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Anthropic के Mythos AI से जुड़े वैश्विक जोखिम और शासन की चुनौतियां

परिचय: Anthropic का Mythos AI और इसकी वैश्विक महत्ता

Anthropic, जो 2021 में स्थापित एक AI अनुसंधान कंपनी है, ने Mythos AI विकसित किया है, जो 175 अरब से अधिक पैरामीटर वाला एक बड़ा भाषा मॉडल (LLM) है और OpenAI के GPT-4 के समकक्ष माना जाता है (Indian Express, 2024)। Mythos AI प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण में एक महत्वपूर्ण छलांग है, जो पिछले मॉडलों की तुलना में 30% कम गलती करता है (Anthropic Research Paper, 2023)। 2023 में लॉन्च हुआ यह मॉडल विश्व स्तर पर काम कर रहा है और डिजिटल अर्थव्यवस्था, साइबर सुरक्षा, और शासन जैसे क्षेत्रों में AI आधारित अनुप्रयोगों को प्रभावित कर रहा है।

Mythos AI की तेज़ प्रगति के साथ सुरक्षा, नैतिक शासन और भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन से जुड़े गंभीर जोखिम भी सामने आए हैं। ये जोखिम नीति निर्माताओं का तत्काल ध्यान आकर्षित करते हैं, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर AI के लिए बंधनकारी नियमावली का अभाव है। भारत, अपनी बढ़ती AI पारिस्थितिकी और नियमावली के साथ, इन जोखिमों से निपटने में विशिष्ट चुनौतियां और अवसर दोनों का सामना कर रहा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS Paper 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – AI शासन, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, और नैतिक AI उपयोग
  • GS Paper 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – AI के भू-राजनीतिक प्रभाव और वैश्विक नियामक सहयोग
  • निबंध: उभरती तकनीकों का समाज, शासन और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

Mythos AI के तकनीकी और आर्थिक आयाम

175 अरब से अधिक पैरामीटर वाले Mythos AI की संरचना इसे विश्व के सबसे उन्नत LLM में रखती है, जो जटिल भाषा समझ और उत्पादन में सक्षम है (Indian Express, 2024)। यह क्षमता विविध अनुप्रयोगों को समर्थन देती है, लेकिन साथ ही गलत सूचना, स्वचालित साइबर हमलों और निर्णय प्रक्रिया की अस्पष्टता जैसे जोखिम भी बढ़ाती है।

  • 2022 में वैश्विक AI बाजार का मूल्य USD 136.55 बिलियन था और 2030 तक यह USD 1.59 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 38.1% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है (Fortune Business Insights, 2023)।
  • Anthropic की नवाचार संभावित रूप से 2025 तक डिजिटल अर्थव्यवस्था में $500 बिलियन के बदलाव का कारण बन सकती है (McKinsey Global Institute, 2023)।
  • भारत का AI अनुसंधान एवं विकास बजट, जो NITI Aayog की राष्ट्रीय AI रणनीति के तहत है, 2022-2025 के लिए लगभग INR 7,500 करोड़ (~USD 1 बिलियन) है, जिसमें AI सुरक्षा और नवाचार को प्राथमिकता दी गई है (NITI Aayog, 2022)।

भारत में AI शासन के कानूनी और नैतिक ढांचे

भारत में AI शासन के लिए कानूनी ढांचा विकसित हो रहा है, लेकिन फिलहाल असंगठित है। Information Technology Act, 2000 इस क्षेत्र के लिए आधारशिला प्रदान करता है, जिसमें Section 43A डेटा सुरक्षा और Section 66A साइबर अपराधों से संबंधित हैं, हालांकि बाद वाला अस्पष्टता के कारण निरस्त हो चुका है।

  • Personal Data Protection Bill, 2019 लंबित है, जिसका उद्देश्य डेटा गोपनीयता और प्रोसेसिंग को नियंत्रित करना है, जो Mythos AI जैसे सिस्टम के लिए अहम है।
  • भारतीय संविधान का Article 21 निजता के अधिकार को भी शामिल करता है (न्यायमूर्ति K.S. Puttaswamy बनाम भारत संघ, 2017), जो AI से जुड़े डेटा संरक्षण के लिए आधार बनता है।
  • NITI Aayog के AI Ethics Guidelines (2020) जिम्मेदार AI विकास, पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही पर जोर देते हैं, लेकिन इनमें कानूनी बाध्यता नहीं है।

