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झारखंड में अक्षय ऊर्जा की संभावनाएं: सौर और पवन संसाधनों का विश्लेषण एवं नीति रूपरेखा

परिचय: झारखंड की अक्षय ऊर्जा की स्थिति

झारखंड में सौर और पवन ऊर्जा की अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन नीति निर्देशों के बावजूद अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में इसका उपयोग सीमित है। राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 5,000 मेगावाट आंकी गई है, जहां औसत सौर विकिरण 5.5 kWh/m2/दिन है (MNRE, 2023)। पवन ऊर्जा की संभावना लगभग 1,200 मेगावाट है, जो मुख्य रूप से संथाल परगना क्षेत्र में केंद्रित है, लेकिन 2024 तक केवल 50 मेगावाट स्थापित किया गया है (JREDA, 2023)। झारखंड 2030 तक 2,000 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जो राष्ट्रीय सौर मिशन (2008) के तहत निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप है।

JPSC Exam प्रासंगिकता

  • JPSC सामान्य अध्ययन पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, ऊर्जा क्षेत्र
  • राज्य-विशिष्ट अक्षय ऊर्जा नीतियां और क्षमता डेटा
  • पिछले वर्षों के प्रश्न झारखंड के अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों और पवन ऊर्जा की चुनौतियों पर (JPSC 2022)

झारखंड में अक्षय ऊर्जा के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

विद्युत अधिनियम, 2003 (केंद्रीय अधिनियम 36/2003) की धारा 61 और 86 के तहत राज्य विद्युत नियामक आयोगों को अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना अनिवार्य है। झारखंड ने इसे झारखंड राज्य सौर नीति 2019 और झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी अधिनियम, 2010 के माध्यम से लागू किया है, जिसके तहत JREDA को राज्य का अक्षय ऊर्जा प्रोत्साहन निकाय बनाया गया है।

  • झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) टैरिफ निर्धारण और अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्व (RPO) लागू करता है।
  • नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) केंद्रीय नीति मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत पर्यावरण मंजूरी की निगरानी करता है।
  • झारखंड कौशल विकास मिशन (JSDM) अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है।

झारखंड में सौर ऊर्जा की संभावनाएं और विकास

झारखंड की सौर ऊर्जा क्षमता 5,000 मेगावाट के करीब है, जो औसत 5.5 kWh/m2/दिन के सौर विकिरण पर आधारित है (MNRE, 2023)। मार्च 2024 तक स्थापित सौर क्षमता 400 मेगावाट पहुंच चुकी है, जो पिछले पांच वर्षों में 18% की सालाना वृद्धि दर दर्शाती है (झारखंड ऊर्जा विभाग)। 2023-24 के बजट में राज्य ने अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें सौर पार्क और रूफटॉप सौर इंस्टालेशन को प्राथमिकता दी गई है।

  • रांची और हजारीबाग जैसे जिलों में सौर पार्क बनाए जा रहे हैं, जहां जमीन और ग्रिड कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध है।
  • रूफटॉप सौर परियोजनाएं मुख्य रूप से शहरी इलाकों में जहां वाणिज्यिक और आवासीय बिजली की मांग अधिक है, केंद्रित हैं।
  • झारखंड की प्रति व्यक्ति बिजली खपत 600 kWh है, जो राष्ट्रीय औसत 1,200 kWh से काफी कम है, इससे सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली पहुंच बढ़ाने की गुंजाइश दिखती है (CEA, 2023)।

झारखंड में पवन ऊर्जा की संभावनाएं और चुनौतियां

पवन ऊर्जा की संभावना मुख्य रूप से संथाल परगना क्षेत्र में 1,200 मेगावाट के आसपास है (JREDA, 2023)। हालांकि, केवल 50 मेगावाट ही स्थापित किया गया है, जिसका कारण कमजोर ग्रिड बुनियादी ढांचा और JSERC द्वारा अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्वों (RPO) का कमजोर पालन है।

