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Governance · Exam Notes

मध्य पूर्व संघर्ष से उजागर हुई वैश्विक समुद्री मार्गों की रणनीतिक कमजोरियां

1 min read GS Paper II

परिचय: समुद्री मार्ग और वैश्विक सुरक्षा

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास, ने वैश्विक समुद्री मार्गों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। ये संकरी जलधाराएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार की मुख्य धमनियां हैं, विशेषकर ऊर्जा आपूर्ति के लिए। केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही लगभग 21 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल का परिवहन करता है, जो 2025 तक विश्व की लगभग 20% पेट्रोलियम खपत का हिस्सा है (International Energy Agency, 2025)। यहां किसी भी बाधा से वैश्विक बाजारों में हलचल मच जाती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिरता प्रभावित होती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – समुद्री सुरक्षा, भारत की विदेश नीति, संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून
  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास
  • निबंध: बहुध्रुवीय विश्व में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति

युद्धों में समुद्री मार्गों का ऐतिहासिक महत्व

  • डार्डनेल्स जलडमरूमध्य (प्रथम विश्व युद्ध): भूमध्य सागर और काला सागर को जोड़ने वाला यह जलमार्ग प्रथम विश्व युद्ध में रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। इस जलमार्ग पर नियंत्रण यूरोएशियाई व्यापार मार्गों और नौसैनिक प्रभुत्व के लिए जरूरी था (Historical Military Archives, 1915)।
  • अटलांटिक युद्ध (द्वितीय विश्व युद्ध): अटलांटिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा ने मित्र राष्ट्रों को आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने और युद्ध जीतने में निर्णायक भूमिका निभाई (Naval History and Heritage Command, 1945)।
  • आधुनिक समुद्री मार्ग: ये ऐतिहासिक उदाहरण दिखाते हैं कि कैसे समुद्री मार्गों पर नियंत्रण से युद्ध के परिणाम प्रभावित होते हैं, क्योंकि ये व्यापार और सैन्य गतिविधियों के लिए मार्ग तय करते हैं।

भारत के समुद्री हितों का कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत का अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में भागीदारी संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 के तहत संचालित होती है, जिसके भारत भी सदस्य है। मुख्य प्रावधान हैं:

  • भाग II: क्षेत्रीय समुद्र और संलग्न क्षेत्र – सीमाओं और अधिकारों को परिभाषित करता है।
  • भाग V: विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) – 200 समुद्री मील तक संसाधन उपयोग के अधिकार देता है।

देशीय स्तर पर, मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 भारतीय शिपिंग हितों को नियंत्रित करता है, जबकि रक्षा के नियम डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1962 के तहत युद्धकाल में समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिकार देते हैं। ये कानून भारत की नौसैनिक गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा नीति की आधारशिला हैं।

प्रमुख समुद्री मार्गों का आर्थिक महत्व

मार्गदैनिक तेल पारगमन (मिलियन बैरल)वैश्विक तेल व्यापार का प्रतिशतरणनीतिक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज21लगभग 20%गल्फ के तेल का मुख्य निर्यात मार्ग; वैश्विक पेट्रोलियम और LNG व्यापार के लिए अहम (IEA, 2025)
मलक्का जलडमरूमध्य15+चीन के तेल आयात का लगभग 80%दुनिया का सबसे व्यस्त तेल पारगमन मार्ग; पूर्वी एशियाई औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण (EIA, 2024)
डार्डनेल्स जलडमरूमध्यNANAभूमध्य सागर को काला सागर से जोड़ता है; प्रमुख यूरोएशियाई व्यापार मार्ग (Historical Military Archives, 1915)

भारत अपनी कच्ची तेल की 80% से अधिक आवश्यकता इन मार्गों पर निर्भर है (Ministry of Petroleum & Natural Gas, 2024)। यहां किसी भी बाधा या संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में हफ्तों में 20% से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास को प्रभावित करती है।

समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा नीति में संस्थागत भूमिका

  • इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA): वैश्विक ऊर्जा प्रवाहों की निगरानी और आपूर्ति श्रृंखला जोखिमों का आकलन करती है।
  • भारतीय नौसेना: समुद्री व्यापार मार्गों और रणनीतिक मार्गों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG): भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीतियों और विविधीकरण रणनीतियों का संचालन करता है।
  • UNCLOS सचिवालय: समुद्री नेविगेशन के लिए कानूनी ढांचा और विवाद समाधान प्रदान करता है।
  • इंटरनेशनल समुद्री संगठन (IMO): अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्रों में जहाज सुरक्षा और सुरक्षा नियमों का प्रबंधन करता है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत की समुद्री रणनीति बनाम चीन की रणनीतिक विविधता

