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Governance · Exam Notes

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL): वित्तीय तनावग्रस्त संपत्तियों के समाधान और वसूली में भारत की प्रगति, वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए

1 min read GS Paper II

परिचय: NARCL की स्थापना और उद्देश्य

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) को वित्तीय वर्ष 2024-25 में लागू किया गया ताकि भारत के बैंकिंग क्षेत्र की तनावग्रस्त वित्तीय संपत्तियों को समेकित कर उनका समाधान किया जा सके। यह कंपनी दिवालियापन और दिवाला संहिता, 2016 (IBC) और SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत संचालित होती है और व्यावसायिक बैंकों से बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPA) को खरीदती है। ₹2 लाख करोड़ की तनावग्रस्त संपत्तियों के समेकन और सरकार द्वारा ₹10,000 करोड़ की इक्विटी निवेश के साथ, NARCL का लक्ष्य दो वर्षों में वसूली दर को 15-20% बढ़ाना है, जिससे वित्तीय स्थिरता और क्रेडिट वृद्धि को वित्तीय वर्ष 2025–26 में मजबूती मिलेगी।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (बैंकिंग क्षेत्र सुधार, वित्तीय स्थिरता)
  • GS पेपर 2: शासन (IBC, SARFAESI अधिनियम जैसे कानूनी ढांचे)
  • निबंध: वित्तीय क्षेत्र सुधार और आर्थिक विकास

NARCL का कानूनी और संस्थागत ढांचा

NARCL एक कॉर्पोरेट संस्था के रूप में कंपनियां अधिनियम, 2013 के तहत काम करती है और इसे IBC 2016 तथा SARFAESI अधिनियम, 2002 की प्रावधानों से अधिकार प्राप्त हैं। IBC की धारा 5(20) में ‘वित्तीय संपत्ति’ की परिभाषा दी गई है, जिससे NARCL बैंकों से ऐसी संपत्तियां खरीद सकती है। IBC की धारा 7 के तहत वित्तीय लेनदार दिवालियापन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, जिसे NARCL तनावग्रस्त संपत्तियों को समेकित कर समाधान की प्रक्रिया को तेज करता है। SARFAESI की धारा 3 और 5 एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को बिना अदालत के हस्तक्षेप के सुरक्षा हित लागू करने का अधिकार देती हैं, जिससे वसूली की प्रक्रिया तेज होती है।

  • IBC 2016: दिवालियापन समाधान के लिए समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करता है।
  • SARFAESI अधिनियम: एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को सुरक्षा हित लागू करने और वसूली का अधिकार देता है।
  • कंपनियां अधिनियम, 2013: NARCL की कॉर्पोरेट संरचना और शासन को नियंत्रित करता है।
  • RBI: NARCL के संचालन से जुड़ी वित्तीय स्थिरता की निगरानी करता है।

आर्थिक प्रभाव और वसूली प्रदर्शन के अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक के फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट, जून 2024 के अनुसार देश में सकल NPA कुल अग्रिम का 6.9% है। NARCL द्वारा ₹2 लाख करोड़ की तनावग्रस्त संपत्तियों के समेकन से वसूली दर को वर्तमान 40% से बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2025–26 तक 60% से ऊपर ले जाने का प्रयास है। इससे बैंकों की प्रावधान राशि में ₹30,000 करोड़ की कटौती होगी और बैंकिंग क्रेडिट वृद्धि 1.5-2% तक बढ़ेगी, जैसा कि इकोनॉमिक सर्वे 2024 और RBI मौद्रिक नीति रिपोर्ट, 2024 में अनुमानित है। इंडिया डेट रिजॉल्यूशन कंपनी लिमिटेड (IDRCL) के साथ साझेदारी से सक्रिय संपत्ति प्रबंधन और वसूली प्रक्रिया में तेजी आएगी।

  • दो वर्षों में वसूली दर में 15-20% की तेजी (PIB, 2024)।
  • सरकार द्वारा NARCL में ₹10,000 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी निवेश (संघ बजट 2024-25)।
  • प्रावधान राशि में अनुमानित ₹30,000 करोड़ की कमी।
  • बैलेंस शीट मजबूत होने से 1.5-2% तक क्रेडिट वृद्धि।

तनावग्रस्त संपत्ति प्रणाली में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

NARCL एक केंद्रीय एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी के रूप में काम करती है जो व्यावसायिक बैंकों से तनावग्रस्त संपत्तियों को समेकित करती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इसका नियामक है और वित्तीय स्थिरता की निगरानी करता है। IBC, 2016 कानूनी ढांचा प्रदान करता है जबकि SARFAESI अधिनियम, 2002 एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को सुरक्षा हित लागू करने का अधिकार देता है। IDRCL NARCL का परिचालन भागीदार है जो वसूली और समाधान प्रक्रिया का प्रबंधन करता है। बैंकों से तनावग्रस्त संपत्तियां NARCL को ट्रांसफर होती हैं।

