Announcements
UPSC Foundation 2026 Prime Batch - Admissions Open JPSC 14th CCE Complete Course 2025 - Enroll Now Mains Practice Questions Programme - Limited Seats Daily Current Affairs - Free Access UPSC Prelims Test Series 2026 - 5000+ MCQs
+91 91025 57680
learnpro Civil Services
LearnPro Menu

Governance · Exam Notes

भारत में फसल विविधता और एमएसपी सुधार पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एमएसपी और खरीद नीतियों में सुधार कर फसल विविधता को बढ़ावा देने, खासकर उत्तर भारत में दालों की खेती को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है। यह कदम गेहूं और धान को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था की खामियों को दूर करने और पोषण सुरक्षा व सतत कृषि को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। वर्तमान एमएसपी आवंटन और खरीद कवरेज अनाजों के पक्ष में भारी झुकाव रखती है, जिससे दालों को उचित समर्थन नहीं मिल पाता।
1 min read GS Paper II
Governance
Exam Notes
GS Paper II

Constitution, governance, social justice and institutional analysis

In brief

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एमएसपी और खरीद नीतियों में सुधार कर फसल विविधता को बढ़ावा देने, खासकर उत्तर भारत में दालों की खेती को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है। यह कदम गेहूं और धान को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था की खामियों को दूर करने और पोषण सुरक्षा व सतत कृषि को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। वर्तमान एमएसपी आवंटन और खरीद कवरेज अनाजों के पक्ष में भारी झुकाव रखती है, जिससे दालों को उचित समर्थन नहीं मिल पाता।

परिचय: सुप्रीम कोर्ट का फसल विविधता पर निर्देश

साल 2024 की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार को कृषि नीतियों में बदलाव कर फसल विविधता को बढ़ावा देने का आदेश दिया है। विशेष रूप से, उत्तर भारत में गेहूं-धान के प्रभुत्व वाले कृषि तंत्र से दालों की खेती की ओर बदलाव को जरूरी बताया गया है। यह न्यायिक हस्तक्षेप उन व्यवस्था संबंधी असंतुलनों को ठीक करने के लिए है, जो पारंपरिक रूप से गेहूं और चावल को प्राथमिकता देते आए हैं और दालों के पोषण तथा पर्यावरणीय महत्व को नजरअंदाज करते हैं। कोर्ट का यह निर्देश संविधान के Article 48 के तहत राज्य की जिम्मेदारी के अनुरूप है और Essential Commodities Act, 1955 तथा Food Corporation of India Act, 1964 जैसे कानूनों का उपयोग करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद व्यवस्था में सुधार का मार्ग प्रशस्त करता है।

UPSC से संबंधित विषय

  • GS पेपर 3: कृषि – MSP, खरीद, फसल विविधता, खाद्य सुरक्षा
  • GS पेपर 2: राजनीति – न्यायिक सक्रियता, कृषि से जुड़े संवैधानिक प्रावधान
  • निबंध: भारत में सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा

एमएसपी और खरीद में प्रणालीगत पक्षपात: आंकड़ों की पड़ताल

वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए MSP बजट आवंटन में भारी असंतुलन साफ नजर आता है: लगभग ₹1.2 लाख करोड़ गेहूं और चावल की खरीद के लिए रखे गए जबकि दालों के लिए ₹10,000 करोड़ से भी कम (इकोनॉमिक सर्वे 2024)। प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत दालों की खरीद कवरेज महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में 30% से भी कम है (कृषि मंत्रालय 2023), जबकि पंजाब और हरियाणा में गेहूं-चावल की खरीद 90% से ऊपर है (FCI 2023)। यह अंतर किसानों को दालों की खेती से दूर करता है, जबकि दालें भारत के प्रोटीन सेवन का 25% हिस्सा हैं और केवल 6% फसल क्षेत्र में उगाई जाती हैं (राष्ट्रीय पोषण निगरानी ब्यूरो 2022)।

  • एमएसपी बजट आवंटन (2023-24): गेहूं और चावल – ₹1.2 लाख करोड़; दालें – ₹10,000 करोड़ से कम
  • खरीद कवरेज: गेहूं और चावल – पंजाब, हरियाणा में >90%; दालें – महाराष्ट्र में <30%
  • घरेलू उत्पादन बनाम आयात: भारत हर साल लगभग 1.5 मिलियन टन पीली मटर का आयात करता है जिसकी कीमत ₹3,000 करोड़ है (DGCI&S 2023)
  • बफर स्टॉक: दालों का बफर स्टॉक वार्षिक खपत का 10% से कम; गेहूं और चावल का 25-30% (खाद्य मंत्रालय 2023)

