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Indian Economy Notes · Exam Notes

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक दक्षिण के लिए भारत की स्थायी सदस्यता की मांग

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सुधार की वकालत करता है। यह पहल 1945 के पुराने शक्ति संतुलन को चुनौती देती है और भारत की आर्थिक उन्नति तथा वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, साथ ही वीटो अधिकार और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धाओं जैसी चुनौतियों का सामना करती है।
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GS Paper III

Economy, environment, science, security and applied policy

In brief

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सुधार की वकालत करता है। यह पहल 1945 के पुराने शक्ति संतुलन को चुनौती देती है और भारत की आर्थिक उन्नति तथा वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, साथ ही वीटो अधिकार और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धाओं जैसी चुनौतियों का सामना करती है।

परिचय: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के लिए भारत की पहल

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता में वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए अपनी मुहिम तेज कर दी है। 2026 के ECOSOC फोरम ऑन फाइनेंसिंग फॉर डेवलपमेंट (FfD) और चल रही UNSC सुधार चर्चाओं में भारत ने परिषद को लोकतांत्रिक बनाने के लिए P5 (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) से आगे स्थायी सीटों के विस्तार की जरूरत पर जोर दिया, जो 1945 के विश्व युद्ध के बाद के शक्ति संतुलन को दर्शाती हैं। भारत की यह मांग वैश्विक आर्थिक और जनसांख्यिकीय बदलावों के अनुरूप है, जिससे परिषद की वैधता और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखने की क्षमता बढ़े।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – UNSC की संरचना, वीटो पावर, भारत की कूटनीतिक पहल
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – UN शांति मिशन, वैश्विक शासन सुधार
  • निबंध: वैश्विक शासन और बहुपक्षीय संस्थाओं में भारत की भूमिका

UNSC की संरचना और भारत का संवैधानिक संदर्भ

UN चार्टर (1945) UNSC की संरचना और शक्तियों को कानूनी रूप से परिभाषित करता है, जिसमें स्थायी सदस्यता और वीटो अधिकार शामिल हैं। भारत का घरेलू ढांचा, खासकर United Nations (Privileges and Immunities) Act, 1947, भारत को UN प्रणाली से जोड़ता है लेकिन UNSC सुधार को नियंत्रित नहीं करता। हालांकि, भारतीय संविधान के Article 51 और 253 राज्य को अंतरराष्ट्रीय शांति बढ़ावा देने और संधियों को लागू करने का निर्देश देते हैं, जो UNSC सुधार में भारत की सक्रिय भूमिका को आधार देते हैं।

  • Article 51: निर्देशक सिद्धांत जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश देते हैं।
  • Article 253: संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।
  • UN चार्टर: UNSC सुधार के लिए संशोधन आवश्यक है, जिसके लिए UNGA में दो-तिहाई बहुमत और P5 की सर्वसम्मति चाहिए।

भारत की मांग के आर्थिक आधार

भारत की आर्थिक प्रगति उसकी स्थायी सदस्यता की मांग को मजबूत करती है। लगभग USD 3.73 ट्रिलियन (World Bank, 2023) के GDP के साथ, भारत विश्व GDP का करीब 7.3% हिस्सा रखता है। लगभग USD 450 बिलियन (WTO, 2023) के निर्यात से यह वैश्विक व्यापार में बढ़ती भागीदारी दिखाता है। ये आंकड़े स्थिर UNSC सदस्यता से काफी अलग हैं, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं को शामिल नहीं करती।

  • भारत का GDP हिस्सा (7.3%) वर्तमान स्थायी सदस्यों जैसे फ्रांस और ब्रिटेन से अधिक है।
  • भारत संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में 2.5% और शांति मिशन के बजट में 7.4% योगदान देता है (UN Financial Reports, 2023)।
  • भारत का आर्थिक और जनसांख्यिकीय वजन वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व की मांग करता है।

