रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 2026 की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जो इस संगठन की दसवीं द्विवार्षिक बैठक होगी। यह बैठक यूरेशिया के किसी SCO सदस्य देश में आयोजित की जाएगी, जहां भारत 2017 से पूर्ण सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस भागीदारी से भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को गहरा करने और बदलती भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय रक्षा कूटनीति को बढ़ावा देने की मंशा स्पष्ट होती है।
SCO, जिसकी स्थापना SCO चार्टर, 2001 के तहत हुई थी, एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है जिसमें भारत, चीन, रूस समेत आठ पूर्ण सदस्य देश हैं। रक्षा मंत्रियों की बैठकें आतंकवाद विरोधी प्रयासों, संयुक्त सैन्य अभ्यासों और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होती हैं, हालांकि इनमें कोई बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता नहीं होती। भारत की भागीदारी क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने और पश्चिमी तथा उत्तरी सीमाओं पर स्थिरता को बढ़ावा देने की उसकी रणनीतिक सोच को दर्शाती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – बहुपक्षीय मंचों में भारत की भूमिका, क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना, रक्षा कूटनीति
- GS पेपर 3: सुरक्षा – रक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोध, सीमा प्रबंधन
- निबंध: भारत की विदेश नीति और यूरेशिया में रणनीतिक स्वायत्तता
भारत की SCO भागीदारी के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा
भारत की SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भागीदारी उस संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत आती है जो केंद्र सरकार को अंतरराष्ट्रीय समझौतों में शामिल होने का अधिकार देती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत संसद को संधियों और समझौतों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार है, जिसमें रक्षा सहयोग से जुड़े समझौते भी शामिल हैं। SCO सदस्यता के लिए कोई विशेष भारतीय कानून नहीं है, लेकिन रक्षा मंत्रालय अधिनियम, 1950 के तहत रक्षा मामलों का कार्यकारी प्राधिकार रक्षा मंत्रालय को प्राप्त है, जो विदेश मंत्रालय अधिनियम, 1956 के तहत विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय करता है।
- भारत रक्षा अधिनियम, 1917 भारत की रक्षा तैयारियों का ऐतिहासिक संदर्भ देता है, लेकिन SCO से संबंधित कार्यों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं है।
- विदेश मंत्रालय बहुपक्षीय मंचों जैसे SCO में कूटनीतिक समन्वय का प्रबंधन करता है, जिससे भारत की विदेश नीति के लक्ष्यों के अनुरूप कार्य हो।
- रक्षा मंत्रालय रक्षा कूटनीति का नेतृत्व करता है, जिसमें संयुक्त अभ्यास, खुफिया साझा करना और आतंकवाद विरोधी सहयोग शामिल हैं।
भारत की SCO रक्षा भागीदारी के आर्थिक पहलू
वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भारत का रक्षा बजट लगभग ₹5.94 लाख करोड़ (USD 79 बिलियन) है, जो आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण में निरंतर निवेश को दर्शाता है (संघ बजट 2023)। SCO सदस्य देश कुल मिलाकर 3 अरब से अधिक आबादी और USD 20 ट्रिलियन से अधिक GDP वाले बाजार का प्रतिनिधित्व करते हैं (वर्ल्ड बैंक 2023), जो रक्षा उद्योग सहयोग के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है।
- भारत की रक्षा आयात 2022 में कुल खरीद का 46% थी, लेकिन 2018 से यह 10% कम हुई है, जिसका श्रेय ‘मेक इन इंडिया’ पहलों को जाता है (SIPRI 2023)।
- SCO के तहत रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने से संयुक्त अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे आयात निर्भरता घटेगी और स्वदेशी क्षमताएं मजबूत होंगी।
- भारत के रक्षा निर्यात 2023 में USD 1.2 बिलियन तक पहुंच गए, जो 2020 से 35% की वृद्धि है, इसमें SCO सदस्यों के साथ साझेदारी का भी योगदान है (रक्षा मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
SCO रक्षा सहयोग में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका
SCO एक बहुपक्षीय मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें सुरक्षा और रक्षा सहयोग के लिए विभिन्न संस्थान हैं:
- SCO (शंघाई सहयोग संगठन): 2001 में स्थापित, यह यूरेशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद विरोध और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित है।
- भारत का रक्षा मंत्रालय (MoD): रक्षा नीति, अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और संयुक्त अभ्यासों के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार।
- भारत का विदेश मंत्रालय (MEA): बहुपक्षीय मंचों में कूटनीतिक भागीदारी और समन्वय का प्रबंधन करता है।
- CIS (कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स): SCO के साथ भौगोलिक ओवरलैप है, लेकिन इसका कार्यक्षेत्र अलग है; क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषण के लिए प्रासंगिक।
- SCO RATS (क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना): SCO का आतंकवाद विरोधी समन्वय निकाय, जो खुफिया साझा करना और संयुक्त अभियानों का संचालन करता है।
भारत की SCO रक्षा भागीदारी पर तथ्यात्मक जानकारी
2017 से भारत की SCO सदस्यता क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में रणनीतिक बदलावों के साथ मेल खाती है:
- 2026 की बैठक SCO रक्षा मंत्रियों की दसवीं द्विवार्षिक बैठक होगी।
- 2023 में SCO का संयुक्त सैन्य व्यय लगभग USD 1.5 ट्रिलियन था, जिसमें चीन और रूस का हिस्सा 70% से अधिक था (SIPRI 2023)।
