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IN–SLN DIVEX 2026: भारत-श्रीलंका समुद्री रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा

IN–SLN DIVEX 2026 का परिचय

IN–SLN DIVEX 2026 एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जो 2026 में बंगाल की खाड़ी में भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं के बीच आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री अवरोधन संचालन है, जिसमें लाइव फायरिंग, खोज और बचाव अभियान और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के सिमुलेशन शामिल हैं (Press Information Bureau, 2024)। 2000 से अब तक भारत और श्रीलंका ने 15 से अधिक ऐसे द्विपक्षीय अभ्यास किए हैं, जो दोनों नौसेनाओं की तालमेल क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित हुए हैं (Indian Navy Annual Report 2023)। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री रक्षा सहयोग को गहरा करने का प्रतीक है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना में योगदान देता है।

UPSC से संबंधित

  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां, द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा रणनीति
  • GS पेपर 2: भारत के दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ विदेश संबंध, रक्षा कूटनीति
  • निबंध: भारत की इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में भूमिका

IN–SLN DIVEX के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

यह अभ्यास रक्षा अधिनियम, 1962 और भारतीय नौसेना अधिनियम, 1957 के तहत संचालित होता है, जो नौसैनिक संचालन और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को नियंत्रित करते हैं। यह भारत-श्रीलंका रक्षा सहयोग समझौता (2000) के नीति ढांचे के अनुरूप है, जो द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को संस्थागत बनाता है। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) भारत की सशस्त्र सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन और तालमेल सुनिश्चित करता है, ताकि अभ्यास के दौरान कानूनी और परिचालन मानकों का पालन हो सके।

  • रक्षा अधिनियम, 1962: रक्षा तैयारी और सहयोग के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।
  • भारतीय नौसेना अधिनियम, 1957: नौसेना कर्मियों, संचालन और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों को नियंत्रित करता है।
  • रक्षा सहयोग समझौता (2000): भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का ढांचा।
  • भारतीय समुद्री सिद्धांत (2015): नौसैनिक संचालन और संयुक्त अभ्यासों के लिए मार्गदर्शक।

अभ्यास के आर्थिक पहलू

भारत के केंद्रीय बजट 2023-24 में नौसेना आधुनिकीकरण के लिए ₹1.40 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो समुद्री सुरक्षा में रणनीतिक निवेश दर्शाता है। इसके विपरीत, श्रीलंका का रक्षा बजट 2022 में अपने GDP का लगभग 2.5% था (SIPRI), जो स्वतंत्र क्षमता विकास के लिए सीमित संसाधन दिखाता है। ऐसे संयुक्त अभ्यास श्रीलंका के लिए भारत के उन्नत नौसैनिक संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने का अवसर हैं, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और क्षमता निर्माण संभव हो पाता है।

  • भारत का नौसैनिक बजट 150 से अधिक जहाजों और पनडुब्बियों की खरीद का समर्थन करता है (SIPRI 2023)।
  • श्रीलंका नौसेना के पास लगभग 40 जहाज हैं, जो बजट की सीमाओं में कार्यरत हैं।
  • भारत का समुद्री व्यापार कुल व्यापार का 90% से अधिक है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023), जो समुद्री मार्गों की सुरक्षा की आर्थिक आवश्यकता को दर्शाता है।
  • श्रीलंका का EEZ 517,000 वर्ग किलोमीटर है, जिसके लिए मजबूत समुद्री सुरक्षा सहयोग जरूरी है (UNCLOS)।

संस्थागत भूमिकाएं IN–SLN DIVEX 2026 में

भारतीय नौसेना संचालन की योजना बनाने और क्रियान्वयन की अगुवाई करती है, जिसमें उन्नत प्लेटफॉर्म और कर्मी तैनात होते हैं। श्रीलंका नौसेना सक्रिय भागीदारी निभाती है, जिससे उसे संचालनात्मक अनुभव और तालमेल कौशल विकसित करने का मौका मिलता है। भारत का रक्षा मंत्रालय नीति निर्धारण और द्विपक्षीय समन्वय का प्रबंधन करता है। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) संयुक्त संचालन की संगति और सेवाओं के बीच संचार सुनिश्चित करता है। ये संस्थान मिलकर अभ्यास के रणनीतिक और परिचालनात्मक लक्ष्यों को पूरा करते हैं।