  • NARCL: तनावग्रस्त संपत्तियों का अधिग्रहण और समाधान में सहायता।
  • RBI: बैंकिंग क्षेत्र का नियमन और वित्तीय स्थिरता की निगरानी।
  • IBC, 2016: दिवालियापन और समाधान का कानूनी आधार।
  • SARFAESI अधिनियम, 2002: एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को अधिकार प्रदान करता है।
  • IDRCL: परिचालन भागीदार के रूप में वसूली प्रक्रिया का प्रबंधन।
  • वाणिज्यिक बैंक: तनावग्रस्त संपत्तियों का NARCL को हस्तांतरण।

तुलनात्मक अध्ययन: NARCL और अमेरिकी ट्रबल्ड एसेट रिलीफ प्रोग्राम (TARP)

पहलूNARCL (भारत)TARP (अमेरिका)
शुरुआत का वर्ष2024-252008
मालिकानामिश्रित: सरकारी इक्विटी + निजी क्षेत्र की भागीदारीमुख्य रूप से सरकारी स्वामित्व
संपत्ति का प्रकारबैंकों की तनावग्रस्त वित्तीय संपत्तियांटॉक्सिक संपत्तियां जैसे मॉर्गेज-बैक्ड सिक्योरिटीज
कानूनी ढांचाIBC 2016, SARFAESI अधिनियम 2002, कंपनियां अधिनियम 2013इमरजेंसी इकोनॉमिक स्टेबिलाइजेशन एक्ट 2008
मुख्य उद्देश्यNPA का समेकन और समाधान, वसूली में तेजीटॉक्सिक संपत्तियां खरीदकर बैंकों को स्थिर करना
संचालन मॉडलएसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी और परिचालन भागीदार (IDRCL)सरकार द्वारा सीधे खरीद और प्रबंधन

NARCL के ढांचे में चुनौतियां और कमियां

NARCL के पास संभावनाएं होने के बावजूद समाधान में देरी की वजह से कानूनी अड़चनें जैसे IBC प्रक्रिया में फैसलों में विलंब और अपीलें मुख्य बाधाएं हैं। तनावग्रस्त संपत्ति की बिक्री के लिए सीमित बाजार और मूल्यांकन में अंतर भी हस्तांतरण प्रक्रिया को धीमा करते हैं। इन कारणों से केवल संपत्ति समेकन से वसूली में तेजी सुनिश्चित नहीं होती, इसलिए दिवालियापन निर्णय प्रक्रिया और द्वितीयक बाजार के सुधार जरूरी हैं।

  • IBC से जुड़ी देरी और मुकदमेबाजी समाधान को धीमा करती है।
  • तनावग्रस्त संपत्तियों के लिए सीमित खरीदार और बाजार की गहराई।
  • बैंकों और निवेशकों के बीच मूल्यांकन में अंतर।
  • NARCL, IDRCL और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता।

महत्त्व और आगे का रास्ता

NARCL की स्थापना भारत के तनावग्रस्त संपत्ति समाधान तंत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो बड़े पैमाने पर समेकन और केंद्रित वसूली प्रयासों को सक्षम बनाता है। प्रभाव को अधिकतम करने के लिए IBC की प्रक्रियाओं में तेजी और तनावग्रस्त संपत्तियों के लिए मजबूत द्वितीयक बाजार विकसित करना आवश्यक है। संपत्ति मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाना और IDRCL की परिचालन क्षमता मजबूत करना वसूली को और तेज करेगा। निरंतर सरकारी समर्थन और नियामक निगरानी NARCL की सफलता के लिए जरूरी हैं ताकि वित्तीय वर्ष 2025–26 और उसके बाद बैंकिंग बैलेंस शीट मजबूत हों और क्रेडिट वृद्धि को बढ़ावा मिले।

  • IBC निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाकर समाधान समय कम करें।
  • तनावग्रस्त संपत्तियों के लिए द्वितीयक बाजार विकसित करें ताकि तरलता बढ़े।
  • मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाकर विवाद कम करें।
  • IDRCL की संपत्ति प्रबंधन क्षमता को मजबूत करें।
  • वित्तीय स्थिरता के लिए सरकार और RBI की निगरानी जारी रखें।

