परिचय: EVM की यात्रा की परिभाषा
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) भारत के चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, जिसे पहली बार 1999 में पेश किया गया और 2004 के आम चुनाव तक पूरे देश में लागू कर दिया गया। मतदान केंद्रों से मतगणना केंद्रों तक EVM की यात्रा सुरक्षा, पारदर्शिता और मतदाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए कड़े नियंत्रणों के तहत होती है। यह प्रक्रिया संविधान के प्रावधानों, कानूनों, चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और तकनीकी-भौतिक सुरक्षा उपायों से नियंत्रित होती है। 543 लोकसभा और 4,000 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में 15 लाख से अधिक EVM का सुरक्षित परिवहन और रखरखाव चुनावी निष्पक्षता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: राजनीति और शासन — चुनाव सुधार, ECI के कार्य, संवैधानिक प्रावधान (Article 324)
- GS पेपर 3: आंतरिक सुरक्षा — चुनाव सुरक्षा, शासन में तकनीक
- निबंध: तकनीक और लोकतंत्र — चुनावी पारदर्शिता के उदाहरण के रूप में EVM
EVM संचालन के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा
Article 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव कराने और EVM के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है। Representation of the People Act, 1951 चुनाव के संचालन को नियंत्रित करता है, जिसमें Section 29A मतदान की गोपनीयता का प्रावधान करता है, जिसे EVM डिज़ाइन से सुनिश्चित करते हैं। आयोग के EVM Management Guidelines (2023 संस्करण) में मशीनों के भंडारण, परिवहन, सीलिंग और रखरखाव के नियम विस्तार से बताए गए हैं, जो कड़ी सुरक्षा और चेन-ऑफ-कस्टडी बनाए रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों जैसे PUCL बनाम भारत संघ (2013) ने EVM की तकनीकी विश्वसनीयता को मान्यता दी और VVPAT के यादृच्छिक सत्यापन को सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने के लिए जरूरी ठहराया।
- Article 324: चुनाव आयोग को चुनाव नियंत्रित करने का संवैधानिक अधिकार
- Representation of the People Act, 1951: चुनाव संचालन और मतदान गोपनीयता का कानूनी आधार
- ECI EVM Management Guidelines 2023: संचालन के विस्तृत नियम
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले: तकनीकी वैधता और पारदर्शिता के निर्देश (PUCL बनाम भारत संघ, 2013; SC आदेश 2019)
चुनाव स्थल से मतगणना केंद्र तक संचालन प्रक्रिया
मतदान के बाद, EVM को पोलिंग अधिकारियों और पार्टियों के एजेंटों की मौजूदगी में छेड़छाड़-रोधी कंटेनरों में सील किया जाता है। इन कंटेनरों को सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) या राज्य पुलिस की सशस्त्र सुरक्षा में GPS ट्रैकिंग के साथ ले जाया जाता है। सुरक्षित स्ट्रांगरूम में मशीनों को 24 घंटे निगरानी में रखा जाता है जब तक मतगणना शुरू नहीं हो जाती। अधिकांश क्षेत्रों में ट्रांजिट समय 12 घंटे से कम रहता है, जिससे छेड़छाड़ या नुकसान के खतरे कम हो जाते हैं। मतगणना के दिन, उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीनें खोली जाती हैं और वोट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से गिने जाते हैं, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यादृच्छिक VVPAT काउंटरिंग भी होती है।
- मतदान के तुरंत बाद छेड़छाड़-रोधी कंटेनरों में सीलिंग
- सशस्त्र सुरक्षा और GPS ट्रैकिंग के साथ परिवहन
- CCTV और गार्ड्स के साथ सुरक्षित स्ट्रांगरूम में भंडारण
- पार्टी एजेंट और पर्यवेक्षकों की मौजूदगी से पारदर्शिता
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार विधानसभा क्षेत्र के 5 मशीनों से यादृच्छिक VVPAT काउंटरिंग
EVM प्रबंधन के आर्थिक पहलू
वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में EVM की खरीद, रखरखाव और लॉजिस्टिक्स के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। Bharat Electronics Limited (BEL) और Electronics Corporation of India Limited (ECIL) मुख्य निर्माता हैं, जो भारत के $75 बिलियन इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षेत्र में योगदान देते हैं (India Electronics and Semiconductor Association, 2023)। EVM के इस्तेमाल से कागजी मतपत्रों की तुलना में चुनाव खर्च में 30-40% की बचत होती है क्योंकि प्रिंटिंग, परिवहन और मानव संसाधन की लागत कम हो जाती है। हालांकि, भारत की EVM तकनीक अभी तक वैश्विक बाजार में व्यापक रूप से नहीं फैली है, जबकि ब्राजील जैसे देश खुले स्रोत वाले मतदान मशीनों का निर्यात करते हैं, जो एक बड़ी आर्थिक संभावना है।
- FY 2023-24 में EVM से जुड़ी गतिविधियों के लिए ₹1,000 करोड़ बजट
- BEL और ECIL: घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के प्रमुख निर्माता
- कागजी मतपत्रों की तुलना में 30-40% लागत बचत
- निर्यात बाजार में विस्तार की अपार संभावनाएं
प्रमुख संस्थान और उनका योगदान
चुनाव आयोग (ECI) पूरे देश में EVM तैनाती, सुरक्षा और प्रक्रियाओं का प्रबंधन करता है। BEL और ECIL EVM और VVPAT यूनिट्स का निर्माण करते हैं। Central Forensic Science Laboratory (CFSL) तकनीकी जांच और फोरेंसिक ऑडिट करता है। राज्य चुनाव आयोग राज्य स्तर पर लॉजिस्टिक्स का समन्वय करता है, जबकि CISF और राज्य पुलिस परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
- ECI: समग्र प्रबंधन, नीति और कानूनी अनुपालन
- BEL और ECIL: निर्माण और तकनीकी सहायता
- CFSL: फोरेंसिक जांच और तकनीकी सत्यापन
- राज्य चुनाव आयोग: स्थानीय समन्वय और लॉजिस्टिक्स
- CISF और राज्य पुलिस: परिवहन और भंडारण में सुरक्षा
डेटा और प्रदर्शन संकेतक
2024 तक देशभर में 15 लाख से अधिक EVM तैनात हो चुके हैं (ECI वार्षिक रिपोर्ट 2023-24)। पिछले पांच आम चुनावों में खराबी दर 0.01% से कम रही है, जो उच्च विश्वसनीयता दर्शाती है (ECI तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट)। 90% निर्वाचन क्षेत्रों में ट्रांजिट समय औसतन 12 घंटे से कम है, जिससे जोखिम कम होता है (ECI लॉजिस्टिक्स रिपोर्ट 2023)। 2013 में शुरू हुए VVPAT का 2019 से सार्वभौमिक उपयोग हो रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यादृच्छिक VVPAT स्लिप गिनती की जाती है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
- देशभर में 15 लाख EVM तैनात (2024)
- पिछले पांच चुनावों में खराबी दर 0.01% से कम
- 90% क्षेत्रों में औसत ट्रांजिट समय 12 घंटे से कम
- 2019 से सार्वभौमिक VVPAT उपयोग और यादृच्छिक गिनती
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम अमेरिका के मतदान सिस्टम
| पहलू | भारत (EVM सिस्टम) | अमेरिका (मतदान सिस्टम) |
|---|---|---|
| मतदान तकनीक | इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें VVPAT के साथ | कागजी मतपत्र और DRE मशीनें बिना VVPAT के |
| पारदर्शिता उपाय | सुप्रीम कोर्ट द्वारा यादृच्छिक VVPAT स्लिप गिनती | सीमित कागजी प्रमाण; पुनर्गणना में मैनुअल मतगणना |
| खराबी दर | 0.01% से कम | अधिक खराबी और त्रुटि दर, पुनर्गणना की आवश्यकता |
| पुनर्गणना की आवृत्ति | कम पुनर्गणना, EVM की विश्वसनीयता के कारण | 2020 में 1000 से अधिक पुनर्गणना (US Election Assistance Commission, 2021) |
| लागत प्रभाव | कागजी मतपत्र की तुलना में 30-40% लागत बचत | 2020 में पुनर्गणना की लागत $50 मिलियन से अधिक |
| ऑडिट तंत्र | ECI द्वारा ऑडिट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा VVPAT जांच | राज्य स्तर के अलग-अलग ऑडिट, कोई समान VVPAT अनिवार्यता नहीं |
