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गड़वाह जिला: झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय विरासत

गड़वाह जिले का परिचय

झारखंड के पश्चिमी हिस्से में स्थित गड़वाह जिला 1991 में पलामू जिले से अलग होकर बना था। इसका क्षेत्रफल लगभग 4,390 वर्ग किलोमीटर है और 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 13,22,784 है। जिले की खासियत इसकी जनजातीय आबादी है, जो कुल जनसंख्या का 28.5% है, साथ ही 42% क्षेत्र वनाच्छादित है (फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2023)। गड़वाह की भौगोलिक संरचना घने जंगलों, पहाड़ियों और उपजाऊ मैदानों का मिश्रण है, जो इसे पारिस्थितिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से समृद्ध बनाता है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 1: पंचम अनुसूची के तहत जनजातीय संस्कृति और अनुसूचित क्षेत्र
  • GS पेपर 3: वन अधिकार अधिनियम, वन प्रबंधन और सतत विकास
  • GS पेपर 2: अनुसूचित जनजातियों के लिए संवैधानिक प्रावधान और स्थानीय शासन
  • निबंध: गड़वाह जैसे जनजातीय जिलों में विकास और संरक्षण का संतुलन

गड़वाह में संवैधानिक और कानूनी ढांचा

गड़वाह जिला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(2) और पंचम अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्र घोषित है, जो जनजातीय हितों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रशासनिक प्रावधान करता है। वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत यहां की जनजातीय समुदायों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों का दावा करने का अधिकार मिला है, जिसमें भूमि स्वामित्व और लघु वन उत्पादों तक पहुंच शामिल है। झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग अधिनियम, 2002 जनजातीय कल्याण की निगरानी और संरक्षण के लिए काम करता है, जिससे गड़वाह जैसे जिलों में नीतियों का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।

  • अनुच्छेद 244(2) और पंचम अनुसूची: स्वायत्त शासन की व्यवस्था करते हैं, जनजातीय भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाते हैं और विकास परियोजनाओं के लिए सहमति आवश्यक करते हैं।
  • वन अधिकार अधिनियम की धारा 3 एवं 4: वन भूमि और संसाधनों पर व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकार मान्यता देते हैं, जो गड़वाह के जनजातीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग: गड़वाह में जनजातीय कल्याण योजनाओं और अधिकारों के क्रियान्वयन की निगरानी करता है।

आर्थिक स्वरूप: कृषि, वन अर्थव्यवस्था और पर्यटन

गड़वाह की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, जहां लगभग 70% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी है और यह झारखंड की कुल कृषि उत्पादन में करीब 2.5% योगदान देती है (झारखंड इकोनॉमिक सर्वे 2023-24)। धान यहां की प्रमुख फसल है, जो कुल बोई गई जमीन का 45% हिस्सा है। वन आधारित आजीविका लगभग 15% परिवारों का सहारा है, जो तेंदू पत्ता, लैक और औषधीय पौधों जैसे लघु वन उत्पादों के संग्रह और बिक्री से जुड़ी है (झारखंड वन विभाग 2023)। गड़वाह में बेतला नेशनल पार्क और पलामू टाइगर रिजर्व के आसपास इको-टूरिज्म में 2023 में 12% की राजस्व वृद्धि देखी गई है, जो जिले की सतत पर्यटन क्षमता को दर्शाता है।

  • कृषि: 70% कार्यबल कृषि में; धान प्रमुख फसल।
  • वन अर्थव्यवस्था: लघु वन उत्पाद संग्रह से 15% परिवार जुड़े; जनजातीय आय के लिए अहम।
  • पर्यटन: पर्यटक संख्या 50,000 (2019) से बढ़कर 56,000 (2023); 2023 में 12% राजस्व वृद्धि।
  • जनजातीय उप-योजना (TSP): 2023-24 में बुनियादी ढांचे और आजीविका परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित।

प्रमुख संस्थान और शासन तंत्र

गड़वाह के विकास और संरक्षण के लिए कई संस्थान काम कर रहे हैं। झारखंड जनजातीय कल्याण विभाग जनजातीय योजनाओं को लागू करता है, जबकि झारखंड वन विभाग वन संरक्षण और लघु वन उत्पाद संग्रह का प्रबंधन करता है। गड़वाह जिला प्रशासन स्थानीय शासन और विकास योजना का समन्वय करता है। झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देता है। झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग जनजातीय अधिकारों की निगरानी करता है, और पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन प्राधिकरण आसपास के वन क्षेत्रों में संरक्षण का काम देखता है।