UNSC सुधार में प्रमुख संस्थान और सत्ता संतुलन

UNSC वैश्विक शांति और सुरक्षा का मुख्य अंग है, जिसमें 15 सदस्य होते हैं: 5 स्थायी जिनके पास वीटो पावर है और 10 निर्वाचित गैर-स्थायी सदस्य। UN General Assembly (UNGA) सुधार प्रस्तावों पर चर्चा करती है, जबकि Economic and Social Council (ECOSOC) व्यापक आर्थिक मुद्दों को देखता है। P5 की वीटो शक्ति सुधार में सबसे बड़ी बाधा है, जो नीति गतिरोध और परिषद की वैधता को प्रभावित करती है।

  • P5 का वीटो उपयोग: 1946 से अब तक 290 से अधिक बार, खासकर सीरिया और यूक्रेन जैसे संकटों पर प्रस्तावों को रोकने में (UN DPA डेटा)।
  • वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व: UN सदस्यों का लगभग 85% होने के बावजूद, केवल एक स्थायी सीट है (भारत की मांग)।
  • कूटनीतिक प्रयास: भारत G4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान) का नेतृत्व करता है जो UNSC विस्तार की वकालत करता है।

UNSC सुधार में चुनौतियाँ

सुधार प्रक्रिया में कई अड़चनें हैं। UN चार्टर संशोधन के लिए व्यापक सहमति जरूरी है, जिसमें सभी P5 सदस्यों की सहमति शामिल है, जो अपनी विशेषाधिकारों को बनाए रखना चाहते हैं। क्षेत्रीय विवाद जैसे भारत-पाकिस्तान और ब्राजील-अर्जेंटीना के मतभेद सहमति बनाना और कठिन बनाते हैं। वीटो शक्ति पर अधिकांश प्रस्तावों में कोई सुधार नहीं है, जिससे निर्णय प्रक्रिया जमी हुई रहती है।

  • राजनीतिक विरोध: P5 सदस्य अपनी शक्तियों को कम करने के लिए तैयार नहीं।
  • क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा: विरोधी दावों से एकजुट मांग कमजोर होती है।
  • वीटो पावर सुधार: इसके अभाव में लोकतंत्रीकरण और प्रभावशीलता सीमित।

तुलनात्मक अध्ययन: UNSC बनाम यूरोपीय संघ परिषद

पहलूसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषदयूरोपीय संघ परिषद
सदस्यता5 स्थायी + 10 गैर-स्थायी सदस्य निश्चितसदस्य देशों के वोटिंग वेट्स समय-समय पर समायोजित
प्रतिनिधित्व1945 के शक्ति संतुलन पर आधारित; स्थिरवर्तमान जनसांख्यिकी और आर्थिक आंकड़ों को दर्शाता है
निर्णय प्रक्रियाP5 के पास वीटो पावर; सहमति में बाधायोग्य बहुमत मतदान; कोई वीटो नहीं
वैधतापुरानी संरचना और वीटो दुरुपयोग के कारण प्रश्नआंशिक प्रतिनिधित्व से अधिक वैधता

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • भारत और अन्य वैश्विक दक्षिण के देशों को स्थायी सदस्यता देने से लोकतांत्रिक कमी दूर होगी और UNSC को वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुकूल बनाया जा सकेगा।
  • वीटो पावर में सुधार जरूरी है ताकि नीति गतिरोध रोका जा सके और परिषद की विवाद समाधान क्षमता बढ़े।
  • G4 और अन्य बहुपक्षीय मंचों में भारत की निरंतर कूटनीतिक भागीदारी सुधार की मांग को मजबूत करती है।
  • क्षेत्रीय सहमति बनाना और P5 सदस्यों के साथ रचनात्मक संवाद आवश्यक है ताकि सार्थक प्रगति हो सके।
  • UNSC सदस्यता में आर्थिक और जनसांख्यिकीय मानदंड जोड़ने से वैधता और जवाबदेही बढ़ेगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. 1945 से UNSC की स्थायी सदस्यता में कोई बदलाव नहीं हुआ है, भले ही वैश्विक आर्थिक शक्ति में बदलाव आया हो।
  2. वीटो पावर UNSC के सभी स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों के पास है।
  3. भारत G4 समूह का हिस्सा है जो UNSC विस्तार की मांग करता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

