Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Answer Writing Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu
Home Current Affairs All Articles
UPSC
UPSC NOTES
STATE PSC
OPTIONAL SUBJECTS
CURRENT AFFAIRS
DAILY EDITORIAL
COURSES
DOWNLOAD NOTES
PYQ Papers Mains Answer Writing WhatsApp Counselling Call +91 91025 57680 Online Courses

Post

दसवीं भारत-कैनीया संयुक्त व्यापार समिति की बैठक: द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना

दसवीं भारत-कैनीया संयुक्त व्यापार समिति की बैठक का परिचय

2024 की शुरुआत में नैरोबी में दसवीं भारत-कैनीया संयुक्त व्यापार समिति की बैठक हुई, जिसमें भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और कैनीया के वाणिज्य एवं औद्योगिकीकरण मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। यह एक संस्थागत मंच है जो द्विपक्षीय व्यापार के मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देता है, आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और व्यापार असंतुलन को दूर करने का लक्ष्य रखता है। बैठक में बाजार पहुंच बढ़ाने, विभिन्न क्षेत्रों में पूरकता को प्रोत्साहित करने और अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20% बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत की विदेश नीति, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार संबंध
  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – विदेशी व्यापार और निवेश
  • निबंध: भारत-अफ्रीका संबंध और आर्थिक कूटनीति

भारत-कैनीया व्यापार के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत और कैनीया के बीच व्यापार सहयोग विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होता है, खासकर इसके सेक्शन 3 और 4, जो सरकार को नीति उपायों और समझौतों के माध्यम से विदेशी व्यापार को नियंत्रित और बढ़ावा देने का अधिकार देते हैं। भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 द्विपक्षीय समझौतों और व्यापार सहयोग से उत्पन्न अनुबंधों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

कैनीया की ओर से पूर्वी अफ्रीकी समुदाय कस्टम प्रबंधन अधिनियम, 2004 पूर्वी अफ्रीकी समुदाय (EAC) के भीतर व्यापार को नियंत्रित करता है, जो शुल्क संरचनाओं, कस्टम प्रक्रियाओं और गैर-शुल्क बाधाओं को प्रभावित करता है। कैनीया की EAC सदस्यता उसके व्यापार नीतियों और क्षेत्रीय व्यापार समन्वय पर प्रभाव डालती है, जो भारत के साथ उसके व्यापार संबंधों को आकार देती है।

  • भारत की व्यापार नीति वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा केंद्रीकृत रूप से समन्वित होती है और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (EXIM Bank) द्वारा व्यापार और निवेश परियोजनाओं के वित्तपोषण में सहायता मिलती है।
  • कैनीया में व्यापार संवर्धन का नेतृत्व वाणिज्य और औद्योगिकीकरण मंत्रालय और कैनीया एक्सपोर्ट प्रमोशन एंड ब्रांडिंग एजेंसी (KEPROBA) करती है।
  • भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) कूटनीतिक संपर्क और व्यापार वार्ताओं को सुविधाजनक बनाता है।
  • पूर्वी अफ्रीकी समुदाय (EAC) एक क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉक के रूप में कैनीया की बाहरी व्यापार नीतियों को प्रभावित करता है।

आर्थिक प्रोफाइल और व्यापार संरचना

2023 में भारत-कैनीया द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत कैनीया का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है (भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय; कैनीया के वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। भारत से कैनीया को निर्यात में मुख्य रूप से दवाइयां, मशीनरी, वाहन और विनिर्मित वस्तुएं शामिल हैं। वहीं, कैनीया से भारत को निर्यात मुख्यतः कृषि उत्पाद जैसे चाय, कॉफी और बागवानी उत्पाद हैं।

विश्व बैंक के अनुसार 2023 में कैनीया की GDP 5.7% बढ़ी, जबकि IMF के विश्व आर्थिक पूर्वानुमान के मुताबिक भारत की GDP वृद्धि 6.1% रही। भारत ने अपने 2023-24 के बजट में अफ्रीका के साथ व्यापार संबंध बढ़ाने के लिए 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान किया है (MEA वार्षिक रिपोर्ट), जो महाद्वीप की रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।

पहलू भारत-कैनीया व्यापार भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार
व्यापार मात्रा (2023) 2.5 बिलियन USD 8.5 बिलियन USD
कैनीया के मुख्य निर्यात चाय, कॉफी, बागवानी उत्पाद खनिज, कीमती धातुएं
भारत के मुख्य निर्यात दवाइयां, मशीनरी, वाहन औद्योगिक वस्तुएं, मशीनरी
क्षेत्रीय ताकत कृषि, वस्त्र, उभरती प्रौद्योगिकी खनन, विनिर्माण
व्यापार वृद्धि लक्ष्य 3 वर्षों में 20% वृद्धि उच्च आधार, विविध क्षेत्र

संरचनात्मक चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतर

व्यापार मात्रा बढ़ने के बावजूद, कैनीया को अपनी निर्यात वस्तुओं में मूल्य संवर्धन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में संरचनात्मक सीमाओं का सामना करना पड़ता है। कैनीया के निर्यात मुख्य रूप से कच्चे या अर्ध-प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद हैं, जिससे वह मूल्य श्रृंखला में ऊपर नहीं चढ़ पाता और स्थायी आर्थिक विकास में बाधा आती है। यह अंतर कैनीया के निर्यात को पारंपरिक वस्तुओं से परे विविधीकृत करने में भी रुकावट डालता है।