  • झारखंड जनजातीय कल्याण विभाग: TSP के तहत जनजातीय विकास योजनाएं लागू करता है।
  • झारखंड वन विभाग: वन संसाधनों का प्रबंधन और लघु वन उत्पाद संग्रह का नियंत्रण करता है।
  • गड़वाह जिला प्रशासन: जिला स्तर पर योजना और क्रियान्वयन का समन्वय करता है।
  • JTDC: इको-टूरिज्म अवसंरचना विकसित करता है और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देता है।
  • राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग: जनजातीय अधिकारों की रक्षा और कल्याण योजनाओं की निगरानी करता है।
  • पलामू टाइगर रिजर्व प्राधिकरण: जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों की देखरेख करता है।

जनसांख्यिकी और पर्यावरणीय संकेतक

संकेतक गड़वाह जिला झारखंड राज्य औसत
जनसंख्या (2011 जनगणना) 13,22,784 3.296 करोड़
अनुसूचित जनजाति (%) 28.5% 26.2%
साक्षरता दर 60.88% 67.63%
वन आवरण 42% 29%
धान की खेती क्षेत्र (% नेट बोई गई) 45% 38%
वार्षिक औसत वर्षा 1200 मिमी 1300 मिमी
पर्यटक संख्या (2023) 56,000 जिला अनुसार भिन्न

तुलनात्मक विश्लेषण: गड़वाह बनाम बस्तर जिला

छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला जनजातीय आबादी, वन आश्रित जीवन और सांस्कृतिक विरासत के मामले में गड़वाह से मिलता-जुलता है। बस्तर के सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म मॉडल ने पिछले पांच वर्षों में जनजातीय आय में 18% की वृद्धि की है (छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड 2022)। गड़वाह में पर्यटन राजस्व में 12% की वृद्धि यह दर्शाती है कि बस्तर की भागीदारीपूर्ण रणनीतियों को अपनाकर यहां के जनजातीय जीवन स्तर और संरक्षण को बेहतर बनाया जा सकता है।

पहलू गड़वाह जिला (झारखंड) बस्तर जिला (छत्तीसगढ़)
अनुसूचित जनजाति आबादी 28.5% लगभग 37%
वन आवरण 42% 45%
इको-टूरिज्म राजस्व वृद्धि (हालिया) 12% (2023) 18% (2017-2022)
सामुदायिक पर्यटन सीमित जनजातीय सहभागिता के साथ स्थापित
पर्यटन से जनजातीय आय मध्यम महत्वपूर्ण वृद्धि (18%)

गड़वाह के विकास में प्रमुख चुनौतियां

प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा के बावजूद, गड़वाह में बुनियादी ढांचे की कमी और जनजातीय उत्पादों के लिए सीमित बाजार पहुंच विकास में बाधा हैं। नीतियां अक्सर संसाधनों के दोहन पर केंद्रित होती हैं, जबकि मूल्य संवर्धन और समुदाय सशक्तिकरण पर कम ध्यान दिया जाता है। इससे सतत विकास और जनजातीय कल्याण प्रभावित होता है क्योंकि लघु वन उत्पादों और हस्तशिल्प के लिए पर्याप्त विपणन मंच नहीं हैं। साथ ही, खराब सड़क संपर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की कमी सामाजिक-आर्थिक प्रगति को रोकती है।

  • अपर्याप्त अवसंरचना से बाजार और सेवाओं तक पहुंच सीमित।
  • जनजातीय उत्पादों के लिए मूल्य श्रृंखला कमजोर, आय क्षमता कम।
  • नीतिगत झुकाव संसाधन दोहन की ओर, सतत विकास की ओर नहीं।
  • कम साक्षरता (60.88%) क्षमता निर्माण और सशक्तिकरण में बाधक।

महत्व और आगे का रास्ता

गड़वाह की विशिष्ट जनजातीय विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए ऐसी नीतियां जरूरी हैं जो पारिस्थितिक संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाएं। वन अधिकार अधिनियम और अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन जनजातीय समुदायों को सशक्त करेगा। बस्तर की तरह सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर आय के स्रोत बढ़ाए जा सकते हैं। जनजातीय उप-योजना के तहत सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी ढांचे का विकास प्राथमिकता हो। लघु वन उत्पादों और जनजातीय हस्तशिल्प के लिए बेहतर बाजार संबंध स्थापित करना आजीविका सुधार में मदद करेगा।