कथन 1 सही है क्योंकि 1945 के बाद से UNSC की स्थायी सदस्यता में कोई बदलाव नहीं हुआ। कथन 2 गलत है क्योंकि केवल पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर है, गैर-स्थायी सदस्यों के पास नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि भारत G4 समूह का हिस्सा है जो UNSC सुधार की मांग करता है।

अंतरराष्ट्रीय शांति से संबंधित भारत के संवैधानिक प्रावधानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. भारतीय संविधान का Article 51 राज्य को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
  2. Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।
  3. भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से UNSC सुधार का निर्देश है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)

कथन 1 सही है क्योंकि Article 51 अंतरराष्ट्रीय शांति बढ़ावा देने का निर्देश देता है। कथन 2 सही है क्योंकि Article 253 संसद को संधियों को लागू करने का अधिकार देता है। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान में UNSC सुधार के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है।

मेन प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का गंभीरता से विश्लेषण करें। UNSC सुधार में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें और परिषद की वैधता तथा प्रभावशीलता बढ़ाने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और वैश्विक समूह
  • झारखंड कोण: UN शांति मिशनों में झारखंड का योगदान भारत की वैश्विक सुरक्षा भूमिका को दर्शाता है।
  • मेन प्वाइंटर: उत्तर में भारत की वैश्विक भूमिका, अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए संवैधानिक प्रावधान और झारखंड जैसे क्षेत्रीय राज्यों के लिए निहितार्थ पर जोर दें।
1945 से UNSC की स्थायी सदस्यता में बदलाव क्यों नहीं हुआ?

UNSC की स्थायी सदस्यता में बदलाव के लिए UN चार्टर में संशोधन आवश्यक है, जिसके लिए UNGA में दो-तिहाई बहुमत और सभी पांच स्थायी सदस्यों (P5) की सर्वसम्मति चाहिए। P5 अपने वीटो अधिकार और प्रभाव को बनाए रखने के लिए बदलाव का विरोध करते हैं।

UN शांति मिशन में भारत के योगदान का UNSC सुधार में क्या महत्व है?

भारत UN शांति मिशन के बजट में लगभग 7.4% योगदान देता है और ऐतिहासिक रूप से हजारों सैनिक भेज चुका है। यह सक्रिय भूमिका भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को मजबूत करती है, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

G4 समूह क्या है और UNSC सुधार में इसकी भूमिका क्या है?

G4 समूह में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं, जो उभरती शक्तियों को स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए UNSC विस्तार की मांग करते हैं। यह समूह UNSC को वर्तमान भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप लोकतांत्रिक बनाने का प्रयास करता है।

वीटो पावर UNSC के कामकाज को कैसे प्रभावित करती है?

वीटो पावर पांच स्थायी सदस्यों को किसी भी प्रस्ताव को रोकने का अधिकार देती है, जिससे अक्सर नीति गतिरोध होता है, खासकर मानवीय संकटों में। यह परिषद की वैधता और विवाद समाधान क्षमता को कमजोर करती है।

भारत के किन संवैधानिक अनुच्छेदों से अंतरराष्ट्रीय शांति और UNSC सुधार में उसकी भागीदारी समर्थित है?

भारतीय संविधान के Article 51 और 253 भारत की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का समर्थन करते हैं। Article 51 अंतरराष्ट्रीय शांति बढ़ावा देने का निर्देश देता है, जबकि Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है, जिसमें UN से संबंधित दायित्व भी शामिल हैं।

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