्ट्रीय सुरक्षा में AI के नैतिक और रणनीतिक पहलू
राष्ट्रीय सुरक्षा में AI के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा
भारतीय संविधान का Article 246 संसद को संघ सूची के तहत रक्षा और सुरक्षा से संबंधित कानून बनाने का विशेष अधिकार देता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 AI-सक्षम साइबर अपराधों से जुड़े प्रावधान प्रदान करता है, जैसे कि सेक्शन 66A (जो अब निरस्त है, लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है) और सेक्शन 70B, जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए साइबर सुरक्षा नियम लागू करता है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013 साइबर रक्षा के लिए रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित करती है, हालांकि यह AI के वर्तमान स्तर से पहले बनी है।
भारत रक्षा अधिनियम, 1962 सुरक्षा से जुड़ी आपातकालीन शक्तियां देता है, जो AI आधारित निगरानी और संचालन नियंत्रण के लिए लागू हो सकती हैं। अधिकारिक रहस्य अधिनियम, 1923 रक्षा खुफिया में गोपनीयता बनाए रखने का प्रावधान करता है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले, विशेषकर Justice K.S. Puttaswamy (Retd.) बनाम भारत संघ (2017), ने गोपनीयता के अधिकार को स्थापित किया है, जो AI निगरानी और डेटा संग्रहण पर संवैधानिक सीमाएं लगाता है।
- Article 246: रक्षा और सुरक्षा कानून बनाने के लिए संसद को संघ सूची में विशेष अधिकार
- IT Act के सेक्शन 66A (निरस्त) और 70B (साइबर सुरक्षा कर्तव्य)
- राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013: साइबर रक्षा के लिए रणनीतिक ढांचा
- भारत रक्षा अधिनियम, 1962: सुरक्षा उपायों के लिए आपातकालीन शक्तियां
- अधिकारिक रहस्य अधिनियम, 1923: रक्षा खुफिया में गोपनीयता
- सुप्रीम कोर्ट (पुत्तस्वामी, 2017): AI निगरानी पर गोपनीयता का संवैधानिक अधिकार
राष्ट्रीय सुरक्षा में AI के लिए संस्थागत संरचना
प्रमुख तकनीकी खुफिया एजेंसी NTRO ने 2021 से 2023 के बीच AI आधारित निगरानी को 45% तक बढ़ाया है, जिसमें मशीन लर्निंग का उपयोग सिग्नल इंटरसेप्शन और साइबर खतरे पहचान में किया जा रहा है। DRDO AI आधारित रक्षा अनुसंधान में अग्रणी है, जिसका बजट 2021 में 4,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023 में 5,400 करोड़ रुपये हो गया है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक (NCSC) मंत्रालयों में AI आधारित साइबर रक्षा रणनीतियों का समन्वय करता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) AI नीति के ढांचे बनाता है, जबकि डाटा सुरक्षा परिषद भारत (DSCI) साइबर सुरक्षा मानकों को बढ़ावा देता है। भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) साइबर खतरे का मुकाबला करती है और रिपोर्ट करती है कि 2023 में सरकारी एजेंसियों पर 70% से अधिक साइबर हमले AI-सक्षम मैलवेयर के कारण हुए। भारत में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में लगभग 2 लाख पेशेवरों की कमी है, जबकि मांग 5 लाख के आसपास है (NASSCOM, 2023)।
- NTRO: AI आधारित निगरानी और साइबर खुफिया में 45% वृद्धि (2021-23)
- DRDO: AI रक्षा अनुसंधान बजट में 35% की बढ़ोतरी (4,000 करोड़ से 5,400 करोड़)
- NCSC: AI समेकित साइबर रक्षा रणनीतियों का समन्वय
- MeitY: AI नीति निर्माण और शासन
- DSCI: साइबर सुरक्षा मानक निर्धारण
- CERT-In: साइबर खतरे का मुकाबला, AI आधारित मैलवेयर का प्रचलन
- साइबर सुरक्षा क्षेत्र में 3 लाख पेशेवरों की कमी, मांग 5 लाख
राष्ट्रीय सुरक्षा में AI के आर्थिक पहलू