EVM प्रबंधन में प्रमुख कमियां
तकनीकी और प्रक्रियात्मक सुरक्षा के बावजूद, चुनाव से पहले EVM सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के लिए पूरी तरह स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट का अभाव एक कमजोरी है। EVM का मालिकाना सॉफ्टवेयर पारदर्शिता को सीमित करता है और जनता में संदेह पैदा करता है, जिसके चलते खुले स्रोत सॉफ्टवेयर की मांग बढ़ रही है। ब्राजील जैसे देशों ने खुले स्रोत मतदान सॉफ्टवेयर के ऑडिट को अनिवार्य किया है, जिससे भरोसा बढ़ा है। भारत का मौजूदा मॉडल मुख्य रूप से ECI के आंतरिक ऑडिट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर निर्भर है, लेकिन बाहरी स्वतंत्र प्रमाणन की कमी है, जो चुनावी विश्वास को और मजबूत कर सकता है।
- चुनाव से पहले स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट का अभाव
- मालिकाना सॉफ्टवेयर पारदर्शिता को सीमित करता है
- ब्राजील जैसे देशों में खुले स्रोत ऑडिट अनिवार्य हैं
- गलत सूचना और संदेह से निपटने के लिए पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत
महत्व और आगे की राह
मतदान से मतगणना तक EVM की सुरक्षित और पारदर्शी यात्रा भारत के चुनावी लोकतंत्र की विश्वसनीयता की नींव है। कम खराबी दर और तेज़ ट्रांजिट समय ने लॉजिस्टिक जोखिम कम किए हैं। हालांकि, स्वतंत्र प्रमाणन और खुले स्रोत सॉफ्टवेयर की खोज से पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाया जा सकता है। घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाना और निर्यात के अवसर तलाशना भारत की चुनाव तकनीक में नेतृत्व को मजबूत कर सकता है। ECI, सुरक्षा एजेंसियों और निर्माताओं के बीच समन्वय को और मजबूत करना आवश्यक है ताकि तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया जा सके।
- EVM सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट को संस्थागत बनाना
- पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खुले स्रोत सॉफ्टवेयर मॉडल की खोज
- ECI, सुरक्षा बलों और निर्माताओं के बीच समन्वय को मजबूत करना
- घरेलू निर्माण में निवेश और निर्यात संभावनाओं का विकास
- मतदाताओं में EVM और VVPAT सिस्टम के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए शिक्षा
मतदान से मतगणना तक EVM की यात्रा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- EVM को छेड़छाड़-रोधी सील कंटेनरों में सशस्त्र सुरक्षा और GPS ट्रैकिंग के साथ परिवहन किया जाता है।
- सुप्रीम कोर्ट चुनाव में उपयोग किए गए हर EVM के लिए सभी VVPAT स्लिप की गिनती अनिवार्य करता है।
- Representation of the People Act, 1951 मतदान की गोपनीयता का प्रावधान करता है, जिसे EVM सुनिश्चित करते हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि EVM को छेड़छाड़-रोधी सील कंटेनरों में सशस्त्र सुरक्षा और GPS ट्रैकिंग के तहत ले जाया जाता है (ECI EVM Management Guidelines 2023)। कथन 2 गलत है; सुप्रीम कोर्ट केवल विधानसभा क्षेत्र के 5 EVM से यादृच्छिक VVPAT स्लिप गिनती का आदेश देता है, सभी स्लिप की नहीं। कथन 3 सही है; Representation of the People Act, 1951 की Section 29A मतदान की गोपनीयता का प्रावधान करती है, जिसे EVM डिज़ाइन से सुनिश्चित करते हैं।
EVM निर्माण और आर्थिक प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- Bharat Electronics Limited (BEL) और Electronics Corporation of India Limited (ECIL) भारत में EVM के मुख्य निर्माता हैं।
- EVM के उपयोग से कागजी मतपत्रों की तुलना में चुनाव खर्च में लगभग 50% वृद्धि हुई है।
- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र, जिसमें EVM निर्माण भी शामिल है, $75 बिलियन से अधिक का है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?