  • झारखंड में पवन की गति मध्यम है और अन्य पवन समृद्ध राज्यों जैसे तमिलनाडु की तुलना में कम स्थिर है।
  • ग्रिड में समेकन की समस्याएं और समर्पित ट्रांसमिशन लाइनों की कमी बड़े पैमाने पर पवन ऊर्जा उत्पादन में बाधा है।
  • राज्य का 29.6% वन क्षेत्र होने के कारण पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया जटिल है, जिसके तहत सख्त प्रभाव मूल्यांकन आवश्यक हैं (वन सर्वेक्षण भारत, 2023)।

तुलनात्मक विश्लेषण: झारखंड बनाम तमिलनाडु अक्षय ऊर्जा विकास

पैरामीटर झारखंड तमिलनाडु
स्थापित पवन क्षमता (MW) 50 7,500
स्थापित सौर क्षमता (MW) 400 2,000+
कुल उत्पादन में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा (%) 12 30+
नीति ढांचा झारखंड राज्य सौर नीति 2019, JREDA अधिनियम 2010 मजबूत नीति प्रोत्साहन, फीड-इन टैरिफ, और ग्रिड समेकन तंत्र
ग्रिड बुनियादी ढांचा कमजोर, अस्थायी ऊर्जा समेकन सीमित मजबूत, समर्पित अक्षय ऊर्जा ट्रांसमिशन कॉरिडोर
RPO पालन कमजोर कड़ा और निगरानी में

आर्थिक प्रभाव और रोजगार संभावनाएं

2023 तक झारखंड के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र का मूल्य लगभग 1,200 करोड़ रुपये आंका गया है (IBEF Renewable Energy Report, 2023)। 18% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ यह क्षेत्र 2030 तक 15,000 से अधिक रोजगार पैदा कर सकता है, खासकर सौर पैनल निर्माण, स्थापना और रखरखाव में (झारखंड कौशल विकास मिशन, 2023)।

  • सरकारी बजट सहायता और कौशल विकास कार्यक्रम क्षेत्र की मांग के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने पर केंद्रित हैं।
  • अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं झारखंड की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान कर सकती हैं, जो परंपरागत रूप से खनन और भारी उद्योगों पर निर्भर है।
  • स्थानीय रोजगार सृजन से पलायन की समस्या कम होगी और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरणीय पहलू और चुनौतियां

झारखंड का वन क्षेत्र राज्य के कुल क्षेत्रफल का 29.6% है (वन सर्वेक्षण भारत, 2023), इसलिए अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया का पालन करना होता है। सौर पार्क और पवन फार्म को जैव विविधता हानि और भूमि उपयोग विवादों को कम करने के लिए कड़े प्रभाव मूल्यांकन से गुजरना पड़ता है।

  • बड़े पैमाने पर सौर स्थापना से भूमि क्षरण का खतरा होता है यदि वे अवनत या गैर-वन भूमि पर न हों।
  • पवन टरबाइन को प्रवासी पक्षियों के मार्ग और स्थानीय जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए सावधानी से स्थापित करना आवश्यक है।
  • पर्यावरण मंजूरी की जटिलताएं परियोजना क्रियान्वयन में देरी करती हैं, इसलिए प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है।

नीति और नियामक कमियां

संसाधनों की संभावनाओं के बावजूद झारखंड के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं:

  • अपर्याप्त ग्रिड बुनियादी ढांचा अस्थायी सौर और पवन ऊर्जा के समेकन में बाधक है।
  • JSERC द्वारा अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्वों (RPO) का कमजोर पालन बाजार में अक्षय ऊर्जा की मांग को कम करता है।
  • नीति अनिश्चितता और लंबी पर्यावरण मंजूरी प्रक्रियाओं के कारण निजी क्षेत्र की भागीदारी सीमित है।
  • केंद्रीय (MNRE) और राज्य (JREDA, JSERC) एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी कार्यान्वयन में देरी का कारण है।