भू-राजनीतिक जोखिम और शक्ति असंतुलन

Mythos AI AI के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को तेज करता है, जिसका असर राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रभुत्व और डिजिटल संप्रभुता पर पड़ता है। Anthropic और OpenAI जैसे निजी संस्थानों के पास AI क्षमताओं का केंद्रीकरण इस क्रांतिकारी तकनीक पर एकतरफा नियंत्रण की चिंता बढ़ाता है।

  • ऐसे देश जिनके पास उन्नत AI इंफ्रास्ट्रक्चर है, Mythos AI का उपयोग रणनीतिक लाभ के लिए कर सकते हैं, जिससे वैश्विक असमानताएं बढ़ती हैं।
  • साइबर सुरक्षा खतरे बढ़े हैं, 2023 में AI से जुड़े साइबर घटनाओं में 45% की वृद्धि हुई है (Interpol Cybercrime Report, 2024), जो AI के दुरुपयोग से उत्पन्न कमजोरियों को दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय नियमों के असंगठित होने और बंधनकारी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अभाव के कारण सीमा पार AI जोखिम अनियंत्रित बने हुए हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण: AI नियामक ढांचे

पहलू यूरोपीय संघ (EU) संयुक्त राज्य अमेरिका (US) भारत
नियामक दृष्टिकोण जोखिम-आधारित, अनिवार्य अनुपालन मूल्यांकन के साथ AI Act (2021 प्रस्तावित) नवाचार-केंद्रित, कम अनिवार्य, स्वैच्छिक दिशानिर्देशों पर आधारित असंगठित; IT Act + लंबित Data Protection Bill + NITI Aayog दिशानिर्देश
क्षेत्र उच्च-जोखिम AI सिस्टम के लिए स्पष्ट जोखिम न्यूनीकरण दायित्व व्यापक AI नवाचार प्रोत्साहन, सीमित नियामक निगरानी डेटा गोपनीयता और AI नैतिकता पर उभरता फोकस, लेकिन बाध्यकारी कानून नहीं
प्रवर्तन बंधनीय, जुर्माने के साथ; 5 वर्षों में AI हानियों में 40% कमी का लक्ष्य (EC Impact Assessment, 2023) बाजार बलों और स्व-नियमन पर निर्भर सीमित प्रवर्तन तंत्र; कानूनी अनिश्चितता बनी हुई है
अंतरराष्ट्रीय सहयोग OECD और UNESCO AI नैतिकता ढांचे में सक्रिय भागीदारी चुनिंदा सहभागिता, राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता UNESCO AI नैतिकता सिफारिश (2021) में सहभागी, लेकिन बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं नहीं

नीतिगत अंतराल और चुनौतियां

बंधनीय अंतरराष्ट्रीय AI सुरक्षा मानकों के अभाव में Anthropic जैसे कंपनियां शक्तिशाली मॉडल बिना समन्वित निगरानी के लागू कर रही हैं। यह विखंडन जोखिम प्रबंधन को कमजोर करता है और नियामक छल को बढ़ावा देता है।

  • भारत का लंबित Personal Data Protection Bill Mythos AI के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक व्यापक डेटा शासन में देरी करता है।
  • NITI Aayog के नैतिक दिशानिर्देशों में कानूनी मजबूती न होने के कारण AI हानियों के लिए जवाबदेही सीमित है।
  • वैश्विक AI शासन में क्षेत्राधिकार विवाद और प्रवर्तन तंत्र की कमी के कारण सीमा पार AI जोखिमों पर प्रभावी नियंत्रण में बाधा आती है।

आगे का रास्ता: AI शासन और जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत बनाना

  • Personal Data Protection Bill को पारित कर इसे लागू करना ताकि AI सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत डेटा गोपनीयता व्यवस्था स्थापित हो सके।
  • EU AI Act मॉडल से प्रेरणा लेकर जोखिम-आधारित मूल्यांकन और अनिवार्य पारदर्शिता के साथ कानूनी AI नियम बनाए जाएं।
  • OECD और UNESCO जैसे मंचों पर सक्रिय भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएं और बंधनकारी वैश्विक AI सुरक्षा मानकों की मांग करें।
  • AI सुरक्षा अनुसंधान और साइबर सुरक्षा अवसंरचना में निवेश बढ़ाएं ताकि दुरुपयोग और कमजोरियों को कम किया जा सके।
  • राष्ट्रीय हितों और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करते हुए नैतिक AI नवाचार सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करें।