  • भारतीय नौसेना: समुद्री युद्ध संचालन और संयुक्त अभ्यासों का नेतृत्व।
  • श्रीलंका नौसेना: क्षमता निर्माण और तालमेल विकास में सक्रिय।
  • रक्षा मंत्रालय (भारत): नीति निगरानी और कूटनीतिक समन्वय।
  • इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ: संयुक्त संचालन और तालमेल बढ़ाने की सुविधा।

रणनीतिक और परिचालन महत्व

IN–SLN DIVEX 2026 बंगाल की खाड़ी में द्विपक्षीय विश्वास और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता को मजबूत करता है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पनडुब्बी रोधी युद्ध पर ध्यान उभरते जलमग्न खतरों का मुकाबला करता है, जबकि समुद्री अवरोधन अभियानों से समुद्री डाकू और तस्करी रोकने की क्षमता बढ़ती है। यह अभ्यास भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा भागीदारी के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जो उसकी व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति के अनुरूप है।

  • असमान समुद्री खतरों के खिलाफ संयुक्त परिचालन तत्परता बढ़ाता है।
  • खुफिया साझा करने और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता में सुधार करता है।
  • भारत के सुरक्षित और स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
  • संसाधन सीमित श्रीलंका की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देता है।

तुलनात्मक अध्ययन: IN–SLN DIVEX बनाम US-जापान मलबार अभ्यास

पहलू IN–SLN DIVEX US-जापान मलबार अभ्यास
भागीदार भारत और श्रीलंका (द्विपक्षीय) प्रारंभ में अमेरिका और जापान; अब ऑस्ट्रेलिया और भारत समेत त्रिपक्षीय
केन्द्रित क्षेत्र पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री अवरोधन, खोज और बचाव कैरियर स्ट्राइक समूह संचालन, पनडुब्बी रोधी युद्ध, मिसाइल रक्षा
रणनीतिक उद्देश्य क्षेत्रीय विश्वास निर्माण और दक्षिण एशियाई समुद्री सुरक्षा शक्ति प्रदर्शन और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा संरचना
कमांड संरचना कोई औपचारिक संयुक्त कमांड या स्थायी टास्क फोर्स नहीं संरचित त्रिपक्षीय कमांड के साथ एकीकृत टास्क समूह
आयाम मध्यम, तालमेल और क्षमता निर्माण पर केंद्रित बड़ा पैमाना, कई कैरियर स्ट्राइक समूह और उन्नत प्लेटफॉर्म शामिल

भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग में चुनौतियां

बार-बार अभ्यास के बावजूद भारत और श्रीलंका के बीच कोई स्थायी संयुक्त कमांड संरचना या स्थायी समुद्री टास्क फोर्स नहीं है। इससे संकट के समय तेज़ समन्वय में बाधा आती है और संयुक्त प्रतिक्रिया की प्रभावशीलता कम हो जाती है। इसके अलावा, श्रीलंका की संसाधन सीमाएं निरंतर क्षमता विकास को रोकती हैं, इसलिए अधिक संस्थागत क्षमता निर्माण की जरूरत है।

  • स्थायी संयुक्त कमांड की कमी से संकट प्रतिक्रिया में देरी।
  • संसाधन असमानता से संतुलित परिचालन तत्परता प्रभावित।
  • औपचारिक संचार प्रोटोकॉल और साझा खुफिया ढांचे की आवश्यकता।
  • अभ्यास से आगे बढ़कर वास्तविक समय संयुक्त गश्त का विस्तार संभव।

आगे का रास्ता: IN–SLN समुद्री सहयोग को मजबूत करना

  • तेज़ संकट प्रतिक्रिया के लिए औपचारिक संयुक्त समुद्री कमांड या टास्क फोर्स की स्थापना।
  • नियमित खुफिया साझा करने और संयुक्त समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहलों को संस्थागत बनाना।
  • अभ्यास के दायरे में साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध को शामिल करना।
  • भारत के नौसैनिक आधुनिकीकरण का उपयोग करते हुए श्रीलंका को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • IN–SLN सहयोग को व्यापक इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करना, लेकिन द्विपक्षीय फोकस बनाए रखना।