  • FRA 2006 के अधिकारों को लागू कर जनजातीय भूमि और संसाधनों की सुरक्षा करें।
  • सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म बढ़ाकर जनजातीय आय में सुधार करें।
  • ग्रामीण अवसंरचना जैसे सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश करें।
  • लघु वन उत्पादों और जनजातीय उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच विकसित करें।
  • जनजातीय कल्याण, वन और पर्यटन विभागों के बीच समन्वय मजबूत करें।

गड़वाह जिले में लागू वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. FRA केवल वन भूमि पर व्यक्तिगत अधिकार मान्यता देता है, सामुदायिक अधिकारों को शामिल नहीं करता।
  2. FRA की धारा 3 और 4 अनुसूचित जनजातियों को वन भूमि और संसाधनों पर अधिकार का दावा करने का अधिकार देती हैं।
  3. गड़वाह में FRA के क्रियान्वयन की निगरानी झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि FRA वन भूमि पर व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों अधिकारों को मान्यता देता है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि धारा 3 और 4 अनुसूचित जनजातियों को अधिकार देती हैं और झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग FRA के क्रियान्वयन की निगरानी करता है।

गड़वाह जिले के जनसांख्यिकीय और पर्यावरणीय आंकड़ों पर विचार करें:

  1. 2011 की जनगणना के अनुसार गड़वाह में अनुसूचित जनजाति की आबादी 28% से अधिक है।
  2. गड़वाह में वन आवरण जिले के क्षेत्र का 30% से कम है।
  3. गड़वाह में धान की खेती नेट बोई गई जमीन के लगभग आधे हिस्से में होती है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि जनजातीय आबादी 28.5% है। कथन 2 गलत है क्योंकि वन आवरण 42% है। कथन 3 सही है क्योंकि धान की खेती 45% नेट बोई गई जमीन में होती है।

मुख्य प्रश्न

गड़वाह जिले की जनजातीय विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सतत विकास के लिए कैसे किया जा सकता है? जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए किन संस्थागत और नीतिगत कदमों की जरूरत है?

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 1 (भूगोल और संस्कृति), पेपर 2 (शासन और संवैधानिक प्रावधान), पेपर 3 (आर्थिक विकास और पर्यावरण)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: गड़वाह की 28.5% जनजातीय आबादी और 42% वन आवरण झारखंड में जनजातीय कल्याण और वन अधिकारों के मुद्दों का उदाहरण हैं।
  • मुख्य बिंदु: पंचम अनुसूची की सुरक्षा, FRA 2006, कृषि और लघु वन उत्पादों के आर्थिक आंकड़े, और बस्तर के इको-टूरिज्म से सीखें शामिल करें।
गड़वाह जिले में जनजातीय आबादी की सुरक्षा के लिए कौन से संवैधानिक प्रावधान हैं?

गड़वाह पंचम अनुसूची और अनुच्छेद 244(2) के तहत अनुसूचित क्षेत्र है, जो जनजातीय भूमि संरक्षण और विशेष शासन व्यवस्था प्रदान करता है। ये प्रावधान भूमि हस्तांतरण पर रोक लगाते हैं और विकास परियोजनाओं के लिए जनजातीय सहमति अनिवार्य करते हैं।

वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत गड़वाह के जनजातीय समुदायों को क्या अधिकार मिलते हैं?

वन अधिकार अधिनियम वन भूमि और संसाधनों पर व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों को मान्यता देता है, जिससे गड़वाह के जनजातीय समुदाय अपनी पारंपरिक आजीविका की रक्षा कर सकते हैं और लघु वन उत्पादों तक पहुंच बना सकते हैं।

गड़वाह की जनजातीय आबादी को मुख्य रूप से कौन-सी आर्थिक गतिविधियां सहारा देती हैं?

लगभग 70% जनसंख्या कृषि कार्य में लगी है, खासकर धान की खेती में। इसके अलावा 15% परिवार लघु वन उत्पाद जैसे तेंदू पत्ता और लैक के संग्रह से जुड़े हैं।

हाल ही में पर्यटन ने गड़वाह की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव डाला है?

बेतला नेशनल पार्क और पलामू टाइगर रिजर्व के आसपास पर्यटन बढ़ा है, पर्यटक संख्या 2019 के 50,000 से बढ़कर 2023 में 56,000 हो गई है और 2023 में पर्यटन राजस्व में 12% की वृद्धि हुई है, जो इको-टूरिज्म की संभावनाओं को दर्शाता है।

गड़वाह में जनजातीय कल्याण और वन प्रबंधन में कौन-कौन सी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं?

झारखंड जनजातीय कल्याण विभाग, झारखंड वन विभाग, गड़वाह जिला प्रशासन, झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन प्राधिकरण मुख्य संस्थाएं हैं।

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