Anthropic के Mythos AI के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. Mythos AI में 175 अरब से अधिक पैरामीटर हैं, जो इसे GPT-4 के बराबर बनाते हैं।
  2. Personal Data Protection Bill, 2019 वर्तमान में भारत में AI डेटा गोपनीयता को नियंत्रित करने वाला बाध्यकारी कानून है।
  3. Mythos AI ने पिछले LLM की तुलना में 30% कम गलती की दर प्रदर्शित की है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि Mythos AI में 175 अरब से अधिक पैरामीटर हैं (Indian Express, 2024)। कथन 2 गलत है क्योंकि Personal Data Protection Bill, 2019 अभी लंबित है और कानून नहीं बना है। कथन 3 सही है क्योंकि Anthropic के शोध पत्र में 30% गलती में कमी दर्शाई गई है (Anthropic Research Paper, 2023)।

AI नियामक ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यूरोपीय संघ का AI Act उच्च-जोखिम AI सिस्टम के लिए जोखिम-आधारित अनुपालन मूल्यांकन अनिवार्य करता है।
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका के पास यूरोपीय संघ के AI Act के समान एक बाध्यकारी संघीय AI कानून है।
  3. भारत वर्तमान में AI नैतिकता दिशानिर्देशों को कानूनी नियमों के माध्यम से लागू करता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) और (c) केवल
  • (c) केवल
  • (d) केवल 1 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि EU AI Act जोखिम-आधारित अनुपालन मूल्यांकन प्रस्तावित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि US के पास EU जैसा बाध्यकारी AI कानून नहीं है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत के AI नैतिकता दिशानिर्देश गैर-बाध्यकारी हैं।

मुख्य प्रश्न

Anthropic के Mythos AI से उत्पन्न वैश्विक जोखिमों पर चर्चा करें और इन जोखिमों से निपटने में भारत के मौजूदा कानूनी और नैतिक ढांचे की पर्याप्तता का विश्लेषण करें। भारत में AI शासन को मजबूत करने के लिए सुझाव दें।

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, डिजिटल शासन
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के उभरते IT हब और डिजिटल पहलों में Mythos AI जैसी तकनीकों का उपयोग हो सकता है, लेकिन डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के डिजिटल विकास, AI सुरक्षा जागरूकता की आवश्यकता और राष्ट्रीय AI नीतियों के साथ समन्वय पर आधारित उत्तर तैयार करें।
Anthropic के Mythos AI को अन्य बड़े भाषा मॉडलों से क्या अलग बनाता है?

Mythos AI में 175 अरब से अधिक पैरामीटर हैं, जो GPT-4 के बराबर हैं, और यह hallucination त्रुटियों में 30% की कमी दिखाता है, जिससे भाषा उत्पादन में विश्वसनीयता बढ़ती है (Anthropic Research Paper, 2023)।

क्या Personal Data Protection Bill, 2019 भारत में वर्तमान में लागू है?

नहीं, Personal Data Protection Bill, 2019 अभी संसद की मंजूरी का इंतजार कर रहा है और कानून नहीं बना है, जिससे AI शासन के लिए आवश्यक डेटा गोपनीयता नियमों में खामियां हैं।

EU AI Act भारत के AI शासन ढांचे से कैसे अलग है?

EU AI Act एक बाध्यकारी, जोखिम-आधारित नियामक ढांचा है जिसमें उच्च-जोखिम AI के लिए अनिवार्य अनुपालन मूल्यांकन है, जबकि भारत गैर-बाध्यकारी नैतिक दिशानिर्देशों और लंबित कानूनों पर निर्भर है, जिससे प्रवर्तन कमजोर है (European Commission Impact Assessment, 2023)।

Mythos AI से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिम क्या हैं?

Mythos AI की उन्नत क्षमताओं का दुरुपयोग गलत सूचना फैलाने, स्वचालित साइबर हमलों और गोपनीयता उल्लंघनों के लिए किया जा सकता है, जिससे 2023 में AI-संबंधित साइबर घटनाओं में 45% की वृद्धि हुई है (Interpol Cybercrime Report, 2024)।

भारत में AI शासन में NITI Aayog की क्या भूमिका है?

NITI Aayog AI नीति ढांचे और नैतिक दिशानिर्देश बनाता है, AI सुरक्षा अनुसंधान को बढ़ावा देता है, और भारत की राष्ट्रीय AI रणनीति का प्रबंधन करता है, जिसमें 2022-2025 के लिए INR 7,500 करोड़ का AI R&D बजट शामिल है (NITI Aayog, 2022)।

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