फसल विविधता को लेकर संवैधानिक और कानूनी ढांचा

Article 48 के तहत राज्य को कृषि को वैज्ञानिक आधार पर व्यवस्थित करने का दायित्व दिया गया है, जिसमें फसल विविधता को बढ़ावा देना शामिल है। Essential Commodities Act, 1955 खरीद और मूल्य नियंत्रण के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है, जबकि Food Corporation of India Act, 1964 के तहत FCI की MSP के तहत खरीद की भूमिका सुनिश्चित होती है। Price Support Scheme दालों और तिलहन की खरीद को लागू करता है, लेकिन इसकी कवरेज सीमित है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश न्यायिक सक्रियता का उदाहरण हैं जो नीति में सुधार और संवैधानिक जिम्मेदारियों के पालन के लिए जारी किए गए हैं।

  • Article 48: कृषि को वैज्ञानिक तरीके से संगठित करने की राज्य की जिम्मेदारी
  • Essential Commodities Act, 1955: खरीद और मूल्य नियंत्रण को नियंत्रित करता है
  • Food Corporation of India Act, 1964: FCI की खरीद भूमिका निर्धारित करता है
  • Price Support Scheme (PSS): दालों और तिलहन के लिए MSP खरीद को लागू करता है
  • न्यायिक सक्रियता: सुप्रीम कोर्ट के नीति सुधार के आदेश

वर्तमान MSP और खरीद नीतियों के आर्थिक प्रभाव

एमएसपी और खरीद की असंतुलित व्यवस्था गेहूं और चावल की एकफसली को बढ़ावा देती है, जिससे पर्यावरणीय क्षरण जैसे भूजल स्तर में गिरावट और मिट्टी की उर्वरता की कमी उत्तर भारत में बढ़ रही है। दालों की कम खरीद से कीमतों में अस्थिरता आती है और आयात पर निर्भरता बढ़ती है, जिससे घरेलू कीमतें नीचे गिरती हैं और किसानों को प्रोत्साहन नहीं मिलता। दालों का पोषण महत्व 25% प्रोटीन सेवन में है, जबकि फसल क्षेत्र केवल 6% है, जो खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि के लिए गंभीर चुनौती है।

  • पर्यावरणीय प्रभाव: धान-गेहूं की एकफसली से भूजल स्तर गिरना और मिट्टी की गुणवत्ता खराब होना
  • आयात निर्भरता: सालाना 1.5 मिलियन टन पीली मटर का आयात, घरेलू कीमतों पर असर
  • बाजार पहुंच: कमजोर खरीद और मूल्य समर्थन के कारण दाल किसानों को अस्थिरता का सामना
  • पोषण सुरक्षा: दालें प्रोटीन का 25% देती हैं लेकिन फसल क्षेत्र केवल 6%

तुलनात्मक दृष्टिकोण: भारत बनाम कनाडा दाल क्षेत्र समर्थन

मामलाभारतकनाडा
एमएसपी और खरीदटूटी-फूटी MSP, दालों के लिए PSS के तहत सीमित खरीदमजबूत मूल्य स्थिरीकरण कोष और कनाडाई कृषि साझेदारी के तहत गारंटीकृत खरीद
दालों के तहत फसल क्षेत्र6% फसल क्षेत्र20% से अधिक फसल क्षेत्र
किसानों की आय स्थिरताकमजोर बाजार समर्थन के कारण मूल्य अस्थिरतामूल्य समर्थन और निर्यात प्रोत्साहन से स्थिर आय
आयात निर्भरताउच्च आयात (~1.5 मिलियन टन पीली मटर)आत्मनिर्भर और निर्यात अधिशेष

भारत की फसल विविधता नीति में प्रमुख खामियां

वर्तमान MSP और खरीद प्रणाली गेहूं और चावल को असमान रूप से प्राथमिकता देती है, जबकि दालों को उनके पर्यावरणीय और पोषण संबंधी महत्व के बावजूद नजरअंदाज किया जाता है। सीमित खरीद कवरेज और आयात मूल्य नियंत्रण की कमी के कारण दाल किसानों को बाजार तक पहुंच और उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे विविधीकरण को बढ़ावा नहीं मिलता। दालों के लिए प्रभावी मूल्य स्थिरीकरण तंत्र का अभाव भी कीमतों में अस्थिरता और आयात निर्भरता को बढ़ाता है।

  • गेहूं और चावल के पक्ष में असंतुलित MSP आवंटन
  • दालों के लिए PSS के तहत सीमित खरीद कवरेज
  • पीली मटर जैसे दालों पर आयात मूल्य नियंत्रण का अभाव
  • दाल किसानों के लिए बाजार पहुंच और मूल्य स्थिरीकरण तंत्र की कमी

आगे का रास्ता: फसल विविधता बढ़ाने के लिए नीति सुझाव

  • दालों के MSP को उत्पादन लागत के साथ उचित लाभांश तक बढ़ाएं, ताकि गेहूं और चावल के बराबर प्रोत्साहन मिले।
  • PSS के तहत दालों की खरीद कवरेज बढ़ाएं, FCI जैसे एजेंसियों को शामिल कर बाजार पहुंच सुनिश्चित करें।
  • पीली मटर जैसी दालों पर आयात मूल्य नियंत्रण या टैरिफ लागू करें ताकि घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा हो।
  • फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए विस्तार सेवाएं और क्रेडिट सहायता दालों की खेती पर केंद्रित करें।
  • दालों के बफर स्टॉक को मजबूत कर कीमतों और आपूर्ति को स्थिर बनाएं।