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. NARCL SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत काम करती है, जो इसे बिना अदालत के हस्तक्षेप के सुरक्षा हित लागू करने की अनुमति देता है।
  2. NARCL पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन में है।
  3. दिवालियापन और दिवाला संहिता, 2016 NARCL द्वारा अधिग्रहित वित्तीय संपत्तियों के दायरे को परिभाषित करती है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि SARFAESI अधिनियम NARCL जैसी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को बिना अदालत के सुरक्षा लागू करने का अधिकार देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि NARCL का स्वामित्व मॉडल मिश्रित है जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी है। कथन 3 सही है क्योंकि IBC की धारा 5(20) में ‘वित्तीय संपत्ति’ की परिभाषा दी गई है जो NARCL के अधिग्रहण से संबंधित है।

भारत में तनावग्रस्त संपत्ति समाधान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. दिवालियापन और दिवाला संहिता, 2016, दिवालियापन मामलों के लिए अधिकतम 270 दिनों की समाधान समय सीमा निर्धारित करती है।
  2. SARFAESI अधिनियम, 2002, एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को उधारकर्ता की सहमति के बिना सुरक्षित संपत्तियों का कब्जा लेने की अनुमति देता है।
  3. NARCL सीधे बैंकों में पूंजी निवेश करता है ताकि NPA कम हो सकें।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि IBC में 270 दिन की समय सीमा निर्धारित है। कथन 2 भी सही है क्योंकि SARFAESI अधिनियम एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को उधारकर्ता की सहमति के बिना सुरक्षा हित लागू करने की अनुमति देता है। कथन 3 गलत है क्योंकि NARCL तनावग्रस्त संपत्तियों को खरीदता है लेकिन सीधे बैंकों में पूंजी निवेश नहीं करता।

मुख्य प्रश्न

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) की स्थापना भारत के तनावग्रस्त संपत्ति समाधान ढांचे को कैसे बदलने की उम्मीद है? वित्तीय स्थिरता और वित्तीय वर्ष 2025–26 में क्रेडिट वृद्धि पर इसके प्रभावों पर चर्चा करें। NARCL को अपने उद्देश्यों को पूरा करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इसका समालोचनात्मक विश्लेषण करें।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और शासन) – बैंकिंग क्षेत्र सुधार और वित्तीय स्थिरता
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के क्षेत्रीय और सहकारी बैंक तनावग्रस्त संपत्तियों से जूझ रहे हैं; NARCL का ढांचा राज्य के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों के लिए क्रेडिट उपलब्धता को बेहतर बना सकता है।
  • मुख्य बिंदु: NARCL की भूमिका पर जोर दें जो झारखंड के प्रमुख क्षेत्रों में NPA समाधान के माध्यम से क्रेडिट प्रवाह सुधारती है, और राज्य स्तर पर केंद्रीय तंत्र के साथ समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करें।
NARCL का मुख्य कार्य क्या है?

NARCL व्यावसायिक बैंकों से तनावग्रस्त वित्तीय संपत्तियों को खरीदकर उन्हें समेकित करती है ताकि गैर-निष्पादित संपत्तियों के तेज समाधान और वसूली को संभव बनाया जा सके, जिससे बैंकों के बैलेंस शीट सुधरें और क्रेडिट प्रवाह बढ़े।

NARCL किन कानूनी प्रावधानों के तहत काम करती है?

NARCL कंपनियां अधिनियम, 2013 के तहत संचालित होती है और इसे दिवालियापन और दिवाला संहिता, 2016 (IBC) तथा SARFAESI अधिनियम, 2002 द्वारा अधिग्रहण और प्रवर्तन के लिए कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।

NARCL पारंपरिक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों से कैसे अलग है?

पारंपरिक ARCs के विपरीत, NARCL एक केंद्रीय एजेंसी है जिसमें सरकारी इक्विटी भागीदारी है और इसका बड़ा अधिग्रहण लक्ष्य है, जिसे परिचालन में IDRCL का समर्थन प्राप्त है, जो बैंकों के तनावग्रस्त संपत्ति समाधान पर केंद्रित है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 में NARCL के संचालन से अनुमानित आर्थिक लाभ क्या हैं?

NARCL वसूली दर को 40% से बढ़ाकर 60% से ऊपर ले जाने, ₹30,000 करोड़ की प्रावधान राशि घटाने और बैंकिंग क्रेडिट वृद्धि को 1.5-2% तक बढ़ाने की उम्मीद रखती है, जिससे वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी।

NARCL की प्रभावशीलता में कौन-सी चुनौतियां बाधा डाल सकती हैं?

IBC प्रक्रिया में देरी, तनावग्रस्त संपत्तियों के लिए सीमित बाजार तरलता, मूल्यांकन में असमानताएं और बैंकों, NARCL तथा परिचालन भागीदारों के बीच समन्वय की कमी प्रमुख चुनौतियां हैं।

Sources and further reading

Tags:Governance