आगे का रास्ता: झारखंड की अक्षय ऊर्जा क्षमता का सही उपयोग

  • समर्पित अक्षय ऊर्जा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और स्मार्ट ग्रिड तकनीकों के साथ ग्रिड बुनियादी ढांचे को मजबूत करें।
  • JSERC के माध्यम से RPO पालन को सख्त बनाकर अक्षय ऊर्जा के लिए सुनिश्चित मांग बनाएं।
  • पर्यावरण मंजूरी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाएं, जिससे पारिस्थितिक चिंताओं और परियोजना समयसीमा में संतुलन बना रहे।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करें और सौर तथा पवन क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा दें।
  • JSDM के तहत कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार करें ताकि उद्योग की मांग के अनुरूप रोजगार लक्ष्य पूरे हो सकें।
  • झारखंड की सौर और पवन ऊर्जा क्षमता का उपयोग बढ़ाकर प्रति व्यक्ति बिजली खपत और ऊर्जा पहुंच में सुधार करें।

झारखंड की अक्षय ऊर्जा क्षमता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. झारखंड की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 5,000 मेगावाट है, जिसमें औसत विकिरण 5.5 kWh/m2/दिन है।
  2. 2024 तक झारखंड में स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 1,000 मेगावाट से अधिक है।
  3. झारखंड राज्य सौर नीति 2019 विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत लागू की गई थी।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 MNRE 2023 के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि स्थापित पवन क्षमता केवल 50 मेगावाट है (JREDA 2023)। कथन 3 सही है, झारखंड राज्य सौर नीति 2019 विद्युत अधिनियम 2003 के तहत लागू है।

झारखंड की अक्षय ऊर्जा संस्थाओं के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:

  1. झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) 2010 में एक राज्य अधिनियम के तहत स्थापित की गई थी।
  2. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) टैरिफ विनियमन और अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्वों के पालन के लिए जिम्मेदार है।
  3. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) का अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी में कोई भूमिका नहीं है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 और 2 सही हैं। JSPCB पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण मंजूरी में भूमिका निभाता है, इसलिए कथन 3 गलत है।

मुख्य प्रश्न

झारखंड की सौर और पवन ऊर्जा क्षमता का दोहन करने में आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करें। नीति और संस्थागत सुधार राज्य में अक्षय ऊर्जा के विकास को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 3 – पर्यावरण, ऊर्जा और आर्थिक विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: राज्य-विशिष्ट अक्षय ऊर्जा डेटा, नीति ढांचे और संस्थागत भूमिकाएं
  • मुख्य बिंदु: झारखंड की अप्रयुक्त सौर और पवन क्षमता, विद्युत अधिनियम 2003 के तहत कानूनी प्रावधान, और अक्षय ऊर्जा विकास में संस्थागत समन्वय की कमी
झारखंड की अनुमानित सौर ऊर्जा क्षमता क्या है?

MNRE 2023 के आंकड़ों के अनुसार झारखंड की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 5,000 मेगावाट है, औसत सौर विकिरण 5.5 kWh/m2/दिन है।

राज्य में अक्षय ऊर्जा के लिए कौन सी एजेंसी नोडल है?

झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA), जो 2010 के अधिनियम के तहत स्थापित है, राज्य की अक्षय ऊर्जा प्रोत्साहन की नोडल एजेंसी है।

2024 तक झारखंड में स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता कितनी है?

झारखंड में स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 50 मेगावाट है, जो संभावित 1,200 मेगावाट से काफी कम है (JREDA, 2023)।

झारखंड में अक्षय ऊर्जा का कुल उत्पादन में हिस्सा राष्ट्रीय औसत से कैसा है?

2024 तक झारखंड में अक्षय ऊर्जा का कुल उत्पादन में हिस्सा 12% है, जो राष्ट्रीय औसत 15% से कम है (केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, 2024)।

झारखंड के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में कमजोर ग्रिड बुनियादी ढांचा, अक्षय ऊर्जा खरीद दायित्वों का कमजोर पालन, जटिल पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया और निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी शामिल हैं।

झारखंड के पर्यावरण और ऊर्जा विषयों पर विस्तृत नोट्स के लिए JPSC Notes Hub और झारखंड भूगोल नोट्स देखें।

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