उत्तर: (d)
कथन 1 सही है; BEL और ECIL EVM बनाते हैं (ECI वार्षिक रिपोर्ट 2023-24)। कथन 2 गलत है; EVM कागजी मतपत्र की तुलना में 30-40% लागत बचत करता है। कथन 3 सही है; भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र $75 बिलियन से अधिक का है (India Electronics and Semiconductor Association 2023)।
मुख्य प्रश्न
भारत में मतदान से मतगणना तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की यात्रा में लागू प्रक्रियात्मक सुरक्षा और तकनीकी उपायों पर चर्चा करें। ये उपाय चुनावी निष्पक्षता और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित करते हैं? प्रणाली में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सुझाव दें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 — भारतीय संविधान और शासन; पेपर 3 — आंतरिक सुरक्षा
- झारखंड कोण: झारखंड में सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में EVM का उपयोग होता है, राज्य चुनाव आयोग स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा का समन्वय करता है।
- मुख्य बिंदु: उत्तर में ECI की भूमिका, राज्य स्तर समन्वय, जनजातीय और दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा चुनौतियां, तथा EVM पारदर्शिता के महत्व को मतदाता विश्वास के लिए उजागर करें।
चुनाव आयोग को EVM प्रबंधन के लिए कौन से कानूनी प्रावधान अधिकार देते हैं?
भारत के संविधान के Article 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनावों की निगरानी और EVM प्रबंधन का अधिकार प्राप्त है। Representation of the People Act, 1951 चुनाव संचालन का कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिसमें Section 29A मतदान की गोपनीयता सुनिश्चित करता है।
Voter Verifiable Paper Audit Trail (VVPAT) EVM की पारदर्शिता कैसे बढ़ाता है?
2013 में शुरू और 2019 से सार्वभौमिक रूप से इस्तेमाल हो रहे VVPAT से हर वोट के लिए एक पेपर स्लिप निकलती है, जिससे मतदाता यह जांच सकते हैं कि उनका वोट सही दर्ज हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के 5 EVM से यादृच्छिक VVPAT स्लिप गिनती की जाती है, जो इलेक्ट्रॉनिक परिणामों की पुष्टि करती है।
EVM के परिवहन के दौरान भौतिक सुरक्षा के लिए कौन-कौन सी एजेंसियां जिम्मेदार हैं?
सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) और राज्य पुलिस EVM के परिवहन के दौरान सशस्त्र सुरक्षा प्रदान करते हैं। EVM को छेड़छाड़-रोधी सील कंटेनरों में GPS ट्रैकिंग के साथ सुरक्षित रूप से ले जाया जाता है।
वर्तमान EVM ऑडिट प्रणाली में मुख्य कमियां क्या हैं?
भारत में चुनाव से पहले EVM सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के लिए पूरी तरह स्वतंत्र तृतीय पक्ष ऑडिट तंत्र नहीं है। मालिकाना सॉफ्टवेयर पारदर्शिता को सीमित करता है, जिससे जनता में संदेह बढ़ता है और खुले स्रोत सॉफ्टवेयर ऑडिट की मांग होती है।
भारत के EVM सिस्टम की तुलना अमेरिका के मतदान सिस्टम से कैसे की जा सकती है?
भारत में VVPAT के साथ EVM का उपयोग होता है, जिसकी खराबी दर 0.01% से कम है और पुनर्गणना कम होती है। अमेरिका में मुख्यतः कागजी मतपत्र या DRE मशीनें बिना VVPAT के इस्तेमाल होती हैं, जिससे पुनर्गणना अधिक होती है और 2020 में पुनर्गणना की लागत $50 मिलियन से ऊपर रही।