भारत का AI बाजार 2025 तक 7.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 20.2% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है (NASSCOM, 2023)। साइबर सुरक्षा बाजार भी 2025 तक 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक विस्तारित होने की संभावना है (DSCI)। रक्षा मंत्रालय का बड़ा बजट आवंटन AI आधारित रक्षा तकनीकों को रणनीतिक आर्थिक प्राथमिकता देता है।
वैश्विक स्तर पर, 2023 में AI सैन्य खर्च 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें चीन और अमेरिका अग्रणी हैं (SIPRI, 2023)। भारत का निवेश बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक अग्रणी देशों की तुलना में अभी सीमित है और तेजी से विकसित हो रहा है। आर्थिक दृष्टि से यह केवल खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, प्रतिभा विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार तक फैला हुआ है।
- भारत का AI बाजार: 2025 तक 7.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर, CAGR 20.2%
- साइबर सुरक्षा बाजार: 2025 तक 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- रक्षा मंत्रालय AI अनुसंधान बजट: 2023-24 में 13,000 करोड़ रुपये (~1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर)
- वैश्विक AI सैन्य खर्च: 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2023), चीन और अमेरिका अग्रणी
- भारत का AI रक्षा खर्च बढ़ रहा है, लेकिन वैश्विक नेताओं से पीछे
भारत और चीन की तुलना: AI आधारित राष्ट्रीय सुरक्षा
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| रणनीतिक दृष्टिकोण | शुरुआती AI समावेशन, नीति में विखंडन, एजेंसियों के बीच समन्वय में चुनौतियां | सैन्य-नागरिक एकीकरण रणनीति के तहत AI का व्यापक और आक्रामक समावेशन |
| स्वायत्त प्रणालियों की तैनाती | सीमित, DRDO परियोजनाएं बढ़ रही हैं लेकिन धीरे-धीरे | 2020 के बाद से स्वायत्त ड्रोन की तैनाती में 30% की वृद्धि |
| साइबर युद्ध क्षमता | AI आधारित साइबर रक्षा बढ़ रही है; मानव संसाधन की कमी सीमा बन रही है | राज्य समर्थित निवेश के साथ उन्नत AI साइबर युद्ध क्षमता |
| बजट आवंटन | रक्षा में AI अनुसंधान के लिए 13,000 करोड़ रुपये (~1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) (2023-24) | कई गुना अधिक, नागरिक-सैन्य एकीकृत बजट |
| कानूनी ढांचा | विभिन्न और ओवरलैपिंग कानून; AI के लिए विशेष शासन की कमी | केंद्रित नियंत्रण, सीमित पारदर्शिता, मजबूत राज्य निगरानी |
भारत के AI और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में महत्वपूर्ण कमियां
भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए AI का एक समग्र और समन्वित शासन ढांचा नहीं है जो नवाचार, गोपनीयता और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए। IT Act और Official Secrets Act जैसे मौजूदा कानून AI की जटिलताओं को संभालने में अपर्याप्त हैं। NTRO, NCSC, DRDO और MeitY के बीच समन्वयfragmented है और जिम्मेदारियां ओवरलैप होती हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित गोपनीयता सुरक्षा AI निगरानी पर प्रतिबंध लगाती है, लेकिन खुफिया संग्रहण में AI के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समर्पित AI शासन ढांचे का अभाव
- विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच नीति में विखंडन
- अपर्याप्त संस्थागत समन्वय और डेटा साझा करने की कमी
- साइबर सुरक्षा और AI विशेषज्ञता में मानव संसाधन की कमी
- AI निगरानी और गोपनीयता अधिकारों के बीच कानूनी अस्पष्टता
आगे का रास्ता: कानूनी, संस्थागत और रणनीतिक सुधार
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए AI शासन के लिए समर्पित कानून बनाएं जो गोपनीयता, नैतिकता और संचालन की जरूरतों को संतुलित करे।
