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Jharkhand Society, Tribes & Culture · Exam Notes

गिरिडीह जिला: पारसनाथ पर्वत और जैन विरासत — भूगोल, संस्कृति और सतत विकास

1 min read GS Paper II

गिरिडीह जिला और पारसनाथ पर्वत का परिचय

झारखंड के उत्तरी भाग में स्थित गिरिडीह जिला लगभग 4,861 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसकी जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 24,45,474 है। यह जिला पारसनाथ पर्वत के लिए प्रसिद्ध है, जो झारखंड की सबसे ऊंची चोटी है और समुद्र तल से 1,365 मीटर ऊंचाई पर स्थित है (Survey of India, 2023)। पारसनाथ पर्वत जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, जहां हर साल लगभग 2,00,000 तीर्थयात्री आते हैं, जो कुल पर्यटकों का 60% हिस्सा है (झारखंड टूरिज्म विभाग, 2023)। इस पर्वत की धार्मिक महत्ता जैन धर्म से जुड़ी है क्योंकि माना जाता है कि 24 तीर्थंकरों में से 20 ने यहीं मोक्ष प्राप्त किया, जिससे यह भारत के सबसे पवित्र जैन स्थलों में से एक बन गया है।

JPSC से प्रासंगिकता

  • Mains पेपर 3: भूगोल – झारखंड की स्थलाकृति और सांस्कृतिक स्थल
  • Mains पेपर 6: पर्यावरण और पारिस्थितिकी – प्राकृतिक विरासत स्थलों का संरक्षण (Article 48A के तहत)

भूगोल और पर्यावरणीय संदर्भ

पारसनाथ पर्वत छोटा नागपुर पठार का हिस्सा है और घने वनस्पति आवरण तथा जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 18 और 29 के तहत संरक्षित है, जो वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए गतिविधियों को नियंत्रित करता है। झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड (JSBB) इस क्षेत्र की पारिस्थितिकीय स्थिरता पर नजर रखता है, खासकर खनन और पर्यटन के दबाव को देखते हुए। आसपास के जंगल कई प्रजातियों का आवास हैं, जो क्षेत्रीय जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन में योगदान देते हैं।

  • ऊंचाई: 1,365 मीटर, झारखंड की सबसे ऊंची चोटी (Survey of India, 2023)
  • वन आवरण: पर्याप्त, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित
  • जैव विविधता: स्थानीय और संरक्षित प्रजातियों का आवास, JSBB द्वारा निगरानी
  • खतरे: खनन अतिक्रमण और बिना नियमन के पर्यटन

जैन धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक महत्व

पारसनाथ पर्वत का धार्मिक महत्व जैन ब्रह्मांड विज्ञान में गहरा है, जहां 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) यहां के प्राचीन जैन मंदिरों और स्मारकों की सुरक्षा करता है, जो प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 (AMASR Act) की धारा 2 और 3 के तहत संरक्षित हैं। यह पर्वत वार्षिक जैन तीर्थ यात्रा के दौरान एक केंद्र बिंदु बन जाता है, जहां धार्मिक अनुष्ठान और त्योहार स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखते हैं।

  • धार्मिक महत्व: 20 तीर्थंकरों के मोक्ष स्थल के रूप में
  • विरासत संरक्षण: AMASR अधिनियम के तहत ASI की देखरेख
  • वार्षिक तीर्थयात्रा: 2,00,000 से अधिक, जिसमें 60% जैन समुदाय (झारखंड टूरिज्म विभाग, 2023)
  • सांस्कृतिक आयोजन: नियमित त्योहार जो जैन परंपराओं को बनाए रखते हैं

गिरिडीह जिले की आर्थिक स्थिति

गिरिडीह की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जो स्थानीय GDP का लगभग 40% हिस्सा है (झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)। जिले का 55% क्षेत्र कृषि भूमि के रूप में उपयोग में है, जहां मुख्य फसलें धान, मक्का और दालें हैं (झारखंड कृषि विभाग, 2023)। खनन क्षेत्र, विशेषकर कोयला और माइका खनन, जिले की आय का लगभग 25% प्रदान करता है (खनिज संसाधन विभाग, झारखंड, 2023)। पारसनाथ पर्वत पर आधारित पर्यटन से लगभग ₹15 करोड़ वार्षिक राजस्व होता है, जिसे FY 2023-24 में ₹12 करोड़ के बजट आवंटन से समर्थन मिलता है, जो बुनियादी ढांचे और विरासत संरक्षण के लिए है (झारखंड टूरिज्म विभाग, 2023)। हालांकि, विकास में असंगति के कारण पूरी आर्थिक क्षमता का लाभ नहीं उठाया जा पा रहा है।