पहलूभारतचीन
निर्भरतातेल आयात के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और मलक्का जलडमरूमध्य पर उच्च निर्भरतानिर्भर है, लेकिन सक्रिय रूप से वैकल्पिक मार्ग विकसित कर रहा है
रणनीतिक दृष्टिकोणनौसैनिक उपस्थिति और कूटनीतिक प्रयास से समुद्री मार्गों की सुरक्षासीपीईसी और ग्वादर पोर्ट जैसे वैकल्पिक गलियारों में निवेश कर मलक्का जलडमरूमध्य से बचाव (South China Morning Post, 2024)
जोखिम प्रबंधनसीमित वैकल्पिक मार्ग; क्षेत्रीय संघर्षों के प्रति संवेदनशीलविविधता से मार्ग बाधाओं के जोखिम कम
भू-राजनीतिक प्रभावहिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और साझेदारी पर ध्यानइन्फ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के माध्यम से प्रभाव विस्तार

संरचनात्मक कमियां और सुरक्षा चुनौतियां

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों के आसपास सभी तटीय देशों को शामिल करने वाला कोई व्यापक बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचा नहीं है। इस कमी के कारण एकतरफा सैन्य कार्रवाई होती है, क्षेत्रीय तनाव बढ़ते हैं और व्यापार में बाधा का खतरा बढ़ जाता है। सहयोगी तंत्र की कमी संघर्ष रोकथाम और संकट प्रबंधन को कमजोर करती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • भारत को हिंद महासागर और आस-पास के समुद्री मार्गों में अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ानी होगी ताकि प्रभावी उपस्थिति कायम रखी जा सके।
  • तटीय देशों के साथ कूटनीतिक संबंध मजबूत करने और बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को बढ़ावा देने से एकतरफा तनाव कम हो सकते हैं।
  • ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और आयात मार्गों में निवेश से आर्थिक जोखिम कम होंगे।
  • IEA और IMO जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाकर जोखिम मूल्यांकन और संकट प्रबंधन बेहतर किया जा सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. यह भूमध्य सागर को काला सागर से जोड़ता है।
  2. यह विश्व के लगभग 20% पेट्रोलियम खपत को संभालता है।
  3. यह संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 के तहत संचालित है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (b)

कथन 1 गलत है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है, भूमध्य सागर को काला सागर से नहीं (यह डार्डनेल्स है)। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि यह लगभग 20% वैश्विक पेट्रोलियम खपत संभालता है और UNCLOS के तहत संचालित होता है।

भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1962 सरकार को युद्ध के दौरान समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए अधिकार देता है।
  2. मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) को नियंत्रित करता है।
  3. भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS) 1982 का सदस्य है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 3
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 2
  • (d) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (a)

कथन 2 गलत है क्योंकि मर्चेंट शिपिंग एक्ट शिपिंग को नियंत्रित करता है लेकिन EEZ अधिकार UNCLOS के तहत आते हैं। कथन 1 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे वैश्विक समुद्री मार्गों की कमजोरियों को कैसे उजागर किया है, इस पर चर्चा करें। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रणनीति के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS पेपर 3 – आर्थिक विकास और सुरक्षा
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र को स्थिर ऊर्जा कीमतों की जरूरत होती है; समुद्री मार्गों में बाधा राज्य की अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति और ईंधन आपूर्ति के माध्यम से प्रभावित कर सकती है।
  • मुख्य बिंदु: वैश्विक समुद्री सुरक्षा को स्थानीय आर्थिक प्रभावों से जोड़कर उत्तर तैयार करें, भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया और ऊर्जा आयात की रक्षा में नौसैनिक सुरक्षा की भूमिका पर जोर दें।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक महत्व क्या है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला संकरा जलमार्ग है। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगभग 21 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल का परिवहन करता है, जो विश्व की लगभग 20% पेट्रोलियम खपत और LNG व्यापार का हिस्सा है (IEA, 2025)।

UNCLOS 1982 भारत की समुद्री सुरक्षा नीति को कैसे प्रभावित करता है?

UNCLOS 1982 भारत के समुद्री क्षेत्रों जैसे क्षेत्रीय समुद्र, संलग्न क्षेत्र और EEZ के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। भारत इन प्रावधानों का उपयोग समुद्री क्षेत्राधिकार और संसाधन उपयोग के अधिकारों के लिए करता है (UNCLOS, भाग II और V)।

मलक्का जलडमरूमध्य चीन की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल पारगमन मार्ग है, जहां से चीन के तेल आयात का लगभग 80% पारगमन होता है (EIA, 2024)। यहां बाधा से चीन की ऊर्जा आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

समुद्री मार्गों के आसपास बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग की क्या सीमाएं हैं?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे मार्गों के आसपास सभी तटीय देशों को शामिल करने वाला कोई व्यापक बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचा मौजूद नहीं है। इससे एकतरफा सैन्य कार्रवाई होती है, क्षेत्रीय तनाव बढ़ते हैं और व्यापार बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है।

भारत समुद्री मार्गों की कमजोरियों को कैसे संबोधित कर रहा है?

भारत हिंद महासागर में नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा रहा है, तटीय देशों से कूटनीतिक संपर्क मजबूत कर रहा है और ऊर्जा विविधीकरण पर काम कर रहा है। डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट के तहत युद्ध के दौरान व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान भी लागू करता है (MoPNG, Indian Navy reports, 2024)।

Sources and further reading

Tags:Governance