प्रैक्टिस प्रश्न

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. MSP एक कानूनी बाध्यकारी मूल्य है जिस पर सरकार को किसानों से फसल खरीदनी होती है।
  2. PSS विशेष रूप से दालों और तिलहन के लिए MSP खरीद को लागू करता है।
  3. PSS के तहत दालों की खरीद कवरेज सभी राज्यों में समान रूप से 70% से ऊपर है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 गलत है क्योंकि MSP एक घोषित मूल्य है लेकिन सरकार के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। कथन 2 सही है क्योंकि PSS दालों और तिलहन की MSP खरीद को लागू करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में PSS के तहत दालों की खरीद कवरेज अक्सर 30% से कम है।

भारत में फसल विविधता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. फसल विविधता एकफसली से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम करती है।
  2. भारत में दालें गेहूं और चावल से अधिक फसल क्षेत्र घेरती हैं।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए नीति सुधारों का निर्देश दिया है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि फसल विविधता पर्यावरणीय नुकसान को कम करती है। कथन 2 गलत है; दालें केवल 6% फसल क्षेत्र में उगाई जाती हैं, जो गेहूं और चावल से कम है। कथन 3 सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने फसल विविधता के लिए नीति सुधारों का निर्देश दिया है।

मेन प्रश्न

भारत में फसल विविधता को प्रोत्साहित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। MSP और खरीद नीतियों में मौजूद प्रणालीगत पक्षपात पर चर्चा करें और सतत कृषि व पोषण सुरक्षा के लिए दालों की खेती को बढ़ावा देने हेतु सुधार सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से जुड़ाव

  • JPSC पेपर: GS पेपर 3 – कृषि और संबद्ध क्षेत्र
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि अर्थव्यवस्था दालों की खेती से विविधता प्राप्त कर सकती है, जिससे चावल और मक्का की एकफसली पर निर्भरता कम होगी और मिट्टी की सेहत बेहतर होगी।
  • मेन पॉइंट: राज्य स्तर पर MSP लागू करने की चुनौतियां, झारखंड में दालों की संभावनाएं, और आदिवासी आबादी में पोषण सुरक्षा से जुड़ाव।
प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) क्या है और इसका MSP से क्या संबंध है?

प्राइस सपोर्ट स्कीम MSP के तहत दालों और तिलहन की खरीद को लागू करती है, जिससे सरकारी एजेंसियां किसानों से MSP पर फसल खरीद पाती हैं। गेहूं और चावल के विपरीत, जहां FCI व्यापक रूप से खरीद करता है, दालों के लिए PSS की कवरेज सीमित और राज्यों के अनुसार भिन्न होती है।

सुप्रीम कोर्ट फसल विविधता को गेहूं और धान से हटकर क्यों बढ़ावा देता है?

क्योंकि गेहूं और धान की खरीद और MSP नीतियां पर्यावरणीय क्षरण को बढ़ावा देती हैं और दालों जैसे पोषण और मिट्टी की सेहत के लिए जरूरी फसलों को उपेक्षित करती हैं। विविधता सततता और खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है।

आयात भारत में घरेलू दाल उत्पादन को कैसे प्रभावित करता है?

भारत सालाना लगभग 1.5 मिलियन टन पीली मटर का आयात करता है, जो घरेलू कीमतों को दबाता है और किसानों को दाल की खेती से दूर करता है, जिससे उत्पादन स्थिर रहता है।

कृषि विकास में राज्य की भूमिका को कौन सा संवैधानिक प्रावधान निर्देशित करता है?

Article 48 भारतीय संविधान राज्य को कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक आधार पर व्यवस्थित करने का निर्देश देता है, जो फसल विविधता को बढ़ावा देने वाली नीतियों का आधार है।

गेहूं/चावल और दालों की खरीद कवरेज में क्या अंतर है?

पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों में गेहूं और चावल की खरीद 90% से अधिक है, जबकि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में दालों की खरीद PSS के तहत 30% से कम है, जो नीति में पक्षपात को दर्शाता है।

Sources and further reading

Academic supportNeed guidance for this examination?

Speak to LearnPro about the relevant course, notes, test series or answer-writing programme.

Ask LearnPro
Continue preparation

Read, revise and practise this subject

LearnPro Editorial Team

LearnPro prepares civil-services notes in simple language with syllabus relevance, factual review and links to primary references where available. Academic direction is provided by Rajan Kumar, Director, LearnPro Civil Services. For changing examination dates and vacancies, the official commission notification always prevails.