  • कृषि: GDP का 40%, 55% भूमि उपयोग, मुख्य फसलें धान, मक्का, दालें
  • खनन: 25% राजस्व, कोयला और माइका प्रमुख खनिज
  • पर्यटन आय: पारसनाथ तीर्थ यात्रा से ₹15 करोड़ वार्षिक
  • राज्य बजट: गिरिडीह पर्यटन विकास के लिए ₹12 करोड़ (FY 2023-24)

पारसनाथ पर्वत के प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्था

पारसनाथ पर्वत के प्रबंधन की जिम्मेदारी कई संस्थाओं के बीच साझा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) राज्य प्रशासनिक भर्ती और संबंधित नीतियों के कार्यान्वयन में मदद करता है। झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) पर्यटन बुनियादी ढांचे और प्रचार-प्रसार का संचालन करता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) जैन मंदिरों के संरक्षण के लिए कानून लागू करता है। झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड (JSBB) पारिस्थितिक संरक्षण की देखरेख करता है। जिला प्रशासन गिरिडीह स्थानीय शासन और विकास योजनाओं को लागू करता है।

  • JPSC: प्रशासनिक भर्ती और नीति कार्यान्वयन
  • JTDC: पर्यटन बुनियादी ढांचा और प्रचार
  • ASI: AMASR अधिनियम के तहत विरासत संरक्षण
  • JSBB: जैव विविधता और पारिस्थितिकी संरक्षण
  • जिला प्रशासन गिरिडीह: स्थानीय शासन और योजना क्रियान्वयन

तुलनात्मक अध्ययन: पारसनाथ पर्वत और माउंट कैलाश

पहलूपारसनाथ पर्वत (झारखंड)माउंट कैलाश (तिब्बत)
ऊंचाई1,365 मीटर6,638 मीटर
धार्मिक महत्वजैन धर्म: 20 तीर्थंकरों का मोक्ष स्थलहिंदू, बौद्ध, जैन, बोन: पवित्र तीर्थ स्थल
कानूनी संरक्षणAMASR अधिनियम (1958), वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972)चीन का सैक्रेड माउंटेन्स प्रोटेक्शन एक्ट (2017)
पर्यटन प्रबंधनखंडित, सीमित समेकित योजनाबहु-हितधारक मॉडल, पर्यटन और पारिस्थितिकी का संतुलन
पर्यटन राजस्व वृद्धि₹15 करोड़ वार्षिक, 8.5% CAGR (2018-2023)2017 के बाद सतत पर्यटन राजस्व में 15% वृद्धि
पारिस्थितिक संरक्षणJSBB निगरानी, लेकिन दबाव मेंकठोर पर्यावरण नियम, क्षरण में कमी

समेकित प्रबंधन में प्रमुख कमियां

पारसनाथ पर्वत की धार्मिक और पारिस्थितिक दोनों महत्वता के बावजूद, गिरिडीह जिले में कोई समेकित प्रबंधन योजना नहीं है। विरासत संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा और पर्यटन विकास के प्रयास बिखरे हुए हैं। इससे आर्थिक अवसरों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता और पर्यावरणीय दबाव बढ़ता है। माउंट कैलाश जैसे स्थलों के बहु-हितधारक शासन मॉडल की तुलना में यहां समन्वित नीतियों की कमी स्पष्ट है, जो स्थिरता और राजस्व वृद्धि में मदद करते हैं।

  • संस्कृति, पारिस्थितिकी और पर्यटन के लक्ष्यों को जोड़ने वाली कोई एकीकृत योजना नहीं
  • खंडित संस्थागत भूमिकाएं कार्यकुशलता कम करती हैं
  • अपर्याप्त बुनियादी ढांचा पर्यटक अनुभव और राजस्व सीमित करता है
  • अनियंत्रित गतिविधियों से पर्यावरणीय क्षति का खतरा