- 2018 से 2023 के बीच भारत की रक्षा आयात में 10% की कमी आई है, जो घरेलू क्षमता वृद्धि को दर्शाता है।
- 2020 से 2023 के बीच भारत के रक्षा निर्यात में 35% वृद्धि हुई है, जो वैश्विक रक्षा बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: SCO बनाम NATO रक्षा ढांचे
| पहलू | SCO | NATO |
|---|---|---|
| स्थापना | 2001 (SCO चार्टर) | 1949 (वॉशिंगटन संधि) |
| सदस्यता | 8 पूर्ण सदस्य (भारत, चीन, रूस सहित यूरेशियाई देश) | 31 सदस्य (उत्तर अमेरिका और यूरोप) |
| रक्षा प्रावधान | कोई बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान नहीं | अनुच्छेद 5: बाध्यकारी पारस्परिक रक्षा प्रतिबद्धता |
| केंद्रित विषय | आतंकवाद विरोध, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, संयुक्त अभ्यास | सामूहिक रक्षा, संकट प्रबंधन, निरोध |
| संस्थागत परिपक्वता | उभरता हुआ बहुपक्षीय ढांचा | उच्च संस्थागत, औपचारिक कमांड संरचनाएं |
महत्वपूर्ण कमी: बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता का अभाव
SCO में बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान न होने के कारण त्वरित संयुक्त सैन्य प्रतिक्रिया की क्षमता सीमित है। भारत के लिए यह रणनीतिक चुनौती है, खासकर चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए। इसलिए भारत को SCO की भागीदारी के साथ-साथ द्विपक्षीय और अन्य बहुपक्षीय रक्षा समझौतों को भी संतुलित करना होगा ताकि समग्र सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
महत्व और आगे का रास्ता
- 2026 की SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत की भागीदारी क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।
- SCO के साथ जुड़ाव चीन-रूस के प्रभुत्व को संतुलित करने और यूरेशिया में भारत के प्रभाव को बढ़ाने का रणनीतिक साधन है।
- SCO के भीतर संयुक्त अनुसंधान और रक्षा उत्पादन सहयोग बढ़ाकर भारत अपनी आयात निर्भरता कम कर सकता है और रक्षा निर्यात को बढ़ावा दे सकता है।
- भारत को SCO की सुरक्षा संरचना में संस्थागत खामियों को द्विपक्षीय रक्षा साझेदारियों और अन्य बहुपक्षीय मंचों के साथ पूरा करना होगा।
- MEA के कूटनीतिक प्रयासों और MoD के संचालन समन्वय से SCO से जुड़ी गतिविधियों को ठोस सुरक्षा परिणामों में बदला जा सकता है।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- SCO में NATO के अनुच्छेद 5 के समान बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान है।
- भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना।
- SCO क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) सदस्य देशों के बीच आतंकवाद विरोधी प्रयासों का समन्वय करती है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि SCO में NATO जैसा बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान नहीं है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि भारत 2017 में पूर्ण सदस्य बना और SCO RATS आतंकवाद विरोधी समन्वय करता है।
भारत के रक्षा आयात और निर्यात के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- 2018 से 2023 के बीच भारत के रक्षा आयात में 10% वृद्धि हुई।
- 2020 से 2023 के बीच भारत के रक्षा निर्यात में 35% वृद्धि हुई।
- ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने रक्षा आयात निर्भरता कम करने में योगदान दिया।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत के रक्षा आयात में 2018 से 2023 तक 10% की कमी आई है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि रक्षा निर्यात में 35% वृद्धि हुई है और ‘मेक इन इंडिया’ ने आयात निर्भरता घटाने में मदद की है।
मेन प्रश्न
“यूरेशिया में भू-राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, शंघाई सहयोग संगठन की रक्षा मंत्रियों की बैठकों में भारत की भागीदारी के रणनीतिक महत्व का मूल्यांकन करें।”
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन इकाइयां हैं, जो भारत के रक्षा निर्यात वृद्धि और आयात प्रतिस्थापन प्रयासों में योगदान देती हैं।
- मेन पॉइंटर: उत्तर देते समय भारत की बहुपक्षीय रक्षा कूटनीति को घरेलू रक्षा उद्योग विकास से जोड़ें, और झारखंड की भूमिका को स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने में रेखांकित करें।
भारत कब SCO का पूर्ण सदस्य बना?
भारत 2017 में शंघाई सहयोग संगठन का पूर्ण सदस्य बना, जिससे उसका यूरेशियाई क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग में भूमिका बढ़ी।
SCO रक्षा मंत्रियों की बैठकों का मुख्य फोकस क्या है?
SCO रक्षा मंत्रियों की बैठकें मुख्यतः क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोध, संयुक्त सैन्य अभ्यासों और बहुपक्षीय रक्षा समन्वय को बढ़ावा देने पर केंद्रित होती हैं, जिनमें बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान नहीं होता।
क्या SCO में NATO जैसा सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता है?
नहीं, SCO में NATO के अनुच्छेद 5 जैसा कोई बाध्यकारी सामूहिक रक्षा प्रावधान नहीं है, जिससे सदस्य देशों के बीच त्वरित सामूहिक सैन्य प्रतिक्रिया सीमित होती है।
SCO क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना (RATS) की क्या भूमिका है?
SCO RATS सदस्य देशों के बीच खुफिया साझा करना, संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान और क्षमता निर्माण का समन्वय करता है, ताकि क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ाई को मजबूत किया जा सके।
भारत की रक्षा आयात निर्भरता में हालिया बदलाव क्या है?
2018 से 2023 के बीच भारत की रक्षा आयात निर्भरता लगभग 10% कम हुई है, जिसका कारण ‘मेक इन इंडिया’ पहल द्वारा स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है।