- केंद्रीकृत AI राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद या कार्यबल के माध्यम से एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करें।
- लक्षित कौशल विकास और सार्वजनिक-निजी साझेदारी के जरिए साइबर सुरक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन बढ़ाएं।
- AI आधारित रक्षा तकनीकों के लिए स्वदेशी अनुसंधान और विकास को वित्तीय समर्थन और स्पष्ट लक्ष्य दें।
- AI से जुड़े खतरे और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए साइबर कानूनों और नीतियों को नियमित रूप से अपडेट करें।
- सुप्रीम कोर्ट की गोपनीयता व्याख्या के अनुरूप नैतिक AI उपयोग के लिए संस्थागत ढांचे बनाएं।
- Article 246 राज्य विधानमंडल को रक्षा में AI के उपयोग पर कानून बनाने का अधिकार देता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में AI संदर्भों में साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने पुत्तस्वामी (2017) में गोपनीयता को मौलिक अधिकार मानते हुए AI निगरानी पर प्रभाव डाला।
- NTRO ने 2021 से 2023 के बीच AI आधारित निगरानी कम की है।
- भारत को साइबर सुरक्षा क्षेत्र में लगभग 3 लाख पेशेवरों की कमी है।
- रक्षा मंत्रालय ने 2023-24 में AI अनुसंधान के लिए 13,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
मुख्य प्रश्न
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेशन से मौजूदा कानूनी और संस्थागत संरचनाओं को किस प्रकार चुनौतियां मिलती हैं? नवाचार के साथ गोपनीयता और नैतिकता के संतुलन के लिए आवश्यक सुधारों का सुझाव दीजिए।
झारखंड एवं JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और राजनीति; पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में बढ़ती डिजिटल बुनियादी संरचना के लिए मजबूत AI आधारित साइबर सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता है ताकि राज्य की संपत्ति और सार्वजनिक डेटा सुरक्षित रह सके।
- मुख्य बिंदु: राज्य स्तर पर AI सुरक्षा क्षमता निर्माण, केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और संवैधानिक गोपनीयता मानदंडों का पालन आवश्यक है।
रक्षा और AI से जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा पर कानून बनाने के लिए संसद को कौन सा संवैधानिक अधिकार प्राप्त है?
भारतीय संविधान का Article 246 संसद को संघ सूची के तहत रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कानून बनाने का विशेष अधिकार देता है, जिसमें AI के उपयोग भी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के Justice K.S. Puttaswamy (2017) फैसले का AI निगरानी पर क्या प्रभाव पड़ा?
इस फैसले ने गोपनीयता को मौलिक अधिकार माना, जिससे AI आधारित निगरानी और डेटा संग्रहण पर संवैधानिक सीमाएं लगाई गईं।
भारत में AI आधारित तकनीकी खुफिया के लिए मुख्य जिम्मेदार एजेंसी कौन सी है?
राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) AI आधारित निगरानी और साइबर खुफिया के लिए प्रमुख एजेंसी है।
2023 तक भारत में साइबर सुरक्षा क्षेत्र में कितनी पेशेवरों की कमी है?
भारत में लगभग 3 लाख साइबर सुरक्षा पेशेवरों की कमी है, जबकि मांग लगभग 5 लाख है (NASSCOM, 2023)।
चीन की सैन्य-नागरिक एकीकरण रणनीति की तुलना में भारत का AI समावेशन राष्ट्रीय सुरक्षा में कैसा है?
चीन की सैन्य-नागरिक एकीकरण रणनीति AI को सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में आक्रामक रूप से जोड़ती है, जिससे स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षमताओं का तेजी से विकास होता है, जबकि भारत का AI समावेशन अभी शुरुआती और विखंडित है।
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