आगे का रास्ता: नीति और विकास प्राथमिकताएं

  • ASI, JSBB, JTDC और जिला प्रशासन के दायित्वों को समेटते हुए समेकित प्रबंधन योजना बनाएं
  • झारखंड राज्य पर्यटन नीति (2016) के तहत सतत पर्यटन प्रथाओं को लागू करें
  • पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन के साथ बुनियादी ढांचा सुधारें ताकि तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने पर भी पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचे
  • समुदाय की भागीदारी बढ़ाएं, विशेषकर अनुसूचित जनजातियों (39% आबादी) को संरक्षण और पर्यटन सेवाओं में शामिल करें
  • जिला प्रशासन के लिए JPSC के माध्यम से विरासत और पर्यावरण शासन में क्षमता निर्माण करें
  • चीन के Sacred Mountains Protection Act जैसे मॉनिटरिंग तंत्र अपनाएं, जो विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हैं

पारसनाथ पर्वत के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. पारसनाथ पर्वत झारखंड की सबसे ऊंची चोटी है।
  2. यह वह स्थल है जहां सभी 24 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया।
  3. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण AMASR अधिनियम के तहत पारसनाथ के जैन स्मारकों की रक्षा करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है; पारसनाथ पर्वत झारखंड की सबसे ऊंची चोटी है। कथन 2 गलत है; यहां 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। कथन 3 सही है; ASI AMASR अधिनियम के तहत स्मारकों की रक्षा करता है।

पारसनाथ पर्वत के कानूनी संरक्षण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Article 48A प्राकृतिक विरासत स्थलों सहित पर्यावरण संरक्षण का प्रावधान करता है।
  2. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 धार्मिक तीर्थ स्थलों पर लागू नहीं होता।
  3. झारखंड राज्य पर्यटन नीति 2016 सतत धार्मिक पर्यटन के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है; Article 48A पर्यावरण संरक्षण का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम पारिस्थितिक क्षेत्रों पर लागू होता है, चाहे वे धार्मिक स्थल हों या नहीं। कथन 3 सही है; झारखंड पर्यटन नीति 2016 सतत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देती है।

मुख्य प्रश्न

गिरिडीह जिले में पारसनाथ पर्वत की जैन विरासत और पारिस्थितिक महत्व पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 1 – झारखंड का भूगोल और संस्कृति; पेपर 3 – पर्यावरण और अर्थव्यवस्था
  • झारखंड दृष्टिकोण: पारसनाथ पर्वत झारखंड की सबसे ऊंची चोटी और धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, जो ₹15 करोड़ वार्षिक योगदान देता है; 39% अनुसूचित जनजाति स्थानीय अर्थव्यवस्था में शामिल हैं
  • मुख्य बिंदु: गिरिडीह में विरासत और पारिस्थितिकी संरक्षण, संस्थागत भूमिकाएं और सतत पर्यटन नीति के कार्यान्वयन पर जोर
पारसनाथ पर्वत की ऊंचाई और महत्व क्या है?

पारसनाथ पर्वत की ऊंचाई 1,365 मीटर है, जो इसे झारखंड की सबसे ऊंची चोटी बनाती है। यह जैन धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल है, जहां 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया।

पारसनाथ पर्वत की विरासत और पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए कौन से कानून लागू हैं?

प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 जैन मंदिरों की रक्षा करता है, जबकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 पारिस्थितिक क्षेत्रों के संरक्षण के लिए है। संविधान के Article 48A के तहत पर्यावरण संरक्षण अनिवार्य है।

पारसनाथ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की भूमिका क्या है?

ASI पारसनाथ पर्वत पर स्थित प्राचीन जैन मंदिरों और स्मारकों के संरक्षण और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है, जो AMASR अधिनियम, 1958 के तहत आते हैं।

पर्यटन गिरिडीह की अर्थव्यवस्था में कैसे योगदान देता है?

पारसनाथ पर्वत पर पर्यटन से लगभग ₹15 करोड़ वार्षिक राजस्व आता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे और विरासत संरक्षण के लिए आवंटित बजट से समर्थन मिलता है।

गिरिडीह जिले की मुख्य आर्थिक गतिविधियां क्या हैं?

कृषि जिले की GDP का लगभग 40% हिस्सा है, खनन 25% और पारसनाथ पर्वत आधारित पर्यटन तेजी से बढ़ रहा क्षेत्र है।

Sources and further reading

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