IN–SLN DIVEX 2026 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. IN–SLN DIVEX 2026 एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है जिसमें भारत, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
  2. यह अभ्यास पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री अवरोधन संचालन पर केंद्रित है।
  3. भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग समझौता 2000 में हुआ था।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि IN–SLN DIVEX द्विपक्षीय अभ्यास है जिसमें केवल भारत और श्रीलंका शामिल हैं, ऑस्ट्रेलिया नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि यह अभ्यास पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री अवरोधन पर केंद्रित है और रक्षा सहयोग समझौता 2000 में हुआ था।

भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारत का समुद्री व्यापार कुल व्यापार का 50% से कम है।
  2. IN–SLN DIVEX बंगाल की खाड़ी में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने में योगदान देता है।
  3. भारतीय नौसेना के जहाजों की संख्या श्रीलंका नौसेना से कम है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 3
  • (d) केवल 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि भारत का 90% से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। कथन 2 सही है क्योंकि IN–SLN DIVEX बंगाल की खाड़ी में समुद्री जागरूकता बढ़ाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारतीय नौसेना के पास श्रीलंका से अधिक, 150 से अधिक जहाज हैं।

मुख्य प्रश्न

विवेचना करें कि IN–SLN DIVEX 2026 अभ्यास कैसे भारत की दक्षिण एशिया में समुद्री सुरक्षा सहयोग की रणनीति को दर्शाता है। इस द्विपक्षीय संबंध के कानूनी ढांचे और आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण करें तथा परिचालन समन्वय में मौजूद खामियों को दूर करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC से संबंधित

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
  • झारखंड का नजरिया: यद्यपि झारखंड समुद्री सीमा से दूर है, इसके औद्योगिक क्षेत्र समुद्री व्यापार मार्गों पर निर्भर हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के नौसैनिक अभियानों और IN–SLN DIVEX जैसे अभ्यासों से सुनिश्चित होती है।
  • मुख्य बिंदु: भारत की क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा भूमिका को राष्ट्रीय आर्थिक हितों से जोड़ते हुए उत्तर तैयार करें, जो झारखंड के व्यापार और औद्योगिक विकास से संबंधित हो।
IN–SLN DIVEX 2026 का मुख्य फोकस क्या है?

IN–SLN DIVEX 2026 मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री अवरोधन संचालन पर केंद्रित है, जिसमें लाइव फायरिंग, खोज और बचाव, तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के सिमुलेशन शामिल हैं (PIB, 2024)।

IN–SLN DIVEX किस कानूनी ढांचे के तहत होता है?

यह अभ्यास रक्षा अधिनियम, 1962, भारतीय नौसेना अधिनियम, 1957, और भारत-श्रीलंका के बीच 2000 में हुए रक्षा सहयोग समझौते के तहत संचालित होता है।

IN–SLN DIVEX 2026 क्षेत्रीय सुरक्षा में कैसे योगदान देता है?

यह द्विपक्षीय नौसेना तालमेल, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और बंगाल की खाड़ी में असमान समुद्री खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाता है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होती है।

अभ्यास में आर्थिक असमानताएं कैसे प्रभाव डालती हैं?

भारत का ₹1.40 लाख करोड़ नौसैनिक बजट और श्रीलंका का GDP का 2.5% रक्षा व्यय (SIPRI, 2023) के बीच बड़ा अंतर है, जो श्रीलंका के लिए संयुक्त अभ्यासों को क्षमता विकास के लिए जरूरी बनाता है।

IN–SLN DIVEX मलबार अभ्यास से कैसे अलग है?

IN–SLN DIVEX द्विपक्षीय अभ्यास है जो दक्षिण एशियाई समुद्री सुरक्षा और विश्वास निर्माण पर केंद्रित है, जबकि मलबार एक बड़ा बहुपक्षीय अभ्यास है जिसमें शक्ति प्रदर्शन और त्रिपक्षीय कमांड संरचना शामिल है।

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