भारत के उन्नत विनिर्माण और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र प्रौद्योगिकी सहयोग के अवसर प्रदान करते हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों के लिए संस्थागत व्यवस्था पर्याप्त रूप से उपयोग में नहीं लाई जा रही। इन खामियों को दूर करने के लिए नीति आधारित उपायों और क्षमता निर्माण में सहयोग जरूरी है।

  • कैनीया की उच्च मूल्य वाली विनिर्माण और सेवा निर्यात में सीमित भागीदारी।
  • संयुक्त उद्यम और प्रौद्योगिकी साझेदारी का अपर्याप्त विकास।
  • कैनीया के निर्यात पर गैर-शुल्क बाधाएं और नियामक चुनौतियां।
  • व्यापार लागत कम करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता।

महत्व और आगे का रास्ता

दसवीं संयुक्त व्यापार समिति की बैठक ने कृषि, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आपसी पूरकता का लाभ उठाकर कैनीया के साथ आर्थिक संबंध गहरे करने की भारत की रणनीतिक मंशा को स्पष्ट किया है। 20% व्यापार वृद्धि के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मूल्य संवर्धन की खामियों को दूर करना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

  • फार्मास्यूटिकल और कृषि प्रसंस्करण में प्रौद्योगिकी साझा करने और संयुक्त उद्यमों के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना।
  • कैनीया के निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार मानकों को पूरा करने हेतु क्षमता निर्माण कार्यक्रम बढ़ाना।
  • EAC कस्टम प्रबंधन अधिनियम के तहत कस्टम और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  • भारत के 150 मिलियन USD अफ्रीका व्यापार संवर्धन बजट का उपयोग बुनियादी ढांचे और व्यापार सुविधा परियोजनाओं के लिए करना।
  • कैनीया के निर्यात को विनिर्मित और प्रसंस्कृत वस्तुओं की ओर विविधीकृत करने को बढ़ावा देना।

इन पहलुओं को मजबूत करने से न केवल द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, बल्कि कैनीया के सतत आर्थिक विकास और भारत की अफ्रीका के साथ व्यापक रणनीति को भी बल मिलेगा।

भारत-कैनीया संयुक्त व्यापार समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह व्यापार को बढ़ावा देने और व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय संस्थागत व्यवस्था है।
  2. यह समिति विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होती है।
  3. कैनीया की व्यापार नीतियां केवल भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 के तहत संचालित होती हैं।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि संयुक्त व्यापार समिति व्यापार संवर्धन के लिए द्विपक्षीय मंच है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारत का व्यापार सहयोग विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि कैनीया की व्यापार नीतियां भारतीय अनुबंध अधिनियम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूर्वी अफ्रीकी समुदाय कस्टम प्रबंधन अधिनियम, 2004 का भी प्रभाव होता है।

भारत-कैनीया द्विपक्षीय व्यापार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. 2023 में भारत कैनीया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  2. कैनीया मुख्य रूप से भारत को चाय और कॉफी जैसे कृषि उत्पाद निर्यात करता है।
  3. 2023-24 में भारत ने अफ्रीका व्यापार संवर्धन के लिए 150 मिलियन USD का बजट आवंटित किया।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 2, 3 और 1 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि भारत कैनीया का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, सबसे बड़ा नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि कैनीया मुख्य रूप से चाय और कॉफी जैसे कृषि उत्पाद भारत को निर्यात करता है और भारत ने 2023-24 में अफ्रीका के लिए 150 मिलियन USD का बजट रखा है।

मेन्स प्रश्न

भारत-कैनीया संयुक्त व्यापार समिति की द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में भूमिका की समीक्षा करें। प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें और दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध सुधारने के लिए उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध; GS पेपर 3 – आर्थिक विकास और व्यापार
  • झारखंड का पहलू: झारखंड के खनिज और कृषि उत्पाद अफ्रीकी बाजारों जैसे कैनीया के साथ बेहतर व्यापार संबंध से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मेन्स पॉइंटर: उत्तर में संयुक्त व्यापार समितियों जैसे संस्थागत तंत्र, व्यापार विविधीकरण के अवसर और राज्य स्तर के निर्यात संभावनाओं को शामिल करें।
भारत-कैनीया संयुक्त व्यापार समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है, जिसमें व्यापार बाधाओं को दूर करना, बाजार पहुंच को बढ़ाना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।

भारत-कैनीया व्यापार सहयोग किस भारतीय कानून के तहत संचालित होता है?

यह विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होता है, विशेषकर इसके सेक्शन 3 और 4 के तहत, जो सरकार को विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने का अधिकार देते हैं।

कैनीया मुख्य रूप से भारत को कौन-कौन से वस्तुएं निर्यात करता है?

कैनीया मुख्यतः चाय, कॉफी और बागवानी उत्पाद भारत को निर्यात करता है।

पूर्वी अफ्रीकी समुदाय कस्टम प्रबंधन अधिनियम, 2004 भारत-कैनीया व्यापार को कैसे प्रभावित करता है?

यह अधिनियम पूर्वी अफ्रीकी समुदाय के भीतर कस्टम प्रक्रियाओं और व्यापार नीतियों को नियंत्रित करता है, जिससे कैनीया के व्यापार माहौल और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार पर प्रभाव पड़ता है।

अगले तीन वर्षों में भारत-कैनीया द्विपक्षीय व्यापार के लिए लक्ष्यित वृद्धि दर क्या है?

दसवीं संयुक्त व्यापार समिति की बैठक में तय लक्ष्य अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20% बढ़ाना है।

Call WhatsApp Join Batch Download Syllabus